ट्रायल इन एब्सेंटिया (Trial in Absentia)
पाठ्यक्रम: GS2/ राजव्यवस्था
संदर्भ
पहलगाम आतंकवादी हमले से संबंधित मामले में जम्मू स्थित राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की विशेष न्यायालय द्वारा हाफिज़ सईद के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अंतर्गत ट्रायल इन एब्सेंटिया के प्रावधान पर विशेष ध्यान केंद्रित हुआ है।
ट्रायल इन एब्सेंटिया क्या है?
- ट्रायल इन एब्सेंटिया से आशय उस आपराधिक न्यायिक प्रक्रिया से है, जिसमें अभियुक्त की अनुपस्थिति में मुकदमे का संचालन किया जाता है।
- BNSS की धारा 356 के अनुसार, यदि उद्घोषित अपराधी विचारण से बचने के उद्देश्य से फरार हो गया हो तथा उसकी गिरफ्तारी की तत्काल कोई संभावना न हो, तो न्यायालय अभियुक्त की अनुपस्थिति को कार्यवाही के दौरान उपस्थित रहने के अधिकार के परित्याग के रूप में मान सकता है।
यह किन व्यक्तियों पर लागू होता है?
- यह केवल धारा 84 के अंतर्गत परिभाषित ‘उद्घोषित अपराधी (Proclaimed Offender)’ पर लागू होता है।
- BNSS की धारा 84(4) के अनुसार, यदि किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध उद्घोषणा जारी की गई हो, जिस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 अथवा किसी अन्य विधि के अंतर्गत 10 वर्ष या उससे अधिक के कारावास, आजीवन कारावास अथवा मृत्युदंड से दंडनीय अपराध का आरोप हो, और वह निर्धारित समय एवं स्थान पर उपस्थित न हो, तो न्यायालय आवश्यक जांच के उपरांत उसे उद्घोषित अपराधी घोषित कर सकता है।
धारा 356 के अंतर्गत प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय
- धारा 356 अभियुक्त की ट्रायल इन एब्सेंटिया प्रारंभ करने से पूर्व कई प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय निर्धारित करती है।
- इनमें कम-से-कम 30 दिनों के अंतराल पर लगातार दो गिरफ्तारी वारंट जारी करना शामिल है।
- अभियुक्त को न्यायालय में उपस्थित होने हेतु 30 दिनों का समय देते हुए स्थानीय अथवा राष्ट्रीय समाचार-पत्र में सूचना प्रकाशित की जाती है।
- इसके अतिरिक्त, सूचना अभियुक्त के अंतिम ज्ञात निवास स्थान पर चस्पा की जाती है तथा उसके किसी रिश्तेदार या मित्र को भी विचारण की सूचना दी जाती है।
- आरोप तय किए जाने की तिथि से 90 दिन पूर्ण होने से पूर्व विचारण प्रारंभ नहीं किया जा सकता, ताकि अभियुक्त को न्यायालय में उपस्थित होने का पर्याप्त अवसर मिल सके।
स्रोत: TH
वर्ष 2026 की प्रथम छमाही में चीन से भारत का आयात 80 अरब डॉलर के निकट पहुँचा
पाठ्यक्रम: GS2/ अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- चीन के सीमा शुल्क सामान्य प्रशासन द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की प्रथम छमाही में चीन से भारत का आयात 21.8% बढ़कर रिकॉर्ड 79.41 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
परिचय
- वर्ष 2025-26 में चीन, 151.1 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के साथ, अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया। इसी अवधि में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
- इससे पूर्व वर्ष 2024-25 तक निरंतर चार वर्षों तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था।
- विगत वित्तीय वर्ष में चीन को भारत का निर्यात 36.66% बढ़कर 19.47 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि आयात 16% बढ़कर 131.63 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
- इस अवधि में वस्तुओं के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, विशेष रूप से कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों तथा स्वर्ण के आयात मूल्य में वृद्धि दर्ज की गई।
