पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग की भारत यात्रा, क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए, ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) पर चर्चाओं को पुनर्जीवित किया है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के बारे में
- भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध राष्ट्रमंडल, लोकतांत्रिक मूल्यों, क्रिकेट कूटनीति एवं जन-से-जन संपर्कों पर आधारित हैं।
- हालाँकि, दशकों तक शीत युद्ध के ध्रुवीकरण और भिन्न रणनीतिक प्राथमिकताओं के कारण द्विपक्षीय सहभागिता सीमित रही।
- 2000 के दशक की शुरुआत से संबंधों में उल्लेखनीय सुधार हुआ, जिसका कारण भारत का आर्थिक उदारीकरण, इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक अभिसरण, चीन की आक्रामकता को लेकर साझा चिंताएँ, और क्वाड समूह के अंतर्गत बढ़ता सहयोग रहा।
- एक बड़ा प्रगति-चरण आया:
- नागरिक परमाणु समझौता (2014) – भारत को यूरेनियम निर्यात की अनुमति
- व्यापक रणनीतिक साझेदारी (2020)
- आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता (ECTA), 2022
- वर्तमान में व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) पर वार्ता जारी है।
वर्तमान स्थिति
- व्यापार एवं आर्थिक संबंध: द्विपक्षीय माल व्यापार FY21 के $12.2 बिलियन से FY25 में $24.1 बिलियन तक बढ़ा (ECTA के पश्चात)।
- सेवाओं का व्यापार $10 बिलियन से अधिक हो गया।
- ECTA के अंतर्गत ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय निर्यात को लगभग 100% बाज़ार पहुँच प्रदान की।
- भारत ने लगभग 70% शुल्क रियायतें दीं, जो कुल व्यापार मूल्य का लगभग 91% है।
- निवेश संबंध: ऑस्ट्रेलिया में भारतीय निवेश लगभग $32 बिलियन है।
- भारत में ऑस्ट्रेलियाई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लगभग $18 बिलियन है।
- रणनीतिक एवं रक्षा सहयोग: दोनों देश QUAD, इंडो-पैसिफिक आर्थिक ढाँचे (IPEF), और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के सदस्य हैं।
- रक्षा सहयोग में AUSINDEX नौसैनिक अभ्यास और समुद्री क्षेत्र जागरूकता शामिल है।
- लॉजिस्टिक्स समर्थन समझौता भी है।
- शिक्षा एवं प्रवासी समुदाय: भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में सबसे बड़े विदेशी छात्र समूहों में से एक हैं।
- शिक्षा ऑस्ट्रेलिया के सेवाओं के निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के प्रमुख आयाम
- व्यापार एवं आर्थिक सहयोग: ECTA ने द्विपक्षीय व्यापार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।
- CECA का उद्देश्य बाज़ार पहुँच का विस्तार, निवेश प्रवाह को प्रोत्साहन, गैर-शुल्क बाधाओं को कम करना, और आपूर्ति शृंखला को सुदृढ़ बनाना है।
- भारत ऑस्ट्रेलिया को एक विश्वसनीय इंडो-पैसिफिक साझेदार, महत्वपूर्ण खनिजों का स्रोत, और प्रौद्योगिकी एवं स्वच्छ ऊर्जा सहयोग के प्रमुख माध्यम के रूप में देखता है।
- रणनीतिक एवं इंडो-पैसिफिक सहयोग: दोनों देश मुक्त, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक, नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था एवं नौवहन की स्वतंत्रता का समर्थन करते हैं।
- सहयोग क्वाड पहलों, साइबर सुरक्षा सहयोग, और आतंकवाद-रोधी प्रयासों के माध्यम से सुदृढ़ हुआ है।
- स्वच्छ ऊर्जा एवं महत्वपूर्ण खनिज: ऑस्ट्रेलिया के पास लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों का विशाल भंडार है।
- ये भारत की ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रिक वाहन पारिस्थितिकी तंत्र और नवीकरणीय ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
- दोनों देश हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा तथा आपूर्ति शृंखलाओं के सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में निरंतर सहयोग को विस्तार दे रहे हैं।
