भारत का हरित रूपांतरण 

पाठ्यक्रम: GS3/ पर्यावरण

संदर्भ

  • विश्व पर्यावरण दिवस भारत के एक दशक लंबे हरित रूपांतरण को पारितंत्र पुनर्स्थापन, जलवायु कार्रवाई, सतत संसाधन प्रबंधन तथा वैश्विक पर्यावरणीय नेतृत्व के माध्यम से रेखांकित करता है।

भारत के हरित रूपांतरण के तीन स्तंभ

  • स्तंभ 1: एक लचीले भारत के लिए पारिस्थितिक क्षमता एवं जैव विविधता में वृद्धि
  • स्तंभ 2: सतत रूपांतरण हेतु राष्ट्रीय क्षमता का विस्तार
  • स्तंभ 3: नेतृत्व एवं कूटनीति के माध्यम से विश्वसनीयता को सुदृढ़ करना

एक लचीले भारत के लिए पारिस्थितिक क्षमता एवं जैव विविधता में वृद्धि

  • वन परिदृश्य का पुनरुद्धार: भारत में वन एवं वृक्ष आवरण बढ़कर 8.27 लाख वर्ग किलोमीटर हो गया है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17 प्रतिशत है।
    • वर्तमान में भारत के वन 30.43 अरब टन कार्बन भंडारण करते हैं।
    • वित्त वर्ष 2020–21 से 2024–25 के बीच प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA) के अंतर्गत देशभर में 3.20 लाख हेक्टेयर से अधिक प्रतिपूरक वनीकरण किया गया है।
  • नदी पारितंत्र का पुनर्स्थापन: नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत ₹43,030 करोड़ मूल्य की 524 परियोजनाएँ स्वीकृत की गई हैं।
    • 3,977 एमएलडी (MLD) शोधन क्षमता वाले 138 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) कार्यशील हो चुके हैं।
  • आर्द्रभूमि संरक्षण: रामसर स्थलों की संख्या 2014 में 26 से बढ़कर 2026 में 99 हो गई है।
    • राष्ट्रीय जलीय पारितंत्र संरक्षण योजना (NPCA) आर्द्रभूमियों के समेकित संरक्षण एवं पुनर्स्थापन को प्रोत्साहित करती है।
    • आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 अतिक्रमण, अनुपचारित अपशिष्ट निर्वहन एवं ठोस अपशिष्ट निपटान जैसी गतिविधियों को निषिद्ध करते हैं।
  • मैंग्रोव पारितंत्र संरक्षण: भारत ने मिश्टी (MISHTI – तटीय आवासों एवं आजीविका हेतु मैंग्रोव पहल) के माध्यम से मैंग्रोव पुनर्स्थापन को गति प्रदान की है।
    • मैंग्रोव आवरण 2013 में 4,628 वर्ग किमी से बढ़कर 2023 में 4,992 वर्ग किमी हो गया है।

सतत रूपांतरण हेतु राष्ट्रीय क्षमता का विस्तार

  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन: नगरपालिका ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रसंस्करण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2014 के 17 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 77 प्रतिशत से अधिक हो गया है।
    • शहरी स्थानीय निकाय प्रतिदिन 1.29 लाख टन से अधिक अपशिष्ट का प्रसंस्करण कर रहे हैं।
  • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था: विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) एक नीति दृष्टिकोण है, जिसके अंतर्गत उत्पादकों को उनके उत्पादों के उपयोग के पश्चात पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित प्रबंधन हेतु उत्तरदायी बनाया जाता है।
    • विभिन्न अपशिष्ट धाराओं में 4,574 पंजीकृत पुनर्चक्रणकर्ता कार्यरत हैं।
    • कुल 417.57 लाख मीट्रिक टन अपशिष्ट का प्रसंस्करण किया गया है, जिसमें 341.93 लाख मीट्रिक टन EPR प्रमाणपत्रों के अंतर्गत सम्मिलित है।
  • शिक्षा, जागरूकता एवं हरित कौशल विकास: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पर्यावरण शिक्षा, जागरूकता एवं प्रशिक्षण (EEAT) योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय हरित कोर (NGC), राष्ट्रीय प्रकृति शिविर कार्यक्रम (NNCP) तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (CBP) जैसी पहलों को समर्थन दिया गया है।
    • पर्यावरण शिक्षा, जागरूकता, अनुसंधान एवं कौशल विकास (EEARSD) योजना पर्यावरणीय साक्षरता, सतत प्रथाओं तथा हरित कार्यबल विकास को प्रोत्साहित करती है।
    • ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम (GCP) व्यक्तियों, समुदायों एवं व्यवसायों द्वारा स्वैच्छिक पर्यावरणीय कार्यों को प्रोत्साहन देता है, जिसमें वनीकरण, पारितंत्र पुनर्स्थापन एवं सतत प्रथाएँ शामिल हैं।

नेतृत्व एवं कूटनीति के माध्यम से विश्वसनीयता को सुदृढ़ करना

  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC): भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में उत्सर्जन तीव्रता में 33–35 प्रतिशत कमी का लक्ष्य निर्धारित समय से 11 वर्ष पूर्व ही प्राप्त कर लिया है।
    • 2030 तक 40 प्रतिशत गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य नौ वर्ष पूर्व ही प्राप्त कर लिया गया है।
    • भारत ने 2.29 अरब टन CO₂ समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक भी सृजित किया है।
  • स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व: अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में लगभग 112 सदस्य देश शामिल हो चुके हैं।
    • वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड (OSOWOG) पहल वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा संपर्क को प्रोत्साहन देती है।
  • जलवायु लचीलापन एवं सतत जीवनशैली; आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) वैश्विक स्तर पर लचीली अवसंरचना के लिए एक प्रमुख मंच बन चुका है।
    • मिशन LiFE (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) ने सतत जीवनशैली को जलवायु कार्रवाई के एक आवश्यक घटक के रूप में लोकप्रिय बनाया है।
    • अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA) ने वन्यजीव संरक्षण सहयोग में भारत को वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है।

विश्व पर्यावरण दिवस

  • विश्व पर्यावरण दिवस प्रतिवर्ष 5 जून को 1972 के स्टॉकहोम मानव पर्यावरण सम्मेलन की स्मृति में मनाया जाता है तथा पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के लिए वैश्विक कार्रवाई को प्रोत्साहित करता है।
  • प्रथम आयोजन वर्ष 1973 में “केवल एक पृथ्वी (Only One Earth)” विषय के अंतर्गत किया गया था।
  • वर्ष 2026 का विषय है: “प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।”

स्रोत: PIB

 

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