पाठ्यक्रम: जीएस-2/ अंतरराष्ट्रीय संबंध
सन्दर्भ
- हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने सेशेल्स के स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय दिवस समारोह के अवसर पर माहे के विक्टोरिया में मॉरीशस के अपने समकक्ष से भेंट की।
- दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, व्यापार, संपर्क-सुविधा तथा जन-से-जन संबंधों में सहयोग को और सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत–मॉरीशस संबंध
भारत और मॉरीशस के बीच अत्यंत घनिष्ठ संबंध निम्नलिखित आधारों पर स्थापित हैं—
- साझा इतिहास एवं सभ्यतागत संबंध;
- भारतीय प्रवासी समुदाय का जुड़ाव;
- हिन्द महासागर में समुद्री एवं सामरिक अभिसरण;
- विकास साझेदारी;
- साझा लोकतांत्रिक मूल्य।
- क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (सागर) की भारत की परिकल्पना तथा पड़ोसी प्रथम नीति में मॉरीशस का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- यूरोपीय उपनिवेशीकरण से पूर्व मॉरीशस निर्जन था। 1834 में दास-प्रथा के उन्मूलन के बाद बड़ी संख्या में भारतीय अनुबंधित श्रमिकों के रूप में वहाँ गए।
- वर्तमान में मॉरीशस की लगभग दो-तिहाई जनसंख्या भारतीय मूल की है, जिससे भारतीय प्रवासी समुदाय दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख आधार बन गया है।
- 1968 में मॉरीशस की स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित किए गए।
मॉरिशस गणराज्य
- यह हिंद महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है, जो अफ्रीका के दक्षिण-पूर्वी तट से लगभग 2,000 किलोमीटर दूर है।
- राजधानी:पोर्ट लुईस (Port Louis)

भारत–मॉरीशस संबंधों के प्रमुख स्तंभ
- राजनीतिक संबंध: भारत और मॉरीशस के बीच नियमित रूप से उच्च-स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान होता रहता है।
- हाल ही में दोनों पक्षों ने विकास साझेदारी का विस्तार, समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करने, हिन्द महासागर में क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने तथा आर्थिक सहभागिता को गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
सामरिक एवं समुद्री सहयोग:
समुद्री सुरक्षा:
- मॉरीशस के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र की संयुक्त निगरानी।
- भारतीय नौसेना द्वारा जलसर्वेक्षण।
- तटीय राडार प्रणाली की स्थापना।
- समुद्री क्षेत्र संबंधी जागरूकता हेतु सूचनाओं का आदान-प्रदान।
रक्षा सहयोग:
- भारत, मॉरीशस के रक्षा कर्मियों के प्रशिक्षण, रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, भारतीय सैन्य सलाहकारों की तैनाती तथा संयुक्त सैन्य अभ्यास एवं संयुक्त गश्त के माध्यम से सहयोग प्रदान करता है।
सागर सिद्धांत:
- मॉरीशस, भारत की सभी के लिए क्षेत्र में सुरक्षा और विकास (सागर) की परिकल्पना, हिन्द-प्रशांत महासागर पहल तथा महासागर दृष्टि का प्रमुख आधार है।
आर्थिक एवं वाणिज्यिक संबंध
- द्विपक्षीय व्यापार (वित्तीय वर्ष 2024–25): 88.725 करोड़ अमेरिकी डॉलर (कुल व्यापार)
- भारत का मॉरीशस को निर्यात: 67.634 करोड़ अमेरिकी डॉलर
- मॉरीशस का भारत को निर्यात: 21.091 करोड़ अमेरिकी डॉलर
- वर्ष 2005–06 में 20.676 करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024–25 में 88.725 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया, अर्थात पिछले 17 वर्षों में 329% की वृद्धि।
- व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौता(CECPA): इस पर 2021 में हस्ताक्षर किए गए। यह किसी अफ्रीकी देश के साथ भारत का पहला व्यापार समझौता है। इसका उद्देश्य वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार का उदारीकरण,निवेश को बढ़ावा देना,वित्तीय सेवाओं का विस्तार,बाज़ार तक अधिक पहुँच सुनिश्चित करना आदि है।
- वित्तीय एवं निवेश संबंध: ऐतिहासिक रूप से मॉरीशस भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रमुख स्रोत रहा है।
- इसके प्रमुख कारण अनुकूल कर व्यवस्था तथा दोहरे कराधान से बचाव समझौता (Double Taxation Avoidance Agreement -DTAA) रहे हैं।
- 2016 में इस समझौते में संशोधन का उद्देश्य संधि के अनुचित लाभ, धन की पुनर्प्रविष्टि तथा कर चोरी पर रोक लगाना था।
क्या आप जानते हैं ट्रीटी शॉपिंग (Treaty Shopping)?
