पाठ्यक्रम: GS3/कृषि
संदर्भ
- एग्री स्टैक भूमि अभिलेखों, किसान विवरणों और फसल संबंधी जानकारी को एकीकृत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में समाहित करके डेटा-आधारित कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एग्री स्टैक क्या है?
- यह एक डिजिटल कृषि रूपरेखा है जिसे डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के अंतर्गत विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों, भूमि अभिलेखों और फसलों का एकीकृत एवं मानकीकृत डेटाबेस तैयार करना है।
- यह तीन परस्पर जुड़े रजिस्ट्रियों से मिलकर बना है:
- फार्म रजिस्ट्री: इसमें भू-संदर्भित कृषि भू-खण्डों का डेटाबेस होता है। प्रत्येक कृषि भूमि को डिजिटल रूप से मानचित्रित किया जाता है ताकि सटीक पहचान और सत्यापन सुनिश्चित हो सके।
- फार्मर रजिस्ट्री: प्रत्येक भूमि स्वामी किसान को एक विशिष्ट किसान आईडी प्रदान की जाती है, जो कृषि भू-खण्डों के स्वामित्व विवरण, सह-स्वामित्व की स्थिति और भूमि स्वामित्व में गतिशील परिवर्तनों को रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (RoR) से एकीकृत करती है।
- क्रॉप सोन रजिस्ट्री : इस स्तर पर प्रत्येक भू-खण्ड पर बोई गई फसलों का विवरण दर्ज किया जाता है। यह डिजिटल फसल सर्वेक्षण, मोबाइल आधारित डेटा संग्रहण, जियो-टैगिंग और उपग्रह सहायता के माध्यम से किया जाता है।
- ये सर्वेक्षण प्रत्येक फसल मौसम में बुवाई के बाद किए जाते हैं।
एग्री स्टैक की प्रमुख विशेषताएँ
- संघीय संरचना: एग्री स्टैक संघीय डेटाबेस मॉडल का पालन करता है, जिससे राज्यों को लचीलापन मिलता है और योजनाओं एवं विभागों के बीच अंतःक्रियाशीलता सुनिश्चित होती है।
- गोपनीयता और डेटा संरक्षण: यह प्रणाली डेटा संरक्षण सिद्धांतों, नियम-आधारित पहुँच और किसान डेटा के सुरक्षित एवं सहमति-आधारित उपयोग का पालन करती है।
- प्रौद्योगिकी एकीकरण: प्लेटफ़ॉर्म जीआईएस मैपिंग, मोबाइल अनुप्रयोग, उपग्रह चित्रण और डिजिटल भूमि अभिलेखों को एकीकृत करता है। इससे सटीकता बढ़ती है और पुनरावृत्ति व धोखाधड़ी कम होती है।
प्राप्त प्रगति
- सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 9.40 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाए जा चुके हैं।
- वर्ष 2025–26 के दौरान लगभग 30 करोड़ भू-खण्डों के लिए डिजिटल फसल सर्वेक्षण किए गए, जो 24 राज्यों के 600 से अधिक जिलों में फैले हुए थे।
- मोबाइल उपकरणों, जियो-टैगिंग और उपग्रह सहायता का उपयोग पारंपरिक मैनुअल सर्वेक्षणों से एक बड़ा बदलाव है, जो प्रायः धीमे एवं त्रुटिपूर्ण होते थे।
एग्री स्टैक के लाभ
- कल्याणकारी योजनाओं की बेहतर डिलीवरी: एग्री स्टैक एकल सत्य स्रोत के रूप में कार्य करता है, जिससे बार-बार सत्यापन की आवश्यकता कम होती है और किसानों के लिए लेन-देन लागत घटती है।
- यह सटीक लाभार्थी पहचान, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), रिसाव और पुनरावृत्ति को कम करता है।
- बेहतर कृषि विस्तार सेवाएँ: भूमि अभिलेखों, फसल विवरण और मृदा स्वास्थ्य डेटा का एकीकरण किसानों को बुवाई अनुसूची, सिंचाई, उर्वरक प्रयोग और कीट प्रबंधन से संबंधित व्यक्तिगत परामर्श प्रदान कर सकता है। इससे उत्पादकता और संसाधन दक्षता में सुधार होता है।
