पाठ्यक्रम: GS3/ऊर्जा; पर्यावरण
संदर्भ
- विद्युत वाहन (EVs) को तेल पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए एक रणनीतिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास, ने भारत की वैश्विक कच्चे तेल मूल्य आघातों के प्रति संवेदनशीलता को उजागर किया है।
भारत का EV परिदृश्य: वर्तमान और भविष्य
- भारत वर्तमान में विश्व के सबसे तीव्रता से बढ़ते EV बाज़ारों में से एक है। यह वृद्धि मुख्यतः विद्युत दोपहिया और तिपहिया वाहनों द्वारा संचालित है, जिनके पीछे कम परिचालन लागत, बढ़ती ईंधन कीमतें, सरकारी सब्सिडी एवं छोटे शहरी आवागमन जैसे कारक हैं।
- VAHAN डेटा और नीति आयोग के अनुमानों के अनुसार, भारत में 420 मिलियन से अधिक पंजीकृत वाहन हैं, जिनमें से लगभग 75% दोपहिया हैं। EV का प्रसार सर्वाधिक स्कूटर, ऑटो-रिक्शा एवं शहरी डिलीवरी वाहनों में है।
- सरकारी लक्ष्यों और उद्योग अनुमानों के अनुसार, 2030 तक तीव्र संक्रमण परिदृश्य में 80% दोपहिया, 70% वाणिज्यिक वाहन, 40% बसें और 30% निजी कारें विद्युत हो सकती हैं।
- हालाँकि, 2047 तक पूर्ण विद्युतीकरण के लिए प्रतिवर्ष अतिरिक्त 900–1100 TWh बिजली की आवश्यकता होगी।
भारत में EV संक्रमण की आवश्यकता
- ऊर्जा सुरक्षा: आयातित तेल पर भारत की निर्भरता बाहरी आघातों के प्रति संवेदनशील बनाती है। EV अपनाने से कच्चे तेल का आयात घटेगा और रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ेगी।
- जलवायु प्रतिबद्धताएँ: परिवहन क्षेत्र ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। EV भारत के 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य, पंचामृत प्रतिबद्धताओं और पेरिस समझौते की शर्तों को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं।
- शहरी प्रदूषण में कमी: प्रमुख भारतीय शहरों में वाहनों से गंभीर वायु प्रदूषण होता है। EV PM2.5 उत्सर्जन, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ध्वनि प्रदूषण को कम कर सकते हैं।
- आर्थिक लाभ: EV उपभोक्ताओं के लिए परिचालन लागत कम करते हैं और बैटरी निर्माण, चार्जिंग अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण तथा हरित गतिशीलता स्टार्टअप्स में अवसर सृजित करते हैं।
- औद्योगिक प्रतिस्पर्धा: भारत उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, मेक इन इंडिया और उन्नत रसायन सेल (ACC) निर्माण जैसी पहलों के माध्यम से वैश्विक EV विनिर्माण केंद्र बनने का लक्ष्य रखता है।
EV संक्रमण में प्रमुख मुद्दे और चिंताएँ
- विद्युत ग्रिड पर भारी दबाव: सबसे बड़ी चुनौती केवल EV निर्माण नहीं बल्कि पर्याप्त स्वच्छ विद्युत उत्पादन है।
- यदि 2047 तक केवल 50% वाहन विद्युत हो जाते हैं, तो भारत को लगभग 500 TWh अतिरिक्त विद्युत की आवश्यकता होगी, जो वर्तमान वार्षिक उत्पादन का लगभग एक-तिहाई है।
- मालवाहन विद्युतीकरण: भारी मालवाहक वाहन (HGVs) बेड़े का छोटा हिस्सा होते हुए भी अत्यधिक ऊर्जा खपत करते हैं। भारत में 6.26 मिलियन से अधिक HGVs हैं, और इन्हें विद्युत बनाने के लिए प्रतिवर्ष 450–565 TWh बिजली की आवश्यकता होगी।
- इसका अर्थ है कि परिवहन का विद्युतीकरण वास्तव में भारत की आपूर्ति श्रृंखलाओं का विद्युतीकरण है।
- अधिकतम मांग दबाव: शाम के समय चार्जिंग मांग ग्रिड पर गंभीर दबाव डाल सकती है।
- उचित प्रबंधन के अभाव में ग्रिड अस्थिरता, बिजली कटौती और बिजली दरों में वृद्धि हो सकती है।
- भारत के पास वर्तमान में सार्वभौमिक स्मार्ट-चार्जिंग मानक नहीं हैं।
- वितरण कंपनियों (DISCOMs) की कमजोर वित्तीय स्थिति: DISCOM पहले से ही भारी घाटे, अवसंरचना की कमी और प्रसारण बाधाओं का सामना कर रहे हैं।
- बड़े पैमाने पर EV चार्जिंग के लिए सबस्टेशन उन्नयन, उच्च वोल्टेज कनेक्शन और स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली की आवश्यकता होगी।
- कई राज्य इन निवेशों के लिए वित्तीय रूप से तैयार नहीं हैं।
- कोयले पर निर्भरता: यदि EV चार्जिंग मुख्यतः कोयला-आधारित बिजली पर निर्भर रहती है, तो भारत केवल आयातित तेल से आयातित कोयले पर निर्भरता स्थानांतरित करेगा।
