भविष्य के लिए भारत के ऑटोमोबाइल कार्यबल का कौशल विकास 

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • ऑटोमोबाइल उत्पादन के विस्तार तथा कारखानों में विद्युत, इलेक्ट्रॉनिक और स्वचालित प्रौद्योगिकियों को अपनाए जाने के साथ, विनिर्माताओं के सामने ऐसे कुशल श्रमिकों की कमी की चुनौती उत्पन्न हो रही है, जिनके पास बदलते औद्योगिक कार्यस्थल की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल उपलब्ध हों।

ऑटोमोबाइल उद्योग में संक्रमण

  • विस्तार: वित्त वर्ष 2025 में लगभग 30–35 मिलियन इकाइयों से वार्षिक वाहन उत्पादन बढ़कर वर्ष 2030 तक 50–55 मिलियन इकाइयों तक पहुँच सकता है।
    • ऑटो-कंपोनेंट उद्योग का लक्ष्य वर्ष 2030 तक लगभग 200 बिलियन डॉलर का व्यवसाय प्राप्त करना है, जबकि वर्तमान में यह लगभग 86 बिलियन डॉलर है।
  • नई प्रौद्योगिकियाँ: कारखानों में इलेक्ट्रिक पावरट्रेन, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वचालन, कनेक्टेड प्रौद्योगिकियों तथा उन्नत विनिर्माण प्रणालियों को अपनाया जा रहा है।
  • कुशल कार्यबल की आवश्यकता: कंपनियों को अब विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, मेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स, बैटरी प्रणालियों तथा स्वचालित उपकरणों जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है।

कुशल कार्यबल की कमी

  • तकनीकी शिक्षा में अंतराल: राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (NCAER) के वर्ष 2025 के एक अध्ययन में ऑटोमोटिव क्षेत्र के श्रमिकों की तकनीकी शिक्षा में महत्वपूर्ण अंतराल पाया गया।
    • मोटर वाहनों के पुर्जों एवं सहायक उपकरणों के विनिर्माण में कार्यरत 57.3% श्रमिकों के पास कोई तकनीकी शिक्षा नहीं थी, जबकि 35.2% के पास इंजीनियरिंग या प्रौद्योगिकी में स्नातक स्तर से नीचे का डिप्लोमा या प्रमाणपत्र था।
    • वाहन विनिर्माण क्षेत्र में 53% श्रमिकों के पास कोई तकनीकी शिक्षा नहीं थी, जबकि 21.9% के पास इंजीनियरिंग या प्रौद्योगिकी में तकनीकी डिग्री तथा 16.6% के पास स्नातक स्तर से नीचे का डिप्लोमा या प्रमाणपत्र था।
    • वाहन मरम्मत एवं रखरखाव क्षेत्र में 93.3% श्रमिकों के पास कोई तकनीकी शिक्षा नहीं थी।
  • व्यावहारिक अनुभव का अभाव: एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि अनेक अभ्यर्थियों के पास उन्नत मशीनरी और डिजिटल प्रणालियों के साथ कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव नहीं था।
    • बैटरी प्रौद्योगिकी, मेक्ट्रॉनिक्स, स्वचालन और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में पाठ्यक्रमों की उपलब्धता अभी भी सीमित है। इसके साथ ही योग्य प्रशिक्षकों की भी कमी बनी हुई है।

सरकार की पहल

  • व्यावसायिक प्रशिक्षण:NAPS (राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना) 2.0 के अंतर्गत शिक्षुता प्रशिक्षण वास्तविक कार्य वातावरण में, भाग लेने वाले प्रतिष्ठानों में उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं का उपयोग करते हुए प्रदान किया जाता है। इससे प्रशिक्षुओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा उद्योग का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होता है।
    • NAPS 2.0 के अंतर्गत “ऑटोमोटिव(Automotive)” क्षेत्र में 8.93 लाख तथा अलग से वर्गीकृत “ऑटोमोबाइल(Automobile)” क्षेत्र में 99,244 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया गया है।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITIs): सरकार प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs (PM-SETU) योजना के माध्यम से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) के उन्नयन पर भी कार्य कर रही है।
  • PM-SETU योजना: इसका उद्देश्य हब-एंड-स्पोक मॉडल के अंतर्गत 1,000 सरकारी ITIs (200 हब और 800 स्पोक) का उन्नयन करना है। इसके अंतर्गत उभरते क्षेत्रों में उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने तथा पाँच वर्षों में 20 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • ITI नेटवर्क का विस्तार: ITIs की संख्या वर्ष 2014 में 9,642 से बढ़कर वर्ष 2026 में 13,856 हो गई है। वहीं प्रशिक्षण सीटों की क्षमता वर्ष 2014-15 में 17,42,986 से बढ़कर 20,07,580 हो गई है।
  • वर्ष 2026 में प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) ने बजाज ऑटो लिमिटेड के साथ Flexi-MoU पर हस्ताक्षर किए, जिसके अंतर्गत कंपनी की विनिर्माण सुविधाओं में उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
    • इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को व्यावहारिक अनुभव तथा उद्योग में प्रयुक्त प्रौद्योगिकियों से परिचित होने का अवसर प्रदान करना है।

निष्कर्ष

  • भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग अब प्रौद्योगिकी-आधारित चरण में प्रवेश कर रहा है, जहाँ कुशल कार्यबल की उपलब्धता उत्पादन क्षमता जितनी ही महत्वपूर्ण होगी।
  • यद्यपि NAPS 2.0, PM-SETU तथा उद्योग के साथ साझेदारियाँ व्यावसायिक प्रशिक्षण को सुदृढ़ कर रही हैं, फिर भी तकनीकी शिक्षा और व्यावहारिक अनुभव में बने हुए अंतराल को दूर करने के लिए उद्योग–शैक्षणिक संस्थानों के बीच अधिक सहयोग, पाठ्यक्रमों का आधुनिकीकरण तथा निरंतर कौशल उन्नयन आवश्यक है।
  • इस कौशल अंतराल को समाप्त करना भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र के विकास को अधिक उत्पादक, प्रतिस्पर्धी और रोजगारपरक बनाने के लिए आवश्यक है।

 स्रोत: TH

 

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