पाठ्यक्रम: GS3/ भारतीय अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत ने अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप GDP के अनुमानों एवं आर्थिक वृद्धि दरों में संशोधन किया गया है, ताकि अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना का अधिक यथार्थपरक प्रतिबिंब प्रस्तुत किया जा सके।
GDP शृंखला का पुनरीक्षण क्यों किया गया?
- भारत समय-समय पर अपनी GDP शृंखला के आधार वर्ष का पुनरीक्षण करता है, ताकि अर्थव्यवस्था की संरचना, उत्पादन प्रतिरूपों, उपभोग व्यवहार तथा उपलब्ध आँकड़ों में हुए परिवर्तनों को समुचित रूप से परिलक्षित किया जा सके।
- सामान्यतः यह प्रक्रिया प्रत्येक पाँच वर्ष में की जाती है, किंतु वस्तु एवं सेवा कर (GST) के कार्यान्वयन तथा कोविड-19 महामारी के कारण यह अभ्यास विलंबित हो गया था।
- इस पुनरीक्षण का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय आय के अनुमानों की सटीकता एवं विश्वसनीयता को बढ़ाना है।
नई GDP शृंखला में प्रमुख परिवर्तन
- बेहतर एवं अद्यतन आँकड़ा स्रोतों का उपयोग: संशोधित शृंखला में निम्नलिखित स्रोतों को सम्मिलित किया गया है—
- असंगठित क्षेत्र उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (ASUSE)
- आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS)
- अद्यतन प्रशासनिक डेटाबेस एवं क्षेत्र-विशिष्ट सूचनाएँ
- अधिक विस्तृत क्षेत्रीय आकलन: पूर्ववर्ती अनुमानों में व्यापक क्षेत्रीय संकेतकों पर निर्भरता थी।
- नई कार्यप्रणाली में कृषि, उद्योग एवं सेवा क्षेत्रों के लिए उप-क्षेत्र तथा गतिविधि-स्तर के विस्तृत आँकड़ों का उपयोग किया गया है।
- मूल्य मापन में सुधार: नई शृंखला में वास्तविक GDP के आकलन हेतु वस्तु-विशिष्ट एवं गतिविधि-विशिष्ट मूल्य सूचकांकों का प्रयोग किया गया है।
- ये विस्तृत मूल्य सूचकांक विभिन्न क्षेत्रों में मुद्रास्फीति के प्रभावों को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित करते हैं।
- द्वि-अवस्फीति पद्धति का समावेश: संशोधित शृंखला में कृषि एवं विनिर्माण क्षेत्रों के लिए द्वि-अवस्फीति पद्धति अपनाई गई है, जिसमें आगत मूल्यों एवं निर्गत मूल्यों में होने वाले परिवर्तनों को पृथक रूप से समायोजित किया जाता है।
- इसके परिणामस्वरूप वास्तविक सकल मूल्य संवर्धन (GVA) का आकलन अधिक सटीक हो जाता है।
GDP पुनरीक्षण का महत्व
- बेहतर नीतिगत निर्माण: अधिक सटीक GDP अनुमान नीति-निर्माताओं को अधिक प्रभावी राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियाँ तैयार करने में सहायता प्रदान करते हैं।
- आर्थिक प्रवृत्तियों की बेहतर समझ: संशोधित आँकड़े उपभोग, निवेश तथा उत्पादन में हो रहे परिवर्तनों की अधिक स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता में वृद्धि: उन्नत सांख्यिकीय पद्धतियाँ निवेशकों एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के बीच विश्वास को सुदृढ़ करती हैं।
- अधिक विश्वसनीय आर्थिक आँकड़े वैश्विक आर्थिक आकलनों में भारत की साख को बढ़ाते हैं।
- कल्याण के बेहतर आकलन में सहायक: सटीक GDP अनुमान आय-सृजन एवं रोजगार अवसरों में हो रहे परिवर्तनों का बेहतर मूल्यांकन करने में सहायक होते हैं।
अनुमानों में प्रमुख संशोधन
- GDP के आकार में संशोधन: वर्ष 2022-23 के GDP अनुमान में 2.9 प्रतिशत की कमी की गई है।
- वर्ष 2023-24 तथा 2024-25 के GDP अनुमानों में प्रत्येक वर्ष 3.8 प्रतिशत की कमी की गई है।
- ये संशोधन संकेत करते हैं कि पूर्व में अर्थव्यवस्था के आकार का आकलन अपेक्षाकृत अधिक किया गया था।
