पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा भारत के निवेश माहौल के हालिया आकलन में कई ऐसे मुद्दों की पहचान की गई है, जो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करने की देश की क्षमता को प्रभावित करते हैं।
भारत में विदेशी निवेश की स्थिति
- भारत में कुल FDI प्रवाह वित्त वर्ष 2025–26 में 94.53 अरब अमेरिकी डॉलर के नए उच्च स्तर पर पहुँच गया, जो वित्त वर्ष 2024–25 के 80.62 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में 17% अधिक है। इसमें इक्विटी प्रवाह, पुनर्निवेशित आय और अन्य पूंजी शामिल हैं।
- वित्त वर्ष 2025–26 में FDI इक्विटी प्रवाह 58.85 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
- वित्त वर्ष 2025–26 में पुनर्निवेशित आय बढ़कर 25.56 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई।
- कुल मिलाकर, अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत ने 1.166 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का कुल FDI प्रवाह आकर्षित किया।

भारत के निवेश माहौल की प्रमुख ताकतें
- बड़ा घरेलू बाजार: भारत की विशाल जनसंख्या, बढ़ती खपत और अवसंरचना की बढ़ती आवश्यकता विदेशी निवेशकों के लिए बाजार विस्तार की पर्याप्त संभावनाएँ प्रदान करती हैं।
- समष्टि आर्थिक आधार: भारत की अपेक्षाकृत मजबूत आर्थिक वृद्धि, बढ़ती घरेलू मांग और अवसंरचना में जारी निवेश इसे एक निवेश गंतव्य के रूप में आकर्षक बनाते हैं।
- जनसांख्यिकीय लाभांश: कामकाजी आयु वर्ग की बड़ी आबादी, बढ़ता तकनीकी कार्यबल और योग्य पेशेवरों का विस्तारित समूह श्रम-प्रधान तथा प्रौद्योगिकी-प्रधान निवेश के अवसर प्रदान करता है।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना: आधार, यूपीआई और खाता एग्रीगेटर ढाँचे जैसे मंचों ने डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन और नए व्यवसाय मॉडल के उद्भव को सुगम बनाया है।
- रणनीतिक भौगोलिक स्थिति: भारत का हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थित होना तथा प्रमुख उभरते बाजारों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के निकट होना अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अवसर प्रदान करता है।
भारत में प्रमुख निवेश बाधाएँ
- एफडीआई पर क्षेत्रीय प्रतिबंध: भारत अधिकांश क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग के तहत 100% एफडीआई की अनुमति देता है। हालांकि, कुछ क्षेत्र अभी भी सरकारी मंजूरी या क्षेत्र-विशिष्ट प्रतिबंधों के अधीन हैं।
- रिपोर्ट में बहु-ब्रांड खुदरा व्यापार, निजी बैंकिंग, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा, प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया और उपग्रहों जैसे क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधों को रेखांकित किया गया है।
- एफडीआई और एफपीआई पर एक साथ निवेश संबंधी प्रतिबंध: विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) की रूपरेखा एक ही कंपनी में कुछ परिस्थितियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) को एक साथ करने पर प्रतिबंध लगाती है।
- रिपोर्ट के अनुसार, ये प्रतिबंध अतिरिक्त अनुपालन संबंधी बोझ पैदा करते हैं, विशेष रूप से उन बड़े निवेश समूहों के लिए जो कई निधियों का प्रबंधन करते हैं।
- आयात प्रबंधन संबंधी प्रतिबंध: भारत की आयात प्रबंधन प्रणाली (IMS), जिसे 2023 में शुरू किया गया और बाद में विस्तारित किया गया, कुछ उत्पादों के आयात को प्राधिकरण संबंधी आवश्यकताओं और आयात सीमाओं के माध्यम से विनियमित करती है।
- विदेशी बैंकों पर अधिक कर भार: रिपोर्ट ने भारत में विदेशी और घरेलू बैंकों के बीच प्रभावी कर भार में अंतर को रेखांकित किया।
- इसमें कहा गया कि विदेशी बैंकों पर 38.22% की प्रभावी कर दर लागू होती है, जो घरेलू बैंकों की तुलना में 4.63 प्रतिशत अंक अधिक है।
- भ्रष्टाचार संबंधी चिंताएँ: अमेरिकी व्यवसायों ने वास्तविक और कथित भ्रष्टाचार, विशेष रूप से नियामक प्रणालियों में, को भारत में निवेश के लिए एक बाधा के रूप में चिन्हित किया है।
विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की पहल
- उदारीकृत एफडीआई नीति: भारत ने विदेशी निवेश को सुगम बनाने के लिए अपनी एफडीआई व्यवस्था को लगातार उदार बनाया है और कई क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग के तहत 100% एफडीआई की अनुमति दी है।
- कारोबार सुगमता संबंधी सुधार
- व्यवसाय सुधार कार्य योजना (BRAP): यह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को व्यावसायिक नियामक सुधार लागू करने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
- राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (NSWS): वर्ष 2021 में शुरू की गई यह एकीकृत डिजिटल व्यवस्था है, जिसके माध्यम से निवेशक विभिन्न नियामक स्वीकृतियों की पहचान, आवेदन और उनकी स्थिति की निगरानी कर सकते हैं।
- विनिर्माण और निवेश संवर्धन:
- मेक इन इंडिया: इस पहल का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना, तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाना और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करना है।
- उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: यह योजना चयनित क्षेत्रों में पात्र विनिर्माताओं को प्रोत्साहन प्रदान करती है, ताकि घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा सके, निवेश आकर्षित किया जा सके और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार किया जा सके।
- पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान: यह बहु-माध्यम संपर्क में सुधार और रसद संबंधी अक्षमताओं को कम करने के लिए भू-स्थानिक डिजिटल मंच के माध्यम से एकीकृत अवसंरचना नियोजन को बढ़ावा देता है।
- वित्तीय और कर सुधार:
- वस्तु एवं सेवा कर (GST): जीएसटी ने कई अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से प्रतिस्थापित किया है।
- दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016: यह समयबद्ध दिवाला समाधान की रूपरेखा प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य ऋण अनुशासन में सुधार करना और पूंजी के पुनः आवंटन को सुगम बनाना है।
- डिजिटल शासन और भ्रष्टाचार-रोधी उपाय: सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM), ई-खरीद और सार्वजनिक सेवाओं की डिजिटल उपलब्धता जैसी पहलें विवेकाधीन निर्णय लेने को कम करने और पारदर्शिता में सुधार करने का प्रयास करती हैं।
आगे की राह
- भारत को दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अनिश्चितता को दूर करने हेतु स्पष्ट दिशानिर्देश, पर्याप्त संक्रमण अवधि और कानूनों का सुसंगत अनुप्रयोग सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
- डिजिटल अनुमतियों, खुली खरीद प्रक्रिया, वस्तुनिष्ठ निरीक्षण प्रणालियों और प्रभावी शिकायत निवारण के अधिक उपयोग से विवेकाधीन शक्तियों को सीमित किया जा सकता है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखते हुए उत्पादक निवेश पर अनावश्यक बाधाएँ न डालने के लिए निवेश संबंधी सीमाएँ पारदर्शी, उपयुक्त और समय-समय पर समीक्षा के अधीन होनी चाहिए।
स्रोत: IE
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