पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- भारत सरकार ने केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान के आँकड़ों का सन्दर्भ देते हुए दावा किया कि वर्ष 2022 में मूल्यांकित 135 मत्स्य भंडारों (Fish Stocks) में से 91.1% “सतत (Sustainable)” थे, जिससे भारत के समुद्री मत्स्य क्षेत्र को वैश्विक सफलता की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया।
- हालाँकि, यह आशावादी चित्र खाद्य एवं कृषि संगठन के आकलन से स्पष्ट रूप से भिन्न है, जिसमें कहा गया है कि अत्यधिक मत्स्यन क्षमता (Overcapacity) के कारण भारत का समुद्री मत्स्य क्षेत्र ठहराव (Plateau) की स्थिति में पहुँच गया है। साथ ही, दशकों से मछुआरों की गवाही भी लगातार घटती पकड़ तथा विलुप्त होती प्रजातियों की ओर संकेत करती है।
सरकारी दावों से संबंधित प्रमुख चिंताएँ
1. प्रयुक्त कार्यप्रणाली (Methodology Used)
- अनेक अन्य मत्स्यन देशों की तुलना में, केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान अब भी मुख्यतः लैंडिंग डेटा (Landing Data) पर आधारित आँकड़ों का उपयोग करता है, न कि मत्स्य भंडार आकलन (Stock Assessment) पर।
- यह भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ), जिसमें देश के चारों ओर समुद्र का 200 समुद्री मील (371 किमी) तक का क्षेत्र शामिल है, में मत्स्य भंडार की उपलब्धता का अनुमान मछुआरों द्वारा पकड़ी गई मछलियों के आधार पर लगाता है।
- इसके विपरीत, अन्य देश समुद्र में प्रत्यक्ष स्टॉक आकलन करते हैं, जिससे यह ज्ञात होता है कि किसी समुद्री क्षेत्र में वास्तव में कितनी जलीय जीव-संपदा उपलब्ध है।
- मत्स्य भंडारों के स्वास्थ्य का निर्धारण करने के लिए यही अधिक विश्वसनीय पद्धति मानी जाती है।
2. तटीय (Inshore) पारितंत्रों का ह्रास
- भारत अपेक्षाकृत संकरे महाद्वीपीय मग्नतट से घिरा हुआ है, जहाँ मत्स्यन सर्वाधिक उत्पादक होता है। यह मग्नतट गुजरात तथा महाराष्ट्र के कुछ भागों में अधिक चौड़ा है, जबकि शेष उपमहाद्वीप के अधिकांश तटों पर संकरा है।
- ये समुद्री जल क्षेत्र झींगा (Shrimp) जैसी व्यावसायिक रूप से महत्त्वपूर्ण प्रजातियों के भोजन, प्रजनन और विकास के लिए अनुकूल पारिस्थितिक परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं।
- नदियों पर बाँधों का निर्माण तथा मैंग्रोव वनों का विनाश तटीय मत्स्यन को दूरस्थ समुद्री क्षेत्रों की अपेक्षा अधिक प्रभावित करता है।
3. यंत्रीकृत ट्रॉलिंग (Mechanised Trawling)
- मत्स्य संसाधनों के ह्रास का एक प्रमुख कारण यंत्रीकृत ट्रॉलिंग का विस्तार है, जिसकी शुरुआत लगभग 1960 के आसपास हुई।
- यंत्रीकृत ट्रॉलरों का विशाल बेड़ा तटीय समुद्री तल को निरंतर जोतता(ploughs) रहता है।
- जिन क्षेत्रों में अत्यधिक ट्रॉलिंग होती है, वहाँ सभी प्रकार के जलीय पशु एवं पादप जीवन में गिरावट देखी जाती है।
शासन संबंधी विफलताएँ
- छोटे मछुआरों की सुरक्षा हेतु निर्धारित 5 समुद्री मील का नो-ट्रॉलिंग क्षेत्र प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा रहा है।
- तटीय राज्यों के पास पर्याप्त गश्ती कर्मियों तथा नौकाओं का अभाव है।
- सह-प्रबंधन (Co-management) व्यवस्थाओं से स्वयं मछुआरों को बाहर रखा गया है, जिससे नियमों के पालन तथा स्थानीय निगरानी में कमी आती है।
- परिणामस्वरूप छोटे तथा यंत्रीकृत दोनों प्रकार के मछुआरे भीड़भाड़ वाले अपतटीय (Offshore) एवं गहरे समुद्री क्षेत्रों की ओर जाने को विवश हो रहे हैं।
भारत में मत्स्य संरक्षण हेतु सरकारी पहल
1. समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम (MFRAs)
- ‘मत्स्य’ राज्य सूची का विषय है। सभी तटीय राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश अपने-अपने समुद्री मत्स्य क्षेत्र का प्रबंधन संबंधित समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम (MFRA) के माध्यम से करते हैं।
2. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना
- यह योजना मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास तथा पारंपरिक एवं लघु स्तर के मछुआरों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण के लिए लागू की जा रही है।
