विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए हरित पूंजी का एकत्रीकरण: चुनौतियाँ एवं आगे की राह 

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • ग्रीन ट्रांज़िशन बोर्ड ने अपने कार्य का शुभारंभ इस विचार के साथ किया कि वैश्विक जलवायु एजेंडा अब केवल लक्ष्य निर्धारित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश एकत्रित करने तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित हो चुका है।

ग्रीन ट्रांज़िशन बोर्ड

  • इसकी घोषणा रायसीना संवाद 2026 में की गई।
  • इसका उद्देश्य जलवायु वित्त , बहुपक्षीय विकास बैंकों (MDBs) में सुधार, तथा भारत की 2047 तक 2,500 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन की दिशा में नीति संबंधी अनुशंसाएँ प्रदान करना है।
  • सचिवालय: ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन (ORF) मिडिल ईस्ट।
  • मुख्य फोकस: भारत का हरित संक्रमण ।
  • व्यापक उद्देश्य: उभरते बाजारों एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (EMDEs) के लिए नीतिगत मार्ग विकसित करना।

हरित संक्रमण क्या है?

  • हरित संक्रमण से तात्पर्य कार्बन-प्रधान आर्थिक व्यवस्था से निम्न-कार्बन, जलवायु-अनुकूल एवं सतत विकास आधारित आर्थिक प्रणाली की ओर परिवर्तन से है।
  • इसका उद्देश्य ऊर्जा, उद्योग, परिवहन और कृषि क्षेत्रों में परिवर्तन लाते हुए आर्थिक विकास तथा सामाजिक समावेशन सुनिश्चित करना है।

हरित संक्रमण की आवश्यकता

  • जलवायु परिवर्तन का शमन: वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 75% जीवाश्म ईंधनों के दहन से होता है।
    • पेरिस समझौते के अनुसार वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने के लिए हरित संक्रमण आवश्यक है।
    • स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अनिवार्य है।
  • ऊर्जा सुरक्षा: आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता देशों को भू-राजनीतिक संकटों तथा मूल्य अस्थिरता के प्रति संवेदनशील बनाती है।
    • नवीकरणीय ऊर्जा आत्मनिर्भरता एवं ऊर्जा संप्रभुता को सुदृढ़ करती है।
  • सतत आर्थिक विकास : हरित क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होते हैं, जैसे—
    • नवीकरणीय ऊर्जा,
    • बैटरी निर्माण,
    • इलेक्ट्रिक वाहन (EV),
    • हरित हाइड्रोजन।
    • अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के अनुसार स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार से विश्वभर में लाखों रोजगार सृजित किए जा सकते हैं।
  • जनस्वास्थ्य लाभ: वायु प्रदूषण में कमी से स्वास्थ्य संबंधी व्यय घटता है तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति: हरित संक्रमण निम्नलिखित सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में प्रत्यक्ष योगदान देता है—
    • जलवायु कार्रवाई ,
    • सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा,
    • सतत शहर ,
    • उत्तरदायी उपभोग एवं उत्पादन ।

भारत में हरित संक्रमण की वर्तमान स्थिति

  • भारत ने अपनी राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) की समय-सीमा से पहले ही स्थापित विद्युत क्षमता का 50% से अधिक भाग गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा (बड़े जलविद्युत संयंत्रों सहित) की स्थापित क्षमता 230 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।
  • भारत के प्रमुख लक्ष्य: वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता
    • वर्ष 2030 तक कुल विद्युत क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से।
    • 2070 तक नेट-ज़ीरो (Net Zero) उत्सर्जन।
    • 2047 तक 2,500 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता।
  • उभरते हुए क्षेत्र: सौर एवं पवन ऊर्जा का तीव्र विस्तार।
    • हरित हाइड्रोजन उत्पादन का विस्तार।
    • इलेक्ट्रिक वाहनों एवं बैटरी भंडारण का विकास।
    • पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत रूफटॉप सोलर ऊर्जा को प्रोत्साहन।
    • उचित वित्तीय सहायता एवं प्रौद्योगिकी उपलब्ध होने पर भारत 2070 से पहले ही नेट-ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।

