खाद्य संप्रभुता: फ्रांस और भारत से सीख

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • फ्रांस के कृषि संप्रभुता एवं पीढ़ीगत नवीकरण उन्मुखीकरण कानून, 2024 ने खाद्य संप्रभुता को कृषि में युवाओं की भागीदारी से जोड़ा है।
  • इसी समय, भारत में कृषि के प्रति युवाओं की घटती रुचि ने कृषि संप्रभुता तथा पीढ़ीगत नवीकरण पर पुनः विमर्श को गति दी है।

खाद्य एवं कृषि संप्रभुता के बारे में

  • भारत और फ्रांस जैसे देशों की आर्थिक एवं सामाजिक संरचना में कृषि तथा उससे संबंधित गतिविधियाँ केंद्रीय भूमिका निभाती हैं।
  • फ्रांस यूरोपीय संघ (EU) के कुल कृषि उत्पादन का लगभग 18% योगदान देता है, किंतु वर्ष 2030 तक वहाँ कृषि में कार्यरत किसानों की संख्या लगभग आधी रह जाने की संभावना है।
  • भारत भी इसी प्रकार की चुनौती का सामना कर रहा है, क्योंकि ग्रामीण युवा निरंतर शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं।
  • वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (ASER), 2017 के अनुसार 14–18 वर्ष आयु वर्ग के 42% युवा कार्यरत हैं तथा उनमें से 79% कृषि क्षेत्र में कार्य करते हैं, जिनमें अधिकांश अपने पारिवारिक खेतों पर कार्यरत हैं। इसके बावजूद केवल 1.2% युवा किसान बनने की आकांक्षा रखते हैं।
    • यह संकट केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस प्रश्न से भी जुड़ा है कि कृषि पर नियंत्रण किसका होगा और किन शर्तों पर होगा।

खाद्य संप्रभुता की अवधारणा

  • खाद्य संप्रभुता अथवा कृषि संप्रभुता का आशय लोगों और राष्ट्रों के उस अधिकार से है, जिसके अंतर्गत वे अपनी कृषि व्यवस्था का निर्धारण स्वयं कर सकें। इसमें बीज, भूमि, बाजार, कृषि आदानों तथा उत्पादन पद्धतियों पर नियंत्रण सम्मिलित है।
    • इसके विपरीत, खाद्य सुरक्षा का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त, सुरक्षित एवं किफायती भोजन की विश्वसनीय उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
  • खाद्य संप्रभुता की अवधारणा को वर्ष 1996 में ला विया कैम्पेसिना द्वारा प्रतिपादित किया गया, जिसे बाद में संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने मान्यता प्रदान की।
    • इसके छह प्रमुख मार्गदर्शक सिद्धांत हैं—
      • भोजन का अधिकार,
      • खाद्य उत्पादकों का सम्मान,
      • स्थानीय खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा,
      • स्थानीय स्तर पर नियंत्रण,
      • ज्ञान एवं कौशल का विकास,
      • तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना।
  • इस प्रकार, खाद्य संप्रभुता केवल पर्याप्त खाद्य उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के किसानों के सशक्तीकरण पर भी बल देती है।

खाद्य एवं कृषि संप्रभुता में भारत की भूमिका

  • भारत में हरित क्रांति ने कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता एवं खाद्य आत्म-पर्याप्तता की नींव रखी।
  • वर्तमान में भारत विश्व के प्रमुख अनाज, दलहन, दुग्ध एवं बागवानी उत्पादों के सबसे बड़े उत्पादकों में सम्मिलित है।
  • कृषि संप्रभुता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता निम्नलिखित पहलों में परिलक्षित होती है—
    • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था के माध्यम से मूल्य आश्वासन।
    • सार्वजनिक खरीद प्रणाली तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)
    • अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष, 2023 के अंतर्गत देशी बीजों एवं श्रीअन्न (मिलेट्स) का संवर्धन।
    • पीएम-किसान , किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) जैसी योजनाओं के माध्यम से लघु एवं सीमांत किसानों को सहायता।

