पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
सन्दर्भ
- हाल ही में भारत–कनाडा संयुक्त नेताओं के वक्तव्य (India-Canada Joint Leaders’ Statement) के बाद भारत और कनाडा के बीच संबंधों में पुनः सक्रियता देखने को मिली है। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिवेश में रक्षा,क्रिटिकल मिनरल्स, अंतरिक्ष तथा प्रौद्योगिकी सहयोग दोनों देशों की प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
भारत–कनाडा संबंधों का परिचय (About India-Canada Relations)
- भारत और कनाडा के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन, जन-से-जन संबंधों तथा बढ़ते आर्थिक सहयोग पर आधारित व्यापक सामरिक साझेदारी है।
- हालिया संयुक्त नेताओं का वक्तव्य व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, रक्षा, नवाचार तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के साथ-साथ उच्च-स्तरीय राजनीतिक संवाद की पुनर्बहाली की पुष्टि करता है।
- कनाडा, भारत को स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण में एक महत्त्वपूर्ण साझेदार मानता है, जबकि भारत कनाडा को प्रौद्योगिकी, निवेश, शिक्षा और सामरिक संसाधनों का महत्त्वपूर्ण स्रोत मानता है।
- दोनों देश जी-20, संयुक्त राष्ट्र, राष्ट्रमंडल तथा विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी सहयोग करते हैं।
भारत–कनाडा रक्षा सहयोग
1. सैन्य सहयोग
- भारत और कनाडा ने सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए नई दिल्ली और ओटावा में रक्षा सलाहकारों की पुनः नियुक्ति की है।
- दोनों देशों ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान तथा सामरिक समन्वय को बेहतर बनाने के लिए रक्षा संवाद को संस्थागत स्वरूप देने पर सहमति व्यक्त की है।
- भारतीय और कनाडाई नौसेनाएँ रिमपैक (रिम ऑफ द पैसिफिक अभ्यास) तथा टैलिस्मन सेबर अभ्यास जैसे बहुपक्षीय सैन्य अभ्यासों में संयुक्त रूप से भाग ले चुकी हैं।
- भारत के राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय का एक प्रतिनिधिमंडल वर्ष 2026 में कनाडा का दौरा करेगा, जिससे पेशेवर सैन्य शिक्षा और अधिकारियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।
2. प्रौद्योगिकी एवं रक्षा औद्योगिक सहयोग
- आधुनिक युद्ध ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्षमताओं तथा उन्नत एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों पर आधारित है, जिससे दोनों देशों के बीच गहन सहयोग की संभावनाएँ बढ़ी हैं।
- कनाडा ने ड्रोन नवाचार सहित अगली पीढ़ी की एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों में लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया है तथा रक्षा निवेश एवं औद्योगिक एजेंसियों की स्थापना की है, ताकि रक्षा खरीद प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाई जा सके।
- कनाडा का यह अनुसंधान तंत्र भारत की ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अंतर्गत बढ़ती विनिर्माण क्षमता के लिए उपयुक्त है।
3. अंतरिक्ष क्षेत्र में सामरिक सहयोग
- सहयोग के संभावित क्षेत्रों में सैटेलाइट प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष रोबोटिक्स , पृथ्वी अवलोकन, समुद्री क्षेत्र जागरूकता तथा अंतरिक्ष-आधारित सुरक्षा अनुप्रयोग शामिल हैं।
- कनाडा की रडारसैट (RADARSAT) उपग्रह प्रणाली भारत की समुद्री निगरानी तथा नौसैनिक क्षमताओं, विशेषकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में, महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर सकती है।
4. क्रिटिकल मिनरल्स सम्बन्धी साझेदारी
- क्रिटिकल मिनरल्स रक्षा विनिर्माण, सेमीकंडक्टर्स, विद्युत वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा तथा उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए अत्यंत आवश्यक हो गए हैं।
- कनाडा के पास क्रिटिकल मिनरल्स का विश्व का दसवाँ सबसे बड़ा भंडार, पुनर्प्राप्त किए जा सकने वाले यूरेनियम संसाधनों का तीसरा सबसे बड़ा भंडार, विश्व के लगभग 5% टंगस्टन भंडार, वर्ष 2024 में विश्व के लगभग 24% यूरेनियम उत्पादन तथा 31 क्रिटिकल मिनरल्स के भंडार हैं।
- भारत और कनाडा ने वर्ष 2026 में क्रिटिकल मिनरल्स के मूल्य श्रृंखला पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिससे सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा मिलेगा। इससे कनाडा को विश्वसनीय बाजारों में विविधीकरण तथा भारत को सामरिक खनिजों तक सुरक्षित पहुँच सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
संबंधित चुनौतियाँ एवं मुद्दे
- अतीत के राजनयिक तनावों ने राजनीतिक विश्वास तथा द्विपक्षीय सहयोग को प्रभावित किया है।
- सुरक्षा संबंधी चिंताओं और कानून-प्रवर्तन से जुड़े मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, जिनके समाधान के लिए निरंतर संवाद आवश्यक है।
- रक्षा सहयोग अभी प्रारंभिक अवस्था में है और इसके लिए संस्थागत तंत्र सीमित हैं।
- क्रिटिकल मिनरल्स के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा आपूर्ति सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।
- नियामकीय बाधाएँ, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर प्रतिबंध तथा अलग-अलग रक्षा खरीद प्रणालियाँ रक्षा औद्योगिक सहयोग की गति को धीमा कर सकती हैं।
- हिंद-प्रशांत तथा पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता सामरिक प्राथमिकताओं को प्रभावित कर रही है।
आगे की राह : भारत–कनाडा संबंध
- भारत–कनाडा रक्षा संवाद को नियमित मंत्रीस्तरीय तथा सैन्य-स्तरीय परामर्शों के माध्यम से संस्थागत स्वरूप दिया जाए।
- संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, सैन्य प्रशिक्षण तथा अधिकारियों के आदान-प्रदान में वृद्धि कर परस्पर संचालन क्षमता को मजबूत बनाया जाए।
- एयरोस्पेस, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा प्रणालियों तथा साइबर प्रौद्योगिकी में संयुक्त विकास एवं संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए।
- क्रिटिकल मिनरल्स मूल्य श्रृंखला संबंधी समझौता ज्ञापन को दीर्घकालिक निवेश तथा सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं के माध्यम से प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, सैटेलाइट अनुप्रयोगों तथा समुद्री क्षेत्र जागरूकता में सहयोग को सुदृढ़ किया जाए।
- शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संस्थानों, नवप्रारंभिक उद्यमों तथा रक्षा उद्योग के बीच सहयोग द्वारा नवाचार को बढ़ावा दिया जाए।
- रक्षा सहयोग को आधार बनाकर व्यापार, निवेश तथा प्रौद्योगिकी संबंधों के विस्तार के माध्यम से व्यापक सामरिक साझेदारी को और मजबूत किया जाए।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ बनाने में भारत–कनाडा रक्षा सहयोग के महत्त्व की चर्चा कीजिए। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों, इससे संबंधित चुनौतियों का परीक्षण कीजिए तथा साझेदारी को मजबूत बनाने के उपाय सुझाइए। |
स्रोत:TH