पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य
संदर्भ
- हाल ही में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS)-6 भारत में बाल पोषण और मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुई प्रगति को रेखांकित करता है। साथ ही, यह शिशु एवं बाल आहार प्रथाओं, आहार की गुणवत्ता, माताओं पर बढ़ते कार्यभार तथा स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से संबंधित निरंतर बनी हुई चुनौतियों को भी उजागर करता है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के बारे में
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की शुरुआत 1990 के दशक के प्रारम्भ में हुई थी। प्रथम NFHS वर्ष 1992-93 में आयोजित किया गया था।
- इसके पश्चात भारत ने सफलतापूर्वक निम्नलिखित सर्वेक्षण पूरे किए—
- NFHS-2 : 1998-99
- NFHS-3 : 2005-06
- NFHS-4 : 2015-16
- NFHS-5 : 2019-21
- इसके पश्चात भारत ने सफलतापूर्वक निम्नलिखित सर्वेक्षण पूरे किए—
- मुख्य उद्देश्य: भारत के जनसांख्यिकीय एवं स्वास्थ्य संबंधी डेटाबेस को सुदृढ़ बनाना तथा विश्वसनीय एवं उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना।
- भारतीय संस्थानों की सर्वेक्षण अनुसंधान क्षमता को सुदृढ़ करना ताकि उच्च गुणवत्ता वाले आँकड़ों का संकलन, विश्लेषण और प्रसार किया जा सके।
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से जुड़े उभरते मुद्दों पर देश की डेटा आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाना और उन्हें पूरा करना।
- प्रमुख संकेतक: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य
- शिशु एवं बाल मृत्यु दर
- पोषण (अविकसित वृद्धि/स्टंटिंग, क्षीणता/वेस्टिंग, कम वजन तथा एनीमिया)
- टीकाकरण कवरेज
- प्रजनन एवं परिवार नियोजन
- महिला सशक्तिकरण एवं लैंगिक मुद्दे
- स्वच्छता, पेयजल एवं घरेलू जीवन स्थितियाँ
- NFHS-6 का संचालन वर्ष 2023-24 के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (IIPS), मुंबई नोडल एजेंसी के रूप में कार्यरत था।
बाल स्वास्थ्य एवं पोषण की प्रवृत्तियाँ (NFHS-6)
- अविकसित वृद्धि/स्टंटिंग में कमी: पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अविकसित वृद्धि की दर 35.5% से घटकर 29.3% हो गई है।
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: वर्तमान में 90% से अधिक प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं।
- 58% जन्म सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों में हो रहे हैं।
- 91% प्रसव प्रशिक्षित एवं सक्षम स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में संपन्न हो रहे हैं।
- टीकाकरण: 12-23 माह आयु वर्ग के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज लगभग 87% तक पहुँच गई है।
- यह उपलब्धि मिशन इंद्रधनुष के सार्वभौमिक टीकाकरण के उद्देश्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो रही है।
NFHS-6 द्वारा उजागर प्रमुख चिंताएँ एवं चुनौतियाँ
- बाल कुपोषण की निरंतरता: पोषण संबंधी सुधार अभी भी इतनी तीव्र गति से नहीं हो रहे हैं कि सतत विकास लक्ष्य (SDGs) तथा राष्ट्रीय पोषण मिशन के लक्ष्यों को समय पर प्राप्त किया जा सके।
- अविकसित वृद्धि/स्टंटिंग: पाँच वर्ष से कम आयु के 29.3% बच्चे अब भी अविकसित वृद्धि से प्रभावित हैं।
- वेस्टिंग (क्षीणता): वेस्टिंग की स्थिति में बहुत कम अथवा नगण्य सुधार हुआ है।
- यह तीव्र कुपोषण की निरंतरता को दर्शाता है।
- यद्यपि गंभीर वेस्टिंग में कुछ कमी आई है, फिर भी समग्र स्तर उच्च बना हुआ है।
- शिशु एवं लघु बाल आहार (IYCF) प्रथाओं की कमजोर स्थिति:
- प्रारम्भिक स्तनपान: जन्म के एक घंटे के अंदर केवल लगभग आधे नवजात शिशुओं को स्तनपान कराया जाता है।
- पूरक आहार: 6–8 माह आयु वर्ग के केवल लगभग 60% बच्चों को समय पर ठोस अथवा अर्द्ध-ठोस पूरक आहार प्राप्त होता है।
- पर्याप्त आहार: 6–23 माह आयु वर्ग के केवल 15% बच्चों को पर्याप्त एवं संतुलित आहार मिल पाता है।
- आहार गुणवत्ता एवं पोषणीय अपर्याप्तता: NFHS-6 के आँकड़े भारत में आहार विविधता की कमी को दर्शाते हैं।
- दालों, फलों, सब्जियों, मेवों तथा पशु-आधारित खाद्य पदार्थों का उपभोग कम है।
- प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों तथा शर्करा युक्त पेयों का सेवन बढ़ रहा है।
- अनेक परिवारों के लिए स्वस्थ एवं संतुलित आहार अभी भी आर्थिक रूप से वहनीय नहीं है।
- मातृ समय अभाव : सर्वेक्षण महिलाओं पर बढ़ते कार्यभार को रेखांकित करता है।
- महिलाएँ प्रायः निम्नलिखित कार्यों के बीच संतुलन स्थापित करती हैं—
- कृषि कार्य
- पशुपालन
- घरेलू दायित्व
- अनौपचारिक एवं अवैतनिक श्रम
- महिलाएँ प्रायः निम्नलिखित कार्यों के बीच संतुलन स्थापित करती हैं—
