पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
सन्दर्भ
- प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए निकट संपर्क बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।
परिचय
- दोनों नेताओं के बीच यह पहली फोन बातचीत थी, जब से अमेरिका ने उस कानून पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत रूसी ऊर्जा का आयात करने वाले भारत, चीन और अन्य देशों पर 100% तक शुल्क लगाने की शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।
- दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आपसी हित के अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की।
भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों का अवलोकन
- भारत की स्वतंत्रता के बाद से भारत-अमेरिका संबंधों ने शीत युद्ध के दौर के अविश्वास और भारत के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उत्पन्न दूरी का सामना किया है।
- हाल के वर्षों में संबंधों में सुधार हुआ है और आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों की विस्तृत श्रृंखला में सहयोग मजबूत हुआ है।
- द्विपक्षीय व्यापार: द्विपक्षीय व्यापार का नया लक्ष्य “मिशन 500” है, जिसका उद्देश्य 2030 तक कुल द्विपक्षीय व्यापार को दोगुने से अधिक बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है। भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए “मिशन 500” पहल आधिकारिक रूप से शुरू की गई है।
- वर्ष 2025–26 में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था, दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार 132.2 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 86.51 अरब डॉलर और आयात 45.62 अरब डॉलर था।
- वर्तमान में चीन सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके बाद अमेरिका है।
- रक्षा और सुरक्षा: संवाद तंत्र के शीर्ष स्तर पर 2+2 मंत्रिस्तरीय संवाद है, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री तथा अमेरिका की ओर से उनके समकक्ष करते हैं। यह तंत्र राजनीतिक, सैन्य और रणनीतिक मुद्दों पर मार्गदर्शन प्रदान करता है।
भारत और अमेरिका ने गहन सैन्य सहयोग के लिए “मौलिक समझौतों” की एक श्रृंखला पर हस्ताक्षर किए हैं:
- वर्ष 2016 — लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA)
- वर्ष 2018 — कम्युनिकेशंस कम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (COMCASA)
- वर्ष 2020 — बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA)
- लिमोआ (LEMOA) पर वर्ष 2016 में हस्ताक्षर हुए और उसी वर्ष भारत को अमेरिका ने प्रमुख रक्षा साझेदार का दर्जा दिया।
- वर्ष 2016 में अमेरिका ने भारत को प्रमुख रक्षा साझेदार का दर्जा दिया।
सैन्य अभ्यास:
द्विपक्षीय अभ्यास:
- युद्ध अभ्यास — थल सेना
- वज्र प्रहार — विशेष बल
- मालाबार — नौसेना
- कोप इंडिया — वायु सेना
- टाइगर ट्रायम्फ — तीनों सेनाएँ
- बहुपक्षीय अभ्यास: रेड फ्लैग, रिमपैक (RIMPAC), कटलैस एक्सप्रेस, सी ड्रैगन और मिलन ऐसे बहुपक्षीय अभ्यास हैं, जिनमें दोनों देश भाग लेते हैं। भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग में नियमित सैन्य अभ्यास और समुद्री सुरक्षा सहयोग महत्वपूर्ण घटक हैं।
- अंतरिक्ष: भारत द्वारा हस्ताक्षरित आर्टेमिस समझौते ने समस्त मानवता के लाभ के लिए भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण हेतु एक साझा दृष्टिकोण स्थापित किया है।
- निसार (NISAR-NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar): इसरो और नासा द्वारा संयुक्त रूप से विकसित माइक्रोवेव इमेजिंग उपग्रह को वर्ष 2025 में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया।
- इसरो और नासा ने वर्ष 2024 में मानव अंतरिक्ष उड़ान में सहयोग के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा पर सहयोग किया।
- प्रशिक्षण के बाद, इसरो ने गगनयात्री शुभांशु शुक्ला को संयुक्त इसरो-नासा मिशन (Axiom-4) में ISS के लिए पायलट के रूप में भाग लेने हेतु नामित किया।
- बहुपक्षीय सहयोग: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका संयुक्त राष्ट्र, G20, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन सहित बहुपक्षीय संगठनों और मंचों में निकटता से सहयोग करते हैं।
- ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ मिलकर अमेरिका और भारत क्वाड (Quad) के रूप में एक राजनयिक नेटवर्क का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना है।