- वृद्धि दरों में संशोधन: वर्ष 2023-24 की GDP वृद्धि दर को 9.2 प्रतिशत से घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया गया है।
- वर्ष 2024-25 की GDP वृद्धि दर को 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है।
सकल घरेलू उत्पाद (GDP)
- GDP किसी देश की घरेलू सीमा के अंदर एक निश्चित अवधि (सामान्यतः एक तिमाही अथवा एक वर्ष) में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को दर्शाता है।
- जारीकर्ता: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO)
- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI)
- GDP की गणना: GDP की गणना मुख्यतः तीन विधियों द्वारा की जाती है—
- व्यय विधि : इस विधि में अर्थव्यवस्था में अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं पर किए गए कुल व्यय का योग किया जाता है।
- आय विधि : इस विधि में उत्पादन के कारकों—श्रम, पूंजी आदि—द्वारा अर्जित कुल आय का योग किया जाता है।
- उत्पादन अथवा मूल्य संवर्धन विधि: इस विधि में उत्पादन की प्रत्येक अवस्था पर विभिन्न उद्योगों द्वारा जोड़े गए मूल्य का योग किया जाता है।
नाममात्र GDP एवं वास्तविक GDP
- नाममात्र GDP: नाममात्र GDP वर्तमान बाजार मूल्यों पर आर्थिक उत्पादन का आकलन करता है।
- इसमें मुद्रास्फीति का प्रभाव सम्मिलित होता है, इसलिए यह अर्थव्यवस्था के वर्तमान आकार का आकलन करने में उपयोगी है।
- वास्तविक GDP : वास्तविक GDP उत्पादन का मूल्यांकन स्थिर आधार वर्ष की कीमतों पर करता है।
- यह मुद्रास्फीति के प्रभाव को हटाकर उत्पादन में वास्तविक वृद्धि का अधिक सटीक चित्र प्रस्तुत करता है।
आधार वर्ष
- आधार वर्ष वह संदर्भ वर्ष होता है जिसका उपयोग आर्थिक एवं सांख्यिकीय गणनाओं में तुलना के मानक के रूप में किया जाता है।
- GDP, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) तथा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) जैसे संकेतकों में वास्तविक परिवर्तनों का आकलन इसी के आधार पर किया जाता है।
- महत्व: यह मुद्रास्फीति के प्रभाव को पृथक कर वास्तविक वृद्धि का आकलन करने में सहायता करता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि आँकड़े अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना, उपभोग प्रतिरूपों एवं मूल्य स्तरों को प्रतिबिंबित करें।
आगे की चुनौतियाँ
- जटिल कार्यप्रणाली: उन्नत उपकरणों के बावजूद GDP का आकलन एक जटिल सांख्यिकीय प्रक्रिया बना हुआ है।
- विविध आँकड़ा स्रोतों का एकीकरण: अनेक प्रशासनिक डेटासेटों का समेकन आँकड़ों की गुणवत्ता एवं संगति से संबंधित चुनौतियाँ उत्पन्न करता है।
- विश्वसनीय सर्वेक्षण आँकड़ों की उपलब्धता: उच्च गुणवत्ता वाले सर्वेक्षण आँकड़ों की समयबद्ध उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- तुलनीयता संबंधी समस्याएँ: नई शृंखला में संक्रमण के कारण प्रारंभिक चरण में दीर्घकालिक आर्थिक विश्लेषण हेतु तुलनीयता संबंधी कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
निष्कर्ष
- भारत की GDP शृंखला का यह पुनरीक्षण राष्ट्रीय आय आँकड़ों की सटीकता, पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- आधार वर्ष को अद्यतन कर तथा पूर्ववर्ती विसंगतियों को दूर करके नई रूपरेखा तीव्र गति से औपचारिक होती एवं डिजिटलीकृत होती भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविकताओं के साथ अधिक समन्वित दिखाई देती है।
Source: The Diplomat
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