- प्रथम 1,000 दिनों पर अपर्याप्त ध्यान: गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक की अवधि शारीरिक एवं संज्ञानात्मक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
- प्रमुख चुनौतियाँ: 0–2 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों से संबंधित विशिष्ट आँकड़ों की कमी
- वृद्धि अवरोध का प्रारम्भिक चरण में पहचान न हो पाना
- अधिकांश कार्यक्रमों का रोकथाम के बजाय उपचार पर अधिक केंद्रित होना
- प्रमुख चुनौतियाँ: 0–2 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों से संबंधित विशिष्ट आँकड़ों की कमी
- अन्य प्रमुख समस्याएँ: क्षेत्रीय एवं सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ
- पोषण संबंधी आँकड़ों का अपर्याप्त उपयोग
- अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं (ASHA, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं ANM) की सीमित क्षमता
- बहु-क्षेत्रीय समन्वय का अभाव
- बाल देखभाल सुविधाओं की कमी
संबंधित सरकारी पहलें एवं सुदृढ़ीकरण उपाय
- पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन): यह मिशन बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं में अविकसित वृद्धि, वेस्टिंग, कम वजन और एनीमिया को कम करने तथा पोषण स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से प्रारम्भ किया गया है।
- मुख्य विशेषताएँ: आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों की वृद्धि की वास्तविक समय निगरानी
- जन आंदोलन (व्यवहार परिवर्तन संचार)
- सामुदायिक आधारित कुपोषण प्रबंधन
- मुख्य विशेषताएँ: आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों की वृद्धि की वास्तविक समय निगरानी
- मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0: यह कार्यक्रम निम्नलिखित योजनाओं का एकीकरण करता है—
- पूरक पोषण कार्यक्रम (SNP)
- पोषण अभियान
- आंगनवाड़ी सेवाएँ
- लाभार्थी: 6 वर्ष से कम आयु के बच्चे
- गर्भवती महिलाएँ
- स्तनपान कराने वाली माताएँ
- किशोरियाँ
- प्रमुख फोकस क्षेत्र: आंगनवाड़ी अवसंरचना का उन्नयन
- प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को प्रोत्साहन देना
- अन्य प्रमुख योजनाएँ: पीएम पोषण योजना (मिड-डे मील)
- एनीमिया मुक्त भारत (AMB)
- मिशन इंद्रधनुष
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY)
- जननी सुरक्षा योजना (JSY)
- राष्ट्रीय क्रेच योजना (पालना)
आगे की राह : NFHS-6 द्वारा सुझाए गए प्रमुख सुदृढ़ीकरण उपाय
- पोषण-विशिष्ट हस्तक्षेप: जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान को प्रोत्साहित करना।
- छह माह के बाद समय पर पूरक आहार सुनिश्चित करना।
- स्थानीय खाद्य पदार्थों के माध्यम से आहार विविधता को बढ़ावा देना।
- माताओं हेतु परामर्श सेवाओं का विस्तार करना।
- संस्थागत उपाय: जिला स्तर पर पोषण विशेषज्ञों एवं डेटा विश्लेषकों की नियुक्ति।
- मानवमितीय आँकड़ों के संग्रहण की गुणवत्ता में सुधार।
- वृद्धि निगरानी एवं परामर्श के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग बढ़ाना।
- सुशासन संबंधी उपाय: ग्राम सभाओं एवं पंचायतों में बाल पोषण को नियमित चर्चा का विषय बनाना।
- स्वास्थ्य विभाग, एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS), जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G) तथा ग्रामीण विकास विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
- लैंगिक-संवेदनशील उपाय: बाल देखभाल में पुरुषों की साझा भागीदारी को बढ़ावा देना।
- सामुदायिक क्रेच सुविधाओं का विस्तार करना।
- महिलाओं पर अवैतनिक देखभाल कार्यों के भार को कम करना।
- खाद्य प्रणाली में सुधार: दालें, मोटे अनाज (मिलेट्स), फल, सब्जियाँ तथा प्रोटीन-समृद्ध खाद्य पदार्थों को अधिक किफायती बनाना।
- अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के उपयोग एवं विपणन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना।
निष्कर्ष
- NFHS-6 के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि भारत ने मातृ एवं बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, विशेषकर संस्थागत प्रसव, टीकाकरण तथा अविकसित वृद्धि में कमी के संदर्भ में। तथापि, कुपोषण, आहार गुणवत्ता, शिशु आहार प्रथाओं, लैंगिक असमानताओं तथा स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। अतः बहु-क्षेत्रीय समन्वय, सशक्त स्थानीय शासन, पोषण-केंद्रित हस्तक्षेपों तथा महिलाओं के सशक्तिकरण के माध्यम से बाल पोषण सुधार की दिशा में अधिक प्रभावी प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS)-6 के निष्कर्ष भारत में बाल पोषण की स्थिति में हुई प्रगति के साथ-साथ विद्यमान चुनौतियों को भी उजागर करते हैं। NFHS-6 द्वारा प्रदर्शित बाल पोषण संबंधी प्रमुख प्रवृत्तियों का परीक्षण कीजिए। |
स्रोत: TH
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