भारत लंबे समय से कुशल चिकित्सा पेशेवरों के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन यह अपनी घरेलू स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने में संघर्ष करता है।
भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपने प्रयासों में तीव्रता लाने की आवश्यकता है, क्योंकि महत्वपूर्ण खनिज 21वीं सदी की निर्णायक भू-आर्थिक धुरी के रूप में उभर रहे हैं।
भारत का विद्युत क्षेत्र, जो लंबे समय से विखंडित नियमन, बढ़ते ऋण और अप्रभावी वितरण जैसी समस्याओं से सामना कर रहा है, अब आधुनिक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और सभी के लिए सतत, विश्वसनीय पहुंच सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण सुधारों से गुजर रहा है।
हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई ट्रेन ब्लास्ट मामले (2006) में पूर्व में दोषी ठहराए गए सभी 12 लोगों को बरी कर दिया है, यह कहते हुए कि अभियोजन पक्ष उनके अपराध को सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा।
भारत खाद्य पशु उत्पादन में एंटीबायोटिक के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए अपने नियामक ढांचे को सुदृढ़ कर रहा है, जिससे मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
भारत सरकार ने वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निवेश को प्रोत्साहित करने, नवाचार को बढ़ावा देने और हरित ऊर्जा परिवर्तन को तीव्र करने हेतु भारत की सौर ऊर्जा क्षमता का डेटा आधारित पुनर्मूल्यांकन प्रारंभ किया है।
जैसे-जैसे दुनिया डेटा-आधारित अर्थव्यवस्थाओं की ओर बढ़ रही है, भारत को अपनी डिजिटल अवसंरचना और समुद्री हितों की रक्षा करना आवश्यक है — यह एक संप्रभु आवश्यकता और तकनीकी अनिवार्यता दोनों है।
हाल ही में एक घटनाक्रम में, छत्तीसगढ़ वन विभाग ने सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR) के कार्यान्वयन के लिए स्वयं को नोडल एजेंसी घोषित करने वाला पत्र जारी किया, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।
विगत कुछ दशकों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। फिर भी ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय उद्योग महिलाओं के STEM करियर में निवेश न करके आर्थिक अवसरों को गंवा रहा है।