भारत की विरासत संरक्षण रूपरेखा में सुधार
Published on: 28 April, 2026
भारत की विरासत संरक्षण व्यवस्था अत्यधिक केंद्रीकृत, एकरूप और प्रतिकूल है, जो प्रायः संरक्षण एवं विकास दोनों उद्देश्यों को विफल करती है।
भारत की विरासत संरक्षण व्यवस्था अत्यधिक केंद्रीकृत, एकरूप और प्रतिकूल है, जो प्रायः संरक्षण एवं विकास दोनों उद्देश्यों को विफल करती है।
भारत का ब्रिक्स अध्यक्षता का अवसर ऐसे समय प्राप्त हुआ है जब विश्व अनिश्चितताओं का सामना कर रहा है — भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक विखंडन और तकनीकी व्यवधान। इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों की सामूहिक क्षमता का उपयोग कर वैश्विक कल्याण को बढ़ावा देना है।
हाल ही में हुए राज्य विधानसभा चुनावों में नकद हस्तांतरण, मुफ्त बिजली, परिवहन और वस्तुओं के वादे किए गए, जिन्हें जनकल्याणकारी उपाय माना गया। ये समावेशी विकास, गरीबी उन्मूलन और माँग सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, साथ ही वित्तीय अनुशासनहीनता के प्रति सावधानी भी आवश्यक है।
हालिया भू-राजनीतिक तनाव (जैसे अमेरिका-ईरान संघर्ष) और होरमुज़ जलडमरूमध्य पर प्रतिबंधों के कारण भारत में आपूर्ति की कमी और उर्वरक इनपुट प्रवाह प्रभावित हुए हैं, क्योंकि भारत खाड़ी-उत्पत्ति वाले उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भर है।
भारत की शहरी आय में ग्रामीण आय की तुलना में सभी वर्गों में तीव्रता से वृद्धि हुई है और यह राष्ट्रीय विकास का प्रमुख चालक बनकर उभरी है। शहरी क्षेत्रों ने श्रम को आत्मसात किया और एक उभरते मध्यम वर्ग को पोषित किया। हालांकि, यह विकास असमान रूप से वितरित है।
भारत विश्व के साथ लगातार तीसरे वर्ष भुगतान संतुलन घाटा की ओर अग्रसर प्रतीत होता है।
भारत में हाल के वर्षों में उर्वरक सब्सिडी, विशेषकर यूरिया, ने पोषक तत्वों में असंतुलन, राजकोषीय दबाव और पर्यावरणीय क्षरण को उत्पन्न कर दिया है। इससे स्पष्ट होता है कि कृषि में सर्वोत्तम परिणामों के बजाय सब्सिडी की संरचना और वितरण प्रणाली में त्वरित सुधार की आवश्यकता है।
वैश्विक स्तर पर बुनियादी अधिगम (Foundational Learning) में एक गंभीर संकट उभर रहा है। विश्व बैंक के अनुसार, निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में लगभग 70% बच्चे 10 वर्ष की आयु तक सरल पाठ नहीं पढ़ सकते। यह विद्यालयी कमी और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास में गहरे प्रणालीगत विफलताओं को दर्शाता है।
भारत–दक्षिण कोरिया संबंध पिछले तीन दशकों में उल्लेखनीय रूप से विकसित हुए हैं, जो अब रणनीतिक अभिसरण, साझा विकास पथ और वैश्विक भू-राजनीति में सामंजस्य द्वारा परिभाषित होते जा रहे हैं।
भारत की ग्रामीण विकास यात्रा कल्याण-उन्मुख योजनाओं से सामुदायिक-आधारित संस्थागत मॉडलों की ओर संरचनात्मक बदलाव से गुज़री है। DAY-NRLM जैसी प्रमुख योजनाओं ने भारत में ग्रामीण आजीविका को रूपांतरित किया है और विशेषकर ग्लोबल साउथ में भारत की विकास कूटनीति को प्रभावित कर रही हैं।