गर्भाधान-पूर्व एवं प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम
पाठ्यक्रम: GS2 / स्वास्थ्य / शासन
संदर्भ
- पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड उपकरणों के बढ़ते उपयोग ने इस विषय पर परिचर्चा को शुरू कर दिया है कि गर्भाधान-पूर्व एवं प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 (PCPNDT Act) को अद्यतन किए जाने की आवश्यकता है, ताकि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित की जा सके तथा अल्ट्रासाउंड के अवैध लिंग निर्धारण हेतु दुरुपयोग को भी रोका जा सके।
PCPNDT अधिनियम क्या है?
- PCPNDT अधिनियम वर्ष 1994 में घटते बाल लिंगानुपात की समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रसव-पूर्व लिंग निर्धारण तथा कन्या भ्रूण के चयनात्मक गर्भपात पर रोक लगाने के उद्देश्य से लागू किया गया था।
- वर्ष 2003 में इस अधिनियम में संशोधन कर इसके दायरे का विस्तार किया गया, जिसके अंतर्गत केवल प्रसव-पूर्व निदान तकनीकों के विनियमन तक सीमित रहने के बजाय आधुनिक प्रजनन तकनीकों के माध्यम से गर्भाधान-पूर्व लिंग चयन को भी प्रतिबंधित कर दिया गया।
- दंड :
- प्रथम अपराध: अधिकतम 3 वर्ष का कारावास तथा ₹10,000 तक का जुर्माना।
- पुनरावृत्ति की स्थिति में: अधिकतम 5 वर्ष का कारावास तथा अधिक जुर्माने का प्रावधान।
- संबंधित चिकित्सा व्यवसायी का पंजीकरण राज्य चिकित्सा परिषद द्वारा निलंबित अथवा निरस्त किया जा सकता है।
अधिनियम के प्रमुख प्रावधान
- निदान तकनीकों का विनियमन : प्रसव-पूर्व निदान तकनीकों का उपयोग केवल निम्नलिखित रोगों अथवा विकृतियों की पहचान के लिए किया जा सकता है—
- आनुवंशिक अथवा जन्मजात असामान्यताएँ,
- गुणसूत्र संबंधी विकार ,
- उपापचयी विकार ,
- हीमोग्लोबिन संबंधी विकार ,
- लिंग-संबद्ध आनुवंशिक रोग।
- अनिवार्य पंजीकरण : प्रत्येक आनुवंशिक परामर्श केंद्र , आनुवंशिक प्रयोगशाला , आनुवंशिक क्लीनिक , अल्ट्रासाउंड क्लीनिक तथा इमेजिंग केंद्र का इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत होना अनिवार्य है।
- विज्ञापनों पर प्रतिबंध: लिंग निर्धारण अथवा लिंग चयन संबंधी सेवाओं के प्रचार-प्रसार से संबंधित किसी भी प्रकार के विज्ञापन पर पूर्ण प्रतिबंध है।
- अभिलेखों का रखरखाव: सभी पंजीकृत क्लीनिकों के लिए प्रत्येक प्रसव-पूर्व निदान प्रक्रिया का निर्धारित अभिलेख सुरक्षित रखना अनिवार्य है।
- अभिलेखों का उचित रखरखाव न करना भी अधिनियम के अंतर्गत एक दंडनीय उल्लंघन माना जाता है।
स्रोत: TH
एयर सुविधा 2.0 पोर्टल
पाठ्यक्रम: GS2 / स्वास्थ्य / शासन
संदर्भ
- नागरिक उड्डयन मंत्रालय तथा दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने एयर सुविधा 2.0 पोर्टल का शुभारंभ किया।
एयर सुविधा 2.0 पोर्टल
- यह यात्रियों के लिए विकसित एक उन्नत संपर्क-रहित स्वास्थ्य स्व-घोषणा पोर्टल है, जिसका उद्देश्य देश के प्रवेश बिंदुओं पर सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी को सुदृढ़ बनाना है।
- इस पोर्टल का शुभारंभ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) एवं युगांडा में इबोला/बुंडीबुग्यो वायरस रोग के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति घोषित किए जाने के बाद किया गया।
- स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से विकसित यह पोर्टल अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को आव्रजन प्रक्रिया से पूर्व अनिवार्य ऑनलाइन स्वास्थ्य स्व-घोषणा पत्र प्रस्तुत करने की सुविधा प्रदान करता है।
- इस घोषणा पत्र में यात्रियों को विगत 21 दिनों की यात्रा का विवरण, संभावित संक्रमण संपर्क तथा संबंधित लक्षणों की जानकारी देनी होती है।
- यह पोर्टल एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर, आप्रवासन ब्यूरो , एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) तथा राज्य निगरानी अधिकारियों के साथ वास्तविक समय में आँकड़े साझा करता है, जिससे जोखिम वाले यात्रियों की शीघ्र पहचान एवं आवश्यक चिकित्सीय कार्रवाई संभव हो पाती है।
बुंडीबुग्यो वायरस रोग क्या है?
