रानी लक्ष्मीबाई
पाठ्यक्रम: GS1 / आधुनिक इतिहास
संदर्भ
- 18 जून 1858 को झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ग्वालियर के निकट ब्रिटिश सेना से युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त की।
ब्रिटिश शासन के विरुद्ध रानी लक्ष्मीबाई का संघर्ष
- पृष्ठभूमि: रानी लक्ष्मीबाई झाँसी रियासत की महारानी थीं। झाँसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के पश्चात् राज्य का कोई जैविक (प्राकृतिक) उत्तराधिकारी नहीं था।
- ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) ने दत्तक उत्तराधिकारी को मान्यता देने से इंकार कर दिया तथा व्यपगत सिद्धांत के आधार पर झाँसी का विलय ब्रिटिश साम्राज्य में कर लिया।
- इस सिद्धांत के अनुसार, यदि किसी ब्रिटिश अधीनस्थ रियासत का शासक बिना किसी जैविक पुत्र के निधन हो जाता था, तो वह रियासत ब्रिटिश भारत का हिस्सा बना दी जाती थी।
- ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) ने दत्तक उत्तराधिकारी को मान्यता देने से इंकार कर दिया तथा व्यपगत सिद्धांत के आधार पर झाँसी का विलय ब्रिटिश साम्राज्य में कर लिया।
- 1857 का विद्रोह: वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी की रक्षा का नेतृत्व किया तथा उसका सफलतापूर्वक संगठन किया।
- उन्होंने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध अद्वितीय वीरता का प्रदर्शन किया और प्रतिरोध का सशक्त प्रतीक बनकर उभरीं।
- बाद में उन्होंने तात्या टोपे तथा अन्य क्रांतिकारी नेताओं के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा।
- वीरगति एवं विरासत: 18 जून 1858 को ग्वालियर के निकट ब्रिटिश सेना से युद्ध करते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं।
- वे अपने अदम्य साहस एवं दृढ़ संकल्प के लिए सदैव स्मरणीय रहेंगी, जिसे उनके प्रसिद्ध कथन “मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी” से अभिव्यक्त किया जाता है।
स्रोत: IE
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP)
पाठ्यक्रम: GS3 / अर्थव्यवस्था
समाचार में
- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) जुलाई 2026 में सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) प्रारंभ करने जा रहा है।
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) के बारे में
- सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा विकसित एक मासिक उच्च-आवृत्ति संकेतक है, जिसका उद्देश्य भारत के औपचारिक सेवा क्षेत्र के वास्तविक उत्पादन में अल्पकालिक परिवर्तनों का आकलन करना है।
- इसे सेवा क्षेत्र के लिए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के पूरक के रूप में विकसित किया गया है।
- इसका विकास तकनीकी सलाहकार समिति ( TAC) द्वारा किया गया है, जिसकी अध्यक्षता देबजानी घोष ने की है।
सूचकांक की आवश्यकता
- भारत का सेवा क्षेत्र सकल मूल्य वर्धन (GVA) में 50% से अधिक योगदान देता है, किंतु अब तक इसके वास्तविक विकास की निगरानी हेतु कोई मासिक संकेतक उपलब्ध नहीं था।
- ISP आर्थिक निगरानी, नीति निर्माण तथा आर्थिक पूर्वानुमान के लिए समयबद्ध एवं विश्वसनीय आँकड़े उपलब्ध कराएगा।
ISP की प्रमुख विशेषताएँ
- कवरेज: यह केवल औपचारिक सेवा क्षेत्र को कवर करता है।
- इसमें अनौपचारिक क्षेत्र तथा गैर-बाजार आधारित सरकारी सेवाएँ सम्मिलित नहीं हैं।
- आधार वर्ष: 2024-25
- कार्यप्रणाली: इसमें सकल मूल्य वर्धन (GVA) आधारित भारों के साथ स्थिर-भार लासपेयर आयतन सूचकांक का उपयोग किया गया है।
- वास्तविक विकास का मापन: यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) एवं थोक मूल्य सूचकांक (WPI) जैसे मूल्य अपस्फीतिकारकों की सहायता से नाममात्र सेवा उत्पादन को वास्तविक उत्पादन में परिवर्तित करता है।
प्रमुख आँकड़ा स्रोत
- GST डेटा: व्यापार, परिवहन, दूरसंचार, आवास, रियल एस्टेट, व्यावसायिक सेवाएँ आदि।
- प्रशासनिक आँकड़े: रेलवे, वायु परिवहन, बैंकिंग एवं बीमा।
- ASISSE: निजी स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाएँ।
उत्पादन का मापन
- अधिकांश क्षेत्रों में मुद्रास्फीति के अनुसार समायोजित टर्नओवर अथवा GST आधारित मूल्य संकेतकों का उपयोग किया जाता है।
