भारत के चिप उद्योग का भविष्य

पाठ्यक्रम : जीएस- 3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था एवं आधारभूत संरचना  

संदर्भ 

  • हाल ही में नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने “भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य” शीर्षक से एक प्रतिवेदन जारी किया, जिसमें भारत में स्वदेशी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम  के निर्माण से जुड़ी संभावनाओं और चुनौतियों को रेखांकित किया गया है।

सेमीकंडक्टर क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?

  • सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रीढ़ हैं। इनका उपयोग स्मार्टफोन और लैपटॉप, विद्युत वाहन एवं दूरसंचार प्रणालियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता अवसंरचना तथा रक्षा एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में होता है।
  • वर्तमान में भारत अपनी लगभग सभी सेमीकंडक्टर आवश्यकताओं का आयात करता है, जिससे अर्थव्यवस्था वैश्विक व्यवधानों के प्रति संवेदनशील बन जाती है।

भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की वर्तमान स्थिति

  • भारत के पास वर्तमान में पूर्ण रूप से कार्यरत सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र नहीं है। गुजरात के धोलेरा में स्थापित होने वाला पहला निर्माण संयंत्र वर्ष 2028 तक कार्यशील हो सकता है।
  • वर्तमान में लगभग 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाएँ विभिन्न विकास चरणों में हैं।
  • भारत अभी भी घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में प्रयुक्त अधिकांश चिपों का आयात करता है।
  • ताइवान के आसपास के भू-राजनीतिक तनावों ने सीमित क्षेत्रों में केंद्रित चिप उत्पादन से जुड़े जोखिमों को उजागर किया है।
  • नीति आयोग की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि रक्षा प्रणालियों के लिए आयातित चिपों पर निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर सकती है।

भारत के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ

लंबी स्थापना अवधि

  • सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र विश्व की सबसे जटिल औद्योगिक इकाइयों में से हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, किसी संयंत्र को उत्पादन शुरू करने में 4–5 वर्ष लगते हैं।
  • उत्पादन गुणवत्ता के अनुकूलन और विश्वसनीयता परीक्षण में अतिरिक्त समय लगता है।
  • इसलिए व्यावसायिक लाभप्रदता कई वर्षों बाद ही प्राप्त होती है।

विशाल पूंजीगत आवश्यकता

  • चिप निर्माण के लिए अत्यधिक निवेश की आवश्यकता होती है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, अगले दशक में भारत को लगभग 45–60 अरब अमेरिकी डॉलर का सार्वजनिक व्यय करना पड़ सकता है।
  • इससे वित्तीय स्थिरता, अनुदानों के कुशल उपयोग तथा निवेशकों के विश्वास एवं परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
  • यह रिपोर्ट आगामी इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के अंतर्गत लक्षित तथा व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य निवेशों की अनुशंसा करती है।

तकनीकी निर्भरता: 

  • भारत के पास उन्नत प्रकाश-अंकन प्रौद्योगिकी(Advanced lithography technology) , उच्च-शुद्धतायुक्त  सेमीकंडक्टर मैटेरियल तथा विशिष्ट विनिर्माण उपकरणों का अभाव है।
  • इन अधिकांश प्रौद्योगिकियों पर विश्व के कुछ ही देशों और कंपनियों का नियंत्रण है।

कुशल मानव संसाधन की कमी: 

  • सेमीकंडक्टर के निर्माण के लिए अत्यधिक विशेषज्ञ अभियंताओं और तकनीशियनों की आवश्यकता होती है।
  • ऐसे मानव संसाधन के निर्माण हेतु दीर्घकालिक प्रशिक्षण, उन्नत अनुसंधान संस्थान तथा उद्योग–शिक्षा संस्थान सहयोग आवश्यक है।
  • यह रिपोर्ट अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा निर्माण में निरंतर निवेश की आवश्यकता पर बल देती है।

भारत का सेमीकंडक्टर मिशन 

  • भारत ने सेमीकंडक्टर के रणनीतिक महत्त्व को ध्यान में रखते हुए 76,000 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन प्रारम्भ किया। 

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की प्रमुख विशेषताएँ

1.निर्माण इकाइयों के लिए वित्तीय सहायता

  • सरकार सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्रों के लिए 50 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान प्रदान करती है।
  • कई राज्य सरकारें भूमि, विद्युत तथा आधारभूत संरचना जैसी अतिरिक्त प्रोत्साहन सुविधाएँ भी उपलब्ध करा रही हैं।

2. पैकेजिंग और परीक्षण के लिए प्रोत्साहन

  • भारत ने सेमीकंडक्टर के पैकेजिंग, संयोजन तथा परीक्षण सुविधाओं को बढ़ावा दिया है।
  • ये गतिविधियाँ निर्माण की तुलना में कम पूंजी-प्रधान हैं और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से शीघ्र जोड़ सकती हैं।

3. प्रतिभा और डिज़ाइन इकोसिस्टम 

  • यह मिशन छात्रों और विश्वविद्यालयों के लिए सेमीकंडक्टर डिज़ाइन उपकरणों की उपलब्धता तथा चिप डिज़ाइन में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करता है।
  • यह सेमीकंडक्टर डिज़ाइन सेवाओं में भारत की मौजूदा क्षमता को और मजबूत बनाता है।