- भारत चीन से केवल तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद एवं अन्य उपकरण ही नहीं, बल्कि ऐसे मध्यवर्ती उत्पाद भी आयात करता है, जिनका उपयोग घरेलू विनिर्माण तथा भारत के निर्यात में किया जाता है।
स्रोत: TH
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) का प्रथम मासिक संस्करण
पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने देश का प्रथम परीक्षण आधारित सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) जारी किया, जिसमें 19 उप-क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) के बारे में
- सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) एक अल्पकालिक संकेतक है, जिसे आधार वर्ष की तुलना में सेवा क्षेत्र द्वारा उत्पादित वास्तविक उत्पादन में समयानुसार होने वाले परिवर्तन को मापने के लिए विकसित किया गया है।
- यह समय के साथ सेवा-उत्पादक उद्योगों के वास्तविक उत्पादन में परिवर्तन का आकलन करता है।
- यह सेवा क्षेत्र के लिए वही भूमिका निभाता है, जो औद्योगिक क्षेत्र के लिए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) निभाता है।
- इस सूचकांक का आधार वर्ष 2024-25 निर्धारित किया गया है।

मूल्य अपस्फीतिकारक (Deflator) की आवश्यकता
- सेवा क्षेत्र के आँकड़े सामान्यतः मौद्रिक मूल्यों में उपलब्ध होते हैं, इसलिए वास्तविक उत्पादन का आकलन करने के लिए मूल्य परिवर्तन के प्रभाव को हटाना आवश्यक होता है।
- मूल्य अपस्फीतिकारक मौद्रिक मूल्यों को वास्तविक मूल्यों में परिवर्तित करता है, जिससे सेवा उत्पादन में वास्तविक वृद्धि का आकलन संभव हो पाता है।
- वर्तमान में विभिन्न उप-क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मूल्य अपस्फीतिकारकों का उपयोग किया जाता है:
- थोक मूल्य सूचकांक (WPI): केवल थोक व्यापार क्षेत्र के लिए।
- उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI): अधिकांश अन्य उप-क्षेत्रों के लिए उपयुक्त CPI श्रृंखला का उपयोग।
- सामान्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-General): बैंकिंग, बीमा तथा मरम्मत एवं रखरखाव सेवाओं के लिए।
- सेवा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-Services): जिन उप-क्षेत्रों के लिए पृथक CPI उपलब्ध नहीं है।
प्रमुख निष्कर्ष
- अप्रैल 2026 के दौरान 19 में से 14 सेवा उप-क्षेत्रों में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
- सर्वाधिक वृद्धि आवास एवं खाद्य सेवाओं में 37.2% रही।
- इसके पश्चात खुदरा व्यापार (30.8%), प्रशासनिक एवं सहायक सेवाएँ (28.7%) तथा रियल एस्टेट (27.7%) का स्थान रहा।
- दूरसंचार क्षेत्र में 22.8% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि थोक व्यापार, बैंकिंग, बीमा तथा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेवाओं में भी दो अंकों की उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
- इसके विपरीत, वायु परिवहन क्षेत्र में 13.9% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि रेल परिवहन में 0.4% की मामूली कमी दर्ज की गई।
निडार 2.0 (NIDAR 2.0)
पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
समाचार में
- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के सहयोग से स्वयान (SwaYaan) पहल के अंतर्गत राष्ट्रीय ड्रोन अनुप्रयोग एवं अनुसंधान नवाचार चुनौती (NIDAR 2.0, 2026-27) के दूसरे संस्करण का शुभारंभ किया।
निडार (NIDAR)
