भारत का पर्यटन क्षेत्र: नई उपलब्धि की ओर अग्रसर 

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था; अवसंरचना; GS2/शासन व्यवस्था

संदर्भ 

  • महामारी के पश्चात् निरंतर वृद्धि, बढ़ते निवेश, फेडरेशन ऑफ एसोसिएशंस इन इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी (FAITH) की नीतिगत अनुशंसाओं तथा भारत को वैश्विक पर्यटन महाशक्ति बनाने पर सरकार के विशेष बल के कारण भारत का पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र पुनः चर्चा में है।

भारत में पर्यटन क्षेत्र : वर्तमान स्थिति एवं भावी संभावनाएँ

  • पर्यटन भारत के सबसे बड़े सेवा क्षेत्रों में से एक है तथा आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण एवं क्षेत्रीय विकास का प्रमुख प्रेरक है।
  • यह एक विशिष्ट गुणक क्षेत्र है, जहाँ प्रत्येक प्रत्यक्ष रोजगार परिवहन, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, खुदरा व्यापार एवं स्थानीय सेवाओं में अनेक अप्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन करता है।
  • यह क्षेत्र महामारी के बाद पुनर्प्राप्ति के चरण को पार कर अब निरंतर विस्तार के दौर में प्रवेश कर चुका है।
  • यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 7% का योगदान देता है तथा देश के कुल रोजगार (प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष) का 9% से अधिक उपलब्ध कराता है।
    • वर्ष 2030 तक इसके भारत के GDP में 10% योगदान तथा वर्ष 2034 तक लगभग 523.6 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देने का अनुमान है।
  • भारत में घरेलू पर्यटक यात्राओं की संख्या वर्ष 2024 के 2.5 अरब से बढ़कर वर्ष 2030 तक लगभग 5.2 अरब होने का अनुमान है।
  • अप्रैल 2000 से दिसंबर 2024 के बीच लगभग 18.47 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ तथा विदेशी मुद्रा आय 30.5 मिलियन रही। वर्ष 2030 तक 25 मिलियन विदेशी पर्यटकों के आगमन का लक्ष्य निर्धारित है।
  • यह मूल्यवान विदेशी मुद्रा अर्जित करने के साथ-साथ सॉफ्ट पावर के माध्यम से वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक उपस्थिति को भी सुदृढ़ करता है।

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए पर्यटन का महत्व

  • उद्योग का सुदृढ़ प्रदर्शन: प्रमुख पर्यटन बाजारों में होटलों की अधिभोग दर उच्च स्तर पर बनी हुई है।
    • औसत कक्ष दर (ARR) महामारी-पूर्व स्तर से अधिक हो चुकी है।
    • अवकाश पर्यटन, व्यावसायिक यात्रा, बैठकें, प्रोत्साहन, सम्मेलन एवं प्रदर्शनियाँ (MICE) तथा धार्मिक पर्यटन मांग को निरंतर गति प्रदान कर रहे हैं।
  • निवेश में वृद्धि: संस्थागत निवेशकों, सार्वजनिक होटल कंपनियों, डेवलपर्स तथा पारिवारिक निवेश कार्यालयों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
    • यद्यपि निवेश में वृद्धि हो रही है, फिर भी विकसित वैश्विक आतिथ्य बाजारों की तुलना में संस्थागत भागीदारी अपेक्षाकृत कम है, जिससे आगे विस्तार की पर्याप्त संभावनाएँ विद्यमान हैं।
  • पर्यटन का उभरता भौगोलिक विस्तार: महानगरों से बाहर पर्यटन का विस्तार इस क्षेत्र की प्रमुख प्रवृत्ति बनकर उभरा है।
    • द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी (Tier-II एवं Tier-III) के शहर महत्त्वपूर्ण पर्यटन एवं आतिथ्य केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं।
    • उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना के अंतर्गत क्षेत्रीय हवाई अड्डों, बेहतर राजमार्गों तथा औद्योगिक गलियारों के माध्यम से नए पर्यटन परिपथ विकसित किए जा रहे हैं।
    • हवाई अड्डा-केंद्रित विकास के कारण व्यावसायिक यात्रियों, पारगमन यात्रियों तथा सम्मेलन पर्यटन हेतु नए होटल स्थापित किए जा रहे हैं।

