पाठ्यक्रम: GS2/ शासन
संदर्भ
- विश्व नगर रिपोर्ट 2026 जिसका शीर्षक “वैश्विक आवास संकट: कार्यवाही के मार्ग” है, संयुक्त राष्ट्र-हैबिटेट (UN-Habitat) द्वारा जारी की गई। इसमें यह रेखांकित किया गया कि विश्व की लगभग 40% जनसंख्या गंभीर आवास संकट का सामना कर रही है।
वैश्विक आवास संकट क्या है?
- वैश्विक आवास संकट से आशय लोगों की पर्याप्त, किफायती, सुरक्षित और जलवायु-प्रतिरोधी आवास तक पहुँच की बढ़ती अक्षमता से है। इस संकट में शामिल हैं:
- किफायती आवास इकाइयों की कमी।
- आवास और किराए की बढ़ती कीमतें।
- झुग्गियों और अनौपचारिक बस्तियों का विस्तार।
- बेघरपन और जबरन विस्थापन।
- स्वच्छता, जल और बुनियादी शहरी सेवाओं तक खराब पहुँच।
- आवासीय अवसंरचना की बढ़ती जलवायु संवेदनशीलता।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- आवास अपर्याप्तता का अभूतपूर्व स्तर: विश्वभर में लगभग 3.4 अरब लोगों को पर्याप्त आवास उपलब्ध नहीं है और 1.1 अरब से अधिक लोग अनौपचारिक बस्तियों और झुग्गियों में रहते हैं।
- वैश्विक आवास घाटा 2010 में 251 मिलियन इकाइयों से बढ़कर 2023 में 288 मिलियन इकाइयों तक पहुँच गया।
- आवास वहनीयता संकट: वैश्विक हाउस प्राइस-टू-इनकम अनुपात 2010 में 9.5 से बढ़कर 2023 में 11.7 हो गया, जो आवास वहनीयता में तीव्र गिरावट को दर्शाता है।
- मध्य और दक्षिण एशिया में यह वृद्धि सबसे अधिक रही, जो 16.8 तक पहुँची।
- विश्वभर में लगभग 44% परिवार अपनी आय का 30% से अधिक आवास व्यय पर खर्च करते हैं।
- तीव्र शहरीकरण से बढ़ता दबाव: 2050 तक शहरी क्षेत्रों में लगभग 2 अरब अतिरिक्त निवासियों को समायोजित करना होगा। बढ़ती शहरी भूमि कीमतें और अपर्याप्त योजना आवास संकट को और गहरा कर रही हैं।
- बढ़ता विस्थापन और बेघरपन: 2024 में लगभग 123.2 मिलियन लोग संघर्ष, हिंसा और आपदाओं के कारण जबरन विस्थापित हुए।
- UN-Habitat के अनुसार 2003 से 2023 के बीच शहरी विकास गतिविधियों के कारण लगभग 64 मिलियन लोग अनौपचारिक बस्तियों से विस्थापित हुए।
- जलवायु परिवर्तन से बढ़ती आवासीय संवेदनशीलता: जलवायु-संबंधी आपदाएँ 2040 तक लगभग 167 मिलियन घर नष्ट कर सकती हैं। केवल 2023 में प्राकृतिक आपदाओं से 280 अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।
- भवन वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 37% योगदान करते हैं, जबकि आवास अकेले 17–21% उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है।
भारतीय परिदृश्य
- किफायती आवास आपूर्ति में गिरावट: भारत के प्रमुख शहरों में किफायती आवास परियोजनाओं का हिस्सा 2018 में 52% से घटकर 2025 में 17% रह गया, क्योंकि डेवलपर्स अधिक लाभ के कारण प्रीमियम आवास को प्राथमिकता दे रहे हैं।
- मुंबई और दिल्ली में हाउस प्राइस-टू-इनकम अनुपात उच्च है, जिससे मध्यम आय वर्ग के लिए घर खरीदना कठिन हो गया है।
- अनौपचारिक बस्तियाँ: शहरी केंद्रों की ओर तीव्र प्रवासन झुग्गियों और अनौपचारिक आवास पर दबाव बढ़ा रहा है।
वैश्विक आवास संकट के प्रमुख कारक
- तीव्र शहरीकरण: बड़े पैमाने पर शहरों की ओर प्रवासन ने आवास की माँग को आपूर्ति से अधिक बढ़ा दिया है।
- बढ़ती भूमि कीमतें: शहरी भूमि की बढ़ती कीमतों ने आवास निर्माण लागत को बढ़ा दिया है।
