INS सुदर्शिनी एवं लोकायन-26 अभियान
पाठ्यक्रम: GS3 / रक्षा
संदर्भ
- भारतीय नौसेना के नौकायन प्रशिक्षण पोत INS सुदर्शिनी ने लोकायन-26 अभियान के अंतर्गत ऐतिहासिक अटलांटिक महासागर पार यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण करने के पश्चात एंटीगुआ एवं बारबुडा में प्रवेश किया।
INS सुदर्शिनी के बारे में
- INS सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का एक नौकायन प्रशिक्षण पोत है, जिसे नौसैनिक कर्मियों को पारंपरिक नौकायन तथा समुद्री संचालन कौशलों का प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु निर्मित किया गया है।
- इस पोत का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया था तथा इसे वर्ष 2012 में भारतीय नौसेना में सम्मिलित किया गया।
लोकायन-26 अभियान
- लोकायन-26 अभियान भारतीय नौसेना के नौकायन प्रशिक्षण पोत INS सुदर्शिनी द्वारा संचालित 10 माह की अवधि एवं 22,000 समुद्री मील की एक ऐतिहासिक अंतर-महासागरीय यात्रा है।
- इस अभियान का उद्देश्य समुद्री कूटनीति को प्रोत्साहित करना, मित्र देशों के साथ संबंधों को सुदृढ़ बनाना तथा नौसैनिक कर्मियों के व्यावसायिक नौकायन कौशल का संवर्धन करना है।
- यह यात्रा INS सुदर्शिनी द्वारा की गई प्रथम अटलांटिक महासागर पार यात्रा है। इससे पूर्व भारतीय नौसेना द्वारा ऐसी यात्रा INS तरंगिणी ने वर्ष 2007 में संपन्न की थी।
एंटीगुआ एवं बारबुडा के बारे में
- यह कैरेबियाई सागर में स्थित एक द्वीपीय राष्ट्र है, जो दो प्रमुख जनसंख्या-निवासित द्वीपों—एंटीगुआ एवं बारबुडा—तथा कुछ छोटे समीपवर्ती द्वीपों से मिलकर बना है।
- इस देश ने वर्ष 1981 में यूनाइटेड किंगडम से स्वतंत्रता प्राप्त की थी।
- एंटीगुआ: यह बड़ा द्वीप है तथा देश का आर्थिक केंद्र माना जाता है।
- देश की राजधानी सेंट जॉन्स इसी द्वीप पर स्थित है।
- बारबुडा: यह एंटीगुआ से लगभग 25 मील उत्तर में स्थित है।
- यह अपेक्षाकृत समतल एवं कम विकसित द्वीप है तथा अपनी प्राकृतिक सुंदरता एवं पक्षी अभयारण्यों के लिए प्रसिद्ध है।
स्रोत: AIR
कलई-II जलविद्युत परियोजना को लेकर व्हाइट-बेलिड हेरॉन पर चिंता
पाठ्यक्रम: GS3 / पर्यावरण
संदर्भ
- केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति ने कलई-II जलविद्युत परियोजना को सैद्धांतिक वन स्वीकृति प्रदान कर दी है, जिससे व्हाइट-बेलिड हेरॉन (White-Bellied Heron) के आवास पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएँ व्यक्त की जा रही हैं।
कलई-II जलविद्युत परियोजना
- यह 1,200 मेगावाट क्षमता की रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना है, जिसे टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड) द्वारा प्रस्तावित किया गया है।
- यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के अंजाव जिले में भारत-चीन सीमा के निकट स्थित है।
- परियोजना के अंतर्गत 128.5 मीटर ऊँचे कंक्रीट ग्रेविटी बाँध तथा एक भूमिगत विद्युतगृह का निर्माण किया जाएगा।
- प्रमुख चिंताएँ: परियोजना के लिए लगभग 869 हेक्टेयर वन भूमि का गैर-वानिकी उपयोग हेतु रूपांतरण किया जाएगा।
- इसमें लगभग 638 हेक्टेयर वन क्षेत्र के जलमग्न होने की संभावना है।
- चूँकि अरुणाचल प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का दो-तिहाई से अधिक भाग वनाच्छादित है, इसलिए प्रतिपूरक वनीकरण का कार्य मध्य प्रदेश में किया जाएगा।
व्हाइट-बेलिड हेरॉन
- वैज्ञानिक नाम: आर्डिया इनसिग्निस
- महत्त्व: यह प्रजाति स्वस्थ नदीय पारिस्थितिकी तंत्र की सूचक मानी जाती है।
- IUCN संरक्षण स्थिति: अत्यंत संकटग्रस्त
- वितरण: इसका वैश्विक वितरण मुख्यतः भूटान, भारत एवं म्यांमार तक सीमित है।
- भारत में यह प्रमुख रूप से अरुणाचल प्रदेश तथा असम के कुछ भागों में पाया जाता है।
- संबंधित चिंताएँ: लोहित नदी इस प्रजाति के लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण नदीय आवासों में से एक है।
