पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- विकसित भारत@2047 के प्रमुख प्रेरक के रूप में कौशल विकास पर पुनः बल दिए जाने तथा तीव्र तकनीकी परिवर्तन के कारण भारत का कौशल पारिस्थितिकी तंत्र नीति-निर्माण एवं विकास विमर्श के केंद्र में आ गया है।
कौशल विकास का महत्त्व
- श्रम बाज़ार में संरचनात्मक परिवर्तन: स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटलीकरण, जलवायु परिवर्तन संबंधी पहल तथा जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के कारण भारत का श्रम बाज़ार तीव्र संरचनात्मक बदलाव से गुजर रहा है।
- ऐसी परिस्थितियों में रोजगार-योग्यता एवं आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए निरंतर कौशल उन्नयन अनिवार्य हो गया है।
- आर्थिक विकास: कौशल विकास से उत्पादकता में वृद्धि होती है, उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलता है, गरीबी में कमी आती है तथा सतत आर्थिक विकास को बल मिलता है।
- भविष्य के लिए तैयार कार्यबल: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कृत्रिम बुद्धिमत्ता तत्परता सूचकांक में भारत को 49.3 अंक प्राप्त हुए हैं, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं के औसत 42.1 से अधिक हैं। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अवसरों का लाभ उठाने हेतु भारत की बेहतर तैयारी को दर्शाता है।
- जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग: भारत की 54 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या 25 वर्ष से कम आयु की है तथा लगभग 62 प्रतिशत जनसंख्या कार्यशील आयु वर्ग में आती है। अतः जनसांख्यिकीय लाभांश का प्रभावी उपयोग करने के लिए कौशल विकास अत्यंत आवश्यक है।
- वैश्विक प्रतिभा की मांग की पूर्ति: वर्ष 2030 तक भारत में लगभग 4.5 करोड़ (45 मिलियन) कुशल पेशेवरों का अधिशेष उपलब्ध होगा, जबकि विश्व स्तर पर लगभग 8.5 करोड़ (85 मिलियन) श्रमिकों की कमी का अनुमान है। इससे भारत के लिए वैश्विक रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।
भारत में कौशल विकास : वर्तमान स्थिति
- इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 के अनुसार भारत की रोजगार-योग्यता 2020 के 46 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 56.4 प्रतिशत हो गई है।
- कौशल विकास को शिक्षा से रोजगार तक की संपूर्ण प्रक्रिया में समाहित किया गया है, जिसमें विद्यालयी शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप तथा डिजिटल शिक्षण शामिल हैं।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उभरती प्रौद्योगिकियों, उद्यमिता, महिलाओं की सहभागिता तथा उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है।
- भर्ती की प्रवृत्तियाँ सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों की बढ़ती मांग को दर्शाती हैं।
संबंधित प्रयास एवं पहल
- प्रारंभिक कौशल विकास एवं विद्यालयी शिक्षा:
- समग्र शिक्षा: 25,000 से अधिक विद्यालयों में कौशल शिक्षा प्रारंभ की गई है।
- 138 रोजगार भूमिकाओं (Job Roles) के अंतर्गत लगभग 35.5 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
- पीएम श्री विद्यालय : राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ 13,000 से अधिक विद्यालयों में 21वीं सदी के कौशलों का विकास किया जा रहा है।
- अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL): 10,000 से अधिक नवाचार प्रयोगशालाएँ विद्यार्थियों में सृजनात्मकता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास कर रही हैं।
- AI for ALL (SOAR एवं YUVA AI): IndiaAI मिशन के अंतर्गत विद्यालयी विद्यार्थियों एवं नागरिकों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता साक्षरता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
- राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (NSQF): यह दक्षता-आधारित अधिगम प्रणाली है, जो व्यावसायिक एवं शैक्षणिक शिक्षा का एकीकरण करती है।
