पाठ्यक्रम: जीएस-2/राजव्यवस्था एवं शासन
सन्दर्भ
- ‘बीबीसी न्यूज़ हिंदी’ की एक जाँच से पता चला है कि छह पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPP) को वर्ष 2023-24 के दौरान लगभग ₹1,700 करोड़ का चंदा प्राप्त हुआ था।
राजनीतिक दलों का परिचय
- राजनीतिक दल नागरिकों द्वारा गठित किया जा सकने वाला व्यक्तियों का एक संघ या निकाय है।
- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RP अधिनियम) की धारा 29A में किसी राजनीतिक दल को निर्वाचन आयोग (EC) के साथ पंजीकृत कराने की आवश्यकताएँ निर्धारित की गई हैं।
- प्रस्तुत दस्तावेजों की संतोषजनक जाँच के बाद, निर्वाचन आयोग किसी राजनीतिक दल को RUPP के रूप में पंजीकृत करता है।
- RUPP को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
- आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 12 के तहत प्राप्त चंदे पर कर में छूट,
- लोकसभा/राज्य विधानसभाओं के आम चुनाव लड़ने के लिए साझा चुनाव चिह्न,
- तथा चुनाव प्रचार के दौरान 20 ‘स्टार प्रचारक’।
- RUPP को चंदा: RUPP के लिए एक वित्तीय वर्ष में ₹20,000 से अधिक के व्यक्तिगत दानदाताओं का विवरण रखना और प्रत्येक वर्ष इसे निर्वाचन निकाय को प्रस्तुत करना आवश्यक है।
- आयकर अधिनियम, 2025 के तहत RUPP के लिए ₹2,000 से अधिक का चंदा केवल चेक या बैंक हस्तांतरण के माध्यम से स्वीकार करना आवश्यक है।
- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29C के अनुसार, इन विवरणों को प्रस्तुत करने में विफल रहने पर आयकर छूट समाप्त हो जाएगी।
चिंताएँ
- निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अनुसार, जुलाई तक भारत में 2,800 से अधिक RUPP थे, लेकिन 2024 के आम चुनावों में केवल लगभग 750 ने चुनाव लड़ा।
- इसके कारण शेष RUPP के लिए ‘लेटर पैड पार्टियाँ’ नाम प्रचलित हुआ है।
- वैधानिक आवश्यकताओं के कमजोर अनुपालन के साथ-साथ पारदर्शिता की कमी के कारण इन ‘लेटर पैड’ पार्टियों का उपयोग कर चोरी और धन शोधन के लिए एक अपारदर्शी माध्यम के रूप में किया जा रहा है।
- ऐसे दलों का पंजीकरण रद्द करना: RP अधिनियम निर्वाचन आयोग को किसी राजनीतिक दल द्वारा चुनाव न लड़ने, आंतरिक पार्टी चुनाव न कराने या आवश्यक विवरणियाँ प्रस्तुत न करने की स्थिति में उसका पंजीकरण रद्द करने की स्पष्ट शक्ति प्रदान नहीं करता।
- इंडियन नेशनल कांग्रेस बनाम इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वेलफेयर एवं अन्य (2002) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि RP अधिनियम के तहत निर्वाचन आयोग के पास किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने की शक्ति नहीं है।
- निर्वाचन आयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में ही पंजीकरण रद्द कर सकता है, जैसे कि धोखाधड़ी से पंजीकरण प्राप्त किया गया हो, राजनीतिक दल का संविधान के प्रति निष्ठा समाप्त हो गई हो, या सरकार द्वारा उसे गैरकानूनी घोषित कर दिया गया हो।
अनुशंसित सुधार
- विधि आयोग ने अपनी 255वीं रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि यदि कोई राजनीतिक दल लगातार दस वर्षों तक चुनाव लड़ने में विफल रहता है, तो उसका पंजीकरण रद्द करने के लिए संशोधन किया जाना चाहिए।
- निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन सुधारों पर अपने ज्ञापन (2016) में भी RP अधिनियम में ऐसे संशोधन का सुझाव दिया था, जिससे उसे किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार मिल सके।
- निर्वाचन आयोग ने यह भी सुझाव दिया था कि कर छूट केवल उन्हीं राजनीतिक दलों को दी जाए जो लोकसभा या विधानसभा चुनावों में सीटें जीतते हैं।
- इसे एक अलोकतांत्रिक और अत्यधिक कठोर उपाय माना जा सकता है, क्योंकि ऐसे राजनीतिक दल भी हैं जो लगातार चुनाव लड़ते हैं, लेकिन उन्हें चुनावी सफलता नहीं मिलती।
- इसके बजाय, RUPP को साझा चुनाव चिह्न आवंटित करने के लिए निर्धारित 1% मत सीमा के समान, कानून द्वारा RUPP के लिए एक उपयुक्त मत प्रतिशत सीमा निर्धारित की जा सकती है, ताकि प्राप्त चंदे पर कर छूट का लाभ उठाया जा सके।
आगे की राह
- ये लंबे समय से लंबित सुधार हैं, जिन्हें गैर-गंभीर राजनीतिक दलों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए निर्वाचन आयोग को सशक्त बनाने हेतु लागू करने की आवश्यकता है।
- वर्तमान डिजिटल युग में आयकर विभाग और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के लिए ऐसे दलों के लेन-देन की निगरानी करना और किसी भी गलत कार्य के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करना कठिन नहीं है।
- इससे राजनीतिक दलों को उपलब्ध लाभों और छूटों के दुरुपयोग के विरुद्ध एक निवारक प्रभाव उत्पन्न होगा।
स्रोत: TH
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