पर्यटन उद्योग का अन्य महत्त्व

  • आर्थिक विकास का प्रमुख प्रेरक: पर्यटन GDP में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है तथा परिवहन, विमानन, खुदरा व्यापार, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण एवं निर्माण जैसे अनेक क्षेत्रों को प्रोत्साहित करता है।
  • रोजगार सृजन: पर्यटन एक श्रम-प्रधान क्षेत्र है। होटल, यात्रा एजेंसियों एवं परिवहन क्षेत्र में प्रत्येक प्रत्यक्ष रोजगार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था में अनेक अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होते हैं।
  • क्षेत्रीय एवं समावेशी विकास: पर्यटन ग्रामीण, जनजातीय, तटीय एवं पर्वतीय क्षेत्रों में आय के नए अवसर उत्पन्न करता है, जहाँ औद्योगीकरण अपेक्षाकृत सीमित है।
  • आधारभूत संरचना का विकास: हवाई अड्डों, सड़कों, रेलवे, सम्मेलन केंद्रों एवं डिजिटल अवसंरचना में निवेश से संपर्क सुविधा में सुधार होता है तथा क्षेत्रीय विकास को गति मिलती है।
  • विदेशी मुद्रा अर्जन: विदेशी पर्यटकों का आगमन मूल्यवान विदेशी मुद्रा अर्जित करता है, जिससे भारत के बाह्य क्षेत्र को सुदृढ़ता मिलती है।
  • भारत की सॉफ्ट पावर का संवर्धन: पर्यटन भारत की सभ्यतागत विरासत, योग, आयुर्वेद, अध्यात्म, पाक-कला एवं सांस्कृतिक विविधता का वैश्विक परिचय कराता है तथा देश की सकारात्मक अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत करता है।

संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ

  • उद्योग का दर्जा न मिलना: सभी राज्यों में पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्राप्त नहीं है, जिससे सस्ती वित्तीय सहायता एवं संस्थागत ऋण तक पहुँच सीमित रहती है।
  • आधारभूत संरचना की कमी: अनेक पर्यटन स्थलों पर अंतिम चरण की संपर्क सुविधा, स्वच्छता, आवास, डिजिटल अवसंरचना एवं पर्यटक सुविधाओं का अभाव है।
  • नीतिगत विखंडन: मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों के बीच समुचित समन्वय के अभाव में पर्यटन का समेकित विकास प्रभावित होता है।
  • उच्च कराधान एवं अनुपालन भार: अधिक कर एवं जटिल अनुमोदन प्रक्रियाएँ भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करती हैं।
  • सीमित वैश्विक ब्रांडिंग: भारत के पास प्रमुख पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं की भाँति दीर्घकालिक एवं प्रभावी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन प्रचार अभियान का अभाव है।
  • वीज़ा एवं यात्रा सुविधा: ई-वीज़ा व्यवस्था का विस्तार हुआ है, किंतु प्रवेश प्रक्रियाओं का और अधिक सरलीकरण तथा अधिक देशों तक इसका विस्तार विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ा सकता है।
  • स्थिरता संबंधी चुनौतियाँ: लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर अत्यधिक पर्यटन, पर्यावरणीय क्षरण तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों से निपटने के लिए उत्तरदायी पर्यटन पद्धतियों को बढ़ावा देना आवश्यक है।

