पाठ्यक्रम: जीएस-3/ अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ:
- अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए भारत की रणनीति पर बढ़ती चर्चा, साथ ही इंडिया एआई मिशन के शुभारम्भ तथा सॉवरेन एआई क्षमताओं पर विचार-विमर्श ने अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पहुँच को आधार और एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) जैसी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के समान मानने पर ध्यान केंद्रित किया है।
वृद्धि हिन्दू दर से भारत दर तक
- स्वतंत्रता के बाद लगभग चार दशकों तक भारत की औसत आर्थिक वृद्धि दर लगभग 3% रही, जिसे सामान्यतः ‘वृद्धि की हिन्दू दर’ कहा गया।
- वर्ष 1991 के भुगतान संतुलन संकट ने आर्थिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त किया, जिसने भारत की विकास यात्रा को नई दिशा दी तथा उद्यमिता और उत्पादकता को बढ़ावा दिया।
- वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक निर्णायक मोड़ प्रदान करती है और भारत के लिए तीव्र आर्थिक वृद्धि का नया प्रेरक बन सकती है, जिससे 8% या उससे अधिक की सतत वृद्धि दर प्राप्त करने की सम्भावना है।
अग्रगामी प्रौद्योगिकियों को अपनाने में भारत की सिद्ध क्षमता
- भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के माध्यम से अग्रगामी प्रौद्योगिकियों को अपनाने का निरन्तर सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है, जैसे—
- आधार: विश्व का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक आईडी प्लेटफार्म, जिसमें 1.3 अरब से अधिक नामांकन हैं। इससे लक्षित कल्याणकारी सेवाओं की आपूर्ति और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है।
- एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI): यह विश्व के सभी रियल टाइम के डिजिटल लेन-देन का लगभग 50% संचालित करता है तथा डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक मानक स्थापित करता है।
- सुलभ डेटा क्रांति (Affordable Data Revolution) : रिलायंस जियो के आगमन के बाद डेटा सेवाओं की लागत में भारी कमी आई, जिससे भारत मोबाइल इंटरनेट उपयोग के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक बन गया।
- ये उदाहरण दर्शाते हैं कि उपयुक्त इकोसिस्टम का निर्माण डिजिटल सेवाओं को बड़े पैमाने पर अपनाने में सहायक होता है। इसी प्रकार अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए भी ऐसा किया जा सकता है।
भारत को निःशुल्क या किफायती एआई टोकनों की आवश्यकता क्यों है?
- एआई टोकन वे मूल इकाइयाँ हैं जिनके माध्यम से उपयोगकर्ता जनरेटिव अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रणालियों के साथ संवाद करते हैं।
- ऐसी क्षमताओं तक सार्वभौमिक पहुँच शिक्षा, अनुसंधान और शासन में उत्पादकता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकती है।
सार्वजनिक निवेश की आवश्यकता
- भारत अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर सकल घरेलू उत्पाद का केवल लगभग 0.65% व्यय करता है, जो चीन (लगभग 2.4%), अमेरिका (लगभग 3.5%), दक्षिण कोरिया (लगभग 4.9%) और इज़राइल (लगभग 5.4%) की तुलना में काफी कम है।
- अनुसंधान एवं विकास में सीमित निवेश नवाचार तथा तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बाधित करता है।
- प्रमुख राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और चयनित विद्यालयों को रियायती अथवा निःशुल्क अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सुविधा उपलब्ध कराने से ऐसा इकोसिस्टम विकसित हो सकता है, जहाँ एआई विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों के लिए ‘संज्ञानात्मक सहकर्मी (cognitive teammate)’ के रूप में कार्य करे।
- इसके लिए अनुमानित व्यय सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.06% होगा, जो खाद्य, उर्वरक और ऊर्जा पर दी जाने वाली वर्तमान सब्सिडी की तुलना में अपेक्षाकृत कम है।
- भारत के समक्ष अन्य चुनौतियाँ हैं—डिजिटल डिवाइड एवं असमान पहुँच, डेटा गोपनीयता और नैतिक चिंताएँ, अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अवसंरचना की उच्च ऊर्जा आवश्यकता तथा भ्रामक सूचना और एल्गोरिदम बायस के जोखिम।
वित्तपोषण के मॉडल
- पीपीपी (PPP) मॉडल: सरकार अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS), गूगल क्लाउड तथा माइक्रोसॉफ्ट एज़्योर जैसे बड़े क्लाउड सेवा प्रदाताओं के साथ सहयोग कर सकती है।
- भूमि सहायता(land assistance), आँकड़ा केंद्र(Data Centers) और नियामकीय स्पष्टता(regulatory clarity) प्रदान करने के बदले वे रियायती अनुमानन क्षमता
