पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- हाल ही में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि भारत को अपनी आर्थिक वृद्धि की गति बनाए रखने के लिए निवेश दर में उल्लेखनीय वृद्धि करने की आवश्यकता है।
- निवेश अनुकूलता सूचकांक (IFI) का शुभारंभ राज्यों को निवेश-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में सहायता प्रदान करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
उच्च निवेश क्यों आवश्यक है?
- भारत विश्व की सर्वाधिक तीव्र गति से विकसित हो रही प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जहाँ वित्त वर्ष 1992 से वित्त वर्ष 2025 के बीच वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की औसत वार्षिक वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रही है।
- निवेश आर्थिक वृद्धि का प्रमुख प्रेरक है, जो उत्पादक क्षमता में वृद्धि, रोजगार सृजन तथा मांग उत्पन्न करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- विश्व बैंक के अनुसार, वर्ष 2047 तक उच्च-आय वाली अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारत को आगामी दो दशकों तक वास्तविक GDP में औसतन 7.8 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी।
- वर्ष 1991 के आर्थिक सुधारों के पश्चात भारत की आर्थिक वृद्धि में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान निवेश का रहा है, जो विकास प्रक्रिया में निवेश की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है।
सार्वजनिक निवेश का महत्त्व
- आर्थिक गतिविधियों एवं मांग को प्रोत्साहन: निवेश अपनी प्रकृति के अनुसार रोजगार, आय और उपभोग के माध्यम से मांग उत्पन्न करता है।
- अवसंरचना परियोजनाएँ निर्माण, खरीद तथा संबद्ध उद्योगों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में गुणक प्रभाव उत्पन्न करती हैं।
- निजी निवेश को प्रोत्साहन: बेहतर अवसंरचना, नीतिगत स्थिरता तथा व्यवसाय करने में सुगमता घरेलू एवं विदेशी निवेशकों को उत्पादक निवेश हेतु प्रेरित करती है।
- दीर्घकालिक उत्पादकता में वृद्धि: परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना तथा मानव पूंजी में निवेश उत्पादन लागत को कम करता है तथा प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है।
- संतुलित क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहन: पिछड़े क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश संपर्क, औद्योगिकीकरण तथा सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता में सुधार कर क्षेत्रीय असमानताओं को कम करता है।
- रोजगार सृजन में सहायता: निर्माण, विनिर्माण तथा लॉजिस्टिक्स जैसे अवसंरचना-आधारित क्षेत्रों में कुशल एवं अकुशल दोनों प्रकार के रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं।
- वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि: सुदृढ़ अवसंरचना एवं प्रभावी प्रशासन भारत को वैश्विक विनिर्माण तथा निवेश का अधिक आकर्षक गंतव्य बनाते हैं।
संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ
- निम्न निवेश दर: भारत की निवेश दर वर्तमान में GDP के लगभग 25 प्रतिशत के आसपास है, जो उच्च वृद्धि काल के दौरान पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है।
- यह चीन के उच्च वृद्धि काल की तुलना में भी काफी कम है, जब उसने GDP का लगभग 50 प्रतिशत निवेश किया था।
- राज्यों के स्तर पर असमानताएँ: राज्यों के बीच अवसंरचना की गुणवत्ता, नियामकीय दक्षता, प्रशासनिक क्षमता तथा नीतियों के क्रियान्वयन में व्यापक अंतर विद्यमान है।
- निजी निवेश में मंदी: वैश्विक अनिश्चितताओं, कमजोर मांग तथा जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण निजी पूंजीगत व्यय दबाव में बना हुआ है।
- अवसंरचना वित्तपोषण की चुनौतियाँ: विशाल अवसंरचना परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक वित्त की आवश्यकता होती है, जबकि राजकोषीय सीमाएँ सार्वजनिक व्यय को सीमित करती हैं।
- नियामकीय एवं प्रक्रियात्मक बाधाएँ: भूमि अधिग्रहण, अनुबंधों के प्रवर्तन में विलंब, पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ तथा अनुपालन संबंधी भार जैसी समस्याएँ परियोजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावित करती हैं।
- वैश्विक आर्थिक प्रतिकूल परिस्थितियाँ: संरक्षणवाद, भू-राजनीतिक तनाव तथा आपूर्ति शृंखला में व्यवधान निवेश प्रवाह के लिए अनिश्चितता उत्पन्न कर रहे हैं।
प्रमुख प्रयास एवं पहल
- निवेश अनुकूलता सूचकांक: इसे नीति आयोग द्वारा राज्यों के निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का मूल्यांकन करने तथा साक्ष्य-आधारित नीतिगत सुधारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
