पाठ्यक्रम: GS3/भारतीय अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- हालिया परिचर्चाओं एवं अन्य नीति मंचों पर यह प्रश्न उठाया गया है कि क्या सुधारों की गति में कमी, भारत के द्विपक्षीय निवेश संधि ढाँचे में परिवर्तन, शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में गिरावट तथा रुपये के अवमूल्यन से आर्थिक गति और निवेशकों के विश्वास में कमी का संकेत मिलता है।
भारत की आर्थिक गति एवं संक्रमण
- भारत आर्थिक रूपांतरण के एक महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहा है, जहाँ वह उच्च विकास आकांक्षाओं और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।
- भूराजनीतिक तनाव, आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधान, उच्च वैश्विक ब्याज दरें तथा व्यापारिक विखंडन जैसी निरंतर बाह्य चुनौतियों के बावजूद भारत विश्व की सबसे तीव्र गति से विकसित होने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है।
- भारत का यह संक्रमण निम्नलिखित प्रमुख संरचनात्मक सुधारों द्वारा चिह्नित है—
- डिजिटल आर्थिक परिवर्तन: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) का विस्तार।
- UPI आधारित भुगतान क्रांति।
- जन धन–आधार–मोबाइल (JAM) पारिस्थितिकी तंत्र का सुदृढ़ीकरण।
- डिजिटल वाणिज्य एवं फिनटेक की बढ़ती पहुँच।
- विनिर्माण एवं औद्योगिक विस्तार : मेक इन इंडिया (Make in India) पहल।
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ।
- राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति।
- पीएम गतिशक्ति कार्यक्रम।
- अवसंरचना-आधारित विकास: रेलवे, राजमार्ग, बंदरगाह, हवाई अड्डों तथा नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना में रिकॉर्ड निवेश के माध्यम से उत्पादकता में वृद्धि हुई है तथा लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आई है।
- संतुलित वैश्विक एकीकरण: भारत ने अपने द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) ढाँचे में सुधारों के माध्यम से निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ नीतिगत लचीलेपन को भी बनाए रखने का प्रयास किया है।
- डिजिटल आर्थिक परिवर्तन: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) का विस्तार।
भारत की अर्थव्यवस्था की प्रमुख शक्तियाँ
- वैश्विक प्रतिकूलताओं के बावजूद सुदृढ़ विकास: कोविड-19 महामारी, वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधान, रूस–यूक्रेन संघर्ष तथा वैश्विक मौद्रिक सख्ती जैसी अभूतपूर्व बाह्य चुनौतियों के बावजूद भारत ने सुदृढ़ आर्थिक विकास बनाए रखा है।
- विशाल घरेलू बाजार एवं जनसांख्यिकीय लाभ: भारत अपने विशाल उपभोक्ता आधार, बढ़ते मध्यम वर्ग, युवा कार्यबल तथा विस्तारित होती डिजिटल अर्थव्यवस्था के कारण निवेशकों को आकर्षित करता रहा है।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सुदृढ़ प्रवाह: 2015 के बाद भारत के BIT ढाँचे में पुनर्गठन के बावजूद देश में पर्याप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह जारी है। वर्ष 2025-26 में सकल FDI प्रवाह लगभग 95 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा।
- यह दर्शाता है कि निवेशक भारत को अभी भी एक आकर्षक दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में देखते हैं।
- BIT सुधारों के माध्यम से संतुलित दृष्टिकोण: भारत का मॉडल BIT निवेशकों के अधिकारों की रक्षा करने, संप्रभु नियामकीय अधिकार-क्षेत्र को सुरक्षित रखने तथा अनावश्यक मुकदमेबाजी के जोखिम को कम करने का प्रयास करता है।
- बाह्य क्षेत्र की स्थिरता : रुपये पर दबाव के बावजूद—
- विदेशी मुद्रा भंडार अप्रैल 2026 में लगभग 682 अरब अमेरिकी डॉलर था।
- यह भंडार लगभग 11 महीनों के आयात को कवर करने में सक्षम है।
- चालू खाता घाटा (CAD) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 2% है, जो प्रबंधनीय स्तर पर है।
- ये संकेतक दर्शाते हैं कि भारत के पास बाह्य झटकों का सामना करने हेतु पर्याप्त सुरक्षा कवच उपलब्ध हैं।
- निवेश संधियों की पुनर्समीक्षा की वैश्विक प्रवृत्ति: पारंपरिक BIT ढाँचों की समीक्षा करने वाला भारत अकेला देश नहीं है।
- ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, इक्वाडोर तथा बोलिविया जैसे देशों ने भी नीतिगत लचीलेपन को बनाए रखने हेतु निवेश संधियों में संशोधन या उन्हें समाप्त किया है।
- अतः भारत का दृष्टिकोण नीतिगत अलगाव का नहीं, बल्कि एक व्यापक वैश्विक पुनर्मूल्यांकन का प्रतिबिंब है।
भारत की अर्थव्यवस्था के समक्ष कमजोरियाँ एवं चुनौतियाँ
- निजी निवेश की धीमी गति: यद्यपि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, किन्तु कुछ क्षेत्रों में निजी निवेश की वृद्धि अभी भी असमान बनी हुई है।
- दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए निजी क्षेत्र की अधिक सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
- रोजगार एवं गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन: यदि—
- कौशल विकास अपर्याप्त रहता है,
- औपचारिक रोजगार के अवसर पर्याप्त रूप से नहीं बढ़ते,
- तो भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश एक चुनौती में परिवर्तित हो सकता है।
- विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता: भारत को अभी भी लॉजिस्टिक्स दक्षता, प्रौद्योगिकी अंगीकरण तथा वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण के क्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- राजकोषीय दबाव: अवसंरचना पर उच्च सार्वजनिक व्यय विकास को प्रोत्साहित करता है, किन्तु इसे राजकोषीय अनुशासन, ऋण स्थिरता तथा संसाधनों के कुशल आवंटन के साथ संतुलित करना आवश्यक है।
- विनिमय दर में अस्थिरता: रुपये में समय-समय पर अवमूल्यन देखा गया है। यद्यपि पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार स्थिरता प्रदान करता है, फिर भी तेल कीमतों में वृद्धि, वैश्विक वित्तीय सख्ती तथा भूराजनीतिक अनिश्चितता जैसे दीर्घकालिक बाह्य आघात मुद्रा एवं मुद्रास्फीति प्रबंधन पर दबाव बना सकते हैं।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: भारत अभी भी कमजोर वैश्विक मांग, व्यापारिक विखंडन, आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधान तथा संरक्षणवादी प्रवृत्तियों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।
- इन कारकों का प्रभाव निर्यात एवं निवेश प्रवाह दोनों पर पड़ सकता है।
आगे की राह: भविष्य के लिए भारत की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना
- संरचनात्मक सुधारों का सुदृढ़ीकरण: व्यवसाय करने की सुगमता में सुधार, अनुपालन एवं नियामकीय प्रक्रियाओं का सरलीकरण तथा अनुबंध प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
- विनिर्माण विकास में तीव्रता: PLI आधारित क्षेत्रों का विस्तार, लॉजिस्टिक्स अवसंरचना में सुधार तथा वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ बेहतर एकीकरण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- मानव पूंजी विकास को प्रोत्साहन: शिक्षा एवं कौशल विकास में निवेश बढ़ाया जाए तथा कार्यबल की क्षमताओं को इंडस्ट्री 4.0 की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाए।
- वित्तीय क्षेत्र की दक्षता का सुदृढ़ीकरण: MSME क्षेत्र के लिए ऋण उपलब्धता बढ़ाई जाए, पूंजी बाजारों को गहरा किया जाए तथा बैंकिंग क्षेत्र की लचीलापन क्षमता को सुदृढ़ किया जाए।
- व्यापक आर्थिक स्थिरता का संरक्षण एवं सुदृढ़ीकरण: मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना, विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन सुनिश्चित करना तथा विदेशी मुद्रा भंडार को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
- निवेशक संरक्षण एवं संप्रभु अधिकारों में संतुलन: BIT ढाँचे को निरंतर परिष्कृत किया जाए तथा नीतिगत क्षेत्राधिकार को सुरक्षित रखते हुए नियामकीय निश्चितता सुनिश्चित की जाए।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न]: विकास, निवेश, बाह्य क्षेत्रीय स्थिरता तथा नीतिगत सुधारों के संदर्भ में भारतीय अर्थव्यवस्था की शक्तियों एवं कमजोरियों का परीक्षण कीजिए। साथ ही, दीर्घकालिक आर्थिक गति को बनाए रखने हेतु आवश्यक उपाय सुझाइए। |
स्रोत: IE
Previous article
मुक्त व्यापार समझौते (FTAs): भारत के लिए अवसर एवं उभरती चुनौतियाँ
Next article
भारत की आर्थिक गति: संक्रमण के बीच दृढ़ता