पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Net FDI) बढ़कर 6.6 अरब डॉलर हो गया, जो लगभग पाँच वर्षों का उच्चतम स्तर है। यह वृद्धि सकल निवेश प्रवाह (Gross Inflows) में 65% की वृद्धि के कारण हुई है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) क्या है?
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से तात्पर्य विदेशी संस्थाओं (व्यक्तियों अथवा कंपनियों) द्वारा किसी अन्य देश के व्यावसायिक हितों में किया गया निवेश है, जो सामान्यतः उद्यमों में स्वामित्व अथवा नियंत्रण के रूप में होता है।
- वर्तमान में भारत में लॉटरी, जुआ एवं सट्टेबाजी, चिट फंड, निधि कंपनी, रियल एस्टेट व्यवसाय तथा तंबाकू से बने सिगार, चेरूट, सिगारिलो और सिगरेटों के निर्माण में एफडीआई प्रतिबंधित है।
- नेट एफडीआई (Net FDI): यह देश में आने वाले विदेशी निवेश और विनिवेश (Disinvestment) तथा पूंजी प्रत्यावर्तन (Repatriation) के माध्यम से बाहर जाने वाली पूंजी के बीच का अंतर दर्शाता है।
- नेट एफडीआई में गिरावट का अर्थ यह आवश्यक नहीं है कि निवेशकों की रुचि कम हुई है, क्योंकि सकल निवेश प्रवाह मजबूत बना रह सकता है।
भारत में एफडीआई के मार्ग
- स्वचालित मार्ग (Automatic Route):
यह वह निवेश मार्ग है, जिसके अंतर्गत निवेश के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अथवा केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक नहीं होती।
- विनिर्माण (Manufacturing) तथा सॉफ्टवेयर जैसे अधिकांश क्षेत्र इसी मार्ग के अंतर्गत आते हैं।
- सरकारी अनुमोदन मार्ग (Government Approval Route): यह वह निवेश मार्ग है, जिसके अंतर्गत निवेश के लिए सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है तथा प्राप्त विदेशी निवेश सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुरूप होना चाहिए।
- दूरसंचार, मीडिया, औषधि (Pharmaceuticals) तथा बीमा जैसे क्षेत्र इस मार्ग के अंतर्गत आते हैं।
वे क्षेत्र/गतिविधियाँ जिनमें एफडीआई प्रतिबंधित है –
- सरकारी/निजी लॉटरी तथा ऑनलाइन लॉटरी सहित लॉटरी व्यवसाय।
- कैसीनो आदि सहित जुआ एवं सट्टेबाजी।
- चिट फंड, निधि कंपनी तथा हस्तांतरणीय विकास अधिकारों (TDRs) का व्यापार।
- रियल एस्टेट व्यवसाय अथवा फार्म हाउसों का निर्माण।
- हालांकि, ‘रियल एस्टेट व्यवसाय’ में टाउनशिप विकास, आवासीय/वाणिज्यिक परिसरों का निर्माण, सड़कें अथवा पुलों का निर्माण तथा SEBI (REITs) विनियम, 2014 के अंतर्गत पंजीकृत एवं विनियमित रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (REITs) शामिल नहीं हैं।
- तंबाकू अथवा तंबाकू के विकल्पों से बने सिगार, चेरूट, सिगारिलो एवं सिगरेटों का निर्माण।
एफडीआई आँकड़ों में प्रमुख प्रवृत्तियाँ
- निवेश प्रवाह में वृद्धि:अप्रैल 2026 में सकल FDI (उस माह देश में आया कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) बढ़कर 15.3 अरब डॉलर हो गया।
- अप्रैल 2026 में प्राप्त सकल FDI, पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राप्त कुल FDI का 16% से अधिक था।
- इक्विटी निवेश प्रवाह का सर्वाधिक हिस्सा वित्तीय सेवाओं, खुदरा एवं थोक व्यापार, विनिर्माण तथा कंप्यूटर सेवाओं को प्राप्त हुआ।
- ये क्षेत्र मिलकर कुल FDI प्रवाह का 80% से अधिक हिस्सा रखते हैं।
- कुल FDI प्रवाह का 75% से अधिक हिस्सा जापान, सिंगापुर और मॉरीशस से प्राप्त हुआ।
- बाह्य प्रवाह की धीमी वृद्धि: सकल बाह्य प्रवाह (Gross Outflows) अप्रैल 2025 के 7.7 अरब डॉलर से बढ़कर अप्रैल 2026 में 8.7 अरब डॉलर हो गया, जो 13.7% की वृद्धि दर्शाता है।
- इसमें भारतीय कंपनियों का बाह्य एफडीआई (Outward FDI) अप्रैल 2026 में लगभग 42% बढ़कर 4.8 अरब डॉलर हो गया।
- बाह्य निवेश प्रवाह का लगभग 80% हिस्सा अमेरिका और केमैन द्वीपसमूह की ओर निर्देशित था।
- वित्तीय, बीमा एवं व्यावसायिक सेवाओं तथा विनिर्माण क्षेत्र का योगदान कुल बाह्य निवेश प्रवाह में 90% से अधिक रहा।

चिंताएँ क्या हैं?
- क्षेत्रीय संकेन्द्रण (Sectoral Concentration): एफडीआई कुछ सीमित क्षेत्रों, विशेषकर वित्तीय सेवाओं में अधिक केंद्रित है, जबकि श्रम-प्रधान क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम निवेश प्राप्त हो रहा है।
- नेट एफडीआई में अस्थिरता: लाभ की स्वदेश वापसी (Profit Repatriation), विनिवेश (Disinvestment) तथा भारतीय कंपनियों द्वारा किए जाने वाले बाह्य निवेश में परिवर्तन के कारण नेट एफडीआई में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
- असमान क्षेत्रीय वितरण: एफडीआई मुख्यतः उन राज्यों में केंद्रित है जहाँ बेहतर अवसंरचना और अनुकूल व्यावसायिक पारितंत्र उपलब्ध हैं, जिससे क्षेत्रीय असमानताएँ बढ़ सकती हैं।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक व्यवधान तथा वैश्विक आर्थिक मंदी जैसी परिस्थितियाँ भारत में भविष्य के निवेश प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं।
आगे की राह
- भारत को सतत एवं विविधीकृत एफडीआई प्रवाह आकर्षित करने के लिए व्यवसाय करने की सुगमता (Ease of Doing Business) में निरंतर सुधार, अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने तथा नीतिगत स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रयास जारी रखने चाहिए।
- रोजगार सृजन और संतुलित आर्थिक विकास को अधिकतम करने के लिए विनिर्माण क्षेत्र, नवाचार-आधारित क्षेत्रों तथा अपेक्षाकृत कम विकसित क्षेत्रों में एफडीआई के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
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