“डॉक्स कॉमर्स/सौम्य वाणिज्य (doux commerce) और वैश्विक व्यापार की बदलती प्रकृति

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • टैरिफ, निर्यात नियंत्रण तथा “राष्ट्रीय खरीद” (Buy National) जैसे अनिवार्य प्रावधानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह स्पष्ट हो गया है कि “जेंटल  ट्रेड(Gentle Trade)” का युग समाप्ति की ओर अग्रसर है।

डॉक्स कॉमर्स (Doux Commerce) की अवधारणा

  • डॉक्स कॉमर्स (Doux Commerce) शब्द को मोंतेस्क्यू (Montesquieu) द्वारा लोकप्रिय बनाया गया था, जिसका अर्थ है “जेंटल ट्रेड(gentle commerce)”
    • इस सिद्धांत के अनुसार व्यापार मानव व्यवहार को अधिक सभ्य बनाता है और संघर्ष की संभावनाओं को कम करता है।
    • यदि राष्ट्र आर्थिक रूप से परस्पर निर्भर हो जाते हैं, तो युद्ध की लागत अत्यधिक बढ़ जाती है।
    • इस प्रकार आर्थिक सहयोग शांति और सभ्यता को प्रोत्साहित करेगा।
  • इस विचार ने वैश्वीकरण के युग को गहराई से प्रभावित किया।

वैश्वीकरण की धारणा

  • दशकों तक नीति-निर्माताओं का यह विश्वास रहा कि व्यापारिक एकीकरण देशों को वैश्विक व्यवस्था में जिम्मेदार भागीदार बनाएगा।
  • आर्थिक परस्पर निर्भरता भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को हतोत्साहित करेगी।
  • यह धारणा थी कि पारस्परिक आर्थिक निर्भरता सहयोग को सुनिश्चित करेगी।

यह धारणा क्यों असफल हो रही है?

  • अब परस्पर निर्भरता विश्वास के बजाय संवेदनशीलता (Vulnerability) उत्पन्न कर रही है। इसके प्रमुख कारण हैं—
    • संरक्षणवाद में वृद्धि: टैरिफ, निर्यात नियंत्रण तथा “राष्ट्रीय खरीद” नीतियाँ बढ़ रही हैं।
    • भू-आर्थिक प्रतिस्पर्धा: व्यापारिक उपकरणों का उपयोग अब सामरिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
    • आपूर्ति श्रृंखला की असुरक्षा: महामारी और युद्ध जैसी घटनाओं ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की कमजोरियों को उजागर किया है।
    • व्यापार का हथियारीकरण: सेमीकंडक्टर तथा महत्वपूर्ण खनिजों जैसी प्रौद्योगिकियों का उपयोग भू-राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में किया जा रहा है।
  • इस प्रकार अब आर्थिक संबंधों को रणनीतिक जोखिम के रूप में भी देखा जाने लगा है।

वैश्विक व्यापार रणनीति में परिवर्तन

  • देश अब दक्षता  से अधिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
  • पूर्व में व्यापारिक मॉडल ऑफशोरिंग, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं तथा लागत न्यूनिकीकरण पर आधारित थे।
  • वर्तमान में नए मॉडल फ्रेंड-शोरिंग, नियर-शोरिंग तथा राजनीतिक रूप से विश्वसनीय साझेदारों के साथ व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं।
  • यह प्रवृत्ति बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली (WTO-आधारित) से हटकर द्विपक्षीय या समूह-आधारित व्यापार व्यवस्थाओं की ओर संक्रमण का संकेत देती है।

इस परिवर्तन के परिणाम

  • वैश्विक अर्थव्यवस्था का खंडीकरण
  • उपभोक्ताओं के लिए उच्च लागत
  • बहुपक्षीय संस्थाओं का कमजोर होना
  • भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि
  • राष्ट्रों के बीच सांस्कृतिक संपर्क में कमी
  • इस प्रकार व्यापार अब पारस्परिक समृद्धि से हटकर सामरिक प्रतिस्पर्धा की दिशा में परिवर्तित हो रहा है।

निष्कर्ष

  • वैश्वीकरण के दौर में यह धारणा प्रचलित थी कि आर्थिक परस्पर निर्भरता शांति की गारंटी देगी।किन्तु बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण व्यापार अब सहयोग के बजाय सामरिक प्रतिस्पर्धा का उपकरण बनता जा रहा है।

स्रोत: IE

 

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