पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था; रोज़गार
संदर्भ
- भारत अपने आगामी रोजगार दशक में एक बड़े कार्यबल और बुनियादी ढाँचे, औपचारिकीकरण, कौशल विकास तथा उद्यमिता के क्षेत्र में सुदृढ़ आधार के साथ प्रवेश कर रहा है। अब चुनौती इस व्यापक कार्यबल को उत्पादक, औपचारिक, बेहतर वेतन वाले और समावेशी रोजगार में परिवर्तित करने की है।
भारत में रोजगार की स्थिति के बारे में
- विगत एक दशक के दौरान भारत के रोजगार परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं।
- RBI के KLEMS डेटाबेस के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2014-15 में रोजगार 47.15 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 64.33 करोड़ हो गया, अर्थात 17.18 करोड़ श्रमिकों की वृद्धि हुई।
- हालाँकि, केवल रोजगार की संख्या से उसकी गुणवत्ता का आकलन नहीं किया जा सकता। रोजगार के आगामी चरण में औपचारिकीकरण, वास्तविक मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, उत्पादकता, कार्य परिस्थितियों और करियर में प्रगति पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
- विकसित भारत@2047 के लिए कौशल विकास की पुनर्कल्पना (NITI Aayog रिपोर्ट) ने कौशल विकास की चुनौती के व्यापक स्तर को रेखांकित किया है। इसके अनुसार, लगभग 9 करोड़ युवा भारतीय न तो शिक्षा में थे, न रोजगार में और न ही प्रशिक्षण में (NEET), जिनमें लगभग 88% घरेलू कार्यों में संलग्न थे।
- ऐसे व्यक्तियों को स्वतः बेरोजगार नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन ये आँकड़े अप्रयुक्त मानव पूंजी, विशेष रूप से युवा महिलाओं के बीच, की पर्याप्त उपलब्धता को दर्शाते हैं।
रोजगार संकेतक
- बेरोजगारी दर (UER): बेरोजगारी दर श्रमबल में बेरोजगार व्यक्तियों के प्रतिशत को मापती है।
- इसकी गणना सक्रिय रूप से रोजगार की खोज कर रहे बेरोजगार व्यक्तियों की संख्या को कुल श्रमबल से विभाजित करके की जाती है।
- श्रमबल भागीदारी दर (LFPR): LFPR कार्यशील आयु की उस जनसंख्या के अनुपात को दर्शाती है, जो या तो रोजगार में है या सक्रिय रूप से रोजगार की खोज कर रही है।
- रोजगार दर (ER): रोजगार दर कार्यशील आयु की उस जनसंख्या के अनुपात को मापती है, जो रोजगार में है।
वर्तमान स्थिति एवं विगत दशक में वृद्धि की प्रवृत्तियाँ
- वित्तीय समावेशन, बुनियादी ढाँचे और उद्यमिता में सुधार के साथ-साथ रोजगार के अवसरों का भी विस्तार हुआ है।
- सामान्य स्थिति के आधार पर महिला श्रमबल भागीदारी दर (LFPR) वर्ष 2017-18 में 23.3% से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 41.7% हो गई।
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के अंतगर्त 1.64 करोड़ से अधिक अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित/उन्मुख किया गया है।
- वर्ष 2016 से अब तक 56.08 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को नियोजित किया गया है।
- मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप रोजगार के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभरे हैं और अप्रैल 2026 तक 23 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर चुके हैं।
- भारत का यूनिकॉर्न पारिस्थितिकी तंत्र वर्ष 2014 में केवल चार यूनिकॉर्न से बढ़कर 1 अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाली 120 से अधिक कंपनियों तक विस्तारित हो गया है।
- मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप में लगभग आधे टियर-II और टियर-III शहरों से आते हैं, जो भौगोलिक स्तर पर बढ़ते विविधीकरण को दर्शाता है।
- साथ ही, श्रम संबंधी आँकड़ों की सावधानीपूर्वक व्याख्या की जानी चाहिए। वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) विगत सात दिनों के दौरान की गतिविधियों को दर्शाती है, जबकि सामान्य स्थिति दीर्घकालिक वार्षिक रोजगार स्थिति को दर्शाती है।
- अतः मासिक, साप्ताहिक और वार्षिक संकेतक एक-दूसरे के पूरक हैं, न कि एक-दूसरे के स्थान पर प्रयुक्त किए जा सकने वाले संकेतक।
प्रमुख चिंताएँ एवं मुद्दे
- रोजगार की गुणवत्ता बनाम मात्रा: श्रमिकों की संख्या में वृद्धि का अर्थ स्वतः उत्पादक या पर्याप्त वेतन वाले रोजगार की उपलब्धता नहीं है।
- अनौपचारिक रोजगार, कम मजदूरी, अपर्याप्त सामाजिक सुरक्षा और अल्प-रोजगार अभी भी चिंता के विषय बने हुए हैं।
- शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी: पहली बार रोजगार बाजार में प्रवेश करने वाले युवा, विशेष रूप से स्नातक, प्रायः अपनी शैक्षणिक योग्यताओं और बाजार की आवश्यकताओं के बीच असंगति का सामना करते हैं।
- कौशल-असंगति और उद्योग जगत के अनुभव का अभाव रोजगार-योग्यता को सीमित करता है।
- महिला रोजगार: बढ़ती महिला LFPR के बावजूद, बिना वेतन वाला देखभाल संबंधी कार्य, सुरक्षा संबंधी चिंताएँ, आवागमन की बाधाएँ, सामाजिक मानदंड और उपयुक्त स्थानीय रोजगार के अवसरों की कमी महिलाओं की श्रमबल भागीदारी को सीमित करते हैं।
- कौशल–उद्योग असंगति: पारंपरिक कौशल विकास प्रणालियों को वास्तविक नियोक्ता मांग, अप्रेंटिसशिप तथा AI, इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित प्रौद्योगिकियों और उन्नत विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों के साथ सुदृढ़ रूप से जोड़ने की आवश्यकता है।
- सरकारी रोजगार की सीमित क्षमता: सार्वजनिक रोजगार महत्वपूर्ण बना हुआ है, लेकिन सरकार प्रत्येक वर्ष कार्यबल में प्रवेश करने वाले लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करने में सक्षम नहीं है।
- निजी उद्यमों और विस्तार योग्य MSMEs को रोजगार के प्रमुख इंजन के रूप में विकसित होना होगा।
संबंधित प्रयास एवं सुधार
- सरकारी पहलों ने महत्वपूर्ण आधार तैयार किए हैं:
- PMKVY — बाजारोन्मुख कौशल विकास के लिए।
- अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम — उद्योग जगत का अनुभव एवं कार्य-आधारित शिक्षण प्रदान करने के लिए।
- मुद्रा (MUDRA) एवं स्टैंड-अप इंडिया — उद्यमिता और ऋण तक पहुँच के लिए।
- जन धन योजना — वित्तीय समावेशन के लिए।
- स्टार्ट-अप इंडिया — नवाचार-आधारित उद्यमिता के लिए।
- स्वयं सहायता समूह (SHGs) — महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए।
- बुनियादी ढाँचा, स्वच्छता, स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन और नल के जल से संबंधित पहल — महिलाओं के अवैतनिक घरेलू श्रम एवं कठिन परिश्रम को कम करने के लिए।
आगे की राह: भारत का आगामी रोजगार दशक
- भारत को ‘रोजगार की मात्रा’ के ढाँचे से ‘रोजगार की गुणवत्ता’ के ढाँचे की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाने की आवश्यकता है:
- एक राष्ट्रीय रोजगार डैशबोर्ड तैयार किया जाए, जो औपचारिकीकरण, वास्तविक मजदूरी वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा कवरेज, कार्य किए गए घंटों, क्षेत्रवार उत्पादकता तथा निम्न-आय वाले रोजगार से स्थिर रोजगार की ओर संक्रमण की निगरानी करे।
- कौशल विकास को मांग-आधारित एवं उद्योग-संबद्ध बनाया जाए, जिसमें अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप और नियोक्ता द्वारा प्रमाणित परिणामों को केंद्रीय स्थान दिया जाए।
- आसान अनुपालन, ऋण, प्रौद्योगिकी और बाजार तक पहुँच के माध्यम से MSMEs एवं सूक्ष्म उद्यमों को विस्तार करने, औपचारिक रूप अपनाने और रोजगार सृजित करने में सक्षम बनाया जाए।
- किफायती बाल देखभाल, सुरक्षित परिवहन, कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास, लचीले औपचारिक रोजगार, डिजिटल पहुँच और घर के निकट रोजगार के अवसरों के माध्यम से महिला रोजगार को केंद्रीय नीतिगत उद्देश्य बनाया जाए।
- पारदर्शी रिक्ति-पूर्ति, परीक्षा की शुचिता और समयबद्ध परिणामों के माध्यम से सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जाए।
निष्कर्ष
- भारत ने विगत एक दशक में रोजगार के लिए एक विश्वसनीय आधार तैयार किया है। अब आगामी चुनौती अधिक व्यापक है: एक बड़े कार्यबल को उत्पादक करियर में परिवर्तित करना और जनसांख्यिकीय क्षमता को जनसांख्यिकीय लाभांश में बदलना।
- सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच एक सतत समन्वय भारत को अधिक श्रमिकों से बेहतर रोजगार, उच्च उत्पादकता और समावेशी समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता कर सकता है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न]: भारत के आगामी रोजगार दशक के समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियों का परीक्षण कीजिए तथा उत्पादक, औपचारिक, समावेशी एवं कौशल-आधारित रोजगार सुनिश्चित करने के उपाय सुझाइए। |
स्रोत: IE
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