संक्षिप्त समाचार 05-06-2026

जिम्बाब्वे

पाठ्यक्रम: GS1 / भूगोल

संदर्भ

  • भारत और जिम्बाब्वे ने वर्तमान सहयोग के विस्तार के माध्यम से द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की है।

जिम्बाब्वे के बारे में

  • जिम्बाब्वे दक्षिण-मध्य अफ्रीका में स्थित एक स्थलरुद्ध देश है, जो लिम्पोपो और ज़ाम्बेज़ी नदियों के बीच स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल 3,90,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक है।
  • यह उत्तर एवं उत्तर-पश्चिम में जाम्बिया, दक्षिण में दक्षिण अफ्रीका, पूर्व एवं उत्तर-पूर्व में मोज़ाम्बिक, तथा दक्षिण-पश्चिम में बोत्सवाना से घिरा हुआ है।
  • जिम्बाब्वे सम्पूर्णतः मकर रेखा के उत्तर में स्थित है तथा दक्षिणी अफ्रीकी पठार का एक भाग है।
  • विक्टोरिया जलप्रपात , जो जिम्बाब्वे और जाम्बिया की सीमा पर स्थित है, विश्व का सबसे बड़ा गिरते जल का पर्दा (sheet of falling water) माना जाता है।

स्रोत: AIR

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (NAeG) 2026

पाठ्यक्रम: GS2 / शासन 

संदर्भ

  • भारत सरकार ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (NAeG) 2026 के विजेताओं की घोषणा की है।
    • कुल सात पुरस्कार श्रेणियों में 17 पहलों का चयन किया गया है, जिनमें 10 स्वर्ण (Gold) पुरस्कार, 6 रजत (Silver) पुरस्कार तथा 1 जूरी पुरस्कार शामिल हैं।

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (NAeG) के बारे में

  • यह पुरस्कार प्रतिवर्ष ई-गवर्नेंस एवं डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण में उत्कृष्टता को प्रोत्साहन देने हेतु प्रदान किए जाते हैं।
    • इनका उद्देश्य शासन, पारदर्शिता, जवाबदेही तथा नागरिक-केंद्रित सेवाओं में सुधार हेतु प्रौद्योगिकी के नवाचारपूर्ण उपयोग को मान्यता देना है।
  • यह पुरस्कार प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा स्थापित किया गया है।
  • इन पुरस्कारों का दायरा केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, जिलों, शहरी स्थानीय निकायों तथा ग्राम पंचायतों द्वारा कार्यान्वित पहलों तक विस्तृत है।

प्रमुख पुरस्कार प्राप्त पहल (स्वर्ण एवं रजत पुरस्कार विजेता)

  • एग्री स्टैक : कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित।
    • यह किसानों के लिए एक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करता है, जिसमें विशिष्ट किसान पहचान एवं भूमि-संबंधित डेटाबेस शामिल हैं।
    • यह सब्सिडी, फसल बीमा, ऋण, कृषि परामर्श एवं सरकारी योजनाओं के लक्षित वितरण को सुगम बनाता है।
  • ई-जागृति : उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा विकसित एक डिजिटल मंच।
    • यह उपभोक्ता शिकायतों के पंजीकरण एवं ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है।
  • महाकुंभ 2025 डिजिटल शासन मॉडल: प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा कार्यान्वित।
    • यह विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक के प्रबंधन में प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
  • ब्लड बैग ट्रेसेबिलिटी एवं नागरिक सहभागिता पोर्टल: केरल विकास एवं नवाचार रणनीतिक परिषद (K-DISC) द्वारा विकसित।
    • यह रक्त इकाइयों के दान से लेकर ट्रांसफ्यूजन तक की संपूर्ण ट्रैकिंग को सक्षम बनाता है।
  • ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा में एआई-सक्षम क्लीनिकल निर्णय सहायता प्रणाली: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित।
    • यह टेलीमेडिसिन सेवाओं में नैदानिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को सुदृढ़ करता है।

जूरी पुरस्कार

  • परियोजना: CORS नेटवर्क के माध्यम से वास्तविक समय सटीक पोजिशनिंग सेवाएँ
  • यह परियोजना निरंतर कार्यरत संदर्भ स्टेशन (CORS) नेटवर्क के माध्यम से अत्यधिक सटीक भौगोलिक स्थिति निर्धारण सेवाएँ प्रदान करती है।