- इस पक्षी की उपस्थिति वालोंग, चेंगुंग तथा कमलांग टाइगर रिजर्व के निचले क्षेत्रीय परिदृश्य में दर्ज की गई है।
- परियोजना के कारण वन एवं नदी तटीय क्षेत्रों के जलमग्न होने से इसके घोंसले बनाने, भोजन प्राप्त करने तथा प्रजनन स्थलों को गंभीर क्षति पहुँच सकती है।
स्रोत: IE
अल्बिनो हॉग हिरण
पाठ्यक्रम: GS3 / समाचारों में प्रजातियाँ
संदर्भ
- हाल ही में असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में एक दुर्लभ अल्बिनो हॉग हिरण देखा गया।
परिचय
- अल्बिनो हॉग हिरण सर्विडे का एक छोटा सदस्य है, जो भारतीय उपमहाद्वीप तथा इंडो-गंगा के मैदानों का मूल निवासी है।
- इसकी प्रमुख विशेषताओं में श्वेत रंग का फर, गुलाबी आँखें तथा हल्के रंग के खुर शामिल हैं।
- ऐल्बिनिज़्म नामक एक दुर्लभ आनुवंशिक उत्परिवर्तन के कारण इस पशु में मेलेनिन वर्णक का पूर्णतः अभाव होता है।

- ऐल्बिनिज़्म से संबंधित चुनौतियाँ: ऐल्बिनिज़्म के कारण प्राकृतिक वातावरण में इन जीवों के लिए जीवित रहना कठिन हो सकता है।
- ऐसे जीव प्रायः छद्मावरण की कमी, परभक्षियों के लिए अधिक दृश्यता तथा सूर्य के प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता जैसी समस्याओं का सामना करते हैं।
- भारत में अन्य अल्बिनो प्रजातियाँ: हॉग हिरण के अतिरिक्त भारत में कई अन्य अल्बिनो प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं, जिनमें—
- गौर
- भारतीय नाग
- प्राइमेट वर्ग के जीव, जैसे रीसस मकाक
- ओडिशा का भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान दुर्लभ अल्बिनो लवणीय जल के मगरमच्छों के लिए प्रसिद्ध है।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के बारे में
- यह भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में स्थित है।
- इसकी स्थापना वर्ष 1908 में एक आरक्षित वन के रूप में की गई थी तथा वर्ष 1974 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा प्रदान किया गया।
- वर्ष 1985 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।
- यह भारतीय एक-सींग वाले गैंडे (राइनोसेरोस यूनिकॉर्निस) का सबसे बड़ा प्राकृतिक आवास है।
स्रोत: IE
बेबेसिया संक्रमण
पाठ्यक्रम: GS2 / स्वास्थ्य
संदर्भ
- गुजरात में बेबेसिया संक्रमण की आशंका के कारण आठ शेर शावकों की मृत्यु हो गई है, जिससे एशियाई शेरों की आबादी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता उत्पन्न हुई है।
बेबेसिया संक्रमण के बारे में
- बेबेसिया एक परजीवी जनित रोग है, जो किलनियों (Ticks) के माध्यम से फैलता है।
- संक्रमित पशुओं में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं—
- कमजोरी
- ज्वर
- खाँसी
- नासिका स्राव
- यह एक जूनोटिक रोग है, अर्थात् इसका संक्रमण पशुओं से मनुष्यों में भी फैल सकता है।
- इसके अधिकांश हल्के से मध्यम मामलों के उपचार हेतु एटोवाक्वोन एवं एज़िथ्रोमाइसिन का संयोजन प्रयोग किया जाता है, जिसे सामान्यतः 7 से 10 दिनों तक दिया जाता है।
एशियाई शेर (पैंथेरा लियो पर्सिका)
- यह भारत में पाई जाने वाली पाँच बिग कैट प्रजातियों में से एक है।
- भौतिक विशेषताएँ: एशियाई शेर, अफ्रीकी शेरों की तुलना में आकार में कुछ छोटे होते हैं।
- नर शेरों की अयाल (Mane) अपेक्षाकृत कम विकसित होती है, जिससे उनके कान स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
- इनके पेट के साथ त्वचा की एक स्पष्ट अनुदैर्ध्य तह पाई जाती है, जो इन्हें अफ्रीकी शेरों से अलग पहचान प्रदान करती है।
- वितरण: भारत में एशियाई शेर मुख्यतः गुजरात राज्य में गिर वन क्षेत्र तथा उसके आसपास पाए जाते हैं, जिनमें प्रमुख संरक्षित क्षेत्र हैं—
- गिर राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य
- पनिया वन्यजीव अभयारण्य
- मितियाला वन्यजीव अभयारण्य
- बरदा वन्यजीव अभयारण्य
- संरक्षण स्थिति:
- IUCN रेड लिस्ट: संकटग्रस्त
- CITES: परिशिष्ट-I
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-I

स्रोत: TH
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