लैंगिक संपत्ति असमानता : आर्थिक समानता का उपेक्षित आयाम 

पाठ्यक्रम: GS2/सामाजिक न्याय; GS3/समावेशी विकास

संदर्भ

  • हालिया वैश्विक रिपोर्टें, जैसे विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 तथा संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट काउंटिंग व्हाट काउंट्स , महिलाओं के श्रम बाज़ार से संबंधित वंचनाओं को सही रूप में रेखांकित करती हैं, किंतु लैंगिक असमानता के संपत्ति संबंधी आयाम को पर्याप्त रूप से समाहित नहीं करती हैं।

प्रमुख निष्कर्ष

  • विश्व असमानता रिपोर्ट 2026: यह देशों के बीच आय एवं घरेलू संपत्ति की बढ़ती असमानताओं की ओर संकेत करती है।
    • लैंगिक असमानता के प्रमुख संकेतकों के रूप में महिलाओं एवं पुरुषों के प्रति घंटा वेतन तथा श्रमबल सहभागिता को प्रमुखता दी गई है।
    • महिलाओं के निम्न रोजगार स्तर के लिए अपर्याप्त बाल-देखभाल सुविधाएँ, सुलभ परिवहन का अभाव, नियुक्ति में भेदभाव तथा परिवार-अवकाश संबंधी कमजोर नीतियों को उत्तरदायी माना गया है।
    • रिपोर्ट समग्र असमानता के प्रमुख कारण के रूप में संपत्ति असमानता को स्वीकार करती है, किंतु संपत्ति एवं उत्पादक परिसंपत्तियों के व्यक्तिगत स्वामित्व पर अपेक्षित ध्यान नहीं देती।
  • संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट – काउंटिंग व्हाट काउंट्स :
    • यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से आगे बढ़कर व्यापक कल्याण संकेतकों के आधार पर विकास के मूल्यांकन का समर्थन करती है।
    • रिपोर्ट अवैतनिक देखभाल कार्य तथा श्रम बाज़ार में विद्यमान असमानताओं को स्वीकार करती है।
    • तथापि, इसका मुख्य ध्यान महिलाओं के रोजगार एवं वेतन पर केंद्रित है, जबकि संपत्ति एवं उत्पादक परिसंपत्तियों के स्वामित्व में लैंगिक असमानताओं पर अपेक्षाकृत कम चर्चा की गई है।

संपत्ति का स्वामित्व क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • आर्थिक सशक्तीकरण केवल रोजगार तक सीमित नहीं: वास्तविक आर्थिक सशक्तीकरण का आधार संपत्ति एवं परिसंपत्तियों का स्वामित्व है, जो दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा तथा आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है।
  • महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण में सुधार: कई अध्ययनों से यह प्रमाणित हुआ है कि महिलाओं के भूमि अथवा आवास पर स्वामित्व से—
    • बच्चों के पोषण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी परिणामों में सुधार होता है।
    • परिवार में महिलाओं की सौदेबाजी की क्षमता बढ़ती है।
    • तलाक के बाद घरेलू हिंसा एवं गरीबी के जोखिम में उल्लेखनीय कमी आती है।
  • उत्पादकता एवं आर्थिक विकास में वृद्धि: खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, यदि महिलाओं को कृषि भूमि, सिंचाई, ऋण तथा कृषि मशीनरी जैसे उत्पादक संसाधनों तक पुरुषों के समान पहुँच प्रदान की जाए, तो कृषि उत्पादकता एवं राष्ट्रीय आर्थिक विकास में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
  • अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में आजीविका का आधार: विशेष रूप से भारत जैसे विकासशील देशों में अधिकांश महिलाएँ अनौपचारिक क्षेत्र तथा कृषि में कार्यरत हैं।
    • ऐसे क्षेत्रों में आय की तुलना में उत्पादक परिसंपत्तियों का स्वामित्व अधिक महत्त्वपूर्ण होता है।
    • भूमि, पशुधन, दुकानें, ठेले, मशीनरी तथा डिजिटल संसाधन सतत आजीविका के प्रमुख साधन हैं।