- डेटा-आधारित नीतिनिर्माण: वास्तविक समय कृषि डेटा की उपलब्धता सरकारों को फसल पैटर्न की निगरानी, आपूर्ति-मांग अंतराल का पूर्वानुमान, मूल्य अस्थिरता की रोकथाम और आपदा प्रतिक्रिया व खरीद योजना में सुधार करने में सहायता करती है।
- विभागीय अलगाव को समाप्त करना: पहले विभिन्न मंत्रालय और राज्य अलग-अलग किसान डेटाबेस बनाए रखते थे। एग्री स्टैक एक साझा डिजिटल परत तैयार करता है जो योजनाओं और विभागों के बीच अंतःक्रियाशीलता सक्षम करता है।
| राज्य-स्तरीय उपयोग के मामले | |
| राज्य | उदाहरण |
| उत्तर प्रदेश | MSP-आधारित खरीद |
| छत्तीसगढ | धान खरीद के लिए किसानों का पंजीकरण |
| मध्य प्रदेश | PM-AASHA के अंतर्गत मूल्य कमी भुगतान योजना |
| महाराष्ट्र | DBT लाभ और आपदा राहत |
- नवाचार के अवसर: जैसे-जैसे एग्री स्टैक परिपक्व होता है, यह एग्री-टेक स्टार्ट-अप्स, प्रिसीजन एग्रीकल्चर उपकरणों, मौसम एवं बाज़ार परामर्श प्लेटफ़ॉर्म, ऋण और बीमा नवाचारों के लिए अवसर उत्पन्न कर सकता है।
- फसल डेटा, मौसम पूर्वानुमान और बाज़ार मूल्य को संयोजित करने वाले अनुप्रयोग किसानों के निर्णय-निर्धारण को सुदृढ़ बना सकते हैं।
चुनौतियाँ और चिंताएँ
- डिजिटल विभाजन: सीमित डिजिटल साक्षरता और कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी छोटे एवं सीमांत किसानों के बीच अपनाने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
- डेटा गोपनीयता: संवेदनशील किसान डेटा की सुरक्षा और सूचित सहमति सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- भूमि अभिलेख संबंधी समस्याएँ: कई राज्यों में पुराने और विवादित भूमि अभिलेख सटीक डेटाबेस निर्माण में बाधा डाल सकते हैं।
- संघीय समन्वय: सफल क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक है।
निष्कर्ष
- एग्री स्टैक भारत की कृषि शासन संरचना में एक महत्वपूर्ण सुधार है। इसका उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी में सुधार करना, पारदर्शिता बढ़ाना और साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण को प्रोत्साहित करना है, जिसके लिए एक मानकीकृत, अंतःक्रियाशील एवं प्रौद्योगिकी-आधारित डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।
- हालाँकि, इसकी सफलता सटीक भूमि अभिलेखों, सुदृढ़ गोपनीयता सुरक्षा उपायों, कमजोर कृषकों के समावेशन और बुनियादी स्तर पर क्षमता निर्माण पर निर्भर करेगी।
- यदि प्रभावी रूप से लागू किया जाए, तो एग्री स्टैक भारतीय कृषि के लिए एक आधारभूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना बन सकता है, जिसकी रूपांतरणीय क्षमता वित्तीय क्षेत्र में यूपीआई जैसे प्लेटफ़ॉर्म के तुल्य हो सकती है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न प्रश्न: भारत में कृषि शासन, कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी और डेटा-आधारित नीतिनिर्माण में एग्री स्टैक की संभावनाओं पर चर्चा कीजिए। इसके क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। |
स्रोत: BL
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