काला सागर
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-1 / समाचारों में स्थान
संदर्भ
- भारत ने काला सागर में वाणिज्यिक पोत एमवी ओमोरफी (MV OMORFI) पर हुए हमले की कड़ी निंदा की।
काला सागर
- काला सागर दक्षिण-पूर्वी यूरोप में स्थित एक विशाल अंतर्देशीय जलराशि है, जिसकी सीमाएँ बुल्गारिया, रोमानिया, यूक्रेन, रूस, जॉर्जिया तथा तुर्किये से मिलती हैं।
- यह बोस्फोरस जलडमरूमध्य, मरमरा सागर तथा डार्डानेल्स जलडमरूमध्य के माध्यम से भूमध्य सागर से जुड़ा हुआ है।
- यह विश्व की सबसे बड़ी अंतर्देशीय जलराशि तथा सबसे बड़ा मेरोमिक्टिक (Meromictic) बेसिन है, अर्थात् इसकी ऊपरी एवं निचली जल-परतों के बीच जल का मिश्रण अत्यंत सीमित होता है।
- काला सागर की गहरी जल-परतों में ऑक्सीजन का अभाव तथा हाइड्रोजन सल्फाइड की अधिकता होती है, जिससे वहाँ अधिकांश समुद्री जीवों का जीवन संभव नहीं है।
- हालाँकि, इसकी ऊपरी ऑक्सीजन-समृद्ध जल-परतों में समुद्री जीवन विद्यमान है।
- महत्त्व: ओडेसा (यूक्रेन), कॉन्स्टांटा (रोमानिया), वार्ना (बुल्गारिया) तथा नोवोरोस्सिय्स्क (रूस) जैसे बंदरगाह तटीय देशों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
- यह क्षेत्र मत्स्य पालन, प्राकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम जैसे ऊर्जा संसाधनों तथा समुद्री व्यापार की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
- काला सागर भूमध्य सागर तक पहुँच के लिए एक सामरिक नियंत्रण बिंदु है तथा ऐतिहासिक रूप से अनेक संघर्षों का केंद्र रहा है।

स्रोत: DD
यूनेस्को द्वारा पश्चिमी तट एवं लेबनान के स्थलों को संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-1 / संस्कृति
संदर्भ
- संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने पश्चिमी तट स्थित सेबास्तिया तथा लेबनान के माउंट अमेल क्षेत्र के पाँच दुर्गों, जिनमें ब्यूफोर्ट दुर्ग भी शामिल है, को विश्व धरोहर सूची तथा संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची दोनों में सम्मिलित किया है।
परिचय
- विश्व धरोहर सूची में ऐसे सांस्कृतिक, प्राकृतिक एवं मिश्रित धरोहर स्थलों को शामिल किया जाता है, जिनका असाधारण सार्वभौमिक महत्त्व होता है।
- संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची में उन स्थलों को सम्मिलित किया जाता है, जो सशस्त्र संघर्ष, प्राकृतिक आपदा, अनियंत्रित नगरीकरण, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन अथवा उपेक्षा के कारण संकट में हों।
- इस सूची का उद्देश्य इन स्थलों के संरक्षण हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं समर्थन जुटाना है।
- इन स्थलों को आपातकालीन आधार पर सूचीबद्ध किया जाना मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण उनके संरक्षण पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों को दर्शाता है।
सेबास्तिया
- पश्चिमी तट के नाबलुस के निकट स्थित सेबास्तिया की पहचान प्राचीन समारिया नगर से की जाती है, जो बाइबिलकालीन इज़राइल साम्राज्य की राजधानी था।
- यहाँ प्राप्त पुरातात्त्विक अवशेष लौह युग, रोमन, बीजान्टिन तथा इस्लामी काल से संबंधित हैं, जो इसके दीर्घकालिक ऐतिहासिक महत्त्व को प्रदर्शित करते हैं।

माउंट अमेल के दुर्ग
- इस अभिलेखन में लेबनान के माउंट अमेल (जबल अमेल) क्षेत्र के पाँच ऐतिहासिक दुर्ग सम्मिलित हैं, जिनमें ब्यूफोर्ट दुर्ग प्रमुख है।
- ये दुर्ग क्रूसेडर, अय्यूबी, ममलूक तथा स्थानीय स्थापत्य परंपराओं के समन्वय को प्रदर्शित करते हैं तथा लगभग नौ शताब्दियों के सैन्य एवं सांस्कृतिक इतिहास का प्रतिनिधित्व करते हैं।

स्रोत: DW
संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि आयोग (UNCITRAL)
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध
समाचार में
- संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि आयोग (UNCITRAL) की स्थापना की 60वीं वर्षगाँठ मनाई गई।
संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि आयोग (UNCITRAL)
- संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि आयोग (UNCITRAL) की स्थापना वर्ष 1966 में की गई थी।
- यह संयुक्त राष्ट्र महासभा का एक सहायक निकाय है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि का आधुनिकीकरण एवं सामंजस्य स्थापित करना है।
- यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि के क्षेत्र में अपने कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष बारी-बारी से न्यूयॉर्क एवं वियना में बैठक आयोजित करता है।
सदस्यता
- इसमें 70 सदस्य देश हैं, जिनका निर्वाचन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा छह वर्ष के लिए किया जाता है।
- प्रत्येक तीन वर्ष में आधे सदस्यों का पुनर्निर्वाचन किया जाता है।
- इसकी सदस्य संख्या 1966 में 29 से बढ़कर 2022 में 70 हो गई।
- इसकी संरचना विश्व के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों तथा प्रमुख आर्थिक एवं विधिक प्रणालियों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है।
- भारत भी UNCITRAL का सदस्य है।
कार्य
- यह अभिसमयों, आदर्श विधियों तथा विधायी मार्गदर्शिकाओं जैसे विधिक साधनों का विकास करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं वाणिज्य को सुगम बनाने के लिए समान विधिक मानक स्थापित किए जा सकें।
- इसका कार्य सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में भी योगदान देता है।
- यह आधुनिक, सामंजस्यपूर्ण एवं पूर्वानुमेय अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानूनों के विकास के माध्यम से विधि के शासन, सतत आर्थिक विकास, व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा, तथा बाजार एवं वित्त तक पहुँच को सुदृढ़ करता है।
क्या आप जानते हैं?
- UNCITRAL, विश्व व्यापार संगठन (WTO) का निकाय नहीं है।
- WTO एक स्वायत्त अंतर-सरकारी संगठन है, जबकि UNCITRAL संयुक्त राष्ट्र महासभा का सहायक अंग है।
- WTO का कार्य व्यापार नीति तथा राज्य-से-राज्य व्यापार संबंधी विषयों, जैसे— व्यापार उदारीकरण, शुल्क, प्रतिपूरक शुल्क, आयात कोटा आदि से संबंधित है।
- इसके विपरीत, UNCITRAL व्यवसायों एवं व्यक्तियों के बीच होने वाले निजी अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक लेन-देन के लिए विधिक ढाँचा विकसित करता है।
स्रोत: Air
प्रधानमंत्री-यशस्वी (PM-YASASVI)
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-2 / शासन एवं कल्याणकारी योजनाएँ
संदर्भ
- भारत सरकार ने प्रधानमंत्री-यशस्वी (PM-YASASVI : प्रधानमंत्री यंग अचीवर्स छात्रवृत्ति पुरस्कार योजना फॉर वाइब्रेंट इंडिया) के अंतर्गत शैक्षिक अवसरों के विस्तार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
प्रधानमंत्री-यशस्वी (PM-YASASVI) के बारे में
- यह योजना अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (EBC) तथा विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्ध-घुमंतू जनजातियों (DNT) के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान करती है।
- मंत्रालय: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय।
- इस योजना का 100 प्रतिशत वित्तपोषण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
- इस योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों के विभिन्न शैक्षिक स्तरों को ध्यान में रखते हुए चार प्रमुख छात्रवृत्ति घटक सम्मिलित किए गए हैं—
- पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना।
- उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना।
- विद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षा योजना।
- महाविद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षा योजना।
- पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना सरकारी विद्यालयों में कक्षा 9 एवं 10 में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए है। इसके अंतर्गत 2.5 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को 4,000 रुपये प्रतिवर्ष की शैक्षणिक सहायता प्रदान की जाती है।
- उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना माध्यमिक शिक्षा के पश्चात अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की श्रेणी के अनुसार 5,000 रुपये से 20,000 रुपये तक की शैक्षणिक सहायता प्रदान करती है।
- इस योजना का उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक कठिनाइयों के बिना विद्यालयी एवं उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाना है।
स्रोत: PIB
भारत द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध SCO की अधिक सशक्त कार्रवाई का आह्वान
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत ने किर्गिज़ गणराज्य के चोलपोन-अता में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक के दौरान आतंकवाद के विरुद्ध दृढ़ एवं सिद्धांत-आधारित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO)
- शंघाई पाँच का गठन वर्ष 1996 में पूर्व सोवियत संघ के चार गणराज्यों तथा चीन के बीच सीमा-निर्धारण एवं सैन्य बलों में कमी से संबंधित वार्ताओं के परिणामस्वरूप हुआ।
- इसके सदस्य थे—
- कज़ाख़स्तान
- चीन
- किर्गिज़स्तान
- रूस
- ताजिकिस्तान
- वर्ष 2001 में उज़्बेकिस्तान के शामिल होने के बाद शंघाई पाँच का नाम बदलकर शंघाई सहयोग संगठन (SCO) कर दिया गया।
- उद्देश्य: मध्य एशिया क्षेत्र में आतंकवाद, अलगाववाद एवं उग्रवाद पर नियंत्रण हेतु क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना।
- सदस्य (10): चीन
- रूस
- भारत
- पाकिस्तान
- ईरान
- बेलारूस
- कज़ाख़स्तान
- किर्गिज़स्तान
- ताजिकिस्तान
- उज़्बेकिस्तान
- भारत वर्ष 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना तथा वर्ष 2023 में घूर्णन अध्यक्षता का दायित्व संभाला।
- प्रमुख तथ्य: सदस्य देश विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 30 प्रतिशत तथा विश्व की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- पर्यवेक्षक देश: अफगानिस्तान एवं मंगोलिया।
- आधिकारिक भाषाएँ: रूसी एवं चीनी।
- संरचना: संगठन का सर्वोच्च निर्णय-निर्माण निकाय राष्ट्राध्यक्ष परिषद (CHS) है, जिसकी बैठक प्रतिवर्ष आयोजित होती है।
- संगठन के दो स्थायी निकाय हैं—
- सचिवालय — बीजिंग।
- क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) की कार्यकारी समिति — ताशकंद।
स्रोत: DD News
2026 राष्ट्रमंडल खेल (CWG)
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- 23वें राष्ट्रमंडल खेल (CWG) का स्कॉटलैंड के ग्लासगो में भव्य उद्घाटन समारोह के साथ औपचारिक शुभारंभ हुआ।
परिचय
- राष्ट्रमंडल खेलों का प्रथम आयोजन वर्ष 1930 में कनाडा के हैमिल्टन नगर में ब्रिटिश साम्राज्य खेल के रूप में हुआ था।
- यह ओलंपिक खेलों की तर्ज पर आयोजित बहु-खेल अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है, जिसमें राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ी भाग लेते हैं।
- राष्ट्रमंडल 56 संप्रभु देशों का एक स्वैच्छिक संगठन है, जिनमें से अधिकांश पूर्व में ब्रिटिश साम्राज्य के उपनिवेश रहे हैं।
- समय-समय पर राजनीतिक परिवर्तनों तथा सदस्य देशों के स्वैच्छिक प्रवेश अथवा निष्क्रमण के कारण इसकी सदस्यता में परिवर्तन होता रहा है।
- वर्तमान में राष्ट्रमंडल खेलों में 71 देशों एवं क्षेत्रों के खिलाड़ी भाग लेते हैं।
- यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बहु-खेल आयोजन तथा चौथा सर्वाधिक देखा जाने वाला वैश्विक खेल प्रसारण आयोजन है।
क्या आप जानते हैं?
- भारत ने पहली बार वर्ष 2010 में नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी की थी।
- राष्ट्रमंडल खेल वर्ष 2030 में पुनः भारत में आयोजित होंगे, जब अहमदाबाद (गुजरात) शताब्दी राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी करेगा। यह आयोजन 1930 में हुए प्रथम संस्करण के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाएगा।
स्रोत: PIB
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संक्षिप्त समाचार 25-07-2026