जैसे ही भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, न्यायपालिका को सुदृढ़ करना भारत की आर्थिक गति को बनाए रखने के लिए एक पूर्वापेक्षा है।
हाल ही में अमेरिका का सैन्य और आर्थिक हस्तक्षेप तथा वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की मूलभूत सिद्धांतों को कमजोर करता है।
भारत की विश्वगुरु (वैश्विक शिक्षक) बनने की आकांक्षा के लिए मौलिक भारतीय विचारों का सृजन और उनका ऐसा अनुकूलन आवश्यक है जो वैश्विक विमर्श को आकार दे सके।
तीव्रता से शहरीकरण, बढ़ती जनसंख्या और अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे के कारण शहरी भारत अपशिष्ट के बढ़ते संकट का सामना कर रहा है। यह चुनौती इस बात पर बल देती है कि इसे हल करने के लिए एक नए दृष्टिकोण की तत्काल आवश्यकता है।
जैसा कि भारत 2047 तक स्वयं को एक विकसित राष्ट्र (विकसित भारत) के रूप में देखता है, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की भूमिका आधारभूत एवं परिवर्तनकारी दोनों रूपों में उभरकर सामने आई है, जो रोजगार के इंजन, नवाचार के महत्वपूर्ण चालक, निर्यात तथा समावेशी विकास के साधन के रूप में कार्य करते हैं।
भारत और ऑस्ट्रेलिया अब एक निर्णायक बिंदु पर खड़े हैं जहाँ वे भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) के अंतर्गत शुल्क समाप्त होने के साथ अपनी रणनीतिक तथा आर्थिक साझेदारी को सुदृढ़ कर सकते हैं।
विश्व अब किसी एक महाशक्ति द्वारा संचालित नहीं है, बल्कि यह तीव्रता से संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच पुनः उभरती द्विध्रुवीय गतिशीलता से आकार ले रही है।
प्रारंभिक पायलट आँकड़े दर्शाते हैं कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के डिज़ाइन, माँग और क्रियान्वयन के बीच एक अंतर और संरचनात्मक असंगतियाँ विद्यमान हैं।