रिपोर्ट द्वारा सुझाया गया रणनीतिक परिवर्तन

1.परिपक्व और रणनीतिक प्रौद्योगिकी पर ध्यान

  • उक्त रिपोर्ट अत्याधुनिक (3–7 नैनोमीटर) चिपों में तत्काल प्रतिस्पर्धा करने के बजाय परिपक्व सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी, रणनीतिक एवं रक्षा-उन्मुख चिपों तथा कटिंग एज चिप्स पर ध्यान केंद्रित करने की सिफारिश करती है।
  • यह दृष्टिकोण अधिक व्यावहारिक और आर्थिक रूप से व्यवहार्य माना गया है।

2. पैकेजिंग को मुख्य शक्ति बनाना

  • उक्त रिपोर्ट सेमीकंडक्टर की पैकेजिंग को गौण गतिविधि नहीं, बल्कि उत्पादन का एक प्रमुख स्तंभ मानती है।

भारत के लिए इसके लाभ:

  • कम पूंजीगत आवश्यकता
  • तीव्र विस्तार की क्षमता
  • रोजगार सृजन
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बेहतर एकीकरण
  • यह विनिर्माण और सेवाओं में भारत की तुलनात्मक शक्तियों के अनुरूप है।

3. स्वदेशी अनुसंधान क्षमता का निर्माण

  • रिपोर्ट स्वदेशी चिप डिज़ाइन क्षमता, पदार्थ विज्ञान अनुसंधान तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग पर बल देती है।
  • भारत की सेमीकंडक्टर डिज़ाइन सेवाओं में पहले से मजबूत उपस्थिति है। भारत के लिए चुनौती सर्विस-लेड मॉडल से आगे बढ़कर स्वदेशी बौद्धिक संपदा (IP) के निर्माण की है।

4. भू-राजनीति और विश्वसनीय साझेदारी

  • सेमीकंडक्टर क्षेत्र वैश्विक भू-राजनीति से गहराई से जुड़ा हुआ है।
  • रिपोर्ट ने प्रौद्योगिकी उपलब्धता, उपकरण सेवा तथा आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ और दक्षिण कोरिया को विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बताया है।
  • यह अप्रत्यक्ष रूप से सेमीकंडक्टर निर्माण में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंताओं को भी दर्शाता है।
  • भारत के लिए सेमीकंडक्टर कूटनीति रणनीतिक और आर्थिक नीति का महत्त्वपूर्ण घटक बनती जा रही है।

निष्कर्ष एवं आगे की राह

  • एक सफल सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम आयात निर्भरता को कम कर सकता है, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ बना सकता है, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा दे सकता है, उच्च कौशलयुक्त रोजगार उत्पन्न कर सकता है तथा भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की आकांक्षाओं को समर्थन दे सकता है।
  • यह मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत तथा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना जैसी पहलों का पूरक है।
  • भारत संपूर्ण वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला की त्वरित प्रतिकृति बनाने के बजाय पैकेजिंग, परिपक्व प्रौद्योगिकी और चिप डिज़ाइन जैसी चयनित शक्तियों पर आधारित संतुलित रणनीति अपना रहा है।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न] भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाएँ आर्थिक आकांक्षाओं जितनी ही रणनीतिक आवश्यकताओं से भी प्रेरित हैं। टिप्पणी कीजिए।

Source: TH

 

Other News

पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध संदर्भ ईरान में जारी संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में उत्पन्न व्यवधानों ने ऊर्जा सुरक्षा, सामुद्रिक संकरे मार्गों तथा भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की सामरिक प्रासंगिकता को लेकर वैश्विक चिंताओं को पुनर्जीवित कर दिया है। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) के बारे में इसका औपचारिक शुभारंभ 2023...
Read More

पाठ्यक्रम: राजव्यवस्था एवं शासन; स्थानीय स्वशासन संदर्भ हाल ही में नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च (NBER) द्वारा लगभग 12 लाख वार्ड सदस्यों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाने मात्र से शासन-प्रदर्शन या कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में उल्लेखनीय सुधार नहीं...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/कृषि; अर्थव्यवस्था संदर्भ  हाल ही में, भारत के विभिन्न राज्यों ने विभिन्न गैर-सब्सिडी युक्त विशेष उर्वरकों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे भारत के उर्वरक क्षेत्र में नीतिगत सामंजस्य को लेकर प्रश्न उठे हैं। यह स्थिति तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब भारत के प्रधानमंत्री ने सतत...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ एक दशक से अधिक समय पश्चात, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 2022-23 और 2023-24 के उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण (CES) जारी किए, जिससे भारत में गरीबी के आकलन, गरीबी रेखा की पद्धति तथा वास्तविक वंचना की सीमा पर पुनः परिचर्चा प्रारम्भ हो गई। भारत में निर्धनता...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध संदर्भ ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग की भारत यात्रा, क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए, ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) पर चर्चाओं को पुनर्जीवित किया है। भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के बारे में भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध राष्ट्रमंडल, लोकतांत्रिक मूल्यों, क्रिकेट कूटनीति एवं जन-से-जन...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ 16वें वित्त आयोग (FC) की सिफारिशों से राज्यों की राजकोषीय स्वायत्तता, संसाधनों के वितरण में समानता एवं दक्षता, तथा परिसीमन के पश्चात उत्पन्न राजनीतिक एवं जनसांख्यिकीय प्रभावों को लेकर परिचर्चा शुरू हो गई है। भारत में वित्त आयोग एवं राजकोषीय संघवाद वित्त आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद...
Read More
scroll to top