निवेश अनुकूलता सूचकांक (IFI)
- यह नीति आयोग द्वारा 28 राज्यों एवं 8 केंद्रशासित प्रदेशों की निवेश आकर्षण क्षमता का आकलन करने हेतु प्रारंभ किया गया है।
- इसका उद्देश्य राज्यों को उनके निवेश पारिस्थितिकी तंत्र की शक्तियों एवं कमियों की पहचान करने, नीतिगत हस्तक्षेपों को सुदृढ़ बनाने तथा अधिक घरेलू एवं विदेशी निवेश आकर्षित करने में सहायता प्रदान करना है।
- यह कोई रैंकिंग प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि राज्यों द्वारा श्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाने के माध्यम से सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद को प्रोत्साहित करने वाला एक निदानात्मक (Diagnostic) उपकरण है।
- मूल्यांकन ढाँचा : राज्यों का मूल्यांकन 100 अंकों के पैमाने पर निवेशकों के प्राथमिक सर्वेक्षण तथा द्वितीयक आँकड़ों के आधार पर किया जाता है।
- मूल्यांकन के आठ स्तंभ: अवसंरचना
- व्यावसायिक वातावरण
- संसाधन
- सरकारी नीति
- नियामकीय सुगमता
- संस्थागत वातावरण
- वित्तीय स्वास्थ्य
- पर्यावरणीय लचीलापन
- राज्यों का वर्गीकरण: बड़े राज्य
- पर्वतीय एवं उत्तर-पूर्वी राज्य
- नगर राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश
- समग्र शीर्ष प्रदर्शनकर्ता (2025): गुजरात
- महाराष्ट्र
- तमिलनाडु
- गोवा
- ओडिशा
- श्रेणीवार अग्रणी राज्य:
- वृहद राज्य: गुजरात
- महाराष्ट्र
- तमिलनाडु
- पर्वतीय एवं उत्तर-पूर्वी राज्य: उत्तराखंड
- असम
- हिमाचल प्रदेश
- वृहद राज्य: गुजरात
- नगर राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश: गोवा
- दिल्ली
- चंडीगढ़
- यह पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति तथा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना जैसी पहलों को भी समर्थन प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP): परिवहन, ऊर्जा, शहरी एवं सामाजिक अवसंरचना के विकास हेतु दीर्घकालिक अवसंरचना निवेश कार्यक्रम।
- पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान: विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर बहु-माध्यमीय संपर्क सुनिश्चित करने के लिए GIS आधारित डिजिटल अवसंरचना नियोजन मंच।
- राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP): विद्यमान ब्राउनफील्ड सार्वजनिक परिसंपत्तियों के मूल्य का उपयोग कर नई अवसंरचना के निर्माण हेतु संसाधन जुटाना।
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: रणनीतिक क्षेत्रों में विनिर्माण निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं।
- व्यवसाय करने में सुगमता सुधार: डिजिटल स्वीकृतियाँ, श्रम सुधार, फेसलेस कर प्रशासन तथा सिंगल विंडो प्रणाली जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से निवेश वातावरण में सुधार किया जा रहा है।
- पूंजीगत व्यय के माध्यम से परिसंपत्ति निर्माण: हाल के केंद्रीय बजटों में अवसंरचना-आधारित आर्थिक वृद्धि को गति देने हेतु पूंजीगत व्यय को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की गई है।
आगे की राह
- निरंतर सार्वजनिक पूंजीगत व्यय तथा निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी के माध्यम से निवेश दर में वृद्धि की जाए।
- परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग द्वारा सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता एवं दक्षता में सुधार किया जाए।
- निवेश अनुकूलता सूचकांक द्वारा चिन्हित श्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाने हेतु राज्यों को प्रोत्साहित कर सहकारी संघवाद को सुदृढ़ किया जाए।
- विनियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, नीतिगत स्थिरता सुनिश्चित कर तथा अनुबंध प्रवर्तन को सुदृढ़ बनाकर निवेशकों का विश्वास बढ़ाया जाए।
- विकास वित्त संस्थानों, नगर निगम बॉण्ड तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से अवसंरचना वित्तपोषण का विस्तार किया जाए।
- सतत एवं समावेशी विकास को प्रोत्साहित करने हेतु हरित अवसंरचना, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तथा नवाचार-आधारित निवेश को बढ़ावा दिया जाए।
- संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करने के लिए निवेश को पिछड़े राज्यों एवं आकांक्षी जिलों पर विशेष रूप से केंद्रित किया जाए।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न]: भारत में आर्थिक वृद्धि को तीव्र गति प्रदान करने में सार्वजनिक निवेश की भूमिका का परीक्षण कीजिए। निवेश में वृद्धि के समक्ष विद्यमान प्रमुख चुनौतियों की चर्चा करते हुए भारत के निवेश पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने हेतु उपयुक्त उपाय सुझाइए। |
स्रोत: New Indian Express
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