भारत में हाइड्रोजन रेलगाड़ियाँ: हरित परिवर्तन की दिशा में एक कदम या एक प्रौद्योगिकीय प्रयोग

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • भारत के प्रधानमंत्री ने हाल ही में हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की प्रथम हाइड्रोजन संचालित रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही भारत, जर्मनी और चीन के बाद वाणिज्यिक यात्री सेवा में हाइड्रोजन रेलगाड़ियों का संचालन करने वाला विश्व का तीसरा देश बन गया।

हाइड्रोजन रेलगाड़ी के बारे में

  • हाइड्रोजन रेलगाड़ियाँ ईंधन सेल प्रौद्योगिकी का उपयोग करती हैं, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की अभिक्रिया से विद्युत उत्पन्न की जाती है तथा प्रत्यक्ष उत्सर्जन के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है।
  • ईंधन-सेल स्टैक द्वारा उत्पन्न विद्युत, विद्युत कर्षण मोटरों को संचालित करती है, जबकि बैटरियाँ त्वरण तथा पुनर्योजी ब्रेकिंग में सहायता प्रदान करती हैं।             
  • हाइड्रोजन प्राथमिक ईंधन नहीं, बल्कि एक ऊर्जा वाहक है।
  • भारत के प्रोटोटाइप का फ्यूल-सेल स्टैक आयातित है।
  • हालांकि, प्रणोदन प्रणाली , नियंत्रण प्रणाली तथा रेलगाड़ी का एकीकरण स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है, जो भारत की इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है।
  • यह पहल राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप स्वच्छ हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देती है।

विश्व में हाइड्रोजन रेल का अनुभव

  • विश्वभर में हाइड्रोजन रेलगाड़ियों का उपयोग मुख्यतः उन क्षेत्रीय रेलमार्गों पर किया जाता है जहाँ विद्युतीकरण उपलब्ध नहीं है तथा उसका विस्तार आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं है।
  • जर्मनी ने वर्ष 2022 में एल्सटॉम कोराडिया आईलिंट के माध्यम से वाणिज्यिक हाइड्रोजन रेल सेवा प्रारंभ कर अग्रणी भूमिका निभाई।
    • किंतु बाद में अनेक संचालकों ने बैटरी-विद्युत रेलगाड़ियों को प्राथमिकता दी, क्योंकि ईंधन-सेलों का क्षरण, रखरखाव संबंधी कठिनाइयाँ, हाइड्रोजन आपूर्ति की चुनौतियाँ तथा अधिक परिचालन लागत सामने आईं।
  • चीन ने चयनित रेलमार्गों पर हाइड्रोजन रेलगाड़ियों का संचालन प्रारंभ किया है।
  • जापान, दक्षिण कोरिया, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड तथा संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश अभी भी दीर्घकालिक व्यवहार्यता का आकलन करते हुए मुख्यतः पायलट अथवा प्रदर्शन परियोजनाएँ संचालित कर रहे हैं।

भारत की प्रथम हाइड्रोजन रेल परियोजना

  • भारतीय रेल अपनी कार्बन उत्सर्जन में कमी की रणनीति के अंतर्गत हाइड्रोजन संचालित रेलगाड़ियों की शुरुआत कर रही है।
  • पहला प्रोटोटाइप उत्तरी रेलवे के जींद–सोनीपत खंड पर परीक्षणाधीन है।
  • भारत ने ‘हेरिटेज हेतु हाइड्रोजन’ योजना के अंतर्गत आठ नैरो गेज एवं मीटर गेज विरासत रेलमार्गों पर 35 हाइड्रोजन रेलगाड़ियों के निर्माण की योजना बनाई है, जहाँ पारंपरिक विद्युतीकरण पर्यावरणीय दृष्टि से उपयुक्त नहीं हो सकता।
  • इस परियोजना का उद्देश्य हाइड्रोजन प्रणोदन, सुरक्षा, भंडारण तथा रखरखाव में विशेषज्ञता विकसित करना तथा राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लक्ष्यों को समर्थन प्रदान करना है।

हाइड्रोजन रेलगाड़ियों का महत्त्व

  • पर्यावरणीय लाभ: उपयोग के समय ईंधन-सेल केवल जलवाष्प का उत्सर्जन करते हैं, जिससे स्थानीय वायु प्रदूषण में कमी आती है तथा डीज़ल पर निर्भरता घटती है।
  • तकनीकी क्षमता का विकास: प्रणोदन एवं नियंत्रण प्रणालियों का स्वदेशी विकास भारत के रेलवे विनिर्माण पारितंत्र को सुदृढ़ बनाता है तथा आत्मनिर्भर भारत पहल को प्रोत्साहित करता है।
  • ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण: हाइड्रोजन परिवहन क्षेत्र के लिए स्वच्छ ऊर्जा का एक वैकल्पिक माध्यम प्रदान करता है तथा दीर्घकाल में जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम कर सकता है।
  • रणनीतिक अनुभव: प्रोटोटाइप से प्राप्त परिचालन अनुभव भारतीय रेल को हाइड्रोजन भंडारण, सुरक्षा मानकों, रखरखाव एवं प्रणाली एकीकरण में विशेषज्ञता विकसित करने में सहायक होगा।