- यह ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों दोनों को कमजोर करता है।
- अतः भारत का EV संक्रमण स्वच्छ बिजली मिश्रण द्वारा समर्थित होना चाहिए।
- बैटरी पुनर्चक्रण और संसाधन सीमाएँ: भारत के पास बड़े पैमाने पर बैटरी पुनर्चक्रण अवसंरचना का अभाव है।
- भविष्य की चिंताओं में लिथियम और कोबाल्ट पर निर्भरता, खतरनाक बैटरी अपशिष्ट एवं आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियाँ शामिल हैं।
संबंधित प्रयास और सरकारी पहलें
- फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (FAME) योजना: EV खरीद और चार्जिंग अवसंरचना के लिए सब्सिडी प्रदान करती है।
- PM ई-ड्राइव योजना: सार्वजनिक चार्जिंग और स्वच्छ गतिशीलता के समर्थन के साथ EV अपनाने में तीव्रता लाने पर केंद्रित।
- उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: उन्नत रसायन सेल (ACC) और घरेलू EV निर्माण को समर्थन देती है।
- राष्ट्रीय विद्युत नीति (मसौदा चरण): भविष्य की EV मांग और ग्रिड तैयारी की आवश्यकता को मान्यता देती है।
- पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS): स्मार्ट मीटर, अवसंरचना उन्नयन और हानि में कमी के माध्यम से DISCOMs का आधुनिकीकरण करने का लक्ष्य।
- बैटरी स्वैपिंग नीति: दोपहिया और वाणिज्यिक बेड़ों के लिए इंटरऑपरेबल बैटरी-स्वैपिंग प्रणालियों को प्रोत्साहित करती है।
आगे की राह: भारत के EV परिदृश्य और सुदृढ़ ग्रिड को सुदृढ़ करना
- नवीकरणीय ऊर्जा और भंडारण को सुदृढ़ करना: EV विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर विद्युत उत्पादन और विश्वसनीय चौबीसों घंटे आपूर्ति आवश्यक है। कोई भी एकल ऊर्जा स्रोत इस आवश्यकता को पूरा नहीं कर सकता।
- नवीकरणीय ऊर्जा: सौर और पवन ऊर्जा किफायती और विस्तार योग्य हैं। भारत ने राष्ट्रीय सौर मिशन के अंतर्गत पहले ही उल्लेखनीय प्रगति की है। हालाँकि, नवीकरणीय ऊर्जा अस्थिर होती है और इसके लिए भंडारण समर्थन आवश्यक है।
- परमाणु ऊर्जा: परमाणु ऊर्जा स्थिर, निम्न-कार्बन बेसलोड विद्युत प्रदान करती है। छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) और माइक्रो-मॉड्यूलर रिएक्टर भविष्य में औद्योगिक गलियारों और मालवाहन केंद्रों को समर्थन दे सकते हैं।
- पम्प्ड हाइड्रो और बैटरी भंडारण: ये तकनीकें नवीकरणीय-प्रधान ग्रिड को स्थिर कर सकती हैं और अधिकतम मांग का प्रबंधन कर सकती हैं।
- प्राकृतिक गैस: गैस-आधारित संयंत्र संक्रमणकालीन अधिकतम मांग प्रबंधन में सहायक हो सकते हैं।
- EV मांग को विद्युत योजना में एकीकृत करना: विद्युत मांग के अनुमानों में 30%, 50% और 100% EV अपनाने के परिदृश्यों को शामिल किया जाना चाहिए।
- मालवाहन विद्युतीकरण आवश्यकताएँ।
- स्मार्ट चार्जिंग को बढ़ावा देना: अनिवार्य स्मार्ट-चार्जिंग मानक समय-आधारित मूल्य निर्धारण, लोड प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण को सक्षम करें।
- नवीकरणीय ऊर्जा और भंडारण को सुदृढ़ करना: भारत को सौर और पवन क्षमता, बैटरी भंडारण प्रणाली एवं पम्प्ड हाइड्रो भंडारण का विस्तार करना होगा ताकि विश्वसनीय स्वच्छ बिजली सुनिश्चित हो सके।
- मालवाहन चार्जिंग कॉरिडोर विकसित करना: वाणिज्यिक EVs और विद्युत ट्रकों के लिए स्वर्ण चतुर्भुज और समर्पित मालवाहन कॉरिडोर के साथ समर्पित चार्जिंग अवसंरचना आवश्यक है।
- DISCOM वित्त को सुधारना: RDSS में सुधार और DISCOM वित्त को सुदृढ़ करना ग्रिड आधुनिकीकरण, अंतिम-मील कनेक्टिविटी और विश्वसनीय चार्जिंग अवसंरचना के लिए महत्वपूर्ण है।
- परिपत्र बैटरी अर्थव्यवस्था का निर्माण: भारत को बैटरी पुनर्चक्रण, दुर्लभ-पृथ्वी पुनर्प्राप्ति और स्वदेशी बैटरी तकनीक में निवेश करना चाहिए ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] भारत के विद्युत वाहन (EV) संक्रमण से जुड़ी अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। परिवहन के सतत विद्युतीकरण को सुनिश्चित करने हेतु एक सुदृढ़ और स्वच्छ विद्युत ग्रिड की आवश्यकता का परीक्षण कीजिए। |
स्रोत: TH