पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था और शासन
संदर्भ
- हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को सड़क दुर्घटनाओं तथा अन्य दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु में कमी लाने के लिए एक एकीकृत आपातकालीन ट्रॉमा देखभाल प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिया।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की प्रमुख विशेषताएँ
- आपातकालीन हेल्पलाइन का एकीकरण: सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे 100, 101, 108, 102, 1033 तथा 1091 जैसी आपातकालीन एवं एम्बुलेंस हेल्पलाइनों का एकीकृत हेल्पलाइन नंबर 112 में तकनीकी एवं परिचालन स्तर पर पूर्ण एकीकरण तीन माह के अंदर सुनिश्चित करें।
- शिकायत निवारण प्रणाली: राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को गुड सेमेरिटन से संबंधित शिकायतों के निवारण हेतु भौतिक एवं डिजिटल दोनों प्रकार की शिकायत निवारण प्रणाली तीन माह के अंदर स्थापित करने का निर्देश दिया गया।
- सर्वोच्च न्यायालय ने GPS-सुसज्जित एम्बुलेंस, ट्रॉमा रजिस्ट्री तथा मानकीकृत बचाव प्रोटोकॉल विकसित करने का भी निर्देश दिया।
- चिकित्सा बचाव प्रोटोकॉल: सर्वोच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को ट्रॉमा मामलों के लिए चिकित्सा बचाव प्रोटोकॉल तैयार करने हेतु तीन माह का समय दिया।
- इसके उपरांत राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को आगमी तीन माह के अंदर इस प्रोटोकॉल का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा।
भारत में सड़क दुर्घटनाएँ
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, वर्ष 2024 में यातायात दुर्घटनाओं में 1.99 लाख लोगों की मृत्यु हुई, जो वर्ष 2023 की तुलना में 0.79% अधिक है।
- सड़क दुर्घटनाएँ: वर्ष 2024 में दर्ज 1.99 लाख यातायात-संबंधी मृत्युओं में से 1.75 लाख (88%) सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुईं।
- सड़क दुर्घटनाओं से भारत को होने वाली सामाजिक-आर्थिक हानि देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 3.14% है।
- सर्वाधिक घातक सड़क दुर्घटनाएँ दोपहिया वाहनों से संबंधित होती हैं, जिनके बाद पैदल यात्री तथा कारें आती हैं।
- अत्यधिक गति सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है, जो कुल सड़क दुर्घटना मृत्यु का लगभग 58% है।
- सड़क दुर्घटनाओं में सर्वाधिक मृत्यु वाले तीन राज्य हैं—
- उत्तर प्रदेश
- तमिलनाडु
- महाराष्ट्र
भारत में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के कारण
- अत्यधिक गति एवं लापरवाह वाहन संचालन: तीव्र गति से वाहन चलाना, खतरनाक ओवरटेकिंग, शराब पीकर वाहन चलाना तथा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।
- खराब सड़क अवसंरचना: जर्जर सड़कें, गड्ढे, अपर्याप्त संकेतक, खराब प्रकाश व्यवस्था तथा असुरक्षित सड़क अभिकल्प दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ाते हैं।
- यातायात नियमों का कमजोर प्रवर्तन: अपर्याप्त निगरानी एवं यातायात नियमों के असंगत अनुपालन के कारण सुरक्षा नियमों का पालन कम होता है।
- उचित चालक प्रशिक्षण का अभाव: कमजोर लाइसेंस प्रणाली एवं अपर्याप्त चालक प्रशिक्षण के कारण अकुशल एवं गैर-जिम्मेदार वाहन संचालन को बढ़ावा मिलता है।
- वाहनों की तीव्र वृद्धि एवं यातायात जाम: सड़क अवसंरचना के अनुपात में वाहनों की संख्या में तीव्र वृद्धि से अव्यवस्थित एवं असुरक्षित यातायात परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।
- कमजोर आपातकालीन एवं ट्रॉमा देखभाल व्यवस्था: विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर चिकित्सा सहायता न मिलना तथा अपर्याप्त ट्रॉमा देखभाल सुविधाएँ दुर्घटनाओं के बाद मृत्यु दर बढ़ाती हैं।
सरकारी पहल
- राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति, 2010: इस नीति में बेहतर सड़क अवसंरचना, यातायात नियमों का सख्त प्रवर्तन, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का सुदृढ़ीकरण, जन-जागरूकता अभियान तथा दुर्घटना उपरांत देखभाल में सुधार पर बल दिया गया।
- इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (e-DAR) / एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस (iRAD): सड़क दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग, प्रबंधन एवं विश्लेषण के लिए एक केंद्रीकृत प्रणाली विकसित की गई है, जिससे सड़क सुरक्षा में सुधार किया जा सके।
- दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित सहायता: दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने वाले गुड सेमेरिटन को ₹25,000 का पुरस्कार।
- शीघ्र मुआवजा—
- गंभीर चोट के लिए ₹2.5 लाख
- मृत्यु की स्थिति में ₹5 लाख
- हिट-एंड-रन मामलों में बढ़ा हुआ मुआवजा—
- मृत्यु पर ₹2 लाख
- गंभीर चोट पर ₹50,000
- तृतीय-पक्ष बीमा से संबंधित प्रक्रियाओं का सरलीकरण, जिसमें किराए के चालकों को भी शामिल किया गया है।
- शीघ्र मुआवजा—
- वाहन फिटनेस: पुराने एवं अनुपयुक्त वाहन दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण हैं।
- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में मॉडल निरीक्षण एवं प्रमाणन केंद्र स्थापित कर रहा है। वर्ष 2024 तक 28 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को इस पहल के अंतर्गत शामिल किया जा चुका है।
- आईआईटी मद्रास के साथ सहयोग: सड़क सुरक्षा हेतु उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जा रही है, जिसका उद्देश्य नए उत्पादों का विकास, अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा सड़क सुरक्षा संबंधी पहलों को सुदृढ़ करना है।
- दुर्घटना ब्लैक स्पॉट का सुधार: राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना-प्रवण स्थलों की पहचान कर अभियांत्रिकी उपायों के माध्यम से उनमें सुधार को प्राथमिकता दी जा रही है।
- सड़क सुरक्षा ऑडिट: सभी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के डिज़ाइन, निर्माण एवं संचालन के प्रत्येक चरण में सड़क सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य किया गया है।
- ब्रासीलिया घोषणा : भारत उन 100 से अधिक देशों में शामिल था जिन्होंने वर्ष 2015 में ब्रासीलिया घोषणा पर हस्ताक्षर किए।
- इसके अंतर्गत भारत ने सतत विकास लक्ष्य (SDG) 3.6 के अनुरूप वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली वैश्विक मृत्यु एवं गंभीर चोटों की संख्या को आधा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
- मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019: इस अधिनियम के माध्यम से तीव्र गति, शराब पीकर वाहन चलाना तथा हेलमेट एवं सीट बेल्ट का उपयोग न करने जैसे यातायात उल्लंघनों पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया।
निष्कर्ष
- एक प्रभावी एवं व्यापक ट्रॉमा देखभाल प्रणाली के लिए अधिकार-आधारित विधिक ढाँचे, संस्थागत समन्वय, मानकीकृत प्रोटोकॉल तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के कठोर एवं प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है। ये उपाय समय पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने, रोकी जा सकने वाली मृत्यु में कमी लाने तथा पूरे देश में एक सुदृढ़ एवं सक्षम ट्रॉमा प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Source: IE
Previous article
ईरान–भारत सभ्यतागत संबंध
Next article
भारत में पर्यटन-आधारित आर्थिक विकास