पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- पर्यटन भारत के आर्थिक परिवर्तन के प्रमुख प्रेरक कारकों में से एक रहा है।
भारत में पर्यटन क्षेत्र
- भारत में पर्यटन आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, क्षेत्रीय विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा अंतरराष्ट्रीय सहभागिता का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
- पर्यटन व्यापक बहुगुणक प्रभाव उत्पन्न करता है तथा भारत की विकास यात्रा एवं विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वर्तमान स्थिति
- विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद (WTTC) के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का योगदान लगभग 231.6 अरब अमेरिकी डॉलर है तथा भारत विश्व की अग्रणी पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
- वर्ष 2014-2025 के दौरान भारत में 181.25 मिलियन अंतरराष्ट्रीय आगमन तथा 93.35 मिलियन विदेशी पर्यटक आगमन (FTAs) दर्ज किए गए।
- वर्ष 2024 में भारत में 20.6 मिलियन अंतरराष्ट्रीय आगमन दर्ज हुए, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक पर्यटन रैंकिंग में भारत वर्ष 2016 के 25वें स्थान से बढ़कर वर्ष 2024 में 20वें स्थान पर पहुँच गया।
पर्यटन का महत्व
- आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन: पर्यटन आय सृजन, विदेशी मुद्रा अर्जन तथा आतिथ्य, परिवहन, हस्तशिल्प एवं खाद्य सेवा उद्योगों सहित अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करता है।

- उदाहरण: गोवा में पर्यटन होटल, टैक्सी एवं रेस्तरां उद्योगों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय हस्तशिल्पियों की आजीविका का भी प्रमुख स्रोत है।
- क्षेत्रीय विकास:पर्यटन संतुलित क्षेत्रीय विकास का एक महत्वपूर्ण साधन बनकर उभरा है। सरकार की प्रमुख पहलें निम्नलिखित हैं—
- उत्तर-पूर्वी क्षेत्र का विकास।
- ग्रामीण पर्यटन का विकास।
- पूर्वी भारत के लिए पूर्वोदय विजन का विकास।
- संस्कृति एवं विरासत का संरक्षण: पर्यटन सांस्कृतिक परंपराओं, ऐतिहासिक स्मारकों एवं विरासत के संरक्षण तथा संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- उदाहरण: खजुराहो मंदिर एवं हम्पी में पर्यटन ने इन विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण को बढ़ावा दिया है।
- सॉफ्ट पावर का निर्माण: पर्यटन भारत की सॉफ्ट पावरको सुदृढ़ करता है तथा सांस्कृतिक कूटनीति को प्रोत्साहित करता है।
- उदाहरण: भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान वैश्विक समुदाय के समक्ष भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं परंपराओं का प्रभावी प्रदर्शन किया गया।

- सामुदायिक सशक्तिकरण एवं समावेशी विकास: पर्यटन स्थानीय समुदायों, विशेषकर महिलाओं एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराता है।
- उदाहरण: सिक्किम एवं केरल में होमस्टे पर्यटन स्थानीय लोगों के लिए आय एवं रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत बना है।
- सतत पर्यटन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण: उत्तरदायी पर्यटन जैव विविधता एवं प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण में सहायक है।
- उदाहरण: केरल के पेरियार टाइगर रिजर्व में इको-टूरिज्म गतिविधियाँ क्षेत्र के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को रोजगार भी प्रदान करती हैं।
- मामल्लापुरम दक्षिण एशिया का पहला यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बन गया है, जिसे ग्रीन डेस्टिनेशंस सिल्वर सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया है।
प्रमुख संबंधित पहलें
- स्वदेश दर्शन योजना , 2014: यह एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसका उद्देश्य भारत में एकीकृत एवं विषय-आधारित पर्यटन परिपथों का विकास करना ह
- इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकारों एवं केंद्रीय प्राधिकरणों को विश्वस्तरीय पर्यटन अवसंरचना के विकास हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- स्वदेश दर्शन 1.0: 15 विभिन्न विषयगत पर्यटन परिपथों के अंतर्गत ₹5,000 करोड़ से अधिक लागत वाली 76 से अधिक परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई।
- स्वदेश दर्शन 2.0 (2022): इसका उद्देश्य सतत एवं अनुभव-आधारित पर्यटन का विकास करना है।
- तीर्थस्थल कायाकल्प एवं आध्यात्मिक, विरासत संवर्धन अभियान (PRASHAD) योजना एवं आध्यात्मिक पर्यटन: इस योजना का उद्देश्य देशभर के प्रमुख तीर्थस्थलों पर आधारभूत अवसंरचना का विकास करना है।
- सोमनाथ, श्रीशैलम एवं गोवर्धन जैसे तीर्थस्थलों को बेहतर सुरक्षा, स्वच्छता एवं पर्यटक सुविधाओं का लाभ प्राप्त हुआ है।
- राज्यों को पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता (SASCI) योजना: इस योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2024-25 में ₹3,295.76 करोड़ के परिव्यय के साथ की गई।
- इसका क्रियान्वयन वित्त मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
- इसके अंतर्गत राज्यों को 50 वर्षों के लिए ब्याज-मुक्त दीर्घकालिक ऋण प्रदान किया जाता है, जिससे पूंजीगत निवेश को बढ़ावा मिले, आर्थिक विकास को गति मिले तथा खनन, शहरी अवसंरचना एवं सड़क सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सुधार को प्रोत्साहन प्राप्त हो।
- सेवा प्रदाताओं के क्षमता निर्माण योजना: वर्ष 2025 तक 4.5 लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।
- केंद्रीय बजट 2026-27 में राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान की स्थापना तथा 10,000 पर्यटन गाइडों के कौशल उन्नयन का प्रस्ताव रखा गया है।
- प्रौद्योगिकी, संपर्क एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता: भारत ने ई-टूरिस्ट वीज़ा सुविधा के विस्तार, NIDHI एवं NIDHI Plus जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों तथा अतुल्य भारत अभियान के माध्यम से डिजिटल प्रचार-प्रसार द्वारा पर्यटन को अधिक सुगम बनाया है।
- राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण, वंदे भारत ट्रेनों, उड़ान (UDAN) योजना, हवाई अड्डों के उन्नयन तथा अंतिम मील संपर्क में सुधार के माध्यम से पर्यटन संपर्क व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है।
- सतत पर्यटन संबंधी पहलें: पर्यटकों के दबाव को संतुलित करने हेतु पक्षी अवलोकन परिपथ , हिमालयी ट्रेकिंग मार्ग तथा कछुआ पर्यटन जैसे विशिष्ट पर्यटन क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है।
- ट्रेवल फॉर लाइफ (Travel for LiFE) पहल के माध्यम से पर्यटकों एवं पर्यटन उद्योग में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी व्यवहार को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
- चैलेंज आधारित गंतव्य विकास (CBDD) पहल के अंतर्गत इको-टूरिज्म एवं आध्यात्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।