‘फेक पेटेंट’ का काला बाज़ार

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सन्दर्भ

  • ‘फेक पेटेंट’ की एक चिंताजनक नई प्रवृत्ति सामने आई है, जिसमें शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी कुछ कंपनियाँ यूनाइटेड किंगडम में पंजीकृत हजारों पेटेंट भारत तथा अन्य देशों के शिक्षाविदों को बेच रही हैं। इससे अनुसंधान की सत्यनिष्ठा से जुड़े विशेषज्ञों के बीच गंभीर चिंता उत्पन्न हुई है।

परिचय

  • कुछ कंपनियाँ भारतीय शिक्षाविदों को यूके  डिज़ाइन रजिस्ट्रेशन बेचती हैं, ताकि संस्थागत रैंकिंग और व्यक्तिगत सीवी(CV) को कृत्रिम रूप से बेहतर दिखाया जा सके।
  • इन पंजीकरणों को प्रायः 11 दिनों में नवीनता की जाँच किए बिना स्वीकृति मिल जाती है। मौलिक अनुसंधान या वास्तविक नमूने के अभाव के बावजूद इन्हें भ्रामक रूप से अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

बौद्धिक संपदा अधिकार 

  • बौद्धिक संपदा को सामान्यतः ‘मस्तिष्क की उपज’ के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  • यह ऐसी संपत्ति है, जो औद्योगिक, वैज्ञानिक, साहित्यिक अथवा कलात्मक क्षेत्रों में मानवीय बुद्धि की सृजनात्मक गतिविधियों से उत्पन्न होती है।
  • बौद्धिक संपदा अधिकार(IPR) वह विधिक रूप से प्रवर्तनीय विशिष्ट अधिकार है, जो बौद्धिक संपदा के स्वामी को एक सीमित अवधि के लिए प्रदान किया जाता है।
  • बौद्धिक संपदा अधिकार सृजनात्मकता एवं मानवीय प्रयासों को प्रोत्साहित करते हैं, जो मानव सभ्यता की प्रगति को गति प्रदान करते हैं।

बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रमुख प्रकार:

  • पेटेंट,कॉपीराइट,ट्रेडमार्क,इंडस्ट्रियल डिज़ाइन,भौगोलिक संकेतक,इंटीग्रेटेड सर्किट्स,
  • पादप किस्मों एवं कृषकों के अधिकारों का संरक्षण,अप्रकाशित सूचना/व्यापारिक गोपनीयता(Trade Secrets) का संरक्षण।

क्या भारतीय पेटेंट अन्य देशों में मान्य होता है? 

  • पेटेंट अधिकार प्रादेशिक अधिकार होते हैं, अर्थात् वे केवल उसी देश की सीमा के भीतर मान्य होते हैं, जिसने पेटेंट प्रदान किया है।
  • इसलिए, भारत सरकार द्वारा प्रदान किया गया भारतीय पेटेंट केवल भारत में ही मान्य होता है।

पेटेंट कॉपरेशन ट्रीटी (PCT):

  • विभिन्न देशों के पेटेंट कानून अलग-अलग होते हैं और “विश्व पेटेंट” अथवा “अंतरराष्ट्रीय पेटेंट” जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। तथापि, एक अंतरराष्ट्रीय आवेदन प्रणाली है, जिसे पेटेंट सहयोग संधि प्रणाली कहा जाता है।
  • जब इस संधि के अंतर्गत आवेदन किया जाता है, तो सदस्य देश का कोई आविष्कारक एक साथ सभी सदस्य देशों में अपने आविष्कार के लिए प्राथमिकता अधिकार प्राप्त कर सकता है।
  • भारत 1998 में इस संधि का सदस्य बना।
  • इस संधि से संबंधित सभी गतिविधियों का समन्वय विश्व बौद्धिक संपदा संगठन द्वारा किया जाता है, जिसका मुख्यालय जिनेवा में स्थित है।

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) 

  • यह संयुक्त राष्ट्र की एक स्व-वित्तपोषित संस्था है, जो विश्वभर के नवप्रवर्तकों एवं सृजनकर्ताओं की सेवा करते हुए यह सुनिश्चित करती है कि उनके विचार सुरक्षित रूप से बाज़ार तक पहुँचें तथा लोगों के जीवन को बेहतर बनाएँ।

इतिहास:

  • इसकी स्थापना 1967 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन अभिसमय के माध्यम से हुई।

सदस्य:

  • इस संगठन के 194 सदस्य देश हैं, जिनमें भारत, इटली, इज़राइल, ऑस्ट्रिया, भूटान, ब्राज़ील, चीन, क्यूबा, मिस्र, पाकिस्तान, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा यूनाइटेड किंगडम जैसे विकसित एवं विकासशील देश शामिल हैं।
  • भारत 1975 में इसका सदस्य बना।
  • मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड।

भारत की बौद्धिक संपदा व्यवस्था की चुनौतियाँ

  • पेटेंट लंबित मामलों का बोझ:आवेदनों की संख्या बढ़ने के बावजूद पेटेंट की जाँच एवं स्वीकृति में विलंब एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
  • बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन:प्रवर्तन तंत्र की कमजोरी के कारण जाली वस्तुओं तथा अवैध प्रतिलिपियों का व्यापक प्रसार होता है।
  • पेटेंट का सीमित व्यावसायीकरण:उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच पर्याप्त सहयोग के अभाव में भारत में दाखिल अनेक पेटेंट व्यावसायिक उपयोग तक नहीं पहुँच पाते।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता:भारत में नवाचार का बड़ा हिस्सा विदेशी आवेदकों द्वारा संचालित है, जो घरेलू अनुसंधान एवं विकास में कम निवेश को दर्शाता है।

भारत की पहलें 

राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति, 2016:

  • यह सभी बौद्धिक संपदा अधिकारों को एकीकृत दृष्टिकोण के अंतर्गत लाने वाला व्यापक नीति दस्तावेज़ है, जिसके माध्यम से क्रियान्वयन, निगरानी तथा समीक्षा के लिए संस्थागत व्यवस्था स्थापित की गई है।
  • यह नीति आविष्कारकों, कलाकारों तथा सृजनकर्ताओं को बेहतर संरक्षण एवं प्रोत्साहन प्रदान कर नवाचार एवं सृजनशीलता को बढ़ावा देती है।

बौद्धिक संपदा अधिकार संवर्धन एवं प्रबंधन प्रकोष्ठ(CIPAM):

  • इसकी स्थापना राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति के क्रियान्वयन के समन्वय के लिए की गई है।

राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा जागरूकता मिशन(NIPAM):

  • यह प्रमुख कार्यक्रम शैक्षणिक संस्थानों में बौद्धिक संपदा के प्रति जागरूकता तथा बुनियादी प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए संचालित किया गया है।

नवप्रारंभ उद्यमों के बौद्धिक संपदा संरक्षण को सुगम बनाने की योजना(SIPP):

  • इसका उद्देश्य नवप्रारंभ उद्यमों को अपनी बौद्धिक संपदा परिसंपत्तियों के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना है।

अटल नवाचार मिशन(AIM):

  • इसकी स्थापना 2016 में नीति आयोग द्वारा भारत में नवाचार एवं उद्यमिता की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए की गई थी। इसके अंतर्गत निम्नलिखित चार प्रमुख कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं—
  • अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाएँ
  • अटल इन्क्यूबेशन सेंटर
  • अटल न्यूइण्डिया चैलेंजेज एण्ड अटल ग्रैंड चैलेंज
  • मेंटॉर इंडिया 

स्रोत: TH

 

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