भारत की स्थिति

  • आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण (PLFS) 2023–24 महिलाओं के रोजगार की संरचनात्मक प्रकृति को दर्शाता है—
    • सभी महिला श्रमिकों में लगभग 86% अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 91% महिलाएँ अनौपचारिक क्षेत्र में कार्य करती हैं।
    • ग्रामीण महिला श्रमिकों में लगभग 77% कृषि कार्यों में संलग्न हैं।
    • लगभग 73% ग्रामीण महिला श्रमिक स्व-रोजगार में संलग्न हैं, जिनमें अधिकांश अवैतनिक पारिवारिक श्रमिक हैं।
  • हालाँकि—
    • NFHS, IHDS तथा ICRISAT के आँकड़ों के अनुसार, ग्रामीण भूमि-स्वामी परिवारों में केवल 12–16% मामलों में महिलाओं के नाम कृषि भूमि का स्वामित्व है।
    • पुरुषों के प्रवास के कारण महिलाएँ व्यवहारतः खेती करती हैं, किंतु अधिकांश मामलों में उनके पास भूमि का वैधानिक स्वामित्व नहीं होता।
    • सीमित स्वामित्व के कारण वे संस्थागत ऋण, फसल बीमा, कृषि सब्सिडी तथा औपचारिक बाज़ारों तक पहुँच से वंचित रह जाती हैं।
    • अतः, स्वामित्व के बिना रोजगार केवल आधा आर्थिक सशक्तीकरण है।

संबंधित मुद्दे एवं चिंताएँ 

  • वर्तमान लैंगिक संकेतकों की सीमाएँ: वर्तमान अंतरराष्ट्रीय लैंगिक सूचकांक मुख्यतः श्रमबल सहभागिता, वेतन अंतर, प्रति घंटा आय तथा अवैतनिक घरेलू कार्य पर आधारित हैं।
    • इनमें संपत्ति के स्वामित्व, उत्तराधिकार तथा संपत्ति संचय को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया जाता, जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं की वास्तविक आर्थिक स्थिति का समुचित आकलन नहीं हो पाता।
  • अनुपस्थित आयाम : लैंगिक संपत्ति असमानता: संपत्ति असमानता, आय असमानता से गुणात्मक रूप से भिन्न होती है, क्योंकि—
    • संपत्ति भविष्य की आय उत्पन्न करती है।
    • यह आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है।
    • निर्णय लेने की क्षमता को सुदृढ़ करती है।
    • यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती है।
    • विश्व असमानता प्रयोगशाला  ने भी यह दर्शाया है कि उत्तराधिकार संपत्ति असमानता का एक प्रमुख कारण है, किंतु लैंगिक उत्तराधिकार संबंधी असमानताओं का पर्याप्त मापन नहीं किया जाता।
  • डेटा संबंधी सीमाएँ: यद्यपि व्यापक लैंगिक-आधारित संपत्ति डेटाबेस सीमित हैं, फिर भी—
    • FAO एवं विश्व बैंक महिलाओं के भूमि स्वामित्व से संबंधित आँकड़े संधारित करते हैं।
    • अनेक विकसित देश लैंगिक आधार पर पेंशन संपत्ति का डेटा संकलित करते हैं।
    • भारत में भूमि अभिलेख, NFHS तथा कृषि सर्वेक्षण उपलब्ध हैं, जिन्हें अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत किया जा सकता है।
    • अतः चुनौती डेटा के पूर्ण अभाव की नहीं, बल्कि लैंगिक-वर्गीकृत संपत्ति आँकड़ों के अपर्याप्त संग्रह एवं उपयोग की है।

भारत में संबंधित प्रयास एवं पहल

  • महिलाओं की आर्थिक क्षमता को सुदृढ़ करने हेतु विभिन्न नीतिगत पहलें की गई हैं—
    • हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005—पुत्रियों को समान सहभाजक अधिकार प्रदान करना।
    • स्वामित्व (SVAMITVA) योजना—ग्रामीण संपत्तियों के स्वामित्व संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराना।
    • प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण एवं शहरी)—महिलाओं के नाम अथवा संयुक्त स्वामित्व में संपत्ति पंजीकरण को प्रोत्साहन।
    • दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन।
    • महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना (MKSP)—महिला किसानों की पहचान एवं सशक्तीकरण।
    • डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP)—भूमि अभिलेखों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
    • प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) तथा स्टैंड-अप इंडिया के माध्यम से वित्तीय समावेशन, बैंकिंग सेवाओं एवं उद्यमिता तक पहुँच का विस्तार।