- रेलवे एवं वायु परिवहन क्षेत्रों में यात्री-किलोमीटर जैसे मात्रा-आधारित संकेतकों के माध्यम से उत्पादन का आकलन किया जाता है।
बहिष्कृत क्षेत्र
- लोक प्रशासन एवं रक्षा
- सरकारी स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाएँ
- व्यक्तिगत सेवाएँ
- जुआ एवं अन्य गैर-बाजार गतिविधियाँ
नोट: व्यापक सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक (SPPI) के अभाव में, सेवा क्षेत्र की वास्तविक वृद्धि का अनुमान लगाने के लिए ISP मुख्यतः उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (गैर-खाद्य) को प्रतिनिधि अपस्फीतिकारक के रूप में उपयोग करेगा।
स्रोत: PIB
किरथई-II जलविद्युत परियोजना
पाठ्यक्रम: GS1 / भूगोल, GS3 / ऊर्जा एवं अवसंरचना
संदर्भ
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) ने 820 मेगावाट क्षमता वाली किरथई-II जलविद्युत परियोजना हेतु वन भूमि के सैद्धांतिक अनुमोदन की अनुशंसा की है।
परियोजना के बारे में
- किरथई-II जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर प्रस्तावित रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना है।
- परियोजना के अंतर्गत 121 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रेविटी बाँध निर्मित किया जाएगा।
- सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद स्वीकृति प्राप्त करने वाली चिनाब नदी की यह तीसरी जलविद्युत परियोजना है।
- इस परियोजना का क्रियान्वयन चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा किया जाएगा, जो राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (NHPC) तथा जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JKSPDC) का संयुक्त उपक्रम है।
- किरथई-I परियोजना, किरथई-II के ऊपरी प्रवाह में स्थित है, जबकि किरू जलविद्युत परियोजना इसके निचले प्रवाह में स्थित है।
- चिनाब नदी पर प्रस्तावित अन्य प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में—
- सावलकोट
- दुलहस्ती-II
- रतले
- पाकल दुल
- क्वार
- किरू
- किरथई स्टेज-I शामिल हैं।
स्रोत: IE
विश्व के सबसे तीव्र सुपरकंप्यूटर के मामले में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ा
पाठ्यक्रम: GS3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- चीन ने विश्व के सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटरों की सूची में संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
परिचय
- नेशनल सुपरकंप्यूटिंग सेंटर, शेनझेन (चीन) में स्थापित लाइनशाइन नामक सुपरकंप्यूटर को विश्व का सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर घोषित किया गया है।
- इस प्रणाली ने 2.198 एक्साफ्लॉप्स की संगणनात्मक क्षमता प्राप्त की है, अर्थात यह प्रति सेकंड 2 क्विंटिलियन (2 × 10¹⁸) से अधिक गणनाएँ करने में सक्षम है।
- लाइनशाइन पूर्णतः CPU आधारित प्रणाली है, जबकि अधिकांश आधुनिक सुपरकंप्यूटर वर्षों पूर्व GPU आधारित संरचना अपना चुके हैं।
- एल कैपिटन (El Capitan), जिसका उपयोग अमेरिकी सरकार अपने परमाणु हथियार भंडार के विकास एवं रखरखाव के लिए करती है, इस सूची में दूसरे स्थान पर है।
- भारत की स्थिति: भारत का सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर शक्ति क्लाउड वर्तमान में TOP500 सूची में 32वें स्थान पर है, जिसकी संगणनात्मक क्षमता 84.31 पेटाफ्लॉप्स है।
- चीन का लाइनशाइन भारत के सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर की तुलना में लगभग 26 गुना अधिक तीव्र है।
- भारत की सुपरकंप्यूटिंग क्षमता को राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के माध्यम से प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी।
- इस मिशन के अंतर्गत भारत ने विभिन्न अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थानों में 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए हैं, जिनकी कुल संगणनात्मक क्षमता 47 पेटाफ्लॉप्स है।
- भारत ने परम रुद्र श्रृंखला जैसे स्वदेशी सुपरकंप्यूटर भी विकसित किए हैं तथा अपनी व्यापक डिजिटल एवं संगणनात्मक अवसंरचना का निरंतर विस्तार किया है।
सुपरकंप्यूटर क्या हैं?