स्रोत: PIB

भारत-नेपाल सीमा विवाद

पाठ्यक्रम: GS2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

  • नेपाल के प्रधानमंत्री ने हाल ही में कहा कि नेपाल ने भी कुछ भारतीय क्षेत्रों पर अतिक्रमण किया है, जिसे किसी नेपाली शासनाध्यक्ष द्वारा दिया गया प्रथम ऐसा सार्वजनिक बयान माना जा रहा है।

भारत-नेपाल सीमा विवाद

  • भारत और नेपाल लगभग 1,751 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं, परंतु कुछ क्षेत्रों में विवाद जारी हैं।
  • कालापानी–लिपुलेख–लिम्पियाधुरा विवाद: नेपाल ने 1816 की सुगौली संधि के आधार पर अपना दावा प्रस्तुत किया है, जो ईस्ट इंडिया कंपनी और गजराज मिश्रा के बीच हुई थी।
    • संधि के अनुसार काली नदी को नेपाल की पश्चिमी सीमा निर्धारित किया गया था।
    • नेपाल का दावा है कि काली नदी का उद्गम लिम्पियाधुरा से होता है, जिससे लिपुलेख एवं कालापानी क्षेत्र नेपाल के अंतर्गत आ जाते हैं।
    • भारत का मत है कि नदी का उद्गम कालापानी के निकट निम्न बिंदु से होता है, जिसके अनुसार लिपुलेख दर्रा भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित त्रि-जंक्शन क्षेत्र में आता है।
    • काली नदी के प्रवाह में समय के साथ परिवर्तन होने के कारण सीमा निर्धारण में अस्पष्टता उत्पन्न हुई है।
  • सुस्ता सीमा विवाद: सुस्ता भारत और नेपाल के बीच एक विवादित क्षेत्र है।
    • भारत इसे बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के अंतर्गत प्रशासित करता है।
    • नेपाल का दावा है कि यह क्षेत्र पश्चिम नवलपरासी जिले के सुस्ता ग्रामीण नगरपालिका का हिस्सा है।
    • नेपाल का आरोप है कि सुस्ता क्षेत्र के लगभग 14,860 हेक्टेयर भूमि पर भारत द्वारा अतिक्रमण किया गया है।

सीमा विवाद के कारण

  • सुगौली संधि (1816) की विभिन्न व्याख्याएँ।
  • विशेष रूप से तराई क्षेत्र में नदियों के प्रवाह में परिवर्तन।
  • कुछ क्षेत्रों में सीमांकन का अधूरा निर्धारण।
  • लिपुलेख जैसे हिमालयी दर्रों का रणनीतिक महत्व।

समाधान के विद्यमान तंत्र

  • संयुक्त तकनीकी स्तर सीमा समिति।
  • संयुक्त सीमा कार्य समूह (BWG)।
  • भारत–नेपाल संयुक्त आयोग के माध्यम से नियमित कूटनीतिक संवाद।

PAC द्वारा PMKVY में कमियों का चिन्हन 

पाठ्यक्रम: GS2 / शासन

समाचार में

  • संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने हाल ही में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के कार्यान्वयन पर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की हैं, क्योंकि यह योजना ऐसे क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षण प्रदान करती प्रतीत हो रही है जहाँ अपेक्षित रोजगार अवसर उपलब्ध नहीं हैं।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के बारे में

  • यह योजना वर्ष 2015 में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत शुरू की गई थी।
  • PMKVY को भारत की विशाल एवं युवा कार्यबल को उद्योग-संरेखित कौशलों से सशक्त बनाने के एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में परिकल्पित किया गया था।
  • यह योजना राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के माध्यम से संचालित होती है और इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं की क्षमताओं तथा श्रम बाजार की वास्तविक आवश्यकताओं के बीच के अंतर को समाप्त करना है।

लोक लेखा समिति (PAC)