- बुंडीबुग्यो वायरस रोग (BVD) एक दुर्लभ एवं संभावित रूप से घातक वायरल रक्तस्रावी ज्वर है।
- यह बुंडीबुग्यो वायरस, जो इबोला वायरस का एक प्रकार है, के कारण होता है।
- अब तक इस रोग के दो प्रमुख प्रकोप दर्ज किए गए हैं—
- युगांडा (2007) तथा
- कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (2012)।
- यह रोग संक्रमित अथवा मृत व्यक्ति के रक्त एवं शारीरिक द्रवों के संपर्क में आने से फैलता है।
- संक्रमित वस्तुओं तथा चमगादड़ एवं अन्य गैर-मानव प्राइमेट्स जैसे संक्रमित पशुओं के संपर्क से भी इसका संक्रमण फैल सकता है।
- इसके प्रमुख लक्षण हैं—
- बुखार,
- सिरदर्द,
- मांसपेशियों में दर्द,
- कमजोरी,
- दस्त,
- उल्टी,
- पेट दर्द,
- तथा रोग की उन्नत अवस्था में अस्पष्ट रक्तस्राव या शरीर पर नीले धब्बे।
- वर्तमान में BVD की रोकथाम अथवा उपचार हेतु कोई स्वीकृत टीका अथवा विशिष्ट औषधि उपलब्ध नहीं है।
स्रोत: PIB
बांदीपुर एवं नागरहोल बाघ अभयारण्य
पाठ्यक्रम: GS3 / पर्यावरण
संदर्भ
- कर्नाटक सरकार ने क्षेत्र में मानव-बाघ संघर्ष के कारण नवंबर 2025 से स्थगित जंगल सफारी को बांदीपुर एवं नागरहोल बाघ अभयारण्यों में पूर्ण रूप से पुनः प्रारंभ करने की घोषणा की है।
बांदीपुर एवं नागरहोल बाघ अभयारण्य
- अवस्थिति: दोनों बाघ अभयारण्य कर्नाटक में स्थित हैं।
- ये नीलगिरि जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र का हिस्सा हैं, जो भारत का प्रथम जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है।

- प्रोजेक्ट टाइगर : बांदीपुर को वर्ष 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत अधिसूचित किए गए प्रथम नौ बाघ अभयारण्यों में शामिल किया गया था।
- नागरहोल को वर्ष 2003 में भारत के बाघ अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया।
- भूदृश्य : तमिलनाडु के मुदुमलाई बाघ अभयारण्य तथा केरल के वायनाड वन्यजीव अभयारण्य के साथ मिलकर ये विश्व के सबसे बड़े सतत संरक्षित वन परिदृश्यों में से एक का निर्माण करते हैं, जो बाघों एवं एशियाई हाथियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आवास है।
- नदी तंत्र : कबिनी जलाशय बांदीपुर एवं नागरहोल बाघ अभयारण्यों को उत्तर-पश्चिम दिशा में पृथक करता है।
- प्रमुख जीव-जंतु : बाघ,
- तेंदुआ,
- एशियाई जंगली कुत्ता (ढोल),
- स्लॉथ भालू,
- एशियाई हाथी,
- चार सींग वाला मृग,
- माउस डियर ,
- दक्षिण-पश्चिमी लंगूर आदि।
- प्रमुख वनस्पति : यहाँ मुख्यतः उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन, शुष्क पर्णपाती वन, झाड़ीदार वन तथा बाँस एवं सागौन के विस्तृत क्षेत्र पाए जाते हैं।
स्रोत: TH
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