भारत द्वारा अपनी मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) में संशोधन का प्रयास
Published on: 03 October, 2026
वित्त मंत्रालय ने मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) की समीक्षा पूरी कर ली है और इसे मंत्रिमंडल सचिवालय को भेज दिया है।
वित्त मंत्रालय ने मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) की समीक्षा पूरी कर ली है और इसे मंत्रिमंडल सचिवालय को भेज दिया है।
भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के भारत तथा आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के बीच कार्यान्वयन का एक वर्ष पूरा हुआ।
छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की लद्दाख की निरंतर मांग, साथ ही सीधे निर्वाचित विधायी प्राधिकरण को लेकर चर्चा ने जनजातीय स्वायत्तता, संघवाद, प्रतिनिधित्व और संवैधानिक लचीलेपन पर बहस को फिर से सक्रिय कर दिया है।
एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बिहार के जमुई और दिल्ली के आस्था कुंज से सामने आई घटनाएँ कई मौलिक प्रश्न उठाती हैं, अर्थात् महिलाओं की सुरक्षा के प्रति समान स्तर की भावना में बढ़े हुए व्यय, कानून और बुनियादी ढाँचे का अपेक्षित रूपांतरण क्यों नहीं हो पाया है।
पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) के वित्त, बढ़ते राजनीतिक चंदे और चुनावी पारदर्शिता पर जारी बहस से राजनीतिक वित्तपोषण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आया है।
चीन द्वारा अपनी परमाणु क्षमताओं का विस्तार करने, पाकिस्तान द्वारा सामरिक परमाणु विकल्प विकसित करने तथा नई प्रौद्योगिकियों द्वारा परमाणु प्रतिरोध की स्थिरता को प्रभावित करने के बीच भारत का परमाणु सिद्धांत एक बार फिर चर्चा में है।
AI, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और जलवायु विज्ञान में तीव्र प्रगति भारत के मानसून के पूर्वानुमान के लिए नई संभावनाएँ प्रशस्त कर रही है, जबकि जलवायु परिवर्तन के कारण चरम वर्षा की घटनाओं का पूर्वानुमान लगाना निरंतर अधिक कठिन होता जा रहा है।
हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र (81st UNGA) में भारत के विदेश मंत्री (EAM) ने वैश्विक संकटों के प्रति वैश्विक दक्षिण के असमान रूप से अधिक जोखिमग्रस्त होने को रेखांकित किया और अंतरराष्ट्रीय निर्णय-निर्माण में इसके अधिक प्रतिनिधित्व का आह्वान किया।
भारत के द्विपक्षीय निवेश संधियों (BITs) और मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के विस्तारित नेटवर्क ने निवेश संरक्षण और विवाद निपटान पर नए सिरे से ध्यान आकर्षित किया है। विशेष रूप से, इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है कि संधि नीति भारत के भीतर वाणिज्यिक मध्यस्थता को किस प्रकार सुदृढ़ कर सकती है।
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) बीमा नियामक ढाँचे की व्यापक समीक्षा कर रहा है, जिसमें वितरण व्यवस्था, मध्यस्थों के पारिश्रमिक, मूल्य निर्धारण और कॉरपोरेट प्रशासन में सुधार प्रमुख चिंताओं के रूप में उभर रहे हैं।