पर्यटन क्षेत्र से संबंधित प्रमुख पहलें

  • स्वदेश दर्शन योजना: समेकित विषय-आधारित पर्यटन परिपथों का विकास एवं आधारभूत संरचना का सुदृढ़ीकरण।
  • प्रसाद (PRASHAD) योजना: तीर्थ एवं आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के पुनरुद्धार एवं विकास पर केंद्रित।
  • देखो अपना देश अभियान: नागरिकों को भारत के विविध पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने हेतु प्रोत्साहित कर घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देना।
  • उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना: क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाकर नए पर्यटन स्थलों का विकास।
  • ई-वीज़ा (e-Visa) सुविधा: विदेशी पर्यटकों के लिए यात्रा एवं प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाना।
  • डिजिटल पर्यटन पहलें: पर्यटन मंत्रालय द्वारा पर्यटन आँकड़ा प्रणाली एवं डिजिटल मंचों को सुदृढ़ कर पर्यटन स्थलों के प्रचार तथा नीतिगत योजना निर्माण को बढ़ावा देना।
  • राष्ट्रीय आतिथ्य उद्योग एकीकृत डेटाबेस (NIDHI+): इसका उद्देश्य आतिथ्य एवं पर्यटन क्षेत्र का डिजिटलीकरण, सशक्तीकरण तथा सुगमता बढ़ाना है।
    • यह आवास प्रतिष्ठानों, ट्रैवल एजेंसियों, टूर ऑपरेटरों एवं स्वतंत्र रेस्तराँ आदि के लिए एक साझा राष्ट्रीय पंजीकरण मंच है, जिससे व्यवसाय करना सरल हो तथा सरकारी सेवाएँ डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकें।

आगे की राह : भारत के पर्यटन क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण

  • केंद्रीय बजट 2026-27 में पर्यटन अवसंरचना को सुदृढ़ करने, कौशल विकास को प्रोत्साहित करने तथा डिजिटल मंचों का बेहतर उपयोग करने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई गई है। इसमें शामिल हैं—
    • अनुभव-आधारित पर्यटन एवं पर्यटन स्थलों का विकास।
    • क्षेत्रीय एवं विशिष्ट (Niche) पर्यटन को प्रोत्साहन।
  • फेडरेशन ऑफ एसोसिएशंस इन इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी (FAITH) की प्रमुख अनुशंसाएँ
    • सभी राज्यों में पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया जाए।
    • मिशन मोड में 50 प्रमुख पर्यटन स्थलों का विकास किया जाए।
    • ब्रांड भारत के लिए सुदृढ़ वित्तपोषित वैश्विक पर्यटन अभियान प्रारंभ किया जाए।
    • वीज़ा नीतियों को अधिक उदार बनाया जाए।
    • कराधान व्यवस्था का युक्तिकरण किया जाए।
    • पर्यटन परियोजनाओं के लिए एकल खिड़की स्वीकृति प्रणाली स्थापित की जाए।
  • आवश्यक कदम: अनुमानित 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के यात्रा एवं पर्यटन अवसर का लाभ उठाने हेतु भारत को समेकित एवं दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी।
    • पर्यटन योजना को आधारभूत संरचना विकास, शहरी नियोजन एवं क्षेत्रीय आर्थिक गलियारों के साथ एकीकृत किया जाए।
    • अंतिम चरण की संपर्क सुविधा, डिजिटल सेवाओं एवं पर्यटक सुविधाओं सहित विश्वस्तरीय पर्यटन अवसंरचना विकसित की जाए।
    • उद्योग का दर्जा, सरल वित्तपोषण एवं नियामकीय सुधारों के माध्यम से निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित किया जाए।
    • संतुलित क्षेत्रीय विकास हेतु सतत एवं सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए।
    • कौशल विकास, सुरक्षा मानकों एवं डिजिटल सुशासन के माध्यम से पर्यटन स्थलों के प्रभावी प्रबंधन को सुदृढ़ किया जाए।
    • भारत की विरासत, स्वास्थ्य एवं कल्याण पर्यटन, पारिस्थितिकी पर्यटन तथा सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए ब्रांड भारत अभियान संचालित किया जाए।
    • ई-वीज़ा (e-Visa) सुविधा का विस्तार, निर्बाध बहु-माध्यमीय परिवहन तथा सरल प्रक्रियाओं के माध्यम से यात्रा को अधिक सुगम बनाया जाए।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न]: समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास की प्राप्ति में भारत के पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र की भूमिका का परीक्षण कीजिए। इसकी पूर्ण क्षमता के दोहन में बाधक प्रमुख चुनौतियों की चर्चा करते हुए भारत को वैश्विक पर्यटन महाशक्ति के रूप में विकसित करने हेतु आवश्यक नीतिगत उपाय सुझाइए। 

स्रोत: IE

 

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