पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था; विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के सेमीकंडक्टर अभिकल्पना (डिज़ाइन) एवं विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास हेतु 1,27,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सेमिकॉन 2.0 कार्यक्रम को स्वीकृति प्रदान की है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 1.0
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 1.0 इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत वर्ष 2021 में प्रारंभ किया गया एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले विनिर्माण का व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
- इस मिशन को 76,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन ढाँचे का समर्थन प्राप्त है, जिसके अंतर्गत सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर इकाइयों, असेंबली एवं परीक्षण इकाइयों तथा चिप डिज़ाइन के लिए 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- मिशन के अंतर्गत लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।
- इनमें सिलिकॉन फैब्रिकेशन इकाइयाँ, सिलिकॉन कार्बाइड फैब, उन्नत एवं मेमोरी पैकेजिंग सुविधाएँ तथा विशेषीकृत असेंबली एवं परीक्षण अवसंरचना शामिल हैं।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- इसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2026–27 में की गई थी।
- ISM 2.0 का मुख्य उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर उपकरणों एवं सामग्रियों का विनिर्माण, पूर्णतः भारतीय सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा का विकास तथा घरेलू एवं वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ बनाना है।

- सेमिकॉन 2.0 छह प्रमुख स्तंभों के माध्यम से भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करेगा—डिज़ाइन, मशीनें एवं सामग्री, अधिक फैब की स्थापना, ATMP–OSAT उद्योग का सुदृढ़ीकरण, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास।
सेमिकॉन 2.0 के प्रमुख स्तंभ
- प्रथम स्तंभ: लगभग 105 चिप डिज़ाइन स्टार्टअपों की उपलब्धियों के आधार पर चिप बौद्धिक संपदा , प्रणाली अभिकल्पना एवं नवाचार को प्रोत्साहित कर भारत की सेमीकंडक्टर डिज़ाइन क्षमता का विस्तार किया जाएगा।
- द्वितीय स्तंभ: सेमीकंडक्टर उपकरणों, सामग्रियों, रसायनों एवं गैसों के विनिर्माण तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहन देकर एक सुदृढ़ घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाएगा।
- तृतीय स्तंभ: अधिक से अधिक वैश्विक निर्माताओं को भारत में आकर्षित कर चिप निर्माण हेतु फैब स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे।
- इसके अंतर्गत सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्क्रीट कंपोनेंट फैब तथा डिस्प्ले फैब जैसी इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा।
- चतुर्थ स्तंभ: उन्नत असेंबली, परीक्षण, मार्किंग एवं पैकेजिंग (ATMP) तथा आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT) इकाइयों को प्रोत्साहित कर बैकएंड विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ बनाया जाएगा।
- पंचम स्तंभ: 28–110 नैनोमीटर (nm) प्रौद्योगिकी नोड्स से आगे बढ़ते हुए उन्नत प्रक्रिया नोड्स एवं आगामी पीढ़ी की सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों का विकास किया जाएगा।
- षष्ठम स्तंभ: वर्तमान में 315 विश्वविद्यालयों में नवीनतम इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (EDA) उपकरणों की सहायता से छात्रों को जटिल चिप डिज़ाइन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा लगभग 68,000 छात्र प्रशिक्षित किए जा चुके हैं।
- इस पहल का और विस्तार करते हुए महाविद्यालय स्तर पर प्रशिक्षण की गुणवत्ता एवं गंभीरता को अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
सेमीकंडक्टर रणनीतिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण हैं?
- डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार: सेमीकंडक्टर लगभग प्रत्येक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी का मूलभूत घटक हैं।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: सेमीकंडक्टर चिप रक्षा उपकरणों, निगरानी प्रणालियों, उपग्रहों, साइबर सुरक्षा अवसंरचना तथा सामरिक संचार नेटवर्क के लिए अनिवार्य हैं।
- औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता: जिन देशों के पास सुदृढ़ सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता है, वे तकनीकी नेतृत्व एवं औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय बढ़त प्राप्त कर रहे हैं।
- तकनीकी संप्रभुता: विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने तथा आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ बनाने के लिए घरेलू सेमीकंडक्टर उत्पादन अत्यंत आवश्यक है।

स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर एवं मूलभूत सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियाँ
- माइक्रोप्रोसेसर आधुनिक डिजिटल अवसंरचना की आधारभूत परत हैं, जो दूरसंचार, गतिशीलता, स्वास्थ्य सेवा, उद्योग, रक्षा एवं अंतरिक्ष सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपकरणों एवं प्रणालियों का संचालन करते हैं।
- भारत ने सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता के प्रमुख स्तंभ के रूप में उन्नत प्रोसेसर डिज़ाइन में संप्रभु क्षमताओं के विकास हेतु लक्षित निवेश किए हैं।
- इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि ध्रुव64 का विकास है, जो माइक्रोप्रोसेसर विकास कार्यक्रम (MDP) के अंतर्गत सी-डैक द्वारा विकसित पूर्णतः स्वदेशी 64-बिट माइक्रोप्रोसेसर है।
प्रमुख चुनौतियाँ
- उच्च पूंजीगत निवेश: सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन संयंत्रों की स्थापना के लिए कई अरब डॉलर के निवेश तथा दीर्घकालिक परियोजना अवधि की आवश्यकता होती है।
- प्रौद्योगिकी-प्रधान उद्योग: सेमीकंडक्टर विनिर्माण अत्यंत उन्नत एवं निरंतर विकसित होती प्रौद्योगिकियों पर आधारित उद्योग है।
- आयातित उपकरणों पर निर्भरता: भारत अभी भी उन्नत सेमीकंडक्टर विनिर्माण उपकरणों एवं विशेषीकृत मशीनरी के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है।
- अवसंरचनात्मक आवश्यकताएँ: सेमीकंडक्टर निर्माण हेतु निर्बाध विद्युत आपूर्ति, अति-शुद्ध जल तथा अत्यधिक विश्वसनीय लॉजिस्टिक अवसंरचना की आवश्यकता होती है।
- कौशल संबंधी अंतराल: इस उद्योग को सेमीकंडक्टर अभियांत्रिकी, फैब्रिकेशन प्रक्रियाओं एवं चिप डिज़ाइन में प्रशिक्षित उच्च दक्षता वाले विशेषज्ञ मानव संसाधन की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण से आगे बढ़कर उसके सुदृढ़ीकरण एवं वैश्विक एकीकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
- विनिर्माण, डिज़ाइन तथा उन्नत कौशल विकास को व्यापक समर्थन प्रदान करते हुए ISM 2.0 सेमीकंडक्टर को भारत की रणनीतिक राष्ट्रीय क्षमता के रूप में स्थापित करता है, जो आर्थिक लचीलापन, डिजिटल अवसंरचना तथा तकनीकी संप्रभुता को सुदृढ़ करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा।
स्रोत: AIR
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संक्षिप्त समाचार 15-07-2026
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