  • यह भारत की सबसे प्राचीन संसदीय समितियों में से एक है, जिसकी स्थापना 1919 के भारत सरकार अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 1921 में की गई थी।
  • समिति का पुनर्गठन प्रतिवर्ष किया जाता है।
  • लोकसभा अध्यक्ष द्वारा समिति के सदस्यों में से एक अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है।
  • परंपरा के अनुसार वर्ष 1967–68 से इसका अध्यक्ष सामान्यतः विपक्षी दल से चुना जाता है।
  • यह समिति सरकार के राजस्व एवं व्यय की जाँच करती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सार्वजनिक धन का उपयोग दक्षतापूर्वक, मितव्ययिता के साथ तथा संसद द्वारा स्वीकृत उद्देश्य के अनुरूप किया गया है।
  • यह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों की समीक्षा करती है।
  • यह सुनिश्चित करती है कि संसद द्वारा स्वीकृत धनराशि का उपयोग विधायी अनुमोदन के अनुरूप किया गया है।
  • समिति में कुल 22 सदस्य होते हैं—लोकसभा के 15 सदस्य तथा राज्यसभा के 7 सदस्य।

स्रोत: TH

भारत–वेनेज़ुएला संबंधों को रणनीतिक गति

पाठ्यक्रम: GS2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

  • वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने भारत का दौरा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्ता की।

यात्रा के प्रमुख परिणाम

  • दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी की दिशा में:  दोनों पक्षों ने अल्पकालिक खरीद से आगे बढ़कर दीर्घकालिक कच्चे तेल आपूर्ति अनुबंधों की दिशा में कार्य करने पर चर्चा की।
    • भारत और वेनेज़ुएला ने संपूर्ण ऊर्जा मूल्य शृंखला में सहयोग की संभावनाएँ तलाशीं, जिनमें शामिल हैं—
      • अपस्ट्रीम गतिविधियाँ: तेल अन्वेषण एवं उत्पादन
      • डाउनस्ट्रीम गतिविधियाँ: शोधन एवं पेट्रोकेमिकल्स
  • महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग: वार्ता में महत्वपूर्ण खनिजों, स्वर्ण तथा हीरा खनन पर सहयोग शामिल रहा।
  • अन्य क्षेत्रों में सहयोग: कृषि एवं कृषि यंत्रीकरण
    • पशुपालन
    • परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स
    • ऑटोमोबाइल निर्माण
    • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

भारत के लिए वेनेज़ुएला का महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा: वेनेज़ुएला के पास विश्व का सबसे बड़ा कच्चे तेल भंडार है।
    • भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है तथा अपनी 85 प्रतिशत से अधिक तेल आवश्यकताओं का आयात करता है।
    • भारतीय रिफाइनरियाँ वेनेज़ुएला के भारी कच्चे तेल को संसाधित करने में सक्षम हैं।
    • यह साझेदारी भारत की ऊर्जा विविधीकरण रणनीति को सुदृढ़ कर सकती है तथा पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को कम कर सकती है।
  • भविष्य के उद्योगों हेतु महत्वपूर्ण खनिज: वेनेज़ुएला के पास दुर्लभ मृदा तत्वों , निकेल तथा अन्य रणनीतिक खनिजों के महत्वपूर्ण भंडार उपस्थित हैं।
  • भारत की लैटिन अमेरिका पहुँच: वेनेज़ुएला लैटिन अमेरिका में भारत के आर्थिक एवं कूटनीतिक विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है।

वेनेज़ुएला के बारे में

  • स्थिति: वेनेज़ुएला दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट पर स्थित है।
    • यह पश्चिम में कोलंबिया, दक्षिण में ब्राज़ील, पूर्व में गुयाना, तथा उत्तर में कैरेबियन सागर से घिरा हुआ है।
  • राजधानी: काराकास
  • प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र: उत्तर-पश्चिमी वेनेज़ुएला में एंडीज पर्वतों की उत्तर-पूर्वी शाखा फैली हुई है।
  • लेक माराकाइबो बेसिन उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र का एक प्रमुख भूगर्भीय एवं भौगोलिक क्षेत्र है।
  • लानोस मध्य वेनेज़ुएला में विस्तृत उष्णकटिबंधीय सवाना मैदान हैं, जो 2,50,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले हैं।