प्रमुख समस्याएँ एवं चुनौतियाँ

  • युवाओं की घटती भागीदारी: कृषि की कम आय, आय की अनिश्चितता तथा जलवायु संबंधी जोखिमों के कारण ग्रामीण युवाओं का कृषि से मोहभंग हो रहा है और वे शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं।
  • भूमि का विखंडन: कृषि जनगणना के अनुसार भारत के 85% से अधिक किसान लघु एवं सीमांत किसान हैं, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन प्राप्त करना कठिन हो जाता है।
  • बढ़ता ऋणभार: उत्पादन लागत में वृद्धि, ऋण पर निर्भरता तथा मूल्य अस्थिरता के कारण कृषि व्यवसाय नई पीढ़ी के लिए कम आकर्षक बनता जा रहा है।
  • जलवायु परिवर्तन एवं पारिस्थितिकीय जोखिम: अनियमित मानसून, मृदा अपरदन तथा भूजल का अत्यधिक दोहन कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती है।
  • आयात पर बढ़ती निर्भरता: उर्वरकों, कृषि रसायनों तथा व्यावसायिक बीजों जैसे विदेशी कृषि आदानों पर बढ़ती निर्भरता कृषि संप्रभुता को कमजोर करती है।
  • पीढ़ीगत नवीकरण पर विशेष ध्यान का अभाव: फ्रांस के विपरीत भारत में ऐसी कोई समर्पित संस्था या नीति नहीं है, जिसका उद्देश्य युवाओं को कृषि क्षेत्र की ओर आकर्षित करना हो।

समस्या के समाधान हेतु किए गए प्रयास

  • आय एवं ऋण सहायता: पीएम-किसान के माध्यम से आय सहायता।
    • किसान क्रेडिट कार्ड का विस्तार।
    • ब्याज अनुदान योजनाएँ।
  • सतत कृषि: राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA)।
    • परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY)।
    • भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP) के माध्यम से प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन।
  • संसाधन दक्षता: मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना।
    • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)।
  • बाजार सुधार: ई-नाम (e-NAM)
    • किसान उत्पादक संगठन (FPOs)।
    • कृषि अवसंरचना कोष (Agri Infrastructure Fund)।
  • हालाँकि, ये अधिकांश प्रयास किसानों की आय एवं उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित हैं, न कि प्रत्यक्ष रूप से कृषि क्षेत्र में पीढ़ीगत नवीकरण सुनिश्चित करने पर।

केस स्टडी : कृषि संप्रभुता के लिए फ्रांस की संस्थागत व्यवस्था

  • कृषि संप्रभुता एवं पीढ़ीगत नवीकरण उन्मुखीकरण कानून, 2024 में कृषि संप्रभुता और युवाओं की भागीदारी के बीच स्पष्ट संबंध स्थापित किया गया है। इसके प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं—
    • नए किसानों एवं युवाओं को वित्तीय सहायता।
    • प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
    • कृषि शिक्षा एवं प्रशिक्षण को प्रोत्साहन।
    • नए किसानों के लिए भूमि तक पहुँच की सुविधा।
    • पर्यावरणीय रूप से सतत कृषि को प्रोत्साहन।
    • यूरोपीय संघ की सामान्य कृषि नीति (CAP) के रणनीतिक ढाँचे के साथ समन्वय।
  • CAP के अंतर्गत युवा किसानों को प्रत्यक्ष भुगतान, ईको-स्कीम, तथा संक्रमण सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे कृषि एक आर्थिक रूप से व्यवहार्य एवं आकर्षक व्यवसाय बनती है।

