पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- उन्नत रोबोटिक्स एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित “सन्निहित बुद्धिमत्ता” का उदय भारत की पारंपरिक आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को मूलभूत रूप से परिवर्तित कर सकता है।
भारत की पारंपरिक बढ़त
- कई दशकों से भारत को कम लागत वाले प्रचुर श्रमबल की उपलब्धता का लाभ प्राप्त होता रहा है।
- अनेक उद्योगों ने भारत को इसलिए उत्पादन केंद्र के रूप में चुना क्योंकि यहाँ श्रम लागत विकसित देशों की तुलना में कम थी।
- किंतु यदि उद्योगों एवं कारखानों में मानव श्रमिकों के स्थान पर रोबोटों का उपयोग बढ़ता है, तो कम श्रम लागत पर आधारित भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त का महत्व कम हो जाएगा।
रोबोटिक्स क्या है?
- रोबोटिक्स वह प्रौद्योगिकी है, जिसके अंतर्गत रोबोटों के डिजाइन, निर्माण, संचालन एवं उपयोग का अध्ययन एवं विकास किया जाता है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा मशीन लर्निंग में हुई प्रगति के परिणामस्वरूप ऐसे उन्नत रोबोट विकसित हुए हैं, जो दृश्य पहचान , वाक् पहचान तथा निर्णय-निर्माण जैसे कार्य कर सकते हैं, जिन्हें पहले केवल मनुष्यों की क्षमता माना जाता था।

वैश्विक रोबोटिक्स परिदृश्य
- चीन वैश्विक ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार पर प्रभुत्व रखता है तथा विश्व के लगभग 85% ह्यूमनॉइड रोबोटों का उत्पादन करता है।
- चीन ने रोबोट के भौतिक ढाँचे के बड़े पैमाने पर उत्पादन हेतु एक सुदृढ़ औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है।
- इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स (IFR) के अनुसार, वर्ष 2024 में विश्वभर में स्थापित किए गए औद्योगिक रोबोटों में 54% हिस्सेदारी चीन की थी।
- चीन सौर पैनल, बैटरियों एवं दुर्लभ मृदा प्रसंस्करण की तरह रोबोटिक्स क्षेत्र में भी तीव्रता से वैश्विक अग्रणी बन रहा है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अत्याधुनिक चिप डिजाइन तथा उन सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर में अग्रणी है, जो भविष्य में ह्यूमनॉइड रोबोटों के “मस्तिष्क” के रूप में कार्य करेंगे।
रोबोटिक्स में भारत की स्थिति
- भारत ने वर्ष 2024 में 9,100 औद्योगिक रोबोट स्थापित किए, जो विगत वर्ष की तुलना में 7% अधिक है।
- वार्षिक रोबोट स्थापना के आधार पर भारत विश्व में छठे स्थान पर है, जबकि उससे आगे संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, चीन, दक्षिण कोरिया एवं जर्मनी हैं।
- भारत का रोबोट घनत्व लगभग 10 रोबोट प्रति 10,000 विनिर्माण श्रमिक है, जो वैश्विक औसत 132 रोबोट प्रति 10,000 श्रमिक से काफी कम है।
- SSI Mantra भारत की पहली स्वदेशी सर्जिकल रोबोटिक प्रणाली है, जिसने हजारों किलोमीटर की दूरी पर सफल टेली-सर्जरी का संचालन किया है।
- GreyOrange सहित अनेक भारतीय कंपनियाँ रोबोटिक्स विकास में सक्रिय हैं, किंतु चुनौती औद्योगिक स्तर पर बड़े पैमाने पर रोबोट निर्माण की है।
- राष्ट्रीय रोबोटिक्स नीति (प्रारूप), 2023 के अनुसार, भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक विनिर्माण, स्वास्थ्य, कृषि एवं राष्ट्रीय सुरक्षा क्षेत्रों में रोबोटिक्स के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करना है।
भारत के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
- कुशल मानव संसाधन की कमी: भारत में इंजीनियरों, तकनीशियनों एवं रोबोटिक्स विशेषज्ञों की कमी है।
- औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों में उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण अवसंरचना पर्याप्त विकसित नहीं है।
- आयात पर अत्यधिक निर्भरता: सेंसर, चिपसेट, चुंबक, बैटरी, एक्ट्यूएटर तथा मोटर जैसे महत्वपूर्ण घटकों के लिए भारत आयात पर निर्भर है।
- चीन एवं जापान जैसे देशों की तुलना में भारत की घरेलू रोबोटिक्स आपूर्ति श्रृंखला अभी पर्याप्त विकसित नहीं है तथा बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था का अभाव है।
- उच्च लागत: आयातित घटकों की अधिक लागत रोबोटों की कीमत बढ़ा देती है।
- रोबोटिक्स समाधान प्रायः विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित किए जाते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन सीमित रहता है।
