Editorial Analysis in Hindi
भारत में उर्वरक सब्सिडी: मूल्य सुधार और लक्षित किसान समर्थन की आवश्यकता
भारत में हाल के वर्षों में उर्वरक सब्सिडी, विशेषकर यूरिया, ने पोषक तत्वों में असंतुलन, राजकोषीय दबाव और पर्यावरणीय क्षरण को उत्पन्न कर दिया है। इससे स्पष्ट होता है कि कृषि में सर्वोत्तम परिणामों के बजाय सब्सिडी की संरचना और वितरण प्रणाली में त्वरित सुधार की आवश्यकता है।
प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास एवं भारत का अधिगम संकट
वैश्विक स्तर पर बुनियादी अधिगम (Foundational Learning) में एक गंभीर संकट उभर रहा है। विश्व बैंक के अनुसार, निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में लगभग 70% बच्चे 10 वर्ष की आयु तक सरल पाठ नहीं पढ़ सकते। यह विद्यालयी कमी और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास में गहरे प्रणालीगत विफलताओं को दर्शाता है।
भारत–दक्षिण कोरिया आर्थिक संबंध सुदृढ़ होने की ओर अग्रसर
भारत–दक्षिण कोरिया संबंध पिछले तीन दशकों में उल्लेखनीय रूप से विकसित हुए हैं, जो अब रणनीतिक अभिसरण, साझा विकास पथ और वैश्विक भू-राजनीति में सामंजस्य द्वारा परिभाषित होते जा रहे हैं।
भारत के ग्रामीण मॉडल: विकास कूटनीति का निर्माण
भारत की ग्रामीण विकास यात्रा कल्याण-उन्मुख योजनाओं से सामुदायिक-आधारित संस्थागत मॉडलों की ओर संरचनात्मक बदलाव से गुज़री है। DAY-NRLM जैसी प्रमुख योजनाओं ने भारत में ग्रामीण आजीविका को रूपांतरित किया है और विशेषकर ग्लोबल साउथ में भारत की विकास कूटनीति को प्रभावित कर रही हैं।
लोकसभा का परिसीमन एवं उसके निहितार्थ
हाल ही में केंद्र सरकार ने तीन महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किए हैं, जिनमें ‘संविधान (एक सौ इकतीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2026’ शामिल है। यह भारत की संसदीय संरचना और संघीय संतुलन को पुनः आकार देने की संभावना रखता है।
भारत का ऊष्मा संकट एवं विधायी रिक्तता का मानचित्रण
हीटवेव देश के 57% से अधिक जिलों को प्रभावित कर रही हैं, जिनमें तटीय एवं समशीतोष्ण क्षेत्र भी शामिल हैं, जबकि पूर्व में यह मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी एवं मध्य क्षेत्रों तक सीमित थीं। तथापि, इसका प्रभाव समान नहीं है, जिससे विद्वानों द्वारा ‘तापीय अन्याय’ (Thermal Injustice) की संकल्पना पर बल दिया जा रहा है।
भारत में डिजिटल भुगतान एवं सुरक्षा तंत्र
हाल ही में भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) ने अपने संचालन के 10 वर्ष पूरे किए हैं। इसने वित्तीय समावेशन और वास्तविक समय भुगतान में क्रांति ला दी है। किंतु तीव्र विस्तार के साथ धोखाधड़ी के जोखिम भी बढ़े हैं, जिससे नियामक हस्तक्षेप आवश्यक हो गया है।
भारत के लिए अवसर: परिवर्तित वैश्विक व्यवस्था में
वर्तमान वैश्विक व्यवस्था अनेक समकालीन संकटों से चिह्नित है, जहाँ विरोधी और सहयोगी दोनों ही विचलित हैं। इससे भारत को एक अस्थायी रणनीतिक विराम प्राप्त हुआ है।
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक एवं उच्च शिक्षा शासन
प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को क्रियान्वित करना है। तथापि, इसके संबंध में संवैधानिक वैधता, संघीय संतुलन, संस्थागत स्वायत्तता और सामाजिक न्याय को लेकर चिंताएँ उठती हैं।