(concessional inference capacity)उपलब्ध करा सकते हैं।
- क्रॉस-सब्सिडी मॉडल: उद्यमों की सदस्यता से प्राप्त आय का उपयोग शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों को निःशुल्क सुविधा प्रदान करने में किया जा सकता है।
- इस प्रक्रिया में सरकार की भूमिका सभी व्यय वहन करने के बजाय उपयुक्त नियामकीय व्यवस्था सुनिश्चित करने तक सीमित होनी चाहिए, जैसा दूरसंचार क्षेत्र में हुआ था।
सॉवरेन एआई अवसंरचना का निर्माण
- केवल विदेशी अनुप्रयोग इंटरफेस (API) का उपयोग किसी देश को तकनीकी निर्भरता की स्थिति में पहुँचा सकता है।
- भारत को बड़े भाषा मॉडल (LLM) की मेजबानी और संचालन की अपनी क्षमता विकसित करनी होगी।
- भारत एआई मिशन तथा स्वदेशी परियोजनाएँ जैसे सर्वम एआई (Sarvam AI) इसी दिशा में किए जा रहे प्रयास हैं।
ओपन सोर्स /सॉवरेन मॉडल के लाभ
- रणनीतिक स्वतंत्रता: विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होती है और उनके द्वारा लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का प्रभाव घटता है।
- लागत-प्रभावशीलता: बार-बार दिए जाने वाले अनुज्ञप्ति शुल्क समाप्त हो जाते हैं तथा बड़े पैमाने पर शैक्षिक उपयोग सम्भव होता है।
- भारतीय भाषाओं के अनुरूप अनुकूलन: संविधान की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विकसित करना सम्भव बनाता है।
- लेखा-परीक्षण की सुविधा: सरकारी अनुप्रयोगों में मुक्त भार (Open weights) होने से परीक्षण और सत्यापन सम्भव होता है।
- किन्तु राष्ट्रीय स्तर पर इसे अपनाने के लिए साइबर सुरक्षा, डेटा रेजीडेंसी(data residency),लो लेटेंसी कम्प्यूटेशन (low latency computation), बहु-क्षेत्रीय अतिरेक (multi-region redundancy) तथा ऊर्जा दक्षता का ज्ञान आवश्यक होगा।
- इसलिए अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को भारतीय अंतरिक्ष एवं परमाणु कार्यक्रम की तरह एक राष्ट्रीय परिसंपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए।
कम्प्यूटिंग अवसंरचना का विविधीकरण
- किसी एक प्रदाता, विशेषकर एनवीडिया, पर अत्यधिक निर्भरता वित्तीय तथा रणनीतिक दोनों दृष्टियों से जोखिमपूर्ण है।
विविधीकृत मॉडल इस प्रकार हो सकता है—
- 40%: सुलभ अनुमानन(affordable inference) के लिए एडब्ल्यूएस ट्रेनियम(AWS Trainium) और एएमडी (AMD)आधारित हार्डवेयर।
- 30%: शैक्षणिक उद्देश्यों एवं प्रशिक्षण के लिए गूगल टीपीयू (Google TPUs)।
- 30%: जटिल कार्यभार और अनुकूलता के लिए एनवीडिया(NVIDIA) अवसंरचना।
- इससे लागत कम होती है, किसी एक प्रदाता पर निर्भरता घटती है तथा तकनीकी सुदृढ़ता बढ़ती है।
आगे की राह: राष्ट्रीय एआई टोकन नीति की योजना
- प्रथम चरण: राष्ट्रीय अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टोकन नीति का शुभारम्भ, सॉवरेन कम्प्यूटर साझेदारियों की स्थापना तथा प्रमुख संस्थानों (IIT/IISc) को अनुसंधान हेतु निर्बाध पहुँच प्रदान करना।
- द्वितीय चरण: विश्वविद्यालयों और नवप्रारम्भिक उद्यमों तक पहुँच का विस्तार, नवाचार हेतु अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सैंडबॉक्स लागू करना तथा विद्यालयों में अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साक्षरता कार्यक्रम प्रारम्भ करना।
- तृतीय चरण: सॉवरेन भारतीय भाषा-आधारित अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेंचमार्क विकसित करना; स्वास्थ्य, कृषि, न्यायपालिका और शिक्षा में इसका विस्तार करना; तथा सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग सुनिश्चित करना।
निष्कर्ष
- आधार, यूपीआई और सुलभ आँकड़ा सेवाओं (Affordable data demonstrates) के क्षेत्र में भारत का अनुभव दर्शाता है कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर समाज में व्यापक परिवर्तन ला सकती है।
- ओपन सोर्स मॉडल, सॉवरेन अवसंरचना तथा सुलभ एआई टोकनों को बढ़ावा देकर इसी दर्शन का विस्तार अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में किया जा सकता है, जिससे नवाचार-आधारित विकास का नया युग प्रारम्भ होगा।
- आज लिए गए निर्णायक नीतिगत निर्णय भारत को केवल वैश्विक अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्रांति में सहभागी ही नहीं, बल्कि उसका नेतृत्वकर्ता भी बना सकते हैं।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] भारत की आर्थिक वृद्धि को तीव्र करने में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI), सॉवरेन संप्रभु एआई क्षमताओं तथा नीतिगत सुधारों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। |
स्रोत: TH
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