पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य
संदर्भ
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS )-6 के निष्कर्ष जारी किए हैं।
परिचय
- NFHS-6 का आयोजन वर्ष 2023-24 के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान , मुंबई को नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया था।
- 715 जिलों के लगभग 6.79 लाख परिवारों को शामिल करते हुए यह सर्वेक्षण जनसंख्या, स्वास्थ्य, पोषण तथा परिवार कल्याण संबंधी संकेतकों पर प्रमाण-आधारित जानकारी प्रदान करता है।
- यह जिला स्तर तक साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण एवं कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायक है।
प्रमुख निष्कर्ष
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: 95.9% गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल (ANC) प्राप्त हुई, जबकि गर्भावस्था की प्रथम तिमाही में एएनसी प्राप्त करने वाली माताओं का अनुपात 70.0% से बढ़कर 76.2% हो गया।
- संस्थागत प्रसव: 88.6% से बढ़कर 90.6% हो गए हैं, जिससे भारत सार्वभौमिक कवरेज के लक्ष्य के और निकट पहुंचा है। प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में संपन्न प्रसवों का अनुपात 89.4% से बढ़कर 91.3% हो गया है।
- सीज़ेरियन (शल्य) प्रसव की दर भी 21.5% से बढ़कर 27.2% हो गई है। शहरी क्षेत्रों में यह दर 40% दर्ज की गई, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित 10-15% की आदर्श सीमा से कहीं अधिक है।
- मातृ पोषण: गर्भावस्था के दौरान 100 दिनों या उससे अधिक समय तक आयरन-फोलिक अम्ल की गोलियों का सेवन करने वाली माताओं का अनुपात 44.1% से बढ़कर 54.9% हो गया।
- 180 दिनों या उससे अधिक अवधि तक इन अनुपूरकों का सेवन करने वाली माताओं का अनुपात 26.0% से बढ़कर 37.8% हो गया।
- परिवार नियोजन: भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) 2.0 पर स्थिर बनी हुई है।
- गर्भनिरोधक प्रसार दर (CPR) 66.7% से बढ़कर 69.1% हो गई है, जो माता एवं शिशु कल्याण पर बढ़ते ध्यान को दर्शाती है।
- बाल टीकाकरण में सफलता: टीकाकरण कार्ड के आधार पर 12-23 माह आयु वर्ग के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 83.8% से बढ़कर 87.1% हो गया।
- 95.6% बच्चों को अधिकांश टीके सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से प्राप्त हुए।
- 12-23 माह आयु वर्ग के बच्चों द्वारा कम-से-कम एक टीका प्राप्त करने की दर निरंतर 96% से अधिक बनी हुई है।
- बाल पोषण: सर्वेक्षण अवधि के दौरान छह माह से कम आयु के 95.6% बच्चों को स्तनपान कराया गया।
- पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अविकसित वृद्धि (Stunting) अर्थात आयु के अनुपात में कम लंबाई की समस्या 35.5% से घटकर 29.3% हो गई।
- गंभीर क्षीणता अर्थात लंबाई के अनुपात में अत्यधिक कम वजन की दर 7.7% से घटकर 5.2% रह गई।
- पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में कम वजन की व्यापकता भी 32.1% से घटकर 31.8% हो गई।
- स्वास्थ्य सुरक्षा कवरेज का विस्तार: परिवार स्तर पर स्वास्थ्य बीमा अथवा स्वास्थ्य वित्तपोषण योजनाओं का कवरेज 41.0% से बढ़कर 60.2% हो गया है।
- महिला सशक्तिकरण एवं वित्तीय समावेशन: इंटरनेट का कभी उपयोग कर चुकी महिलाओं का अनुपात लगभग दोगुना होकर 33.3% से बढ़कर 64.3% हो गया।
- स्वयं संचालित बैंक अथवा बचत खाते रखने वाली महिलाओं का अनुपात 78.6% से बढ़कर 89.0% हो गया।
- स्वयं उपयोग हेतु मोबाइल फोन रखने वाली महिलाओं का अनुपात 53.9% से बढ़कर 63.6% हो गया।
- 15-24 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में मासिक धर्म स्वच्छता हेतु स्वच्छ एवं सुरक्षित साधनों के उपयोग का अनुपात 77.6% से बढ़कर 79.2% हो गया।
निष्कर्ष
- सर्वेक्षण के निष्कर्ष मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण तथा आवश्यक सेवाओं तक पहुंच के क्षेत्र में निरंतर प्रगति को प्रतिबिंबित करते हैं।
- साथ ही, गैर-संचारी रोगों में वृद्धि तथा वयस्कों में कुपोषण एवं बढ़ते अधिक वजन/मोटापे के दोहरे भार जैसी उभरती चुनौतियाँ निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
- समग्र रूप से, ये निष्कर्ष भारत की सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में निरंतर प्रगति की पुनर्पुष्टि करते हैं।
- अभिसरण, अंतिम छोर तक सेवा वितरण तथा समावेशी विकास पर निरंतर बल के साथ भारत इन उपलब्धियों को बनाए रखने तथा अपनी जनसंख्या के स्वास्थ्य एवं कल्याण में और अधिक सुधार करने की सुदृढ़ स्थिति में है।
Source: PIB
Previous article
भारत की 1.9 प्रजनन दर के निहितार्थ