- राष्ट्रीय ड्रोन अनुप्रयोग एवं अनुसंधान नवाचार चुनौती (NIDAR) का उद्देश्य भारत के महाविद्यालयी स्नातकों को निर्धारित समस्याओं के समाधान हेतु सहयोगात्मक स्वायत्त ड्रोन विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
- निडार 2025-26 का प्रथम संस्करण मार्च 2025 में प्रारंभ किया गया था।
- इसमें 22 राज्यों, 4 केंद्रशासित प्रदेशों तथा 109 शहरों के 3,448 विद्यार्थियों ने भाग लिया और आपदा प्रबंधन तथा परिशुद्ध कृषि के लिए स्वायत्त ड्रोन समाधान विकसित किए।
निडार 2.0 (NIDAR 2.0)
- इस संस्करण में चुनौती का विस्तार पारंपरिक ड्रोन मंचों से आगे बढ़ाकर स्वायत्त प्रणालियों, स्वदेशी विमानिकी तथा ड्रोन के मूलभूत घटकों तक किया गया है।
- ट्रैक-1 (ड्रोन नवाचार): इसमें प्रतिभागी दलों को आपदा प्रतिक्रिया हेतु स्वायत्त समूह ड्रोन तथा GPS-विहीन औद्योगिक आंतरिक निरीक्षण के लिए ड्रोन विकसित करने की चुनौती दी जाएगी।
- ट्रैक-2 (घटक नवाचार): इसमें प्रतिभागी दलों को VEGA प्रोसेसर तथा स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक अवयवों का उपयोग करते हुए स्वदेशी उड़ान नियंत्रक एवं स्वचालित उड़ान नियंत्रक विकसित करना होगा। चयनित शीर्ष 100 टीमों को आगे के विकास एवं परीक्षण के लिए VEGA प्रोसेसर किट उपलब्ध कराई जाएगी।
VEGA प्रोसेसर
- VEGA स्वदेशी सूक्ष्म-प्रसंस्करणकों का एक परिवार है, जिसे उन्नत संगणना विकास केंद्र (C-DAC) द्वारा MeitY के सूक्ष्म-प्रसंस्करणक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित किया गया है।
- यह मुक्त मानक RISC-V संरचना पर आधारित है।
स्वयान (SwaYaan) पहल
- स्वयान पहल को जुलाई 2022 में MeitY द्वारा लगभग 89.87 करोड़ रुपये के पाँच वर्षीय परिव्यय के साथ स्वीकृति प्रदान की गई थी।
- इसका उद्देश्य भारत के ड्रोन क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करना है।
- यह 30 प्रमुख संस्थानों—जिनमें IISc, IITs, IIITs, NITs, C-DAC तथा NIELIT शामिल हैं—के हब एवं स्पोक मॉडल के माध्यम से संचालित की जाती है।
- यह पाँच प्रमुख विषयों—वायुगतिकी, ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक्स, GNC एल्गोरिद्म एवं सिमुलेशन, ड्रोन अनुप्रयोग तथा संबद्ध मानवरहित विमान प्रणाली (UAS) प्रौद्योगिकियों—पर कार्य करती है।
- अब तक इस पहल के अंतर्गत 51,000 से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
- इसके अतिरिक्त, इसने एम.टेक. एवं लघु उपाधि कार्यक्रमों, वैकल्पिक पाठ्यक्रमों, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों, अनुसंधान पत्रों तथा ड्रोन प्रौद्योगिकी से संबंधित पेटेंट को भी प्रोत्साहन दिया है।
- निडार इस पहल का प्रमुख नवाचार मंच है।
स्रोत: PIB
कार्बन क्रेडिट व्यापार योजना (CCTS) का विस्तार
पाठ्यक्रम: GS3/ पर्यावरण
समाचार में
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की कार्बन क्रेडिट व्यापार योजना (CCTS) के अंतर्गत लौह एवं इस्पात क्षेत्र को शामिल करने संबंधी मसौदा अधिसूचना को स्वीकृति प्रदान की है।
भारत में कार्बन क्रेडिट व्यापार योजना (CCTS)
- कार्बन क्रेडिट व्यापार योजना (CCTS) ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में कमी लाने हेतु कार्बन मूल्य निर्धारण पर आधारित एक व्यवस्था है।
- इसे वर्ष 2023 में भारत सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया था तथा यह भारतीय कार्बन बाजार (ICM) के संचालन के लिए समग्र रूपरेखा प्रदान करती है।
- उत्सर्जन तीव्रता में कमी के लक्ष्य अनुपालन वर्ष 2026-27 तक प्राप्त किए जाने हैं, जबकि आधार वर्ष 2023-24 निर्धारित किया गया है।