- इसके अंतर्गत समुद्री कृषि , समुद्री शैवाल (Seaweed) की खेती तथा ओपेन सी केज कल्चर (Open Sea Cage Culture) को बढ़ावा दिया जाता है, ताकि निकटवर्ती समुद्री क्षेत्रों पर मत्स्यन का दबाव कम हो तथा समुद्री मत्स्य उत्पादन को सतत बनाया जा सके।
- योजना में “100 तटीय मछुआरा गाँवों को जलवायु-लचीले तटीय मछुआरा गाँव (CRCFV) के रूप में विकसित करने” का भी प्रावधान है।
3. राष्ट्रीय समुद्री मत्स्य नीति, 2017
- यह देश में उत्तरदायी एवं सतत मत्स्यन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है।
4. सरकारी परामर्श
- भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में पेयर्ड बॉटम ट्रॉलिंग (Paired Bottom Trawling/Bull Trawling) तथा मत्स्यन में एलईडी लाइटों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है।
- केंद्र सरकार ने तटीय राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को समुद्री कछुओं के संरक्षण हेतु टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TEDs) का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित करने के लिए अपने-अपने MFRAs में संशोधन करने की सलाह भी दी है।
5. मत्स्यन पर समान प्रतिबंध अवधि (Uniform Ban Period on Fishing)
- मत्स्य भंडारों की वृद्धि तथा समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वर्ष 61 दिनों का समान(uniform) मत्स्यन प्रतिबंध लागू किया जाता है।
- पूर्वी तट: 15 अप्रैल से 14 जून
- पश्चिमी तट: 1 जून से 31 जुलाई
6. राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB)
- राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड तथा अनुसंधान एवं विकास संस्थानों ने राज्य मत्स्य विभागों के सहयोग से मत्स्य क्षेत्र के समक्ष उपस्थित प्रमुख खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु अनेक पहल की हैं।
आगे की राह
- सततता संबंधी विश्वसनीय दावों के लिए लैंडिंग डेटा के स्थान पर वैज्ञानिक मत्स्य भंडार आकलन को अपनाया जाए तथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप कार्य किया जाए।
- राज्यों की क्षमता, उपग्रह/एआईएस आधारित निगरानी तथा मछुआरा सहकारी समितियों की भागीदारी के माध्यम से तटीय क्षेत्रों में कानून का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित किया जाए।
- विशेषकर इंजन क्षमता बढ़ाने जैसे उपायों द्वारा यंत्रीकृत ट्रॉलरों के विस्तार पर नियंत्रण लगाया जाए तथा 5 समुद्री मील की सीमा का कड़ाई से पालन कराया जाए।
- मैंग्रोव पुनर्स्थापन, प्रदूषण नियंत्रण तथा तटीय पारितंत्रों को पोषित करने वाली नदियों में आवश्यक पर्यावरणीय प्रवाह सुनिश्चित कर स्थल-आधारित दबावों को कम किया जाए।
- गहरे समुद्री मत्स्यन नीति को मुख्य रणनीति के बजाय पूरक रणनीति के रूप में पुनर्संतुलित किया जाए, क्योंकि इसकी जैविक क्षमता सीमित है।
- केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान के कार्यक्षेत्र का विस्तार कर इसमें केवल पकड़-आधारित सततता सूचकांकों के बजाय समुद्री तल (Benthic) पारितंत्रों के स्वास्थ्य का व्यवस्थित अध्ययन भी शामिल किया जाए।
- श्रीलंका के साथ पाक की खाड़ी (Palk Bay) में मत्स्यन संबंधी मुद्दों पर समयबद्ध संक्रमण व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे बॉटम ट्रॉलिंग से क्रमिक रूप से बाहर निकला जा सके।
निष्कर्ष
- भारत की समुद्री मत्स्य नीति आँकड़ों की विश्वसनीयता के संकट तथा सर्वाधिक पारिस्थितिकीय रूप से उत्पादक तटीय क्षेत्रों में शासन संबंधी शून्यता से ग्रस्त है।
- वास्तविक सततता प्राप्त करने के लिए उत्पादन-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़ते हुए वैज्ञानिक मत्स्य भंडार आकलन, तटीय पारितंत्रों के पुनर्स्थापन तथा आजीविका एवं पारिस्थितिकीय संतुलन पर आधारित समावेशी मत्स्य शासन (governance) को अपनाना आवश्यक है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] भारत की वर्तमान मत्स्य भंडार आकलन पद्धति की सीमाओं का परीक्षण कीजिए। इसकी तुलना अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं से करते हुए आवश्यक सुधारों पर चर्चा कीजिए। |
स्रोत: TH
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