जैसा कि भारत 2047 तक स्वयं को एक विकसित राष्ट्र (विकसित भारत) के रूप में देखता है, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की भूमिका आधारभूत एवं परिवर्तनकारी दोनों रूपों में उभरकर सामने आई है, जो रोजगार के इंजन, नवाचार के महत्वपूर्ण चालक, निर्यात तथा समावेशी विकास के साधन के रूप में कार्य करते हैं।