- स्थापना, एकीकरण, रखरखाव एवं सेवा प्रदान करने की लागत भी अधिक होती है।
- कम वहनीयता विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) में रोबोटिक्स अपनाने को हतोत्साहित करती है।
- तकनीकी सीमाएँ: मूलभूत रोबोटिक्स प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान अभी प्रारंभिक अवस्था में है।
- उन्नत विनिर्माण, प्रोटोटाइप निर्माण एवं परीक्षण सुविधाओं का अभाव है।
- सीमित नियामक व्यवस्था: रोबोटिक्स के लिए व्यापक एवं समर्पित नियामक ढाँचे का अभाव है।
- गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, सुरक्षा मानकों तथा उत्तरदायित्व से संबंधित चिंताएँ बनी हुई हैं।
- नैतिक एवं सामाजिक चुनौतियाँ: स्वचालन के कारण रोजगार में कमी आने की आशंका।
- स्वायत्त निर्णय-निर्माण की पारदर्शिता को लेकर चिंताएँ।
सरकारी पहलें
- फ्यूचरस्किल्स प्राइम (FutureSkills Prime): इस पहल के अंतर्गत उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दूरस्थ एवं स्व-गति अधिगम को बढ़ावा देने हेतु एक सुदृढ़ ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया गया है।
- इस कार्यक्रम के माध्यम से पहचानी गई 10 उभरती प्रौद्योगिकियों में प्रमाणित पाठ्यक्रमों तक इच्छुक प्रतिभागियों को रियायती पहुँच उपलब्ध कराई जाती है।
- अटल नवाचार मिशन : इस मिशन के अंतर्गत देशभर के विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब (ATLs) स्थापित की जा रही हैं।
- इन प्रयोगशालाओं में रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर आधारित डू-इट-योरसेल्फ (DIY) किट उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।
- ई-यंत्र (e-YANTRA): यह शिक्षा मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित तथा आईआईटी बॉम्बे द्वारा संचालित एक रोबोटिक्स प्रसार कार्यक्रम है।
- इसका उद्देश्य युवा इंजीनियरों की प्रतिभा का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने में करना है।
- मेक-इन-इंडिया रोबोट्स: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ‘दक्ष’ नामक रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) विकसित किया है, जो बहुउद्देशीय कार्यों के लिए एक स्वचालित मोबाइल प्लेटफ़ॉर्म है।
- व्योममित्र भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित एक मानवरूपी अंतरिक्ष रोबोट है, जिसे गगनयान मिशन में उपयोग हेतु विकसित किया गया है।
- मानव भारत का प्रथम 3D-प्रिंटेड ह्यूमनॉइड रोबोट है, जिसमें अंतर्निहित दृश्य एवं ध्वनि प्रसंस्करण क्षमता है, जिसके माध्यम से यह मानव निर्देशों के अनुसार चल, बोल और नृत्य कर सकता है।
आगे की राह
- मानव संसाधन का सुदृढ़ीकरण: आईटीआई, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग संस्थानों एवं उद्योग-आधारित कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं स्वचालन संबंधी प्रशिक्षण का विस्तार किया जाए।
- स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहन: सेंसर, सेमीकंडक्टर, मोटर एवं बैटरियों जैसे महत्वपूर्ण रोबोटिक्स घटकों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देकर आयात निर्भरता कम की जाए।
- अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहन: रोबोटिक्स अनुसंधान में निवेश बढ़ाया जाए, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित किया जाए तथा उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को सुदृढ़ किया जाए।
- सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: रोबोटिक्स के सुरक्षित एवं उत्तरदायी उपयोग के लिए सुदृढ़ नियामक ढाँचा, तकनीकी मानक, विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना तथा नैतिक दिशानिर्देश विकसित किए जाएँ।
निष्कर्ष
- भारत का रोबोटिक्स पारिस्थितिकी तंत्र कौशल, आयात निर्भरता, उच्च लागत, तकनीकी क्षमता, नियामक व्यवस्था एवं अवसंरचना से संबंधित अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। कुशल मानव संसाधन, स्वदेशी नवाचार, समर्थक नीतियों तथा सुदृढ़ अवसंरचना के समन्वित विकास के माध्यम से भारत रोबोटिक्स एवं स्वचालन के क्षेत्र में एक वैश्विक अग्रणी राष्ट्र के रूप में उभर सकता है।
Source: IE
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