पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन
संदर्भ
- संसद ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है, जिसके माध्यम से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को वही वैधानिक संरक्षण प्रदान किया गया है, जो वर्तमान में राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है।
प्रमुख बिंदु
- यह विधेयक राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 की धारा 3 में संशोधन करता है।
- इसके अंतर्गत निम्नलिखित कृत्यों को अपराध घोषित किया गया है—
- वंदे मातरम् के गायन को जानबूझकर रोकना; अथवा
- इसके गायन में संलग्न किसी सभा में व्यवधान उत्पन्न करना।
- इस अपराध के लिए दंड में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। दोषसिद्ध व्यक्ति को अधिकतम तीन वर्ष का कारावास, अथवा जुर्माना, अथवा दोनों से दंडित किया जा सकेगा।
- धारा 3A के अंतर्गत पुनरावर्ती अपराधियों के लिए निर्धारित कठोर दंड का प्रावधान भी इस अपराध पर लागू होगा।
संशोधन की आवश्यकता का कारण
- 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा को संबोधित करते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि ‘वंदे मातरम्’ को ‘जन गण मन’ के समान सम्मान प्राप्त होना चाहिए।
- तथापि, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में केवल राष्ट्रीय गान को ही वैधानिक संरक्षण प्रदान किया गया था।
- परिणामस्वरूप, राष्ट्रीय गीत के संबंध में एक विधायी रिक्तता बनी रही, जिसे यह संशोधन दूर करने का प्रयास करता है।
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971
- यह अधिनियम 23 दिसंबर, 1971 को अधिनियमित किया गया था।
- इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है तथा यह भारतीय राष्ट्रीय ध्वज, भारत के संविधान तथा भारतीय राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ को वैधानिक संरक्षण प्रदान करता है।
- वर्तमान अधिनियम के प्रमुख प्रावधान
- धारा 2 – राष्ट्रीय ध्वज एवं संविधान: यह धारा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज एवं भारत के संविधान के अपमान से संबंधित है।
- यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर राष्ट्रीय ध्वज अथवा संविधान को जलाता है, क्षत-विक्षत करता है, विकृत करता है, अपवित्र करता है, नष्ट करता है, पैरों तले रौंदता है अथवा अन्य किसी प्रकार से उसका अनादर करता है, तो उसे अधिकतम तीन वर्ष के कारावास, अथवा जुर्माना, अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।
- वैध आलोचना को संरक्षण: संविधान, राष्ट्रीय ध्वज अथवा सरकार की नीतियों की विधिसम्मत संशोधन या परिवर्तन के उद्देश्य से की गई आलोचनात्मक टिप्पणी को धारा 2 के अंतर्गत अपराध नहीं माना जाता।
- धारा 3 – राष्ट्रीय गान: यह धारा विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रीय गान से संबंधित है।
- यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गान के गायन को रोकता है अथवा उसके गायन में संलग्न किसी सभा में व्यवधान उत्पन्न करता है, तो उसे अधिकतम तीन वर्ष के कारावास, अथवा जुर्माना, अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।
- धारा 3A – पुनरावर्ती अपराध: वर्ष 2003 के संशोधन द्वारा जोड़ी गई इस धारा के अंतर्गत धारा 2 अथवा धारा 3 के अंतर्गत दूसरी अथवा उसके बाद की दोषसिद्धि होने पर न्यूनतम एक वर्ष के कारावास का प्रावधान किया गया है।
- धारा 2 – राष्ट्रीय ध्वज एवं संविधान: यह धारा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज एवं भारत के संविधान के अपमान से संबंधित है।
वंदे मातरम्
- ‘वंदे मातरम्’, जिसका अर्थ है “हे मातृभूमि! मैं आपको नमन करता हूँ”, की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी।
- यह गीत प्रथम बार 7 नवंबर, 1875 को उनकी पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ।
- बाद में इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में सम्मिलित किया गया तथा रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने इसे संगीतबद्ध किया।
- यह गीत भारतीय राष्ट्रवाद एवं स्वाधीनता आंदोलन का एक प्रेरणास्रोत एवं एकीकृत प्रतीक बन गया।
- इसने स्वदेशी आंदोलन (1905) सहित अनेक राष्ट्रीय आंदोलनों को प्रेरित किया तथा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष का एक सशक्त उद्घोष बना।
- वर्ष 1907 में मैडम भीकाजी कामा द्वारा विदेश में प्रथम बार फहराए गए भारतीय तिरंगे पर “वंदे मातरम्” अंकित था।
- इसके अतिरिक्त मदन लाल ढींगरा सहित अनेक क्रांतिकारियों ने “वंदे मातरम्” को राष्ट्रभक्ति के उद्घोष के रूप में अपनाया।
स्रोत: PIB
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संक्षिप्त समाचार 01-08-2026