स्रोत: IE

प्रधानमंत्री अनुसंधान अध्यक्ष (PMRC) योजना, 2026

पाठ्यक्रम: GS2 / शासन 

संदर्भ

  • उच्च शिक्षा विभाग ने प्रधानमंत्री अनुसंधान अध्यक्ष (PMRC) योजना, 2026 के अंतर्गत आवेदन आमंत्रित किए हैं।

योजना के बारे में

  • यह शिक्षा मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग की एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल है।
  • इसका उद्देश्य विदेशों में कार्यरत भारतीय मूल के शोधकर्ताओं को भारत के प्रमुख संस्थानों में उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान हेतु आकर्षित करना है, विशेषकर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में।
  • संरचना: यह पहल तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:
    • प्रमुख संस्थान 
    • मेजबान संस्थान 
    • PMRC फेलो
  • आवेदन श्रेणियाँ:
    • युवा शोध फेलो (YRF): पीएचडी के बाद पाँच वर्ष से कम अनुभव
    • वरिष्ठ फेलो (SF): पीएचडी के बाद पाँच से दस वर्ष से कम अनुभव
    • अनुसंधान अध्यक्ष (RC): पीएचडी के बाद दस वर्ष या अधिक अनुभव तथा सिद्ध शोध नेतृत्व क्षमता
  • प्रशासनिक संरचना: चयन प्रक्रिया एवं सहभागी संस्थानों की निगरानी एक सशक्त समिति द्वारा की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार करेंगे।
  • पात्रता: भारतीय नागरिक जो विदेशों में कार्यरत हैं
    • प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI कार्डधारक)
    • भारतीय मूल के व्यक्ति जिनके पास अनुसंधान, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं
  • पात्र मेजबान संस्थान: वे सरकारी उच्च शिक्षण संस्थान जो NIRF (राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क) की समग्र या इंजीनियरिंग श्रेणी में शीर्ष 100 में हों, अथवा अनुसंधान श्रेणी में शीर्ष 50 में हों।
  • इसके अतिरिक्त, निम्नलिखित संस्थानों के अंतर्गत राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ एवं अनुसंधान संस्थान भी शामिल हैं:
    • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST)
    • जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT)
    • भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)
    • वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR)
  • PMRC फेलो को प्राप्त लाभ: फेलोशिप एवं अनुसंधान अनुदान सहायता
    • प्रयोगशालाओं एवं अनुसंधान अवसंरचना तक पहुँच
    • देश के प्रमुख सरकारी संस्थानों के साथ कार्य करने के अवसर।

स्रोत: AIR

नीलकंठ मिश्रा की विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक के रूप में नियुक्ति

पाठ्यक्रम: GS2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध 

संदर्भ

  • मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने नीलकंठ मिश्रा की विश्व बैंक मुख्यालय, वाशिंगटन डी.सी. में कार्यकारी निदेशक के रूप में तीन वर्ष के कार्यकाल हेतु नियुक्ति को मंजूरी प्रदान की है।

परिचय

  • वे विश्व बैंक में दक्षिण एशियाई निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे, जिसमें भारत, बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका शामिल हैं।
  • वे परमेश्वरन अय्यर का स्थान लेंगे, जिन्होंने फरवरी 2023 से यह पद संभाला था।
  • कार्यकारी निदेशक विश्व बैंक के बोर्ड का हिस्सा होता है, जो नीतियों, ऋण निर्णयों एवं विकास प्राथमिकताओं की निगरानी करता है।

विश्व बैंक

  • विश्व बैंक की स्थापना वर्ष 1944 में हुई थी।
  • यह 189 सदस्य देशों का एक सहकारी संगठन है।
  • इसका उद्देश्य विकासशील देशों को गरीबी कम करने एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देने हेतु वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान करना है।
  • शासन संरचना: सदस्य देश विश्व बैंक के शेयरधारक होते हैं और उनका प्रतिनिधित्व बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा किया जाता है, जो सर्वोच्च नीति-निर्माण निकाय है।
  • सामान्यतः गवर्नर सदस्य देशों के वित्त मंत्री या विकास मंत्री होते हैं।
  • विश्व बैंक समूह के प्रमुख संस्थान:
  • IBRD (अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक): मध्य-आय एवं ऋण योग्य निम्न-आय देशों को ऋण प्रदान करता है।
  • IDA (अंतरराष्ट्रीय विकास संघ): सबसे गरीब देशों को रियायती ऋण एवं अनुदान प्रदान करता है।
  • IFC (अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम): निजी क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करता है।
  • MIGA (बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी): निवेश को प्रोत्साहन हेतु गारंटी प्रदान करता है।
  • ICSID (निवेश विवाद निपटान हेतु अंतरराष्ट्रीय केंद्र): निवेश संबंधी विवादों का समाधान करता है।

