Editorial Analysis in Hindi
भारत के खरीद सुधारों के साथ नवाचार को प्रोत्साहन
भारत में पारदर्शिता और लागत-कुशलता को ध्यान में रखकर तैयार की गई खरीद नीतियाँ एवं ढांचे प्रायः वैज्ञानिक आवश्यकताओं की तुलना में प्रक्रियात्मक अनुपालन को प्राथमिकता देकर नवाचार को बाधित कर देते हैं।
स्मार्ट शहरों का बाढ़ग्रस्त सड़कों में परिवर्तित होने का कारण
स्मार्ट सिटी मिशन के शुभारंभ के एक दशक पश्चात, जिसका उद्देश्य 100 भारतीय शहरों को दक्षता और स्थिरता के मॉडल में बदलना था, कई भारतीय शहरों में बाढ़ ने लचीले शहरों के बजाय कमजोर बुनियादी ढांचे और चयनात्मक सौंदर्यीकरण को उजागर किया।
ग्रेट निकोबार: समुद्री महत्वाकांक्षा और पारिस्थितिक विवेक के मध्य संतुलन
ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना (GNIDP) भारत की “विकसित भारत” आकांक्षाओं का प्रतीक है, लेकिन इसके साथ ही यह पारिस्थितिकीय स्थायित्व और आदिवासी अधिकारों को लेकर तीव्र चिंताएं भी उत्पन्न करता है। यह एक परिचर्चा का विषय बन गया है कि देश रणनीतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय अनिवार्यताओं के बीच किस प्रकार संतुलन बनाए रखता है।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए सुसाइड हेल्पलाइनों से आगे की सोच
भारत में मानसिक स्वास्थ्य संकट को केवल सुसाइड हेल्पलाइन के माध्यम से हल नहीं किया जा सकता, क्योंकि ये केवल आपातकालीन हस्तक्षेप के रूप में कार्य करती हैं और रोकथाम, पहुँच एवं प्रणालीगत कारणों की उपेक्षा करती हैं।
जलवायु परिवर्तन नहीं, बल्कि अनियंत्रित विकास, हिमालय के लिए खतरा
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में हाल ही में आई आपदाओं से यह संकेत प्राप्त हुआ है कि वास्तविक संकट उत्प्रेरक मानवजनित विघटन है, जबकि वैश्विक तापमान में वृद्धि निश्चित रूप से पर्यावरणीय तनाव को बढ़ा रही है।
तकनीकी स्वतंत्रता की ओर लम्बी यात्रा
भारत में तकनीकी स्वतंत्रता की दिशा में प्रयास अब एक रणनीतिक अनिवार्यता बन चुका है, क्योंकि डिजिटल संप्रभुता तेजी से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ती जा रही है।
ईरान-भारत: प्राचीन सभ्यताएँ और नए क्षितिज
विश्व एक ऐसे परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जिसमें पश्चिमी नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में, विशेष रूप से अमेरिका का प्रभुत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसने पारंपरिक रूप से वित्तीय प्रणालियों, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और मीडिया पर नियंत्रण के माध्यम से वैश्विक प्रभाव स्थापित किया है।
भारत की FDI कहानी में एक जटिल मोड़
भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रवाह निरंतर बना हुआ है, लेकिन लाभ की प्रत्यावर्तन, विनिवेश, और भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में निवेश की बढ़ती प्रवृत्ति ने दीर्घकालिक विकास प्रभाव को कमजोर कर दिया है।
बहुध्रुवीय विश्व में भारत की सामरिक स्वायत्तता
बढ़ती वैश्विक अशांति के बीच, जैसे-जैसे वैश्विक व्यवस्था एकध्रुवीय प्रभुत्व से बहुध्रुवीय जटिलता की ओर बढ़ रही है, रणनीतिक स्वायत्तता की अवधारणा भारत की विदेश नीति के निर्णयों को आकार दे रही है।