श्रम बाज़ार सहभागिता एवं महिला सशक्तीकरण को सुदृढ़ करने के उपाय

  • भूमि, आवास, उद्यम, वित्तीय परिसंपत्तियों एवं पेंशन सहित संपत्ति संबंधी लैंगिक-वर्गीकृत डेटाबेस विकसित किए जाएँ।
  • विद्यमान कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तथा संयुक्त भूमि स्वामित्व एवं समान उत्तराधिकार अधिकारों को लागू किया जाए।
  • महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को सुदृढ़ कर उन्हें ऋण, बीमा, कृषि निवेश तथा बाज़ारों तक बेहतर पहुँच उपलब्ध कराई जाए।
  • बाल-देखभाल सुविधाओं, सुरक्षित परिवहन, मातृत्व लाभ एवं लचीली कार्य व्यवस्था में निवेश कर श्रम बाज़ार सुधार किए जाएँ।
  • राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय असमानता सूचकांकों में वेतन-आधारित संकेतकों के साथ-साथ लैंगिक संपत्ति संकेतकों को भी शामिल किया जाए।
  • महिलाओं को स्वामित्व अधिकारों का प्रभावी उपयोग करने हेतु कानूनी साक्षरता तथा भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिया जाए।

आगे की राह

  • श्रम बाज़ार में महिलाओं की सहभागिता उनके सशक्तीकरण का एक महत्त्वपूर्ण संकेतक है, किंतु आर्थिक असमानता के समग्र आकलन के लिए यह अकेला पर्याप्त नहीं है।
  • जिन अर्थव्यवस्थाओं में बड़ी संख्या में महिलाएँ स्व-रोजगार अथवा कृषि क्षेत्र में संलग्न हैं, वहाँ संपत्ति एवं उत्पादक परिसंपत्तियों का स्वामित्व रोजगार जितना ही महत्त्वपूर्ण है।
  • भविष्य में असमानता के आकलन में श्रम संकेतकों के साथ-साथ संपत्ति, भूमि तथा उत्पादक परिसंपत्तियों के स्वामित्व को भी सम्मिलित किया जाना चाहिए।
  • सतत विकास लक्ष्य–5 (लैंगिक समानता) की प्राप्ति तथा समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए परिवार के अंदर विद्यमान संपत्ति संबंधी असमानताओं को कम करना अत्यंत आवश्यक है।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: “केवल श्रम बाज़ार संबंधी असमानताओं को दूर करने मात्र से लैंगिक समानता प्राप्त नहीं की जा सकती; संपत्ति एवं उत्पादक परिसंपत्तियों पर समान स्वामित्व भी उतना ही आवश्यक है। इस कथन के आलोक में चर्चा कीजिए। 

स्रोत: IE

 

Other News

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ भारत में घटती प्रजनन दर, वृद्ध होती जनसंख्या तथा क्षेत्रीय जनसांख्यिकीय असंतुलनों को लेकर बढ़ती चिंताओं ने जनसंख्या परिवर्तन के प्रति एक सावधानीपूर्ण, संतुलित एवं साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। साथ ही, पारंपरिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की मांग भी समय-समय पर उठाई जा...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सन्दर्भ भारत, शासन, सेवा प्रदायगी, जन विश्वास (विश्वास-आधारित शासन) को सुदृढ़ बनाने तथा समावेशी विकास के लिए राज्य की क्षमता बढ़ाने हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के बीच संबंध पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) में आर्टिफिशियल...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-2 / अंतर्राष्ट्रीय संबंध सन्दर्भ प्रधानमंत्री मोदी की पूर्व की ओर यात्रा, जिसमें इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड शामिल हैं, तथा हाल ही में जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली की दिल्ली यात्राएँ, एक उभरते हुए प्रतिरूप की ओर संकेत करती हैं, जिसे "जी माइनस टू...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/ अंतर्राष्ट्रीय संबंध सन्दर्भ वर्ष 2020 में स्थापित व्यापक सामरिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के तीन वर्ष बाद प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया की तीसरी यात्रा इस बात की परीक्षा है कि क्या संबंधों का स्वयं को "टी-20 मोड" बताना वास्तविक उपलब्धियों से मेल खाता है, अथवा व्यापार, रक्षा, ऊर्जा...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ अर्थव्यवस्था  सन्दर्भ भारत ने वर्ष 2024 में 20 लाख से अधिक विद्युत वाहनों (EV) की बिक्री की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि मुख्यतः फेम (FAME)-I/II, पीएम ई-ड्राइव(PM E-DRIVE) तथा ऑटोमोबाइल उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना से प्रेरित है। साथ ही, भारत...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था  सन्दर्भ भारत सरकार ने केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान के आँकड़ों का सन्दर्भ देते हुए दावा किया कि वर्ष 2022 में मूल्यांकित 135 मत्स्य भंडारों (Fish Stocks) में से 91.1% "सतत (Sustainable)" थे, जिससे भारत के समुद्री मत्स्य क्षेत्र को वैश्विक सफलता की कहानी के रूप में प्रस्तुत...
Read More
scroll to top