पाठ्यक्रम: जीएस-3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
सन्दर्भ
- पिछले एक दशक में भारत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure-DPI), स्वदेशी नवाचार, स्टार्टअप पारितंत्र तथा उभरती प्रौद्योगिकी क्षमताओं के माध्यम से एक विशाल डिजिटल बाजार से उभरती हुई वैश्विक प्रौद्योगिकी शक्ति के रूप में विकसित हुआ है।
उभरती क्षमताओं की आधारशिला के रूप में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम
- डिजिटल इंडिया कार्यक्रम, जिसे वर्ष 2015 में प्रारम्भ किया गया था, ने पूरे देश में डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ करके भारत के उभरते प्रौद्योगिकी पारितंत्र की नींव रखी।
- इंटरनेट सेवाओं की कम लागत ने टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स तथा ई-शासन (E-Governance) सेवाओं तक पहुँच का व्यापक विस्तार किया।

भविष्य की तैयारी हेतु क्षमताओं का विकास
- राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के अंतर्गत, जिसे वर्ष 2015 में ₹4,500 करोड़ के परिव्यय के साथ प्रारम्भ किया गया था, भारत ने प्रमुख संस्थानों में 47 पेटाफ्लॉप्स की संयुक्त संगणन क्षमता वाले 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए हैं।
- एक प्रमुख उपलब्धि स्वदेशी परम रुद्र (PARAM Rudra) श्रृंखला का विकास है, जिसे भारतीय रूप से विकसित हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर के आधार पर निर्मित किया गया है।
- सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम (Semicon India Programme), जिसे वर्ष 2021 में ₹76,000 करोड़ के परिव्यय के साथ प्रारम्भ किया गया था, ने अर्धचालक (Semiconductor) विनिर्माण, डिस्प्ले निर्माण, चिप अभिकल्पना (Chip Design), पैकेजिंग, परीक्षण, प्रतिभा विकास तथा अनुसंधान सहयोग को प्रोत्साहित किया।
- इस प्रगति को आगे बढ़ाते हुए, केंद्रीय बजट 2026–27 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 की घोषणा की गई, जिसके लिए वित्तीय वर्ष 2026–27 हेतु ₹1,000 करोड़ का प्रारम्भिक परिव्यय निर्धारित किया गया।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, जिसे वर्ष 2023 में ₹6,003.65 करोड़ के परिव्यय के साथ प्रारम्भ किया गया, चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है—क्वांटम संगणन, क्वांटम संचार, क्वांटम संवेदन एवं माप विज्ञान (Metrology), तथा क्वांटम पदार्थ एवं उपकरण।
- इस मिशन का उद्देश्य स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकियों का विकास, अनुसंधान अवसंरचना को सुदृढ़ करना, कुशल मानव संसाधन तैयार करना, स्टार्टअप्स को समर्थन देना तथा उद्योग–शिक्षा जगत सहयोग को बढ़ावा देना है।
- इंडियाएआई मिशन (IndiaAI Mission), जिसे वर्ष 2024 में ₹10,300 करोड़ से अधिक के परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया, स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कम्प्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण तथा उच्च-स्तरीय GPU सुविधाओं तक पहुँच के विस्तार पर केंद्रित है।
- एआई कोश (AI Kosh) मंच पर 20 क्षेत्रों से संबंधित 12,115 डेटा-संग्रह (Datasets) तथा 306 एआई मॉडल उपलब्ध हैं, जो बड़े पैमाने पर नवाचार एवं अनुसंधान को सक्षम बनाते हैं।
- क्लाउड कम्प्यूटिंग (Cloud Computing): भारत के स्वदेशी क्लाउड पारितंत्र की शुरुआत वर्ष 2014 में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा मेघराज (MeghRaj) के शुभारम्भ से हुई, जो सरकार के राष्ट्रीय क्लाउड मंच के रूप में कार्य करता है।
- इसके अतिरिक्त, मेघराज 2.0 ने संकर (Hybrid) क्लाउड संरचना तथा सुदृढ़ साइबर सुरक्षा के माध्यम से इस पारितंत्र को और मजबूत किया।
- ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी (Blockchain Technology): सरकार ने वर्ष 2021 में ₹64.76 करोड़ के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय ब्लॉकचेन रूपरेखा (National Blockchain Framework-NBF) प्रारम्भ की।
- इसका उद्देश्य नागरिक-केंद्रित शासन एवं डिजिटल विश्वास के लिए सुरक्षित, विस्तारयोग्य (Scalable) तथा अंतर-संचालनीय (Interoperable) ब्लॉकचेन पारितंत्र का निर्माण करना है।
- भारत का ब्लॉकचेन पारितंत्र विश्वास्य ब्लॉकचेन स्टैक (Vishvasya Blockchain Stack), NBFLite सैंडबॉक्स, प्रामाणिक (Praamaanik) ऐप सत्यापन प्रणाली तथा राष्ट्रीय ब्लॉकचेन पोर्टल जैसे स्वदेशी मंचों के माध्यम से विस्तारित हुआ है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने डिजिटल रुपया (e₹) के पायलट कार्यक्रम प्रारम्भ किए, जबकि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने स्पैम संदेशों पर नियंत्रण के लिए ब्लॉकचेन आधारित वितरित खाता-बही प्रौद्योगिकी (Distributed Ledger Technology-DLT) को अपनाया।
- डेटा केंद्र (Data Centers): भारत के डेटा केंद्र क्षेत्र में तीव्र विस्तार हुआ है। इसकी क्षमता वर्ष 2020 में लगभग 375 मेगावाट से बढ़कर वर्ष 2025 तक लगभग 1,500 मेगावाट हो गई।
- भारत की अर्धचालक प्रतिभा श्रृंखला का निर्माण: वर्ष 2022 में प्रारम्भ चिप्स टू स्टार्ट-अप (C2S) कार्यक्रम स्टार्टअप संवर्धन (Incubation), पेटेंट सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा बहुत बड़े पैमाने पर एकीकरण (VLSI), अनुप्रयोग-विशिष्ट समेकित परिपथ (ASICs), सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) अभिकल्पना एवं एम्बेडेड प्रणालियों में उन्नत अनुसंधान को समर्थन प्रदान करता है।
जैव-प्रौद्योगिकी: नवाचार-आधारित विकास का अगला चरण
- भारत का जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र वर्ष 2023 में 150 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर गया और जून 2026 तक 190 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
- जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख पहलों में राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (NBM) शामिल है, जिसे वर्ष 2017 में ₹1,500 करोड़ के परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया था। इसके अतिरिक्त बायोE3 नीति (2023), बायोनेस्ट (BioNEST) इनक्यूबेटर, तथा औद्योगिक नवाचार के प्रभाव को तीव्र करना (i4) एवं शैक्षणिक अनुसंधान को उद्यम में रूपांतरित करने को प्रोत्साहन (PACE) जैसी नवाचार योजनाएँ भी शामिल हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमता का उन्नयन
- “भारत में एआई का निर्माण करें और भारत के लिए एआई को कार्यशील बनाएं” की परिकल्पना के अंतर्गत सरकार ने ₹1,490 करोड़ के कुल आवंटन के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के चार उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence-CoEs) स्थापित किए हैं।
- ये उत्कृष्टता केंद्र शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सतत शहरों तथा कृषि क्षेत्रों पर केंद्रित हैं।

वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की प्रगति
- वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index-GII) 2025 में भारत वर्ष 2015 के 81वें स्थान से बढ़कर 38वें स्थान पर पहुँच गया है। यह भारत के वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में तीव्र उभार को दर्शाता है।
- स्टार्ट-अप इंडिया, डिजिटल इंडिया तथा अटल नवाचार मिशन (Atal Innovation Mission) जैसी पहलों ने उद्यमिता, डिजिटल अवसंरचना, अनुसंधान तथा प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा दिया है।
भारत 6G गठबंधन (B6GA)
- भारत 6G गठबंधन (B6GA), जिसकी स्थापना वर्ष 2023 में की गई, उद्योग-नेतृत्वित तथा सरकार-सुविधाप्रद पहल है, जो दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संस्थाओं तथा मानकीकरण संगठनों को एक मंच पर लाती है।
- यह स्वदेशी 6G अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहित करता है, ताकि आत्मनिर्भर तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उन्नत संचार पारितंत्र का निर्माण किया जा सके।

चुनौतियाँ क्या हैं?
- डिजिटल विभाजन (Digital Divide): तीव्र डिजिटल विस्तार के बावजूद इंटरनेट पहुँच, डिजिटल साक्षरता तथा उपकरणों की वहनीयता (Affordability) में असमानताएँ बनी हुई हैं, विशेषकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में।
- आयात पर निर्भरता: भारत अभी भी सेमीकंडक्टर उपकरणों, उन्नत चिपों, महत्वपूर्ण खनिजों तथा उच्च-स्तरीय प्रौद्योगिकी घटकों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।
- अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर कम व्यय: अग्रणी प्रौद्योगिकी शक्तियों की तुलना में भारत का अनुसंधान एवं विकास पर व्यय अपेक्षाकृत कम है, जिससे क्रांतिकारी नवाचारों की संभावनाएँ सीमित होती हैं।
- डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएँ: डिजिटल मंचों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुप्रयोगों के तीव्र विस्तार के साथ डेटा संरक्षण, गोपनीयता, एल्गोरिदम सम्बन्धी पक्षपात (Algorithmic Bias) तथा प्रौद्योगिकी के नैतिक उपयोग से संबंधित चिंताएँ बढ़ रही हैं।
निष्कर्ष
- पिछले एक दशक में भारत के डिजिटल परिवर्तन ने विकसित भारत 2047 के लिए एक सुदृढ़ आधार तैयार किया है।
- समावेशी डिजिटल अवसंरचना, स्वदेशी नवाचार तथा विश्वसनीय शासन के समन्वय के माध्यम से भारत एक प्रौद्योगिकी उपभोक्ता से प्रौद्योगिकी अग्रणी के रूप में विकसित हो रहा है तथा ऐसे भविष्य का निर्माण कर रहा है जो नवोन्मेषी, सुरक्षित और जन-केंद्रित हो।
स्रोत: PIB