- सुपरकंप्यूटर अत्यधिक शक्तिशाली संगणक होते हैं, जिन्हें अत्यंत जटिल एवं विशाल संख्या में गणनाएँ अत्यधिक तीव्र गति से करने के लिए विकसित किया जाता है।
- इनका उपयोग उन समस्याओं के समाधान हेतु किया जाता है, जिन्हें सामान्य कंप्यूटरों द्वारा हल करना अत्यधिक समयसाध्य अथवा कठिन होता है।
- इनका प्रदर्शन सामान्यतः FLOPS (फ़्लोटिंग पॉइंट ऑपरेशन्स प्रति सेकंड) के आधार पर मापा जाता है।
- आधुनिक सुपरकंप्यूटर प्रति सेकंड क्विंटिलियन (10¹⁸) स्तर की गणनाएँ करने में सक्षम हैं, जिसे एक्सास्केल कंप्यूटिंग कहा जाता है।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- विशाल संगणनात्मक क्षमता: हजारों से लेकर लाखों प्रोसेसर एक साथ कार्य करते हैं।
- समानांतर संगणना : अनेक गणनाएँ एक साथ संपन्न की जाती हैं।
- विशाल स्मृति एवं भंडारण क्षमता: अत्यधिक बड़े आँकड़ों (Datasets) को संसाधित करने में सक्षम।
- विशिष्ट अभिकल्प : सामान्य उपयोग के बजाय वैज्ञानिक एवं अभियांत्रिकी अनुसंधान के लिए अनुकूलित।
स्रोत: TOI
महेश दीक्षित बने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के नए निदेशक
पाठ्यक्रम: GS3 / आंतरिक सुरक्षा
संदर्भ
- प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने महेश दीक्षित को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का निदेशक नियुक्त करने को दो वर्ष की अवधि के लिए स्वीकृति प्रदान की है।
- वे तपन कुमार डेका का स्थान लेंगे, जो वर्ष 2022 से इस पद पर कार्यरत थे।
प्रमुख तथ्य
- महेश दीक्षित 1993 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी हैं तथा आंध्र प्रदेश कैडर से संबंधित हैं।
- यद्यपि उनकी सेवानिवृत्ति अगस्त 2027 में निर्धारित थी, किंतु उन्हें मौलिक नियम (FR) 56(d) तथा अखिल भारतीय सेवाएँ (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के नियम 16(1A) के अंतर्गत सेवा-विस्तार प्रदान किया गया है।
- इन प्रावधानों के अनुसार, केंद्र सरकार जनहित में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW), कैबिनेट सचिव, गृह सचिव आदि के प्रमुखों की सेवाएँ 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु के बाद भी बढ़ा सकती है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB)
- इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) भारत की सबसे पुरानी खुफिया एजेंसी है, जिसकी स्थापना वर्ष 1887 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुई थी।
- यह भारत की आंतरिक सुरक्षा से संबंधित प्रमुख खुफिया एजेंसी है।
- यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।
- इसके प्रमुख दायित्वों में शामिल हैं—
- आतंकवाद-रोधी अभियान
- प्रतिखुफिया
- सीमावर्ती क्षेत्रों में खुफिया जानकारी एकत्र करना
- महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा
- अलगाववादी गतिविधियों का सामना करना
स्रोत: TH
एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्रणाली ‘नेत्र’ (Netra)
पाठ्यक्रम: GS3 / रक्षा
संदर्भ
- भारतीय वायुसेना (IAF) को स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्रणाली ‘नेत्र’ (Netra) के लिए अंतिम परिचालन स्वीकृति (FOC) प्राप्त हो गई है।
परियोजना के बारे में
- नेत्र प्रणाली को वर्ष 2015 में प्रारंभिक परिचालन स्वीकृति (IOC) प्रदान की गई थी तथा इसे वर्ष 2017 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।
- इसका विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अंतर्गत सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (CABS) द्वारा किया गया है।
- यह ब्राज़ील निर्मित एम्ब्रेयर EMB-145I (145I) विमान मंच पर आधारित है।
- इसमें सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग रडार (AESA) लगा है, जिसकी 240–300 किलोमीटर तक की रडार क्षमता है।
- प्रमुख कार्य:हवाई क्षेत्र की प्रारंभिक चेतावनी
- सामरिक वायुक्षेत्र नियंत्रण
- शत्रु विमान एवं ड्रोन की निगरानी
- महत्व: भारत इस प्रकार की क्षमता विकसित करने वाला विश्व का पाँचवाँ देश बन गया है।
- नेत्र प्रणाली हवाई एवं समुद्री लक्ष्यों का पता लगाने , ट्रैक करने, पहचान करने तथा निगरानी करने में सक्षम है।
- यह भारतीय वायुसेना की नेटवर्क-केंद्रित परिचालन क्षमता को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करती है।
स्रोत: TH
Previous article
रोबोटिक्स क्रांति में भारत की अग्रणी भूमिका की आवश्यकता
Next article
संक्षिप्त समाचार 26-06-2026