पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- प्रतिभूति बाज़ार संहिता (Securities Market Code – SMC) पर अपनी रिपोर्ट में संसदीय वित्त संबंधी स्थायी समिति ने क्रिप्टोकरेंसी जैसी आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों (VDAs) के लिए एक उपयुक्त नियामक ढाँचा विकसित करने का आग्रह किया है।
प्रमुख सिफारिशें
- समिति ने उल्लेख किया कि भारत में वर्तमान में आभासी डिजिटल परिसंपत्तियाँ (VDAs) एवं क्रिप्टो परिसंपत्तियाँ कराधान के सीमित उद्देश्य को छोड़कर किसी व्यापक नियामक व्यवस्था के अंतर्गत नहीं आती हैं।
- समिति ने नामित नियामक के पर्यवेक्षण में कार्य करने वाले मान्यता प्राप्त स्व-नियामक संगठनों (Self-Regulatory Organisations – SROs) के माध्यम से एक अंतरिम नियामक व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की।
- इस ढाँचे में शासन, पारदर्शिता, सूचना प्रकटीकरण, निवेशक संरक्षण, शिकायत निवारण, निर्धारित आचार संहिताओं के अनुपालन तथा उपयुक्त नियामकीय निगरानी के न्यूनतम मानक निर्धारित किए जाने चाहिए।
- समिति ने यह भी सुझाव दिया कि सभी क्रिप्टो परिसंपत्तियाँ एक ही श्रेणी में नहीं आतीं, इसलिए VDAs के लिए प्रतिभूतियों, व्युत्पन्नों (Derivatives) तथा अन्य श्रेणियों के अंतर्गत स्पष्ट एवं पृथक परिभाषाएँ निर्धारित की जानी चाहिए
डिजिटल परिसंपत्तियाँ एवं आभासी डिजिटल परिसंपत्तियाँ
- परिसंपत्ति (Asset) वह संसाधन है जिसका आर्थिक मूल्य होता है तथा जिसका स्वामित्व किसी व्यक्ति, संस्था अथवा देश के पास हो सकता है।
- परिसंपत्तियों का वर्गीकरण उनकी परिवर्तनीयता, भौतिक अस्तित्व तथा उपयोगिता के आधार पर किया जाता है।
- डिजिटल परिसंपत्ति (Digital Asset) ऐसी डिजिटल फ़ाइल है जिसका स्वामित्व किसी व्यक्ति या कंपनी के पास हो, जिसका आर्थिक मूल्य हो तथा जिसे खोजा, प्राप्त किया और उपयोग में लाया जा सके।
- आभासी डिजिटल परिसंपत्तियाँ (VDAs) डिजिटल परिसंपत्तियों का एक उपसमूह हैं, जिनका लेन-देन ब्लॉकचेन पर होता है। इनमें अद्वितीय डिजिटल टोकन (NFTs), क्रिप्टोकरेंसी तथा अन्य आभासी परिसंपत्तियाँ शामिल हैं।
VDAs का कराधान
- भारत में आभासी डिजिटल परिसंपत्ति (VDA) की कानूनी परिभाषा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(47A) में दी गई है, जिसे वित्त अधिनियम, 2022 के माध्यम से जोड़ा गया।
- केंद्रीय बजट 2022–23 में VDAs के कराधान का प्रावधान किया गया, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी एवं अद्वितीय डिजिटल टोकन (NFTs) को शामिल किया गया।
- इन पर 30% आयकर तथा हस्तांतरण पर 1% स्रोत पर कर कटौती (TDS) लागू होती है तथा हानि का समायोजन (Set-off) करने की अनुमति नहीं है।
- खनन (Mining), लेन-देन शुल्क तथा मंच (Platform) कमीशन से संबंधित व्यय को कर योग्य आय की गणना करते समय घटाया नहीं जा सकता।
आगे की राह
- भारत द्वारा VDAs को संपत्ति एवं पूँजीगत परिसंपत्ति के रूप में मान्यता देना अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों के अनुरूप एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) अनेक क्रिप्टो परिसंपत्तियों को प्रतिभूति के रूप में वर्गीकृत करता है, जिससे वे वित्तीय बाज़ार विनियमों के अधीन आ जाती हैं।
- यह परिवर्तन आवश्यक है ताकि VDAs किसी कानूनी अस्पष्टता (Legal Grey Area) में न रहें।
- इन्हें संपत्ति के रूप में परिभाषित करने से भारत को आवश्यकता पड़ने पर क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर कर लगाने, उनका विनियमन करने तथा उन्हें जब्त करने की क्षमता प्राप्त होती है, जिससे उनके अवैध वित्तीय गतिविधियों में दुरुपयोग को रोका जा सके।
- इसके लिए एक समन्वित नीतिगत ढाँचे की आवश्यकता है, जो वित्तीय विनियमन, उपभोक्ता अधिकारों तथा तकनीकी प्रगति को एकीकृत करते हुए संतुलित एवं सुरक्षित डिजिटल परिसंपत्ति पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित करे।
स्रोत: TH