- दायरा: वर्तमान में CCTS के अंतर्गत एल्यूमिनियम, सीमेंट, लुगदी एवं कागज, पेट्रोलियम रिफाइनरी, पेट्रो-रसायन तथा वस्त्र क्षेत्र शामिल हैं।
- नवीन परिवर्तन के साथ इसमें लौह एवं इस्पात क्षेत्र को भी सम्मिलित किया गया है।
- कार्यप्रणाली: CCTS दो तंत्रों के माध्यम से संचालित होती है—
- अनुपालन तंत्र
- प्रतिपूरक तंत्र
- अनुपालन तंत्र के अंतर्गत उत्सर्जन-प्रधान उद्योगों को अनिवार्य इकाइयाँ घोषित किया जाता है, जिन्हें निर्धारित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता (GEI) लक्ष्यों को प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
- लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करने वाली इकाइयों को कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र (CCC) प्रदान किए जाते हैं, जिनका व्यापार उन इकाइयों के साथ किया जा सकता है जो अपने लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पातीं।
- प्रत्येक अनिवार्य उद्योग को प्रति इकाई उत्पादन के आधार पर GEI लक्ष्य निर्धारित किया जाता है।
- लक्ष्य प्राप्त न करने वाले उद्योगों को कार्बन क्रेडिट खरीदने अथवा पर्यावरणीय प्रतिपूर्ति का भुगतान करना होता है।
- यह प्रतिपूर्ति कार्बन क्रेडिट के औसत व्यापार मूल्य के दोगुने के बराबर होती है।
भारत के इस्पात क्षेत्र से संबंधित प्रमुख तथ्य
- भारत का इस्पात क्षेत्र विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक क्षेत्र है।
- वित्तीय वर्ष 2024-25 में देश का कच्चा इस्पात उत्पादन लगभग 151 मिलियन टन रहा।

- यह देश के कुल CO₂ उत्सर्जन का लगभग 10-12% योगदान करता है।
- राष्ट्रीय इस्पात नीति, 2017 के अनुसार वर्ष 2030-31 तक कच्चे इस्पात की क्षमता 300 MTPA तथा उत्पादन 255 MTPA तक पहुँचाने का लक्ष्य है।
- देश के प्रमुख इस्पात क्षेत्र कलिंगनगर, अंगुल, राउरकेला, झारसुगुड़ा, नगरनार, भिलाई, रायपुर, जमशेदपुर, बोकारो, दुर्गापुर, कोलकाता तथा विशाखापत्तनम में स्थित हैं।
- हरित इस्पात का तात्पर्य जीवाश्म ईंधनों के उपयोग के बिना इस्पात के उत्पादन से है।
- हरित हाइड्रोजन इस्पात उद्योग के कार्बन उत्सर्जन को कम करने का एक संभावित समाधान माना जाता है।
- एआई इन स्टील पैवेलियन एक अभिनव सहयोगात्मक मंच है, जिसे समस्या से समाधान तक की प्रक्रिया को सुगम बनाने वाले बाज़ार के रूप में विकसित किया गया है।
स्रोत: DTE
फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियरिंग (FDE)
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियरिंग (FDE) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्षेत्र में सबसे अधिक मांग वाली नई भूमिकाओं में से एक के रूप में उभर रही है।
परिचय
- फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियरिंग (FDE) एक बहु-विषयक भूमिका है, जिसमें सॉफ्टवेयर अभियांत्रिकी, AI कार्यान्वयन, समाधान वास्तुकला तथा व्यावसायिक परामर्श का समन्वय होता है।
- इसका उद्देश्य AI आधारित प्रयोगों को ऐसे सुरक्षित एवं कार्यशील तंत्रों में परिवर्तित करना है, जिनका उपयोग दैनिक व्यावसायिक गतिविधियों में किया जा सके।
- FDE विशेषज्ञ सीधे ग्राहकों के साथ कार्य करते हैं, उनकी वास्तविक व्यावसायिक आवश्यकताओं को समझते हैं तथा ग्राहक के अपने (प्रायः संवेदनशील) आँकड़ों से सुरक्षित रूप से जुड़ने वाले AI समाधान विकसित करते हैं।
- विभिन्न AI एजेंटों एवं मंचों के बीच परस्पर समन्वय स्थापित करने के लिए मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल (MCP) तथा एजेंट-टू-एजेंट (A2A) जैसे उभरते मानकों का उपयोग किया जाता है।
स्रोत: TH