NFHS-6: भारत में मोटापा एवं मधुमेह की बढ़ती प्रवृत्ति 

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य 

संदर्भ

  • हाल ही में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) ने भारत में मोटापा एवं मधुमेह के मामलों में तीव्र वृद्धि को रेखांकित किया है, जो गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बढ़ते भार का संकेत है।

NFHS-6 के बारे में

  • वर्ष 2023-24 में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) का संचालन अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (IIPS), मुंबई को नोडल एजेंसी के रूप में सौंपा गया था। इस सर्वेक्षण में मणिपुर को छोड़कर सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 715 जिलों में लगभग 6.79 लाख परिवारों को सम्मिलित किया गया।
  • यह सर्वेक्षण जनसंख्या, स्वास्थ्य, पोषण तथा परिवार कल्याण से संबंधित विभिन्न संकेतकों पर महत्वपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध कराता है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • मोटापे में वृद्धि: महिलाओं में मोटापे की दर 2019-21 के 24% से बढ़कर 2023-24 में 30.7% हो गई।
    • शहरी महिलाओं में इसकी व्यापकता 42.8% रही, जबकि ग्रामीण महिलाओं में यह 25.5% दर्ज की गई।
    • पुरुषों में मोटापे की दर 22.9% से बढ़कर 27.3% हो गई।
    • शहरी पुरुषों में मोटापे की व्यापकता 36.3%, जबकि ग्रामीण पुरुषों में 23% रही।
  •  मधुमेह में वृद्धि: 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के पुरुषों में उच्च रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) की व्यापकता 15.6% से बढ़कर 20.9% हो गई।
  • शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में यह क्रमशः 23.9% तथा 19.7% दर्ज की गई।
  • 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु की महिलाओं में उच्च रक्त शर्करा की व्यापकता 13.5% से बढ़कर 17.8% हो गई।
  • शहरी महिलाओं में इसकी व्यापकता 21.9%, जबकि ग्रामीण महिलाओं में 16.2% रही।

मोटापा क्या है?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मोटापा शरीर में वसा के असामान्य अथवा अत्यधिक संचय की ऐसी स्थिति है, जो स्वास्थ्य के लिए जोखिम उत्पन्न करती है।
  • पारंपरिक रूप से इसका आकलन शरीर द्रव्यमान सूचकांक (BMI) के आधार पर किया जाता है।

मधुमेह क्या है?

  • मधुमेह एक दीर्घकालिक उपापचयी विकार है, जिसमें शरीर या तो पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता अथवा उत्पादित इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता।
  • इसके परिणामस्वरूप रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है।
  • प्रमुख प्रकार:
    • टाइप-1 मधुमेह
    • टाइप-2 मधुमेह
    • गर्भकालीन मधुमेह 

मोटापा एवं मधुमेह में वृद्धि क्यों चिंताजनक है?

  • ICMR-INDIAB अध्ययन के अनुसार, भारत में पहले से ही 10 करोड़ से अधिक लोग मधुमेह से ग्रसित हैं।
  • मोटापा, मधुमेह, हृदय-वाहिका रोगों, उच्च रक्तचाप, आघात तथा कुछ प्रकार के कैंसरों का प्रमुख जोखिम कारक है।
  • गैर-संचारी रोगों में वृद्धि से स्वास्थ्य व्यय बढ़ता है तथा कार्यबल की उत्पादकता प्रभावित होती है।
  • बाल्यावस्था एवं किशोरावस्था में मोटापा जीवनपर्यंत स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं तथा वयस्क अवस्था में गैर-संचारी रोगों के जोखिम को बढ़ाता है।
  • मोटापा एवं मधुमेह का बढ़ता  भार कार्यशील आयु वर्ग के स्वास्थ्य एवं उत्पादकता को प्रभावित कर भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश के लिए चुनौती उत्पन्न करता है।

सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NP-NCD): सामुदायिक सहभागिता, नागरिक समाज, मीडिया तथा अन्य भागीदारों के माध्यम से व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित कर स्वास्थ्य संवर्धन करना।
    • जांच, शीघ्र निदान, उपचार, रेफरल तथा अनुवर्ती देखभाल पर विशेष बल।
  • विशेषीकृत आयुर्वेदिक उपचार: अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) द्वारा मोटापा एवं जीवनशैली संबंधी विकारों के लिए विशेष उपचार उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • आयुर्स्वास्थ्य योजना: यह एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसका उद्देश्य सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं में आयुष आधारित हस्तक्षेपों को बढ़ावा देना है।
    • यह जीवनशैली संबंधी विकारों एवं गैर-संचारी रोगों के प्रबंधन से जुड़े परियोजनाओं को समर्थन प्रदान करती है।
  • पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan): 
    • बाल्यावस्था में मोटापे की रोकथाम: वर्ष 2018 में प्रारंभ।
      • बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण परिणामों में सुधार करना इसका उद्देश्य है।
      • यह कुपोषण की रोकथाम तथा समग्र स्वास्थ्य संवर्धन हेतु पोषण संबंधी जागरूकता, सेवाओं एवं समन्वित तंत्र को सुदृढ़ करता है।
  • फिट इंडिया आंदोलन: जन-स्वास्थ्य एवं फिटनेस को प्रोत्साहन :
    • वर्ष 2019 में प्रारंभ।
    • नागरिकों को सक्रिय जीवनशैली अपनाने तथा दैनिक जीवन में शारीरिक गतिविधियों को शामिल करने हेतु प्रेरित करता है।
    • फिट इंडिया स्कूल प्रमाणन के माध्यम से विद्यालयों में शारीरिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाता है।
    • ‘फिट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल’ पहल के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में साइकिल चलाने एवं पैदल चलने को बढ़ावा दिया जाता है।
  • ईट राइट इंडिया आंदोलन [Eat Right India Movement(FSSAI)]: सुरक्षित, स्वस्थ एवं सतत खाद्य व्यवस्था को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न पहलों का समावेश।
  • उच्च वसा, नमक एवं शर्करा (HFSS) युक्त खाद्य पदार्थों के अनिवार्य लेबलिंग संबंधी सिफारिशें, जिन्हें FSSAI तथा ICMR-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN) द्वारा प्रस्तावित किया गया है।

चुनौतियाँ

  • निष्क्रिय जीवनशैली: स्क्रीन समय में वृद्धि, कार्यालय आधारित कार्य संस्कृति तथा शारीरिक गतिविधियों में कमी मोटापे को प्रोत्साहन देती है।
  • अस्वास्थ्यकर खान-पान: अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का बढ़ता उपभोग, जिनमें शर्करा, नमक एवं वसा की मात्रा अधिक होती है।
  • विलंबित निदान: मधुमेह के अनेक मामलों का पता तब चलता है जब जटिलताएँ विकसित हो चुकी होती हैं।
  • शहरी-ग्रामीण स्वास्थ्य अंतर: यद्यपि शहरी क्षेत्रों में रोगों की व्यापकता अधिक है, किंतु ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणालियाँ गैर-संचारी रोगों के प्रबंधन के लिए अपेक्षाकृत कम सक्षम हैं।
  • आर्थिक भार : मोटापा एवं उससे संबंधित रोगों के दीर्घकालिक उपचार से परिवारों तथा सरकार दोनों पर वित्तीय भार बढ़ता है।

आगे की राह

  • स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम तथा समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण के संबंध में जागरूकता अभियानों के माध्यम से निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा दिया जाए।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं एवं आयुष्मान भारत के अंतर्गत जांच एवं शीघ्र निदान व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।
  • बेहतर खाद्य लेबलिंग तथा HFSS खाद्य पदार्थों के प्रभावी विनियमन के माध्यम से स्वस्थ खाद्य विकल्पों को प्रोत्साहित किया जाए।
  • पैदल मार्ग, साइकिल लेन तथा सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों जैसी सक्रिय शहरी अवसंरचना का विकास किया जाए।
  • गैर-संचारी रोगों से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी नियोजन, खाद्य विनियमन तथा पोषण नीतियों के समन्वित एकीकृत दृष्टिकोण को अपनाया जाए।

Source: IE

 

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