- समग्र शिक्षा: 25,000 से अधिक विद्यालयों में कौशल शिक्षा प्रारंभ की गई है।

- कार्यबल का कौशल उन्नयन: स्किल इंडिया मिशन
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY 4.0): 28 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।
- भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नए कौशल-आधारित रोजगार क्षेत्रों को सम्मिलित किया गया है।
- जन शिक्षण संस्थान (JSS): सामुदायिक कौशल विकास कार्यक्रम, जिसमें 82 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिलाएँ हैं।
- राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (NAPS): उद्योग आधारित “सीखते हुए कमाएँ “ मॉडल पर आधारित प्रशिक्षण।
- शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (CTS): औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
- पीएम-सेतु (PM-SETU): 1,000 आईटीआई को उद्योग-संबद्ध उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY 4.0): 28 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।
- भविष्य के कौशल एवं उद्यमिता
- फ्यूचरस्किल्स प्राइम: 2,800 से अधिक डिजिटल पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं तथा 33 लाख से अधिक शिक्षार्थी इससे जुड़े हैं।
- पीएम विश्वकर्मा: पारंपरिक कारीगरों एवं शिल्पकारों को प्रशिक्षण, ऋण सुविधा एवं बाज़ार से जोड़ने की व्यवस्था प्रदान करता है।
- स्टार्टअप इंडिया, NIESBUD एवं IIE: उद्यमिता एवं स्वरोज़गार को प्रोत्साहित करते हैं।
- महिलाओं पर केंद्रित कौशल विकास: महिलाओं के लिए AI में करियर, स्वावलम्बिनी तथा NAVYA जैसी पहलें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उद्यमिता एवं गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का कार्य कर रही हैं।
बजट 2026–27 में प्रमुख प्रावधान
- विद्यालय एवं महाविद्यालय: AVGC (एनिमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) कंटेंट क्रिएटर लैब्स की स्थापना।
- स्वास्थ्य क्षेत्र: NSQF के अंतर्गत 1.5 लाख देखभालकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
- क्षेत्र-विशिष्ट कौशल विकास: पर्यटन, खेल, आयुर्वेद, डिज़ाइन तथा औद्योगिक गलियारों से जुड़े विश्वविद्यालय नगरों के लिए विशेष कौशल विकास कार्यक्रम।
प्रमुख चुनौतियाँ
- शिक्षा प्रणाली एवं उद्योग की आवश्यकताओं के बीच निरंतर कौशल असंगति।
- अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में औपचारिक व्यावसायिक शिक्षा में कम भागीदारी।
- गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास अवसंरचना की उपलब्धता में क्षेत्रीय असमानताएँ।
- प्रशिक्षण के बाद सीमित रोजगार उपलब्धता तथा उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच अपर्याप्त सहयोग।
- तीव्र तकनीकी परिवर्तन के कारण निरंतर नए कौशल सीखने की आवश्यकता।
आगे की राह : उपायों का सुदृढ़ीकरण
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा तथा इंडस्ट्री 4.0 जैसे उभरते क्षेत्रों के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों का पुनर्संरेखण किया जाए।
- पाठ्यक्रम निर्माण, अप्रेंटिसशिप तथा रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में उद्योगों की भागीदारी बढ़ाई जाए।
- राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (NSQF) के माध्यम से गुणवत्ता आश्वासन एवं परिणाम-आधारित मूल्यांकन को सुदृढ़ किया जाए।
- ग्रामीण क्षेत्रों तथा द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी (Tier-II एवं Tier-III) के शहरों में डिजिटल अवसंरचना एवं कौशल प्रशिक्षण की पहुँच का विस्तार किया जाए।
- नियमित कौशल उन्नयन एवं लचीली प्रमाणन व्यवस्था के माध्यम से आजीवन अधिगम को प्रोत्साहित किया जाए।
- भारत के कुशल पेशेवरों की वैश्विक गतिशीलता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं साझेदारी को सुदृढ़ किया जाए।
Previous article
मंत्रिमंडल द्वारा सेमिकॉन 2.0 को स्वीकृति प्रदान