हरित संक्रमण से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ

  • जलवायु वित्त का अभाव: विकासशील देशों को दीर्घकालिक एवं सस्ती वित्तीय सहायता की गंभीर कमी का सामना करना पड़ता है।
    • वैश्विक जलवायु वित्त प्रतिबद्धताएँ अभी भी अपर्याप्त एवं असमान हैं।
  • निजी निवेश की कमी: उभरती अर्थव्यवस्थाओं में संभावित जोखिम निजी निवेशकों को हतोत्साहित करते हैं।
    • अनेक परियोजनाएँ निवेश योग्य नहीं बन पातीं।
  • बहुपक्षीय विकास बैंकों (MDBs) में सुधार की आवश्यकता: वर्तमान MDBs की ऋण प्रदान करने की क्षमता सीमित है।
    • विकासशील देशों को रियायती वित्त तथा निर्णय-निर्माण में अधिक भागीदारी की आवश्यकता है।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की समस्याएँ: उच्च लागत,
    • बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR),
    • आधुनिक तकनीकों तक सीमित पहुँच।
  • ग्रिड एवं ऊर्जा भंडारण संबंधी चुनौतियाँ: नवीकरणीय ऊर्जा के व्यापक एकीकरण के लिए आवश्यक हैं—
    • ट्रांसमिशन ग्रिड,
    • ऊर्जा भंडारण प्रणाली,
    • स्मार्ट ग्रिड,
    • मजबूत आपूर्ति श्रृंखला।
  • न्यायसंगत संक्रमण की चुनौती: जीवाश्म ईंधनों, विशेषकर कोयला उद्योग पर निर्भर श्रमिकों एवं क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
  • महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भरता: नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ लिथियम, कोबाल्ट एवं दुर्लभ मृदा तत्वों पर निर्भर हैं।

हरित संक्रमण से संबंधित वैश्विक पहलें

  • पेरिस समझौता (2015): वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से नीचे तथा 1.5°C तक सीमित रखने का लक्ष्य।
  • कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ (COP): संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) के अंतर्गत आयोजित।
    • COP30 (ब्राज़ील) का मुख्य फोकस होगा—
      • जलवायु वित्त,
      • क्रियान्वयन।
  • सतत विकास लक्ष्य-7 (SDG-7): सभी के लिए सस्ती, विश्वसनीय, सतत एवं आधुनिक ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • ग्लोबल स्टॉकटेक:  पेरिस समझौते के लक्ष्यों की दिशा में वैश्विक प्रगति का मूल्यांकन।
  • लॉस एंड डैमेज फंड: जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक प्रभावित विकासशील देशों को सहायता प्रदान करना।
  • अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन: भारत एवं फ्रांस के नेतृत्व में स्थापित वैश्विक पहल।

भारत की प्रमुख पहलें

  • राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC): इसके अंतर्गत सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता तथा सतत आवास को प्रोत्साहन देने हेतु विभिन्न राष्ट्रीय मिशनों का संचालन किया जाता है।
  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन : इसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन का वैश्विक उत्पादक एवं निर्यातक बनाना है।
  • पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना : यह योजना घरेलू स्तर पर रूफटॉप सौर ऊर्जा प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना : यह योजना सौर मॉड्यूल तथा उन्नत रसायन कोशिकाओं (ACC) के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देती है।
  • फेम योजना : यह योजना इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने एवं उनके उपयोग को प्रोत्साहित करती है।
  • राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति : यह नीति एथेनॉल मिश्रण तथा वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को प्रोत्साहन देती है।
  • सॉवरेन ग्रीन बॉण्ड्स : इनका उपयोग हरित अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण हेतु किया जाता है।

आगे की राह 

  • MDBs में सुधार कर रियायती जलवायु वित्त का विस्तार किया जाए।
  • मिश्रित वित्त एवं ग्रीन बॉण्ड जैसे नवाचारी वित्तीय साधनों को प्रोत्साहन दिया जाए।
  • विद्युत ग्रिड, ऊर्जा भंडारण एवं ट्रांसमिशन अवसंरचना में निवेश बढ़ाया जाए।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं क्षमता निर्माण हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ किया जाए।
  • कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा एवं क्षेत्रीय विविधीकरण के माध्यम से न्यायसंगत संक्रमण सुनिश्चित किया जाए।
  • नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों तथा महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित किया जाए।
  • जलवायु परियोजनाओं को निवेश योग्य बनाने हेतु उनकी तैयारी में सुधार किया जाए।
  • उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच दक्षिण-दक्षिण सहयोग को प्रोत्साहन दिया जाए।

निष्कर्ष

  • ग्रीन ट्रांज़िशन बोर्ड की स्थापना इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल जलवायु लक्ष्यों की घोषणा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।
  • यह बोर्ड जलवायु वित्त, बहुपक्षीय विकास बैंकों में सुधार, प्रौद्योगिकी तक पहुँच तथा निजी निवेश को प्रोत्साहित कर महत्त्वाकांक्षी लक्ष्यों और वास्तविक कार्यान्वयन के बीच के अंतर को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
  • इसकी अनुशंसाएँ न केवल भारत को 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करेंगी, बल्कि सतत विकास की दिशा में अग्रसर अन्य विकासशील देशों के लिए भी एक आदर्श नीति मॉडल प्रस्तुत कर सकती हैं।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न]: विकासशील देशों के लिए हरित वित्त के एकत्रीकरण में आने वाली प्रमुख चुनौतियों की विवेचना कीजिए। साथ ही, जलवायु वित्त की संस्थागत व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा न्यायसंगत हरित संक्रमण को तीव्र गति प्रदान करने हेतु आवश्यक उपाय सुझाइए। 

स्रोत : IE

 

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