प्रमुख चुनौतियाँ एवं चिंताएँ

  • मार्ग चयन पर प्रश्न: भारत उन कुछ देशों में शामिल है जो पूर्णतः विद्युतीकृत रेलमार्ग पर हाइड्रोजन यात्री रेल का परीक्षण कर रहे हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर हाइड्रोजन रेल का उद्देश्य मुख्यतः गैर-विद्युतीकृत मार्गों पर डीज़ल का विकल्प प्रदान करना है।
  • अवसंरचनात्मक चुनौतियाँ: विभिन्न विरासत रेलमार्गों के लिए हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण तथा पुनर्भरण अवसंरचना विकसित करने हेतु भारी निवेश एवं जटिल व्यवस्थाओं की आवश्यकता होगी।
  • कम ऊर्जा दक्षता: हाइड्रोजन के उत्पादन, संपीड़न/द्रवीकरण, परिवहन, भंडारण तथा पुनः विद्युत में रूपांतरण की प्रत्येक प्रक्रिया ऊर्जा-सघन है, जिससे यह बैटरी-विद्युत प्रणालियों की तुलना में कम ऊर्जा दक्ष बन जाती है।
  • हरित हाइड्रोजन की सीमाएँ: वर्तमान में विश्व के 95% से अधिक हाइड्रोजन का उत्पादन प्राकृतिक गैस से होता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन होता है।
    • नवीकरणीय ऊर्जा आधारित विद्युत अपघटन द्वारा हरित हाइड्रोजन का उत्पादन अभी भी अत्यधिक महँगा है।
  • सीमित प्रगति: हाइड्रोजन रेल विकास हेतु लगभग ₹2,800 करोड़ के आवंटन के बावजूद विरासत रेल परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दी है।

क्या हाइड्रोजन रेल के लिए सर्वश्रेष्ठ हरित ईंधन है?

  • रेलवे परिवहन के लिए हाइड्रोजन हर परिस्थिति में सर्वोत्तम समाधान नहीं है, विशेषकर वहाँ जहाँ पहले से ही रेलमार्गों का विद्युतीकरण हो चुका है।
  • भारतीय रेल अपने 99% से अधिक रेलमार्गों का विद्युतीकरण कर चुकी है, जिससे मुख्य रेल कॉरिडोरों पर हाइड्रोजन की आवश्यकता सीमित हो जाती है।
  • बैटरी-विद्युत रेलगाड़ियाँ अल्प एवं मध्यम दूरी के लिए अधिक ऊर्जा दक्ष, कम परिचालन लागत वाली तथा सरल अवसंरचना वाली होती हैं।
  • तथापि, इस्पात एवं उर्वरक उद्योग, लंबी दूरी के समुद्री परिवहन तथा संभावित रूप से विमानन जैसे क्षेत्रों में हाइड्रोजन की उपयोगिता बनी हुई है।
  • अतः हाइड्रोजन को रेल विद्युतीकरण का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक प्रौद्योगिकी के रूप में देखा जाना चाहिए।

आगे की राह

  • हाइड्रोजन रेलगाड़ियों का उपयोग मुख्यतः गैर-विद्युतीकृत अथवा विरासत रेलमार्गों तक सीमित किया जाए, जहाँ विद्युतीकरण पर्यावरणीय अथवा आर्थिक दृष्टि से उपयुक्त न हो।
  • नवीकरणीय ऊर्जा आधारित हरित हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए।
  • बड़े पैमाने पर विस्तार से पूर्व विस्तृत लागत-लाभ तथा जीवन-चक्र विश्लेषण किया जाए।
  • जहाँ संभव हो, क्षेत्रीय रेल सेवाओं में बैटरी-विद्युत रेलगाड़ियों को प्राथमिकता दी जाए।
  • ईंधन-सेल प्रौद्योगिकी, हाइड्रोजन भंडारण तथा सुरक्षा मानकों में स्वदेशी क्षमता विकसित करते हुए वैश्विक अनुभवों से सीख ली जाए।
  • जींद–सोनीपत प्रोटोटाइप को प्रौद्योगिकी प्रदर्शन परियोजना के रूप में उपयोग करते हुए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाए।

निष्कर्ष

  • भारत की हाइड्रोजन रेल परियोजना देश की तकनीकी एवं इंजीनियरिंग क्षमता के विकास की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
    •  तथापि, अंतरराष्ट्रीय अनुभव यह दर्शाते हैं कि हाइड्रोजन रेलवे क्षेत्र के लिए सार्वभौमिक समाधान नहीं है। 
  • भविष्य में इसका विस्तार परिचालन अनुभव, आर्थिक व्यवहार्यता तथा दीर्घकालिक स्थिरता के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि केवल तकनीकी उत्साह के आधार पर।
  • भारतीय रेल, जींद–सोनीपत हाइड्रोजन रेल परियोजना से प्राप्त अनुभव का उपयोग करते हुए कालका–शिमला सहित अन्य ऐतिहासिक रेलमार्गों पर हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाओं का परीक्षण कर रही है।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न]: भारतीय रेल में नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए क्या हाइड्रोजन-संचालित रेलगाड़ियाँ सर्वाधिक उपयुक्त समाधान हैं? समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। 

स्रोत: BL

 

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