- बढ़ती असमानता: आय असमानता ने निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए वहनीयता को कम कर दिया है। प्रवासी, महिलाएँ और अनौपचारिक श्रमिक जैसे कमजोर वर्ग असमान रूप से प्रभावित होते हैं।
- आवास का वित्तीयकरण: आवास को सामाजिक आवश्यकता के बजाय निवेश संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है।
- सट्टा निवेश और कॉर्पोरेट स्वामित्व ने कीमतों को सामान्य परिवारों की पहुँच से बाहर कर दिया है।
- कमज़ोर आवास शासन: राष्ट्रीय और स्थानीय सरकारों के बीच कमजोर समन्वय आवास नीतियों के कार्यान्वयन को प्रभावित करता है।
- कई नीतियाँ वहनीयता, स्वामित्व सुरक्षा और स्थिरता को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करतीं।

रिपोर्ट द्वारा सुझाए गए उपाय
- आवास को सार्वजनिक प्राथमिकता मानें: सरकारों को आवास को केवल बाज़ार वस्तु नहीं बल्कि सामाजिक कल्याण और मानव अधिकार के रूप में मान्यता देनी चाहिए।
- अनौपचारिक बस्तियों का उन्नयन: जबरन बेदखली के बजाय सहभागी इन-सीटू स्लम उन्नयन को बढ़ावा दें।
- स्थानीय सरकारों को सशक्त करें: शहरी स्थानीय निकायों को आवास वितरण हेतु वित्तीय और प्रशासनिक क्षमता प्रदान करें।
- जलवायु-प्रतिरोधी आवास को बढ़ावा दें: कम-कार्बन निर्माण सामग्री और ऊर्जा-कुशल आवास प्रणालियों को प्रोत्साहित करें।
भारत में किफायती आवास हेतु पहलें
- वाल्मीकि अंबेडकर आवास योजना (VAMBAY): 2001 में शहरी रोजगार और गरीबी उन्मूलन मंत्रालय द्वारा शुरू की गई। इसका उद्देश्य बीपीएल शहरी झुग्गीवासियों को आवास सहायता प्रदान करना था। बाद में इसे जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी पुनर्नवीकरण मिशन (JNNURM) में सम्मिलित कर दिया गया।
- जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी पुनर्नवीकरण मिशन (JNNURM): 2005 में सात वर्षीय प्रमुख शहरी पुनर्नवीकरण कार्यक्रम के रूप में शुरू किया गया। इसमें दो प्रमुख आवास-संबंधी उप-मिशन शामिल थे:
- शहरी गरीबों के लिए बुनियादी सेवाएँ (BSUP)
- एकीकृत आवास और स्लम विकास कार्यक्रम (IHSDP)
- राजीव आवास योजना (RAY): 2011 में स्लम-मुक्त भारत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई। इस योजना ने राज्यों को झुग्गियों को औपचारिक शहरी प्रणाली में एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहित किया।
- प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY): 2015 में सभी के लिए आवास के दृष्टिकोण के अंतर्गत शुरू की गई। इसका उद्देश्य पात्र शहरी और ग्रामीण परिवारों को बुनियादी सुविधाओं सहित किफायती पक्के घर प्रदान करना है।
- PMAY-Urban (PMAY-U 2.0) शहरों के लिए
- PMAY-Gramin (PMAY-G) ग्रामीण क्षेत्रों के लिए
निष्कर्ष
- वैश्विक आवास संकट 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण शहरी विकास चुनौतियों में से एक के रूप में उभर कर सामने आया है।
- तीव्र शहरीकरण, असमानता, महँगा आवास और जलवायु परिवर्तन विश्वभर में संवेदनशीलताओं को बढ़ा रहे हैं।
- इस संकट का समाधान एकीकृत शहरी योजना, मज़बूत सार्वजनिक निवेश, समावेशी आवास नीतियों और जलवायु-प्रतिरोधी अवसंरचना के माध्यम से ही संभव है।
Source: UN Habitat