- इसका आशय सामान्यतः ऐसी स्थिति से है, जिसमें कोई व्यक्ति, जो संबंधित अधिकार-क्षेत्रों में से किसी का निवासी नहीं है, जटिल संरचनाओं एवं व्यवस्थाओं के माध्यम से उन दोनों अधिकार-क्षेत्रों के बीच हुए कर समझौते के लाभ अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त करने का प्रयास करता है।
- विकास साझेदारी:
- मेट्रो एक्सप्रेस परियोजना: मॉरीशस में भारत की प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजना, जिसने शहरी आवागमन में उल्लेखनीय सुधार किया।
- नया उच्चतम न्यायालय भवन: भारतीय अनुदान सहायता से निर्मित, जो लोकतांत्रिक सहयोग का प्रतीक है।
- कान-नाक-गला चिकित्सालय(ENT Hospitals): भारतीय सहयोग से निर्मित, जिसने स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ किया।
- सामाजिक आवास परियोजनाएँ: शिक्षा, स्वास्थ्य, सामुदायिक अवसंरचना तथा खेल जैसे क्षेत्रों में अनेक लघु परियोजनाएँ कार्यान्वित की गई हैं।
अन्य प्रमुख परियोजनाएँ:
- लोक सेवा महाविद्यालय,
- न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला,
- डिजिटल एवं सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी संबंधी पहलें।
सांस्कृतिक एवं प्रवासी संबंध
प्रवासी समुदाय:
- लगभग 12 लाख की जनसंख्या वाले इस द्वीप राष्ट्र में लगभग 70% लोग भारतीय मूल के हैं।
- शेष जनसंख्या में लगभग 28% क्रियोल, 3% चीनी मूल तथा 1% फ़्रांसीसी मूल के लोग हैं।
साझा सांस्कृतिक परंपराएँ:
- हिन्दी, भोजपुरी, तमिल, तेलुगु, मराठी तथा उर्दू व्यापक रूप से प्रचलित हैं।
- दीपावली, होली तथा महाशिवरात्रि जैसे भारतीय त्योहार राष्ट्रीय स्तर पर मनाए जाते हैं।
सांस्कृतिक संस्थान:
- महात्मा गांधी संस्थान,
- रवीन्द्रनाथ ठाकुर संस्थान,
- विश्व हिन्दी सचिवालय (मुख्यालय मॉरीशस में स्थित)।
क्षमता निर्माण एवं मानव संसाधन विकास:
- भारत छात्रवृत्तियों, लोक सेवकों के प्रशिक्षण, कौशल विकास कार्यक्रमों तथा डिजिटल शासन एवं लोक प्रशासन में सहयोग के माध्यम से मॉरीशस का समर्थन करता है।
बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग:
- दोनों देश संयुक्त राष्ट्र, हिन्द महासागर तटीय क्षेत्रीय संगठन, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन तथा वैश्विक दक्षिण से संबंधित पहलों में निकट सहयोग करते हैं।
- मॉरीशस ने अनेक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर निरंतर भारत का समर्थन किया है।
- भारत ने चागोस द्वीपसमूह पर मॉरीशस के क्षेत्रीय दावे का समर्थन किया है, जो यूनाइटेड किंगडम के साथ विवाद का विषय है।
भारत के लिए मॉरीशस का महत्व
सामरिक महत्व:
- पश्चिमी हिन्द महासागर का प्रवेशद्वार।
- समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।
- भारत की हिन्द-प्रशांत रणनीति का प्रमुख भाग।
आर्थिक महत्व:
- व्यापार एवं निवेश का प्रमुख केंद्र।
- अफ्रीकी बाज़ारों तक पहुँच का सेतु।
भूराजनीतिक महत्व:
- हिन्द महासागर में बाह्य शक्तियों के प्रभाव का संतुलन बनाने में सहायक।
- क्षेत्र में सुरक्षा प्रदाता के रूप में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है।
द्विपक्षीय संबंधों की चुनौतियाँ
- बाह्य शक्तियों, विशेषकर चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा।
- सामरिक परियोजनाओं एवं संप्रभुता से जुड़े मुद्दे।
- व्यापार में विविधीकरण की आवश्यकता।
- वित्तीय सहयोग से संबंधित नियामकीय चुनौतियाँ।
- जलवायु परिवर्तन के प्रति मॉरीशस की बढ़ती संवेदनशीलता।
आगे की राह
- समुद्री एवं रक्षा सहयोग को और गहरा करने, व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन, नीली अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाने, डिजिटल एवं वित्तीय प्रौद्योगिकी साझेदारी को सुदृढ़ करने, नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग का विस्तार करने, जन-से-जन तथा शैक्षिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और आधारभूत संरचना परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
स्रोत: DD News
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