पाठ्यक्रम: GS-III (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था)
संदर्भ
- भारत के प्रधानमंत्री की हाल ही में नॉर्डिक देशों, इटली और नीदरलैंड की यात्रा भारत की रणनीतिक पहुँच के लिए महत्वपूर्ण रही। इस यात्रा का उद्देश्य डीप-टेक्नोलॉजी, नवाचार, हरित ऊर्जा और डिजिटल संप्रभुता के क्षेत्रों में साझेदारियों को सुदृढ़ करना था।
डीप टेक क्या है?
- डीप टेक से आशय उन तकनीकी नवाचारों से है जो ठोस वैज्ञानिक या इंजीनियरिंग प्रगति पर आधारित होते हैं।
- डीप-टेक स्टार्टअप्स कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, जैव-प्रौद्योगिकी, ब्लॉकचेन और क्रिप्टो, हरित ऊर्जा तकनीक तथा अंतरिक्ष तकनीक जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्य करते हैं। इसके विपरीत पारंपरिक स्टार्टअप्स मुख्यतः डिजिटल सेवाओं पर केंद्रित रहते हैं।
- पारंपरिक स्टार्टअप्स जहाँ डिजिटल सेवाओं को शीघ्रता से विस्तार देते हैं, वहीं डीप-टेक उद्यमों को उच्च पूंजी, लंबी अनुसंधान अवधि और अकादमिक जगत, उद्योग तथा सरकार के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता होती है। यही उन्हें चुनौतीपूर्ण और रणनीतिक रूप से अमूल्य बनाता है।
अब डीप टेक भू-राजनीतिक मुद्दा क्यों है?
- रणनीतिक लाभ: विश्व एक “डीप-टेक व्यवस्था” में प्रवेश कर रहा है। वे राष्ट्र जो AI अवसंरचना, सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला, क्वांटम-सुरक्षित संचार और हरित ऊर्जा तकनीक पर नियंत्रण रखते हैं, निर्णायक रणनीतिक लाभ प्राप्त करेंगे।
- तकनीकी उपनिवेशवाद: AI प्रणालियाँ, क्लाउड अवसंरचना और उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक कुछ अमेरिकी और चीनी कंपनियों के प्रभुत्व में हैं। जिन देशों के पास घरेलू तकनीकी क्षमता नहीं है, वे दीर्घकालिक निर्भरता के जोखिम में हैं।
- आपूर्ति शृंखला का सशस्त्रीकरण: अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध ने दिखाया है कि सेमीकंडक्टर निर्यात नियंत्रण प्रतिबंधों जितना ही शक्तिशाली भू-राजनीतिक हथियार है। भारत, जो प्रतिवर्ष लगभग 50 अरब डॉलर मूल्य के चिप्स आयात करता है और केवल 2–3 अरब डॉलर का घरेलू उत्पादन करता है, प्रत्यक्षतः प्रभावित है।
- डेटा संप्रभुता अंतराल: भारत वैश्विक डेटा का लगभग 20% उत्पन्न करता है, किंतु घरेलू डेटा भंडारण और प्रसंस्करण क्षमता अनुपातिक रूप से कम है। भारतीय नागरिकों के डेटा से प्राप्त मूल्य का अधिकांश हिस्सा विदेशी क्लाउड प्लेटफॉर्म्स को लाभ पहुँचाता है।
भारत का डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र: वर्तमान स्थिति
- विकसित होता स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र: भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बन चुका है और डीप-टेक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।
- भारत में 1 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं, जिनमें से 3,000 से अधिक डीप-टेक क्षेत्रों में कार्यरत हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे डीप-टेक हब के रूप में उभर रहे हैं।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में मजबूती: आधार, यूपीआई, डिजीलॉकर और CoWIN जैसी प्रणालियाँ भारत की बड़े पैमाने पर डिजिटल नवाचार क्षमता को प्रदर्शित करती हैं।
- AI और सेमीकंडक्टर पहल: सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के बजट के साथ इंडियाAI मिशन शुरू किया है। इसके अंतर्गत AI कंप्यूटिंग अवसंरचना, AI स्टार्टअप्स, स्वदेशी AI मॉडल और कौशल विकास को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
- भारत ने चिप निर्माण को बढ़ावा देने हेतु 76,000 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर प्रोत्साहन योजनाएँ भी घोषित की हैं।
- वैश्विक साझेदारियाँ: भारत सक्रिय रूप से भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA), नॉर्डिक देशों के साथ तकनीकी साझेदारी, तथा अमेरिका, जापान और ताइवान के साथ सेमीकंडक्टर सहयोग को आगे बढ़ा रहा है। इन सहयोगों का उद्देश्य कुछ देशों पर तकनीकी निर्भरता को कम करना है।