- परमाणु सहयोग: नागरिक परमाणु समझौते पर 2005 में हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत भारत ने अपनी नागरिक और सैन्य परमाणु सुविधाओं को अलग करने तथा अपने सभी नागरिक परमाणु संसाधनों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा उपायों के अंतर्गत रखने पर सहमति व्यक्त की।
- इसके बदले, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत के साथ पूर्ण नागरिक परमाणु सहयोग की दिशा में कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।
- नई पहल: कई नई पहलों की घोषणा की गई है, जैसे भारत में जेट इंजन के निर्माण के लिए GE-HAL समझौता और महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकी पहल (iCET)।
- प्रवासी भारतीय: लगभग 54 लाख भारतीय-अमेरिकी/भारतीय मूल के लोग अमेरिका में रहते हैं।
- भारतीय मूल के लोग अमेरिका में तीसरा सबसे बड़ा एशियाई जातीय समूह हैं।
चिंता के क्षेत्र
व्यापार और आर्थिक विवाद
- विशेष रूप से कृषि, डेयरी उत्पादों, चिकित्सा उपकरणों और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्रों में शुल्क और बाजार तक पहुँच को लेकर मतभेद हैं।
- संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत की संरक्षणवादी नीतियों और कुछ उत्पादों पर लगाए गए उच्च आयात शुल्क की आलोचना की है।
भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रूस के साथ संबंध
- रूस के साथ भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक प्रमुख चिंता बनी हुई है।
- भारत द्वारा रूस से S-400 वायु रक्षा प्रणाली की खरीद ने अमेरिकी CAATSA (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act) के तहत चिंताएँ उत्पन्न कीं।
- अमेरिका रूस के विरुद्ध अधिक मजबूत सामरिक तालमेल की अपेक्षा करता है, जबकि भारत रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-संरेखण की नीति बनाए रखता है।
वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों पर मतभेद
- रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे संघर्षों पर भारत ने अक्सर तटस्थ या संतुलित रुख अपनाया है।
- पश्चिम एशिया की नीतियों, ईरान पर प्रतिबंधों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी कभी-कभी मतभेद उत्पन्न होते हैं।
- भारत रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देता है, जबकि अमेरिका अक्सर गठबंधन-आधारित तालमेल की अपेक्षा करता है।
आव्रजन और वीजा प्रतिबंध
- H-1B वीजा नियमों में कड़ाई भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवरों को प्रभावित करती है।
- वीजा प्रक्रिया में देरी छात्रों, कामगारों और व्यवसायों को प्रभावित करती है।
- अमेरिकी आव्रजन नीतियों में अनिश्चितता भारतीय प्रवासी समुदाय और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए चिंताएँ उत्पन्न करती है।
रक्षा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सीमाएँ
- उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण पर प्रतिबंध मौजूद हैं।
- भू-राजनीतिक संकटों के दौरान दीर्घकालिक रक्षा आपूर्ति की विश्वसनीयता को लेकर भारत में चिंताएँ हैं।
पाकिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएँ
- यद्यपि शीत युद्ध की अवधि की तुलना में अमेरिका-पाकिस्तान संबंध कमजोर हुए हैं, फिर भी भारत पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सहायता को लेकर सतर्क रहता है।
अमेरिकी विदेश नीति की अनिश्चितता
- अमेरिकी विदेश नीति में बार-बार होने वाले बदलाव, जैसे व्यापार नीतियों में परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय समझौतों से हटना और प्रतिबंधों से संबंधित दबाव, भारत के लिए अनिश्चितता उत्पन्न करते हैं।
निष्कर्ष
- भारत-अमेरिका संबंधों में मजबूत अभिसरण के साथ-साथ लगातार बने रहने वाले मतभेद भी दिखाई देते हैं।
- जबकि रक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार और हिंद-प्रशांत सहयोग के क्षेत्रों में साझेदारी काफी गहरी हुई है, वहीं अलग-अलग रणनीतिक प्राथमिकताओं, आर्थिक हितों और भू-राजनीतिक दृष्टिकोणों में अंतर के कारण चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
- निरंतर संवाद, संस्थागत सहयोग और रणनीतिक चिंताओं के प्रति पारस्परिक सम्मान के माध्यम से इन मतभेदों का प्रभावी प्रबंधन द्विपक्षीय संबंधों में दीर्घकालिक स्थिरता और विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होगा।
स्रोत: TH
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