स्रोत: AIR

बायोमिमिक्री

पाठ्यक्रम: GS3 / पर्यावरण

समाचार में

  • बायोमिमिक्री नवाचार के क्षेत्र में केवल नकल से आगे बढ़कर प्रकृति-प्रेरित अभूतपूर्व समाधानों की दिशा में परिवर्तन ला रही है, जो विभिन्न उद्योगों के लिए सतत ढाँचे प्रदान कर रही है।

बायोमिमिक्री के बारे में

  • बायोमिमिक्री का अर्थ है प्रकृति की अरबों वर्षों की विकासात्मक बुद्धिमत्ता से सीख लेकर मानव समस्याओं के लिए सतत एवं दक्ष समाधान तैयार करना। यह दृष्टिकोण प्रकृति का दोहन करने के बजाय उसे एक मार्गदर्शक एवं मॉडल के रूप में प्रस्तुत करता है।
  • इसके अनुप्रयोग अत्यंत परिवर्तनकारी हैं। उदाहरण के लिए, जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन को किंगफिशर पक्षी की सुव्यवस्थित चोंच से प्रेरित होकर पुनः डिज़ाइन किया गया। इस डिजाइन परिवर्तन से सुरंगों में उत्पन्न होने वाली दाब तरंगों की समस्या समाप्त हुई तथा गति एवं ऊर्जा दक्षता में वृद्धि हुई।
  • भारत के हरित संक्रमण के संदर्भ में बायोमिमिक्री को उत्पादन, शहरी नियोजन तथा कृषि में एकीकृत करना नवाचार को प्रोत्साहन दे सकता है। यह दृष्टिकोण स्वाभाविक रूप से चक्रीय , संसाधन-कुशल तथा पारिस्थितिक रूप से सामंजस्यपूर्ण विकास को प्रोत्साहित करता है।

भारत–यूके क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्ज़र्वेटरी (GSCO)

पाठ्यक्रम: GS3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

समाचार में

  • भारत–यूके क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्ज़र्वेटरी (GSCO) का औपचारिक रूप से शुभारंभ किया गया है।

GSCO के बारे में

  • यह पहल वर्ष 2025 के प्रधानमंत्री स्तरीय द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित की गई थी तथा मार्च 2026 में अनुसंधान सहयोग समझौते के माध्यम से इसे अंतिम रूप दिया गया।
  • GSCO एक त्रिपक्षीय संयुक्त पहल है, जिसका नेतृत्व निम्नलिखित संस्थानों द्वारा किया जा रहा है:
    • TEXMiN (एक्सप्लोरेशन और माइनिंग में टेक्नोलॉजी इनोवेशन फ़ाउंडेशन, IIT-ISM धनबाद)
    • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (ISM), धनबाद
    • कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
  • इसका उद्देश्य बाजार संबंधी खुफिया जानकारी के माध्यम से आपूर्ति जोखिमों को कम करना है तथा राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) के लक्ष्यों का समर्थन करना है।

राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM)

  • पृष्ठभूमि एवं आरंभ: NCMM को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा जनवरी 2025 में स्वीकृति प्रदान की गई।
    • इस मिशन के लिए लगभग ₹16,300 करोड़ का कुल परिव्यय निर्धारित किया गया है, जिसकी अवधि 7 वर्ष (2030–31 तक) है।
    • यह मिशन खान मंत्रालय के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है।
  • उद्देश्य: लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व, टाइटेनियम आदि जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की विश्वसनीय एवं सतत घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करना।
    • ऊर्जा संक्रमण (इलेक्ट्रिक वाहन, सौर पैनल, पवन टरबाइन, बैटरी) तथा रक्षा एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों के लिए आवश्यक खनिजों पर भारत की आयात निर्भरता को कम करना।

स्रोत: TH

 

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