आगे की राह

  • कृषि में पीढ़ीगत नवीकरण हेतु राष्ट्रीय नीति का निर्माण।
  • युवा किसान मिशन की स्थापना, जिसके अंतर्गत स्टार्टअप अनुदान, रियायती ऋण तथा कृषि उद्यमिता इनक्यूबेशन सुविधाएँ प्रदान की जाएँ।
  • भूमि पट्टेदारी एवं भूमि बैंक संबंधी सुधार।
  • कृषि उद्यमिता, कृषि-प्रौद्योगिकी तथा मूल्य शृंखला के विकास को बढ़ावा।
  • कृषि शिक्षा, कौशल विकास तथा डिजिटल विस्तार सेवाओं का सुदृढ़ीकरण।
  • समुदाय आधारित कृषि-पर्यावरणीय  मॉडल, बीज संप्रभुता तथा किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को प्रोत्साहन।
  • राज्य के सहयोग तथा किसानों की सक्रिय भागीदारी पर आधारित ऐसा संतुलित दृष्टिकोण विकसित किया जाए, जो आर्थिक व्यवहार्यता, पर्यावरणीय सततता तथा कृषि के लोकतांत्रिक शासन को सुनिश्चित कर सके।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न]: वैश्वीकरण एवं जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में खाद्य एवं कृषि संप्रभुता भारत की कृषि नीति का एक महत्त्वपूर्ण आयाम बनकर उभरी है। इस कथन के आलोक में चर्चा कीजिए तथा भारतीय कृषि में पीढ़ीगत नवीकरण सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपाय सुझाइए। 

स्रोत: BL

 

Other News

पाठ्यक्रम: GS3/ऊर्जा संदर्भ हाल ही में, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) ने एकीकृत राष्ट्रीय ऊर्जा रूपरेखा के महत्त्व को रेखांकित किया है। इसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक ऊर्जा आत्मनिर्भरता तथा 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाते हुए भारत की ऊर्जा सुरक्षा, सततता एवं विकासात्मक उद्देश्यों के मध्य...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ भारत में क्विक कॉमर्स (QC) प्लेटफॉर्मों के तीव्र विस्तार ने एक बार पुनः इस परिचर्चा को शुरू कर दिया है कि उभरती डिजिटल खुदरा क्रांति के बीच भारत की पारंपरिक किराना व्यवस्था कितनी सतत सिद्ध होगी। भारत में किराना स्टोर एवं क्विक कॉमर्स किराना स्टोर: किराना स्टोर...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ अर्थव्यवस्था सन्दर्भ: अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए भारत की रणनीति पर बढ़ती चर्चा, साथ ही इंडिया एआई मिशन के शुभारम्भ तथा सॉवरेन एआई क्षमताओं पर विचार-विमर्श ने अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पहुँच को आधार और एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) जैसी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के समान मानने पर ध्यान केंद्रित किया...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ स्वास्थ्य से संबंधित विषय; भूख से संबंधित विषय सन्दर्भ  हाल ही में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 NFHS-6 (2023–24) के निष्कर्षों ने भारत में बढ़ते मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को रेखांकित किया है तथा विद्यालय-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से किशोर पोषण पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण संदर्भ ग्रीन ट्रांज़िशन बोर्ड ने अपने कार्य का शुभारंभ इस विचार के साथ किया कि वैश्विक जलवायु एजेंडा अब केवल लक्ष्य निर्धारित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश एकत्रित करने तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित हो चुका है। ग्रीन ट्रांज़िशन बोर्ड इसकी घोषणा रायसीना संवाद 2026...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण संदर्भ ग्रीन ट्रांज़िशन बोर्ड ने अपने कार्य का शुभारंभ इस विचार के साथ किया कि वैश्विक जलवायु एजेंडा अब केवल लक्ष्य निर्धारित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश एकत्रित करने तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित हो चुका है। ग्रीन ट्रांज़िशन बोर्ड इसकी घोषणा रायसीना संवाद 2026...
Read More

पाठ्यक्रम: GS1/भूगोल; GS3/पर्यावरण; कृषि संदर्भ हाल ही में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सामान्य से कम वर्षा (लगभग 43% कम) का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। वर्षा में यह कमी मानसून के विलंबित आगमन तथा एल नीनो परिस्थितियों के उभरने के कारण और अधिक गंभीर हो गई है। भारतीय मानसून...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था  सन्दर्भ हाल ही में भारतीय कंपनियों जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL) और अमूल ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कीं, किन्तु वे अभी भी वैश्विक स्तर पर प्रभुत्वशाली, नवाचार-संचालित तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था के उच्च-लाभ वाले क्षेत्रों में पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड 10 अरब डॉलर से...
Read More
scroll to top