भारत के डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र की चुनौतियाँ
- कम अनुसंधान एवं विकास व्यय: भारत GDP का लगभग 0.7% अनुसंधान एवं विकास पर व्यय करता है।
- भारत का वार्षिक R&D व्यय लगभग 13 अरब डॉलर है, जबकि अकेले Nvidia कंपनी प्रतिवर्ष 18 अरब डॉलर से अधिक व्यय करती है।
- सीमित निजी निवेश: अधिकांश डीप-टेक पहलें सरकार-प्रेरित हैं।
- वेंचर कैपिटल त्वरित लाभ वाले क्षेत्रों जैसे फिनटेक और ई-कॉमर्स को प्राथमिकता देता है।
- डीप-टेक परियोजनाओं में लंबी अवधि और उच्च जोखिम सहनशीलता की आवश्यकता होती है।
- सेमीकंडक्टर निर्भरता: भारत चिप्स, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरणों के आयात पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे आपूर्ति शृंखला की कमजोरियाँ उत्पन्न होती हैं।
- प्रतिभा पलायन: बेहतर वित्तपोषण, उच्च स्तरीय अनुसंधान अवसंरचना और अधिक वेतन के कारण अनेक भारतीय शोधकर्ता और इंजीनियर विदेश चले जाते हैं।
- कमज़ोर उद्योग-अकादमिक संबंध: अनुसंधान संस्थान और उद्योग प्रायः अलग-अलग कार्य करते हैं, जिससे नवाचार का व्यावसायीकरण सीमित हो जाता है।
सरकार के प्रयास: डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु
- इंडियाAI मिशन: इसे GPU अवसंरचना, AI नवाचार केंद्र, स्टार्टअप समर्थन और नैतिक AI ढाँचे के माध्यम से एक सशक्त AI पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए प्रारंभ किया गया।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM): वर्ष 2023 में ₹6,000 करोड़ के बजट के साथ अनुमोदित किया गया। इसके प्रमुख क्षेत्र क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार और क्वांटम सेंसिंग हैं।
- सेमीकंडक्टर मिशन: भारत सेमीकंडक्टर मिशन का उद्देश्य घरेलू निर्माण संयंत्र विकसित करना, चिप डिज़ाइन पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहन देना और वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों को आकर्षित करना है।
- अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF): इसे अनुसंधान वित्तपोषण, विश्वविद्यालय-उद्योग सहयोग और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु स्थापित किया गया।
- स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया: ये पहलें व्यापार करने में सुगमता, वित्तीय समर्थन, डिजिटल अवसंरचना और नवाचार प्रोत्साहन प्रदान करती हैं।
आगे की राह: भारत डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे सुदृढ़ कर सकता है?
- अनुसंधान एवं विकास व्यय में वृद्धि: भारत को धीरे-धीरे R&D व्यय को GDP के कम से कम 2% तक बढ़ाना चाहिए।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन: R&D हेतु कर प्रोत्साहन, डीप-टेक वेंचर फंड्स और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना आवश्यक है।
- सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता का विकास: भारत को निर्माण इकाइयों की स्थापना, आपूर्ति शृंखला की स्थिरता और इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को तीव्र गति से आगे बढ़ाना होगा।
- अनुसंधान विश्वविद्यालयों को सुदृढ़ करना: वैश्विक रैंकिंग में सुधार, अंतर्विषयक अनुसंधान को प्रोत्साहन, स्वायत्तता और वित्तपोषण में वृद्धि आवश्यक है।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा: यूरोपीय संघ, नॉर्डिक देशों, जापान और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारियाँ तकनीकी हस्तांतरण एवं नवाचार को तीव्र कर सकती हैं।
- कुशल मानव पूंजी का विकास: AI शिक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग कौशल, सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग और अनुसंधान फैलोशिप पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] भारत द्वारा तकनीकी संप्रभुता प्राप्त करने में आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। भारत के डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के प्रयासों की परीक्षा कीजिए। |
स्रोत: IE