खीर भवानी मेला
पाठ्यक्रम: जीएस-1/संस्कृति
सन्दर्भ
- कश्मीर घाटी में ज्येष्ठ अष्टमी के अवसर पर वार्षिक खीर भवानी मेले का आयोजन धार्मिक उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया जा रहा है।
परिचय
- यह कश्मीरी पंडित समुदाय के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है, जिसके दौरान श्रद्धालु माता राग्न्या देवी को खीर, दूध, पुष्प तथा सुगंधित पत्तियाँ अर्पित करते हैं।
- यह मेला आस्था, धैर्य, सांस्कृतिक पुनर्संबंध तथा सामुदायिक सद्भाव का प्रतीक है।
खीर भवानी मंदिर का परिचय
- यह मंदिर माता राग्न्या देवी को समर्पित है, जिन्हें माता दुर्गा का एक अवतार माना जाता है।
- मूल मंदिर का निर्माण लगभग 1912 में महाराजा प्रताप सिंह द्वारा जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में कराया गया था। बाद में महाराजा हरि सिंह द्वारा इसका सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार किया गया।
- मंदिर की एक विशिष्ट विशेषता इसके केंद्र में स्थित षट्कोणीय (Hexagonal) जलस्रोत है, जिसका पवित्र जल अत्यंत श्रद्धा का विषय माना जाता है।
- मंदिर और इस पर्व—दोनों का नाम ‘खीर’ नामक मिठाई से लिया गया है, जिसे श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
स्रोत: AIR
खुरासानी इमली
पाठ्यक्रम: जीएस-3/ अर्थव्यवस्था/ कृषि
सन्दर्भ
- मांडू के बाओबाब वृक्ष के फल, जिसे स्थानीय रूप से खुरासानी इमली के नाम से जाना जाता है, को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हुआ है।
खुरासानी इमली का परिचय
- खुरासानी इमली बाओबाब वृक्ष (Adansonia digitata) का फल है, जो अफ्रीका और मेडागास्कर की मूल प्रजाति है।
- इसे इसके बहुआयामी उपयोगों और असाधारण सहनशीलता के कारण लोकप्रिय रूप से “जीवन का वृक्ष (Tree of Life)” कहा जाता है।
- भारत में बाओबाब वृक्ष मध्य भारत के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों तथा पश्चिमी घाट के कुछ भागों में पाए जाते हैं।
- मध्य प्रदेश का मांडू भारत के उन कुछ स्थानों में से एक है, जहाँ बाओबाब वृक्ष बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
- ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, बाओबाब के बीज 14वीं–15वीं शताब्दी के आसपास अफगान शासकों अथवा अरब व्यापारियों द्वारा मांडू लाए गए थे।
- यह वृक्ष अपने विशिष्ट बोतल-आकार के तने तथा बड़ी मात्रा में जल संग्रहित करने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।
- इसका फल विटामिन-C, प्रतिऑक्सीकारकों (Antioxidants) से समृद्ध होता है तथा इसके अनेक पारंपरिक औषधीय उपयोग भी हैं।

स्रोत: ET
एआई एजेंट लूप्स
पाठ्यक्रम: जीएस-3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
सन्दर्भ
- एआई विशेषज्ञों का सुझाव है कि एआई एजेंट लूप्स कार्यप्रवाहों के स्वचालन तथा बार-बार मैन्युअल प्रॉम्प्ट देने की आवश्यकता को कम करके मानव–एआई अंतःक्रिया को परिवर्तित करने वाले हैं।
एआई एजेंट लूप्स क्या हैं?
- एआई एजेंट लूप एक आवर्ती स्वचालित कार्यप्रवाह (Recurring Automated Workflow) है, जो उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रत्येक चरण पर प्रॉम्प्ट लिखने की आवश्यकता के बिना एआई एजेंटों का बार-बार मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण करता है।
- इसमें मनुष्य को लगातार एआई को यह बताने की आवश्यकता नहीं होती कि आगे क्या करना है। इसके बजाय, प्रणाली स्वयं निर्देश उत्पन्न करती है, प्रगति का मूल्यांकन करती है तथा वांछित उद्देश्य प्राप्त होने तक नए कार्य आवंटित करती रहती है।
एआई एजेंट लूप के प्रमुख घटक
- स्वचालन (Automations):ये किसी लूप की आधारशिला होते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि लूप एक बार की घटना न होकर बार-बार दोहराया जा सके।
- यह एआई एजेंट को निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार कार्य करने, जानकारी खोजने (Discovery) तथा प्राथमिक छंटनी (Triage) स्वयं करने में सक्षम बनाता है।
- वर्कट्रीज़ (Worktrees):यह एक महत्वपूर्ण घटक है, क्योंकि इसके माध्यम से दो एआई एजेंट समानांतर रूप से कार्य कर सकते हैं, जिससे कार्यों में किसी प्रकार का अनावश्यक दोहराव (Overlap) नहीं होता।
- कौशल (Skills): ये एआई एजेंट के लिए विशेष निर्देशों के रूप में कार्य करते हैं। उदाहरणतः, परियोजना संबंधी ज्ञान को लिखित रूप में दर्ज करने के निर्देश, ताकि एजेंट अनुमान लगाने के बजाय सत्यापित जानकारी का उपयोग कर सके।
- प्लग-इन और कनेक्टर (Plugins and Connectors): इनका उपयोग एआई एजेंट को उन उपकरणों और प्रणालियों तक पहुँच प्रदान करने के लिए किया जाता है, जिनका उपयोग पहले से किया जा रहा है।
- उप-एजेंट (Sub-agents): ये उपयोगकर्ताओं को एआई एजेंटों को इस प्रकार व्यवस्थित करने की सुविधा देते हैं कि एक एजेंट विचार उत्पन्न करे, जबकि दूसरा एजेंट उस कार्य की जाँच और सत्यापन करे।
स्रोत: IE
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