- कृषि एवं खाद्य सुरक्षा: कृषि CECA वार्ताओं का सबसे संवेदनशील क्षेत्र है।
- भारत ने परंपरागत रूप से सभी प्रमुख मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) में कमजोर कृषि क्षेत्रों की रक्षा की है।
- भारत की चिंताएँ: छोटे एवं विखंडित भू-खण्ड
- मानसून पर निर्भरता
- लाखों किसानों की आजीविका सुरक्षा
- खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताएँ
- ऑस्ट्रेलिया की रुचियाँ: गेहूँ, डेयरी उत्पाद, दालें और कृषि वस्तुओं के लिए अधिक बाज़ार पहुँच प्राप्त करना।
मुख्य मुद्दे और चिंताएँ
- व्यापार असंतुलन: ऑस्ट्रेलियाई निर्यात द्विपक्षीय माल व्यापार का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है, जिससे ECTA से असमान लाभ और भारतीय निर्यात के सीमित विविधीकरण को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
- कृषि संबंधी संवेदनशीलताएँ: भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई कृषि संरचना में अत्यधिक अंतर है।
- भारत: औसत खेत का आकार 0.73 हेक्टेयर;
- कृषि आधी से अधिक जनसंख्या का आधार;
- आजीविका-आधारित कृषि।
- ऑस्ट्रेलिया: औसत खेत का आकार 1,400 हेक्टेयर से अधिक;
- निर्यात-उन्मुख क्षेत्र;
- औद्योगिक पैमाने की खेती।
- बाज़ार पहुँच की माँग: ऑस्ट्रेलिया CECA के अंतर्गत बाज़ार पहुँच में समानता चाहता है, विशेषकर कृषि, डेयरी और कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्रों में।
- भारत राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों के कारण सतर्क बना हुआ है।
- गैर-शुल्क एवं नियामक बाधाएँ: जैव-सुरक्षा मानदंड, पादप-स्वास्थ्य मानक और प्रमाणन आवश्यकताओं से संबंधित मुद्दे बने हुए हैं।
- भारतीय कृषि निर्यात प्रायः विकसित बाज़ारों में नियामक बाधाओं का सामना करते हैं।
- भारत में सीमित ऑस्ट्रेलियाई निवेश: बढ़ते व्यापार के बावजूद भारत में ऑस्ट्रेलियाई निवेश अपेक्षाकृत कम है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय निवेश अधिक है।
आगे की राह: भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को सुदृढ़ करना
- बाज़ार पहुँच से पूरकता की ओर परिवर्तन: केवल शुल्क कटौती पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय CECA को प्रौद्योगिकी साझाकरण, निवेश साझेदारी और आपूर्ति शृंखला एकीकरण को प्रोत्साहन देना चाहिए।
- कृषि सहयोग शुल्क से परे: दोनों देशों को मानकों की पारस्परिक मान्यता विकसित करनी चाहिए, डिजिटल प्रमाणन प्रणालियों का विस्तार करना चाहिए, और क्वारंटीन सहयोग को सुदृढ़ करना चाहिए।
- इससे बिना कमजोर किसानों को हानि पहुँचाए, कृषि व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा ।
- कृषि-प्रौद्योगिकी एवं अवसंरचना निवेश को प्रोत्साहन: ऑस्ट्रेलिया उन्नत कृषि तकनीक, कोल्ड-चेन अवसंरचना, जल प्रबंधन प्रणाली और जलवायु-अनुकूल कृषि के माध्यम से योगदान दे सकता है।
- “इंडिया-ऑस्ट्रेलिया स्मार्ट फार्म नेटवर्क” जैसी पहलें सकारात्मक कदम हैं।
- महत्वपूर्ण खनिज एवं ऊर्जा में सहयोग का विस्तार: लिथियम आपूर्ति शृंखला, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन में दीर्घकालिक साझेदारी दोनों देशों की आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ कर सकती है।
- जन-से-जन एवं शैक्षिक संबंधों को प्रोत्साहन: विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और कौशल विकास केंद्रों के बीच अधिक सहयोग सामाजिक एवं आर्थिक एकीकरण को सुदृढ़ कर सकता है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न]: प्रस्तावित भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (CECA) में निहित अवसरों एवं चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। दोनों देश अपने-अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए ‘व्यापार एवं विश्वास की बाधा’ को किस प्रकार समाप्त कर सकते हैं? |
स्रोत: TH
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